अगर मुसलमानों को हिन्दुओं के गरबा में इतनी ही दिलचस्पी, तो अकेले नहीं अपनी बहन-बेटियों को भी लाएं साथ, BJP MLA रामेश्वर शर्मा की वो ‘गुगली’ जिससे चारो खाने चित हुए ओवैसी और सनातन विरोधी दल

सच कहूं तो आजकल सेक्युलरिज्म के नाम पर हमारे सनातन धर्म के पवित्र त्योहारों का जो मज़ाक बनाया जा रहा है, उसे देखकर किसी भी सच्चे हिन्दू का खून खौलना लाज़मी है।

नवरात्रि कोई साधारण त्योहार नहीं है। नौ दिनों तक उपवास रखना, नंगे पैर रहना, ज़मीन पर सोना और पूरी श्रद्धा के साथ माँ जगदम्बा की आराधना करना… ये सब हमारी आस्था का सबसे बड़ा अनुष्ठान है।

गरबा इसी भक्ति और शक्ति की पूजा का एक अभिन्न हिस्सा है। ये कोई रात में चलने वाला पब, डिस्को या डांस क्लब नहीं है जहाँ कोई भी मुंह उठाकर सिर्फ मनोरंजन के लिए या लड़कियों को ताड़ने के लिए घुस आए!

लेकिन दुर्भाग्य देखिए, पिछले कुछ सालों से हमारे इन पवित्र गरबा पंडालों पर एक खास समुदाय के लव जिहादियों की गिद्ध वाली नज़र गड़ गई है।

जिन लोगों का गरबा, माँ दुर्गा या हिन्दू धर्म से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है, जिन्हें मूर्ति पूजा से ही भयंकर नफरत है, वे अचानक गरबा के दिनों में ‘सेक्युलर’ बन जाते हैं।

असल में ये लोग गरबा खेलने नहीं आते, बल्कि इनका इकलौता मकसद होता है हमारे पंडालों में घुसपैठ करना, गरबा खेल रही हिन्दू बहन-बेटियों की वीडियो बनाना, उनके साथ छेड़छाड़ करना और उन्हें अपने ‘लव जिहाद’ के गंदे जाल में फंसाना।

सालों से हिन्दू समाज इस घुसपैठ को बर्दाश्त कर रहा था। लेकिन अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है। और जब पानी सिर के ऊपर जाता है, तो समाज को अपनी रक्षा के लिए कड़े नियम बनाने ही पड़ते हैं।

गरबा पंडाल या लव-जिहाद का अड्डा, आखिर विश्व हिन्दू परिषद को क्यों उठानी पड़ी गैर हिन्दुओं की एंट्री बैन करने की मांग

इस पूरे बवाल की असली जड़ को समझने के लिए आपको थोड़े ग्राउंड फैक्ट्स देखने होंगे। हवा में बातें नहीं हो रहीं! हर साल नवरात्रि आते ही लव जिहाद के दर्जनों केस सामने आते हैं जहाँ गरबा पंडालों से हिन्दू लड़कियों को टारगेट किया जाता है।

इसी खौफनाक ग्राउंड रियलिटी को देखते हुए, इस साल नवरात्रि शुरू होने से ठीक पहले विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने साफ-साफ फरमान जारी कर दिया की भइया, गरबा पंडालों में गैर-हिन्दुओं (विशेषकर मुस्लिम युवकों) की एंट्री पूरी तरह से बैन होनी चाहिए।

इन गरबा पंडालों को इन लोगों ने अपनी ‘शिकारगाह’ बना लिया था। ये लोग एकदम प्रॉपर प्लानिंग के साथ आते हैं।

कलाई पर मोटा सा कलावा-वलावा बांध लेंगे, माथे पर एक बड़ा सा नकली लाल तिलक लगा लेंगे और जब गेट पर इनसे नाम पूछा जाएगा, तो ‘रफीक’ बड़ी ही बेशर्मी से अपना नाम ‘राहुल’ या ‘रवि’ बता देगा।

इनका मकसद गरबा देखना होता ही नहीं है। ये तो बस मोबाइल का कैमरा चालू करके लड़कियों की चोरी-छिपे वीडियो बनाते हैं।

बाद में उसी वीडियो के ज़रिए लव जिहाद का खेल शुरू होता है। जब हिन्दू संगठनों ने इस सिंडिकेट को पकड़ा, तो इन घुसपैठियों के आकाओं को मिर्ची लग गई।

माथे पर तिलक लगाओ और अपनी बहन बेटियों को भी लाओ, BJP विधायक रामेश्वर शर्मा ने सरेआम फाड़ दिया सेक्युलरिज्म का नकाब

