हमारे देश में एक बड़ी पुरानी कहावत है- ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।’ लेकिन आज के इस मॉडर्न ‘सेक्युलर इकोसिस्टम’ ने इस कहावत को थोड़ा और अपडेट कर दिया है।
नया वर्ज़न कुछ यूं है की “पत्थर भी हम मारेंगे, दंगा भी हम करेंगे, लेकिन रोते हुए खुद को पीड़ित (विक्टिम) भी हम ही बताएंगे।”
अब आप सोच रहे होंगे की अचानक ये बात कहाँ से आ गई? दरअसल, ये सारा ज्ञान हमें दिया है भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी साहब ने।
अभी इसी 19 सितंबर को दिल्ली के अंदर ए.जी. नूरानी की एक किताब पर चर्चा का कार्यक्रम चल रहा था। वहां हमारे अंसारी साहब पहुंचे और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का हवाला देते हुए एक बयान दाग दिया।
अंसारी साहब ने फरमाया की “भारत को असली खतरा कम्युनिज्म से नहीं, बल्कि हिन्दू राइट-विंग कम्युनलिज्म (यानी हिन्दू कट्टरपंथ) से है।”
ज़रा सोचिए! जिस देश ने आपको सिर आँखों पर बिठाया, हर सुख-सुविधा दी, पद दिया, सम्मान दिया, आज रिटायरमेंट के बाद आपको उसी बहुसंख्यक समाज से डर लग रहा है?
उर्दू की दो-चार शायरी पढ़कर और खुद को डरा हुआ बताकर ये जो ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने की होड़ मची है ना, ये कोई नई बात नहीं है।
लेकिन जब देश के इतने ऊंचे पद पर बैठा कोई व्यक्ति एक पूरे के पूरे समाज को कठघरे में खड़ा कर दे, तो फिर ये ज़रूरी हो जाता है की उस व्यक्ति के खुद के गिरेबान में झांका जाए।
चलिए, ज़रा देखते हैं की आखिर देश को असली खतरा किससे है और अंसारी साहब का चश्मा किस ब्रांड का है।
BIG CONTROVERSY 🚨 Former VP Hamid Ansari says –
“Nehru had said Danger to India not from Communism, but from Hindu right wing communalism” pic.twitter.com/a8IrJgVVJw
— News Algebra (@NewsAlgebraIND) September 18, 2026
पत्थर कोई और बरसाए लेकिन खौफ हिन्दुओं का दिखाया जाए, सेक्युलरिज्म के इस चश्मे का आख़िर नंबर क्या है
जब कोई इतना बड़ा नेता बयान देता है, तो उम्मीद की जाती है की वो ज़मीनी हकीकत देखकर बोल रहा होगा। लेकिन हामिद अंसारी साहब का बयान और ज़मीनी हकीकत एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत दिशा में दौड़ रहे हैं।
अभी सितंबर 2026 का ही महीना चल रहा है। ज़रा अख़बार उठाकर देखिए या इंटरनेट खंगाल लीजिए। कर्नाटक के भटकल में क्या हुआ? बिहार के कई जिलों में क्या हुआ?
हिन्दू समाज अपनी पूरी शांति और आस्था के साथ भगवान गणेश की विसर्जन यात्रा निकाल रहा था। लोग ढोल-नगाड़ों पर नाच रहे थे, भजन गा रहे थे। अचानक से एक मुस्लिम इलाके से गुज़रते हुए छतों से पत्थरों की बारिश होने लगती है।
पुलिस वाले तक घायल हो जाते हैं, गाड़ियों के शीशे टूट जाते हैं और पूरा माहौल जंग के मैदान में तब्दील हो जाता है। ये कोई एक दिन या एक जगह की बात नहीं है।
राम नवमी ले लीजिए, हनुमान जयंती ले लीजिए या कोई और हिन्दू त्योहार… अब देश में एक फिक्स पैटर्न बन चुका है की अगर हिन्दुओं का जुलूस किसी खास गली से निकलेगा, तो वहां छतों पर पहले से जमा की गई ईंटें और पत्थर उन पर बरसाए जाएंगे।
अब ज़रा अंसारी साहब के बयान को इस हकीकत के साथ जोड़कर देखिए। भाई साहब, जो लोग छतों से पत्थर मार रहे हैं, जो सरेआम पुलिस की गाड़ियों को आग लगा रहे हैं… वो अंसारी साहब को ‘देश के लिए खतरा’ नज़र नहीं आते।
उनके लिए वो बस ‘भटके हुए नौजवान’ होंगे। लेकिन जो बेचारा आम नागरिक सिर्फ अपने भगवान की मूर्ति विसर्जित करने जा रहा है, और उन पत्थरों से अपना सिर बचाते हुए भाग रहा है… वो अंसारी साहब को ‘हिन्दू राइट-विंग कम्युनलिज्म’ का हिस्सा और देश के लिए सबसे बड़ा खतरा लग रहा है!
