आजकल अपनी भारतीय राजनीति में क्या गज़ब का बेतुका विरोधाभास चल रहा है! जिस इंसान को सरहद पार के दुश्मन अपना यमराज मानते हों, जिसके नाम से रावलपिंडी में बैठे जनरलों की रातों की नींद उड़ जाती हो, उस असली ‘जेम्स बॉन्ड’ को हमारे अपने ही देश के कुछ नेता मोहल्ले का ‘WhatsApp जासूस’ साबित करने पर तुले हुए हैं।
ज़रा सोचिये। एक तरफ पाकिस्तान है, जहाँ के ‘रक्षा विशेषज्ञ’ अजीत डोभाल का नाम आते ही पानी मांगने लगते हैं। उन्हें लगता है की डोभाल कोई ऐसा जादूगर है जो कभी भी उनके देश में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक करवा सकता है।
और दूसरी तरफ हमारे विपक्ष के लीडर ‘राहुल गाँधी’ हैं, जिन्हें लगता है की देश का नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अपनी सारी फाइलें, देश की सुरक्षा और बॉर्डर की टेंशन छोड़कर बस इस काम में लगा है की फलां नेता ने अपने दोस्त को WhatsApp पर क्या मेसेज भेजा।
ये हंसाने वाली बात नहीं है दोस्त, ये बहुत गहरी चिंता का विषय है। नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जैसे गरिमामयी और अति-संवेदनशील पद को महज़ कुछ राजनीतिक तालियां बटोरने के लिए राहुल गाँधी ने कॉलेज के बच्चों के बीच मज़ाक का विषय बना दिया।
जब आप अपने ही देश की रक्षा करने वाले लोगों का कद चुनाव जीतने के लिए छोटा करने लगते हैं, तो आप दरअसल सरकार का नहीं, सीधे तौर पर देश के सिस्टम का मनोबल तोड़ रहे होते हैं!
Hello Pappu ji, its the same Doval ji who loyally served your Dadi Maa Indira Gandhi.
Remember Blue Star on Khalistani terrorists at Golden Temple & Kandahar hijacking?
Rahulji, show #GRATITUDE which U Don’t have . Aaj woh hain isliye hum hain.#AjitDoval #RahulGandhi pic.twitter.com/fgHx2tVOjh
— Nambiar Adarsh Narayanan P V 🪷 (@Adarsh4BJP) September 19, 2026
140 करोड़ लोगों के फोन की जासूसी और सिर्फ एक जासूस, राहुल गांधी के इस नए तकनीकी ज्ञान पर वैज्ञानिक भी चकरा जाए
अब जरा इस बात पर आते हैं की ये पूरा रायता फैला कहाँ से है। अभी हाल ही की बात है, 19 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में ‘छात्रों की गूंज’ नाम का एक कार्यक्रम चल रहा था।
इसी कार्यक्रम के मंच से विपक्ष के नेता (LOP) राहुल गांधी ने एक ऐसा ऐतिहासिक तकनीकी ज्ञान दुनिया के सामने परोसा, जिसे सुनकर नासा और गूगल वाले भी अपना सिर खुजा रहे होंगे।
राहुल गांधी ने भरे मंच से सीधा अजीत डोभाल पर हमला बोल दिया। उन्होंने बहुत ही कॉन्फिडेंस के साथ कहा की इस देश का पूरा सिस्टम सिर्फ 6 लोग चला रहे हैं और डोभाल जी उनमें से एक हैं।
उनके सटीक शब्द थे- “डोभाल जी आपके फोन के अंदर बैठे हैं। वो हिंदुस्तान के टेलीफोन, व्हाट्सएप और फेसबुक को कंट्रोल कर रहे हैं। वो फोन टैप कराते हैं और इसकी जानकारी नरेंद्र मोदी और अमित शाह को देते हैं।”
खैर, राजनीतिक मंचों पर नेता लोग अक्सर जोश-जोश में बहुत कुछ बोल जाते हैं, लेकिन ज़रा एक मिनट के लिए इस बात पर अपना कॉमन सेंस लगाइए।
सोचिए की 79 साल की उम्र में देश का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार क्या देश के 140 करोड़ लोगों का व्हाट्सएप चेक करेगा?
क्या वो ये पता लगाने में अपनी पूरी ऊर्जा खपाएगा की आज सुबह शर्मा जी ने अपनी बुआ को ‘गुड मॉर्निंग’ का कौन सा मैसेज भेजा, या किस कॉलेज के लड़के ने अपने दोस्तों का ग्रुप छोड़ दिया! मतलब कुछ भी?
इस हास्यास्पद बयान के बाद लकी बिष्ट जैसे कई पूर्व खुफिया अधिकारियों ने भी अपना सर पकड़ लिया। उन्होंने बकायदा लॉजिक देकर समझाया की भाई, मास-फोन टैपिंग (Mass phone tapping) कोई मज़ाक है क्या?