जब यह विवाद गरमाया हुआ था और टीवी डिबेट्स में विपक्षी नेता बैठकर ज्ञान बांट रहे थे, ठीक उसी समय मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरे देश की राजनीति में भूचाल ला दिया।

तारीख थी 21 सितंबर 2026। भोपाल के हुजूर विधानसभा क्षेत्र में एक सार्वजनिक मंच लगा हुआ था। और मंच पर माइक पकड़े खड़े थे बीजेपी के फायरब्रांड विधायक रामेश्वर शर्मा।

विधायक जी ने जो ‘गुगली’ फेंकी ना, उसने ओवैसी से लेकर दूसरे सनातन विरोधी दलों तक, पूरे जिहादी ईकोसिस्टम को चारों खाने चित कर दिया।

उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के सीधा चैलेंज ठोक दिया। रामेश्वर शर्मा ने मंच से गरजते हुए कहा- “गरबा में मुसलमान आना चाहते हैं? अरे सिर्फ गरबा में ही क्यों आना चाहते हो? परमानेंट (हमेशा के लिए) आ जाओ, हम तो तैयार बैठे हैं!”

इसके बाद उन्होंने जो कहा, उसने तो सेक्युलरिज्म का पूरा नकाब ही नोच डाला। उन्होंने सीधा सवाल दागा- “अकेले तुम्हारे लड़के ही क्यों आना चाहते हैं? अरे घर से अपनी बहन-बेटियों को भी लेकर आओ ना! अपनी अम्मी-अब्बू को लेकर आओ!”

विधायक जी यहीं नहीं रुके। उन्होंने गरबा में आने वालों के लिए साफ-साफ शर्तें रख दीं। उन्होंने डंके की चोट पर कहा की गरबा कोई तमाशा नहीं है।

अगर मुसलमानों को गरबा में आना है, तो “आओ, सबसे पहले ज़ोर से जय श्री राम बोलो… माथे पर हमारे जैसा तिलक लगाओ… माँ जगदम्बा की आरती करो, उनका प्रसाद खाओ और आचमन करो! अगर तुम्हें इन सब बातों से कोई परेशानी नहीं है, तो हमें भी कोई परेशानी नहीं है।”

वाह! इसे कहते हैं सीधा और सटीक प्रहार। रामेश्वर शर्मा ने एक ही झटके में इन लोगों का पूरा एजेंडा नंगा कर दिया। उन्होंने साफ कर दिया की अगर गरबा में आना है तो ‘श्रद्धालु’ बनकर आना पड़ेगा, ‘शिकारी’ बनकर नहीं।

और अगर श्रद्धालु बनकर आना है, तो फिर सनातन धर्म के सारे नियम मानने पड़ेंगे। तुम ये नहीं कर सकते की माथे पर तिलक लगाने से तो तुम्हारा धर्म भ्रष्ट हो जाए, लेकिन हिन्दू लड़कियों के बीच गरबा खेलने में तुम्हें सेक्युलरिज्म नज़र आने लगे!

शर्मा जी के इस एक बयान ने पूरे वामपंथी कुनबे की नसें फाड़ कर रख दीं। वो जो पहचान छिपाकर हिन्दू लड़कियों को टारगेट करने वाला जिहादी दिमाग था ना, उसे सरेआम बीच चौराहे पर बेनकाब कर दिया गया।

ओवैसी के चेलों और कांग्रेसी नेता आरिफ मसूद को लगी भयंकर मिर्ची, पूरे परिवार को गरबा में लाने की बात पर तिलमिला गया पूरा ईकोसिस्टम

अब ज़ाहिर सी बात है, जब रामेश्वर शर्मा ने इतना तगड़ा और सीधा वार किया, तो इस ईकोसिस्टम के पेट में दर्द तो होना ही था।

जैसे ही विधायक जी का यह बयान वायरल हुआ, वैसे ही सेक्युलरिज्म के तमाम ठेकेदार अपने बिलों से बाहर आ गए और छाती पीटने लगे। सबसे पहले मिर्ची लगी कांग्रेस को। भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने तुरंत कैमरे के सामने आकर रोना शुरू कर दिया।

आरिफ मसूद ने बौखलाहट में रामेश्वर शर्मा को “नफरती चिंटू” तक कह डाला और उन पर समाज में साम्प्रदायिक आग लगाने का आरोप मढ़ दिया।

यार, इन नेताओं का दोगलापन तो देखिए! जब गरबा पंडालों में इनकी वोटबैंक वाले लड़के अपनी पहचान छिपाकर हमारी बहन-बेटियों को ताड़ते हैं, उनकी चोरी-छिपे वीडियो बनाते हैं और लव जिहाद का गंदा खेल खेलते हैं, तब आरिफ मसूद जैसे नेताओं का सेक्युलरिज्म कहाँ घास चरने चला जाता है?