जिसकी पहचान माफिया मुख्तार अंसारी से जुड़ी हो, उस घर से देश की सुरक्षा पर ज्ञान मिलना एक क्रूर मज़ाक है
चलिए, जब बात खतरे की हो ही रही है, तो ज़रा अंसारी साहब को भी एक आईना दिखा ही देते हैं। दूसरों पर उंगली उठाने से पहले इंसान को अपना खुद का घर ज़रूर देख लेना चाहिए।
ये तो खुले दस्तावेज़ और इंटरनेट के पन्नों पर दर्ज़ है की हामिद अंसारी का ताल्लुक किस खानदान से है।
आपने पूर्वांचल के उस खूंखार माफिया डॉन मुख्तार अंसारी का नाम तो सुना ही होगा? वही मुख्तार अंसारी जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश में हत्या, अपहरण, वसूली और आतंक का एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया था, जिसके नाम से ही आम जनता कांपती थी।
विधायक कृष्णानंद राय की सरेआम गोलियों से भूनकर की गई निर्मम हत्या को क्या आज तक कोई भूल पाया है?
अब मज़े की बात सुनिए। हामिद अंसारी और ये माफिया डॉन मुख्तार अंसारी एक ही खानदान का हिस्सा हैं। हामिद अंसारी और मुख्तार के पिता चचेरे भाई थे।
इस नाते रिश्ते में हामिद अंसारी, माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं। ये पूरा परिवार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी की राजनीतिक और सामाजिक विरासत का दावा करता है।
अब यहाँ एक बहुत सीधा और तार्किक सवाल खड़ा होता है। जिस खानदान का एक बड़ा चिराग सालों-साल जेल में बैठकर अपना खूंखार गैंग चलाता रहा हो, जिस खानदान की बुनियाद में पूर्वांचल के अनगिनत परिवारों की आह और आंसू छिपे हों, जिस घर के सदस्यों ने सरेआम लोकतंत्र और कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई हों… आज उस खानदान के बुज़ुर्ग हमें मंच पर खड़े होकर ये बताएंगे की देश की शांति और सुरक्षा को असली खतरा किससे है?
खुद के घर और परिवार में माफिया और डॉन पल रहे थे, जिन्होंने असली में लोगों की जान ली, लेकिन अंसारी साहब को डर उन आम हिन्दुओं से लग रहा है जो आज भी जिहादी पत्थरबाजों से खुद को बचाके चलते हैं।
ये तो वही बात हो गई की कोई खुद के घर के आंगन में बबूल के पेड़ लगाए, और पड़ोसी के गुलाब के फूल देखकर कहे की “सावधान रहो, इसके कांटों से हमारे पैरों में चुभन हो सकती है!”
पाकिस्तानी जासूस नुसरत मिर्ज़ा और वो पांच मुलाक़ातें जिनका सच आज तक इस इकोसिस्टम के गले की फांस बना हुआ है
अब ज़रा एक और खौफनाक किस्सा सुनिए। बात जुलाई 2022 की है। पाकिस्तान के एक टीवी चैनल पर वहां का एक नामी पत्रकार और स्वयंभू जासूस नुसरत मिर्ज़ा बैठा था।
लाइव टीवी पर उसने शेखी बघारते हुए एक ऐसा भयंकर खुलासा किया जिसने पूरे हिंदुस्तान की राजनीति में भूचाल ला दिया।
नुसरत मिर्ज़ा ने सीना ठोक कर कुबूल किया की वह 2005 से 2011 के बीच एक-दो बार नहीं, बल्कि पूरे 5 बार भारत आया था। अब आप पूछेंगे की भाई एक पाकिस्तानी पत्रकार को भारत में इतना वीआईपी ट्रीटमेंट कौन दे रहा था?