तकनीकी रूप से यह पूरी तरह असंभव है की आप करोड़ों लोगों का एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड (End-to-End Encrypted) व्हाट्सएप और फेसबुक एक साथ कंट्रोल कर सकें।
इसके लिए जो इन्फ्रास्ट्रक्चर चाहिए, वो किसी हॉलीवुड की फिल्म में ही मुमकिन है, असल ज़िंदगी में नहीं।
जब आप देश के युवाओं के सामने खड़े होकर ऐसी बेसिर-पैर की बातें करते हैं, तो आप सिर्फ उस अधिकारी का अपमान नहीं कर रहे होते, बल्कि आप उन छात्रों की बुद्धि का भी मज़ाक उड़ा रहे होते हैं।
एक व्यक्ति जो अपनी पूरी ज़िंदगी देश के खुफिया ऑपरेशन्स में गुज़ार चुका हो, उसे ‘फोन में झांकने वाला जासूस’ या ‘मोदी-शाह का एजेंट’ कहना… क्या ये एक बेहद सतही और घटिया राजनीतिक स्क्रिप्ट नहीं है?
चुनाव में आपको सरकार की नीतियां पसंद नहीं हैं, आप जमकर विरोध कीजिए। लेकिन उस विरोध की आग में देश के सुरक्षा तंत्र और उसके चीफ़ को घसीटना, ये कौन सी ज़िम्मेदार राजनीति है?
“एक और मुंबई किया तो बलूचिस्तान से हाथ धो बैठोगे”, अजीत डोभाल की वो चेतावनी जिससे आज भी कांपता है पड़ोसी मुल्क
Pakistan has always feared NSA Ajit Doval for destroying their terror networks. So why is Rahul Gandhi targeting our national hero at his Indore rally with baseless phone-tapping claims?
When our enemies have a problem with Doval Ji, why is Congress singing the same tune? Whose… pic.twitter.com/ZLplNUNe1F
— Vikram Singh (@Vi_kram92) September 20, 2026
अब अगर आपको लगता है की डोभाल का खौफ सिर्फ एक हवा-हवाई बात है, तो ज़रा पाकिस्तान के खुद के डिफेन्स एक्सपर्ट्स की बातें सुनिए।
पाकिस्तान में एक टीवी शो के दौरान वहां का एंकर अपने रक्षा विशेषज्ञ से पूछता है की भाई, ये अजीत डोभाल आखिर हैं कौन और पाकिस्तान के लिए इनका क्या मतलब है?
इस पर वो पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञ जो जवाब देता है, उसे सुनकर किसी भी हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाए।
वो पाकिस्तानी खुलेआम टीवी पर बैठ कर कुबूल करता है की डोभाल कोई आम बाबू या ब्यूरोक्रेट नहीं हैं। वो एक ‘ऑपरेशनल मास्टरमाइंड’ हैं, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी इंटेलिजेंस और टैक्टिकल ऑपरेशन्स में झोंक दी है।
पाकिस्तानी पैनलिस्ट बाकायदा डोभाल की उस कूटनीति का ज़िक्र करता है, जिसने पाकिस्तान की पूरी आतंकी फैक्ट्री को लकवा मार कर रख दिया है- और उस थ्योरी का नाम है ‘डिफेंसिव ऑफेंस’ (Defensive Offense)।
अब ये डिफेंसिव ऑफेंस क्या बला है? पुरानी सरकारों की नीति हुआ करती थी की जब कोई हम पर हमला करेगा, तब हम कड़े शब्दों में निंदा करेंगे या यूएन (UN) में जाकर रोएंगे।
डोभाल ने आकर इस पूरी थ्योरी को ही पलट दिया। उनका सीधा सा फंडा है- मार खाने का इंतज़ार मत करो। अगर तुम्हें पता है की दुश्मन तुम्हें मारने आ रहा है, तो उसके घर में घुसकर उसे वहीं उलझा दो।
इसी थ्योरी के तहत अजीत डोभाल ने एक सेमिनार में वो ऐतिहासिक बयान दिया था, जिसकी गूंज आज तक इस्लामाबाद की सड़कों पर सुनाई देती है।
उन्होंने कैमरे में देखकर सीधे पाकिस्तान को चेतावनी दी थी- “You do one more Mumbai, you lose Balochistan” (तुम एक और 26/11 मुंबई हमला करो, तुम बलूचिस्तान से हाथ धो बैठोगे)।
दोस्त, इस एक सिंगल लाइन ने पिछले एक दशक से पाकिस्तान को जिस खौफ में बांध कर रखा है, उसका कोई हिसाब नहीं।
जो आदमी बिना एक भी गोली चलाए, सिर्फ अपने दिमाग और रणनीतिक खौफ से दुश्मन को उसकी औकात में रखता हो, उस पर हमारे नेता कैसी राजनीति कर रहे हैं?