तब इन्हें ‘भाईचारा’ और ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ याद नहीं आती? लेकिन जैसे ही कोई हिन्दू नेता अपनी बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाता है, तो अचानक इन्हें समाज में ‘आग’ लगती हुई दिखने लगती है!

पीछे-पीछे ओवैसी की पार्टी (AIMIM) वाले भी इस बहती गंगा में हाथ धोने आ गए। मध्य प्रदेश के AIMIM अध्यक्ष मोहसिन अली खान ने भी इस पर जमकर बवाल काटा।

मोहसिन ने कहा की शर्मा जी को पहले अपने पार्टी के मुस्लिम नेताओं (जैसे मुख्तार अब्बास नकवी या शाहनवाज़ हुसैन) से पूछना चाहिए की क्या वो गरबा में अपनी औरतों को लाएंगे?

भाई, सवाल तो सीधा सा था जिस पर ये लोग तिलमिला गए। जब शर्मा जी ने कहा की गरबा में अकेले क्यों आते हो, घर की औरतों को भी लाओ… तो इसमें गलत क्या है?

अगर तुम इसे एक ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ मानते हो, तो सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तो पूरा परिवार जाता है ना!

लेकिन नहीं, इन्हें अपनी बहन-बेटियों और औरतों को तो घर की चारदीवारी और बुर्के में सख्त कैद रखना है, उन पर मज़हब के सारे कड़े कानून थोपने हैं, लेकिन खुद इन्हें हिन्दू लड़कियों के बीच गरबा खेलने के लिए एकदम ‘फ्री-पास’ चाहिए।

मीडिया के सामने सीना ठोक कर अपने बयान पर अड़े रहे रामेश्वर शर्मा और दे गए पूरे हिन्दू समाज को एक कड़क संदेश

आमतौर पर राजनीति में क्या होता है? कोई नेता जोश में आकर सच बोल देता है, फिर सेक्युलर गैंग उस पर पिल पड़ते हैं। नेता जी पर प्रेशर बनता है और वो अगले ही दिन टीवी पर आकर माफ़ी मांग लेते हैं या कह देते हैं की “मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया।”

लेकिन रामेश्वर शर्मा के केस में ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ! जब बवाल अपने चरम पर था और मीडिया वाले माइक लेकर उनके पीछे पड़े थे, तब न्यूज़ एजेंसी PTI (प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया) से बात करते हुए उन्होंने पीछे हटने के बजाय अपने बयान को और तगड़े तरीके से दोहरा दिया।

उन्होंने सीना ठोक कर कैमरे पर कहा की “मैं अपनी बात पर सौ फीसदी कायम हूँ। गरबा सनातन धर्म का पवित्र त्योहार है, कोई सड़क का तमाशा नहीं। अगर मुस्लिम लड़कों को हमारी संस्कृति से इतना ही प्यार है तो घर की औरतों को भी लाएं, माथे पर तिलक लगाएं और पूजा करें।”

विधायक जी का यह स्टैंड पूरे हिन्दू समाज और गरबा आयोजकों के लिए एक बहुत बड़ा और कड़क संदेश है। अब वक्त आ गया है की हिन्दू समाज डिफेंसिव होना छोड़ दे। रामेश्वर शर्मा की इस ‘गुगली’ को हमें अपना मूल मंत्र बना लेना चाहिए।

अब अगर गरबा पंडाल के गेट पर कोई भी संदिग्ध या गैर-हिन्दू पकड़ा जाए, तो उससे बहस करने की ज़रूरत ही नहीं है। गेट पर ही एक कटोरी में गौ-मूत्र, एक थाली में लाल रोली का तिलक और प्रसाद रखो।

जो भी अंदर आना चाहे, पहले उसे गौ-मूत्र से पवित्र करो, उसके माथे पर बड़ा सा तिलक लगाओ, उसे माँ का प्रसाद खिलाओ और उससे कहो की ज़ोर से नारा लगाए- ‘जय श्री राम’!

अगर वो व्यक्ति ऐसा करने को राज़ी है, तो उसे गले लगाओ और अंदर ले जाओ। लेकिन अगर तिलक देखकर या जय श्री राम सुनकर वो भड़क जाए, तो समझ लेना की वो कोई श्रद्धालु नहीं, बल्कि तुम्हारी बहन-बेटियों को ताड़ने आया एक जिहादी है।

और ऐसे लोगों को तो फिर धक्के मारकर पंडाल से बाहर निकालना ही सनातनियों का परम धर्म है। गरबा हमारी शक्ति की उपासना है, और अपनी शक्ति को इन जिहादियों के गंदे इरादों से बचाना अब हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है!

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