मिर्ज़ा का खुद का दावा था की उसे आतंकवाद के मुद्दों पर होने वाले बड़े-बड़े सेमिनारों में बुलाया गया था, और उसे न्योता देने वाले कोई और नहीं, बल्कि तत्कालीन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी साहब थे!
बात सिर्फ बुलाने तक सीमित नहीं थी। नुसरत मिर्ज़ा ने बड़े फक्र से बताया की उसने इन सरकारी और वीआईपी मुलाकातों का फायदा उठाकर भारत की कई क्रिटिकल और खुफिया जानकारियां बटोरीं।
और भारत से वापस जाकर उसने वो सारा कच्चा-चिट्ठा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और तत्कालीन आर्मी चीफ जनरल अशफाक परवेज़ कयानी के हाथों में सौंप दिया।
अब आप खुद सोचिए यार। देश का उपराष्ट्रपति जिस मंच पर बैठा हो, वहां एक पाकिस्तानी जासूस खुलेआम घूम रहा हो और देश की खुफिया जानकारी निकाल कर पाकिस्तान ले जा रहा हो!
बवाल मचने के बाद हामिद अंसारी साहब ने एक गोलमोल सा बयान देकर इससे पल्ला झाड़ने की कोशिश की और कहा की उन्होंने किसी नुसरत मिर्ज़ा को नहीं बुलाया। लेकिन कहते हैं ना की धुआं वहीं उठता है जहां आग लगी हो।
बीजेपी ने जब पुराने फोटो और डॉक्युमेंट्स निकालकर तीखे सवाल दागे, तो इस ईकोसिस्टम के पास कोई जवाब नहीं था।
जिस इंसान के नाम के साथ एक पाकिस्तानी जासूस के तार जुड़ रहे हों.. क्या वो इंसान देश के आम नागरिकों (हिन्दुओं) को ‘देश के लिए खतरा’ बताने का कोई भी नैतिक अधिकार रखता है?
जो इंसान खुद सवालों के भंवर में फंसा हो, वो आज हमें राष्ट्रवाद और कम्युनलिज्म पर सर्टिफिकेट बांट रहा है!
ईरान में RAW एजेंट्स की जासूसी और देश से गद्दारी के वो संगीन आरोप जो हामिद अंसारी के दामन से कभी धुल नहीं पाए
अगर आपको लग रहा है की नुसरत मिर्ज़ा वाला मामला ही सबसे बड़ा दाग है, तो ज़रा हामिद अंसारी साहब की उस पुरानी फाइल को भी खोल लेते हैं जब वो राजनीति में नहीं, बल्कि कूटनीति (Diplomacy) में थे।
साल 2022 के आस-पास ही भारत के टॉप डिप्लोमैट रहे दीपक वोहरा ने एक इंटरव्यू में हामिद अंसारी को लेकर कुछ ऐसे संगीन आरोप लगाए थे, जिन्हें सुनकर किसी भी सच्चे भारतीय के पैरों तले ज़मीन खिसक जाए।
पूर्व एंबेसडर दीपक वोहरा ने खुफिया एजेंसियों की पुरानी फाइलों के हवाले से सरेआम कहा था की हामिद अंसारी का झुकाव ‘इस्लामी कट्टरपंथ’ की तरफ बहुत ज़्यादा था। वोहरा ने साफ़ कहा था की अंसारी की वफादारी भारत से कहीं ज़्यादा पड़ोसी (इस्लामिक) देशों के प्रति दिखती थी।
और सबसे डार्क चैप्टर तो ईरान का है। जब हामिद अंसारी ईरान की राजधानी तेहरान में भारत के राजदूत हुआ करते थे, तब उन पर भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ (RAW) के ऑपरेशन्स को एक्सपोज़ करने का आरोप लगा था।
ये आरोप किसी आम आदमी ने नहीं, बल्कि खुद रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारियों ने लगाए थे। अधिकारियों का दावा था की अंसारी के कुछ फैसलों और रवैये की वजह से ईरान में काम कर रहे भारत के खुफिया एजेंट्स की पहचान उजागर हो गई थी और उनकी ज़िंदगियां सीधे तौर पर खतरे में पड़ गई थीं।
जिस इंसान के दामन पर अपने ही देश के जासूसों की जानकारी लीक होने और उनकी जान आफत में डालने के इतने गंभीर दाग लगे हों, आज वो इंसान इस देश के हिन्दुओं को ‘कट्टरपंथी’ बता रहा है!