पाकिस्तान कह रहा है की “ये है हमारा वो दुश्मन जिसे हम फेस कर रहे हैं,” और हमारे नेता कह रहे हैं की “ये है वो आदमी जो तुम्हारा फोन टैप कर रहा है!”
अंडरकवर एजेंट से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक के मास्टरमाइंड तक, जिस चेहरे पर देश गर्व करता है उसे विपक्ष ने बना दिया राजनीति का मोहरा
जब आप किसी इंसान को महज़ एक ‘जासूस’ या किसी का ‘एजेंट’ कहकर खारिज कर देते हैं, तो आप दरअसल उसका नहीं, अपने खुद के सामान्य ज्ञान (General Knowledge) का मज़ाक उड़ा रहे होते हैं।
जिन युवाओं के बीच खड़े होकर विपक्ष के नेता ये जासूसी वाली स्क्रिप्ट पढ़ रहे थे, काश उन्होंने उसी मंच से युवाओं को अजीत डोभाल का असली बायोडाटा भी बताया होता! लेकिन वो बताएंगे नहीं, क्योंकि अगर उन्होंने सच बता दिया, तो उनकी रची हुई इस हॉलीवुड फिल्म का विलेन रातों-रात नेशनल हीरो बन जाएगा।
चलिए, हम बताते हैं की अजीत डोभाल आखिर हैं कौन। डोभाल वो जांबाज़ हैं जिन्होंने पूरे 7 साल पाकिस्तान के लाहौर में एक अंडरकवर एजेंट के तौर पर बिताए हैं।
ज़रा सोचिए! दुश्मन देश की ज़मीन पर, एक मुस्लिम बनकर, उनके बीच रहकर देश के लिए खुफिया जानकारी जुटाना… इसके लिए जिगरा चाहिए होता है भाईसाहब! कोई छोटी सी चूक और सीधा मौत की सज़ा। लेकिन वो वहां रहे और शान से अपना काम करके वापस भी आए।
कहानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। जब पूर्वोत्तर में मिज़ो विद्रोह (Mizo insurgency) अपने चरम पर था, तो ये डोभाल ही थे जिन्होंने अपनी जान हथेली पर रखकर विद्रोहियों के कमांडरों को शांत किया था।
1999 में जब आतंकियों ने इंडियन एयरलाइंस का प्लेन (IC-814) हाईजैक करके कंधार ले गए थे, तब निहत्थे होकर आतंकियों से आमने-सामने नेगोशिएट (बातचीत) करने वाले अधिकारियों में अजीत डोभाल सबसे आगे खड़े थे।
और हाल के वर्षों को कैसे भूल जाएं? 2016 की उरी सर्जिकल स्ट्राइक (Uri Surgical Strike) हो, या 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक (Balakot Airstrike)-जब हमारी सेना के जवानों ने दुश्मन के घर में घुसकर आतंकियों को जहन्नुम पहुंचाया, तो उस पूरे ऑपरेशन के पीछे जिस मास्टरमाइंड का दिमाग चल रहा था, वो अजीत डोभाल ही थे।
क्या आप जानते हैं की डोभाल देश के पहले ऐसे पुलिस अधिकारी हैं, जिन्हें सेना के सर्वोच्च शांति-कालीन सम्मान ‘कीर्ति चक्र’ (Kirti Chakra) से नवाज़ा गया है?
अब आप ही बताइए, जिस इंसान की पूरी ज़िंदगी देश के लिए दांव पर लगी रही हो, जो भारत के दुश्मनों की आँखों में सीधा खटकता हो, उसे ‘फोन टैप करने वाला मोहरा’ कहना क्या इस देश के हर सिपाही और खुफिया अधिकारी का क्रूर अपमान नहीं है?
क्या हम अपनी राजनीति में इतने अंधे हो गए हैं की चुनाव जीतने के लिए अब हम देश-रत्नों पर भी कीचड़ उछालने लगे हैं?
आखिर में बस इतना ही कहा जा सकता है की राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति (National Security) कोई स्टैंड-अप कॉमेडी का मंच नहीं है, जहां आप बस 2 मिनट की ताली और हंसी के लिए कुछ भी बोलकर निकल जाएं।
अगर हमारे राजनेताओं को जासूसी की कहानियों और ‘फोन में घुसने’ वाले किस्सों का इतना ही शौक चढ़ा है, तो उन्हें चुनाव लड़ने के बजाय Spy Thriller नॉवेल लिखने चाहिए।
कम से कम नॉवेल पढ़कर लोग मज़ा तो लेंगे, और सबसे बड़ी बात… इससे देश के दुश्मनों को हम पर हंसने का मौका तो नहीं मिलेगा!
