35 हज़ार फीट ऊपर जिहादी ने बरसाए खंजर फिर भी नहीं डगमगाए हाथ, दुबई से इज़रायल जाने वाले विमान में लहूलुहान होकर भी 174 मुसाफिरों की जान बचाने वाले जांबाज़ भारतीय पायलट ‘स्मित मछार’

हमें लगता है की अगर कोई बहुत पढ़ा-लिखा है, लाखों की नौकरी कर रहा है और कोट-टाई पहनकर घूम रहा है, तो वो कोई आतंकी थोड़ी हो सकता है?

लेकिन 30 सितंबर 2026 (कल) आसमान में 35,000 फीट की ऊंचाई पर जो कुछ भी हुआ, उसने इन सारे भ्रमों के चीथड़े उड़ाकर रख दिए हैं।

कल पूरी दुनिया ने देख लिया की जब दिमाग़ में जिहाद का कीड़ा कुलबुला रहा हो, तो एक पायलट भी रातों-रात मौत का सौदागर बन सकता है।

लेकिन उस जिहादी को ये नहीं पता था की जिस विमान में बैठकर वो ‘9/11’ जैसा एक और खौफनाक आतंकी हमला दोहराने का प्लान बना रहा था, उसी कॉकपिट में उसके बगल वाली सीट पर एक भारतीय शेर बैठा था।

एक ऐसा सनातनी जांबाज़, जिसने शरीर पर चाकुओं के अनगिनत वार झेलने और खून से लथपथ होने के बावजूद हार नहीं मानी।

उस जिहादी ने खंजर बरसाए, लेकिन हमारे भारतीय पायलट के हाथ डगमगाए नहीं। उसने अपनी जान पर खेलकर 174 मुसाफिरों को मौत के मुँह से खींच लिया।

चलिए, आसमान में लड़ी गई इस खौफनाक जंग का पूरा सच आपको बताते हैं।

दुबई से तेल अवीव की उड़ान FZ1073 और कॉकपिट के अंदर छिपा मौत का जिहादी सौदागर

कल सुबह की बात है। दुबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फ्लाईदुबई (Flydubai) एयरलाइंस की फ्लाइट FZ1073 ने टेकऑफ किया।

ये एक बोइंग (Boeing 737 MAX 8) प्लेन था, जिसे इज़राइल की राजधानी तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट (Ben Gurion Airport) पर उतरना था।

प्लेन में कुल 174 मुसाफिर सवार थे, जिनमें 27 छोटे बच्चे भी थे। फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी, इसलिए ज़ाहिर सी बात है की इसमें बैठे ज़्यादातर यात्री इज़राइली नागरिक थे।

प्लेन के अंदर सब कुछ एकदम नॉर्मल था। मुसाफिर अपनी सीट बेल्ट बांधकर रिलैक्स कर रहे थे, किसी को भनक तक नहीं थी की उनके साथ उड़ने वाला एक इंसान उन्हें सीधा जहन्नुम भेजने की तैयारी कर चुका है।

इस प्लेन की कमान किसके हाथों में थी? मेन सीट (कैप्टन की सीट) पर बैठे थे हमारे भारतीय जांबाज़ ‘स्मित मछार’ (Smit Machchhar)।

मुंबई के रहने वाले स्मित कोई नौसिखिए पायलट नहीं हैं। भाईसाहब, बंदे के पास 13 साल का तगड़ा फ्लाइंग एक्सपीरियंस और 9500 से ज़्यादा घंटों तक प्लेन उड़ाने का रिकॉर्ड है।

फ्लाईदुबई से जुड़ने से पहले वो पूरे 11 साल तक भारत में स्पाइसजेट (SpiceJet) के कमांडर रह चुके हैं। जून 2022 से वो दुबई में बेस थे। स्मित का ट्रैक रिकॉर्ड एकदम शानदार था।

लेकिन मुसीबत कैप्टन की सीट पर नहीं, बल्कि उनके ठीक बगल वाली फर्स्ट ऑफिसर (को-पायलट) की सीट पर बैठी थी।

वहां बैठा था ओमान (Oman) का एक नागरिक। ये वही गद्दार को-पायलट था जिसके दिमाग़ में कट्टरपंथी और जिहादी नफ़रत का ज़हर इस कदर भरा हुआ था की वो अपने साथ 174 इज़राइली और विदेशी मुसाफिरों की जान लेने पर उतारू था।

वो एक सुसाइड-हाईजैक मिशन पर था, ठीक वैसा ही जैसा 9/11 में अमेरिका में हुआ था।

34000 फीट की ऊंचाई पर मौत का तांडव जब ओमान के जिहादी ने स्मित पर किया चाकुओं से जानलेवा हमला

दुबई से उड़ने के कुछ ही देर बाद प्लेन ने अपनी क्रूज़िंग ऑल्टिट्यूड (Cruising Altitude) पकड़ ली थी। प्लेन करीब 34,000 फीट की ऊंचाई पर सऊदी अरब और जॉर्डन के बॉर्डर वाले इलाके के ऊपर से गुज़र रहा था।

सब कुछ ऑटोपायलट (Autopilot) पर चल रहा था।

अचानक उस ओमानी को-पायलट ने अपनी सीट बेल्ट खोली और स्मित मछार पर चाकू से ताबड़तोड़ जानलेवा हमला कर दिया।

वो चाकू कहाँ से लाया, ये तो अभी जांच का विषय है, लेकिन उसने सीधा स्मित के गले, सीने और हाथों पर कई भयंकर वार किए।

हमला इतना अचानक और खौफनाक था की स्मित को संभलने का मौका ही नहीं मिला। खून का फव्वारा छूट पड़ा और पूरा कॉकपिट खून से लाल हो गया। स्मित बुरी तरह घायल होकर अपनी सीट से खिसक कर कॉकपिट के फर्श पर गिर पड़े।

जिहादी को लगा की उसने कैप्टन का काम तमाम कर दिया है। अब वो अपनी खौफनाक साज़िश के दूसरे हिस्से पर आ गया। उसने तुरंत प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में लिया, ऑटोपायलट को बंद किया और प्लेन के नोज (Nose) को सीधा ज़मीन की तरफ मोड़ दिया।

वो प्लेन 34,000 फीट की ऊंचाई से सीधा ज़मीन की तरफ गोता खाने लगा।

महज़ 30 सेकंड… जी हाँ, सिर्फ 30 सेकंड के अंदर वो प्लेन 15,000 फीट नीचे आ गिरा था!

बच्चे चीख रहे थे, लोगों को लगा की बस अब उनकी ज़िंदगी के चंद सेकंड ही बचे हैं।

इस बीच कॉकपिट के अंदर से दुनिया भर के रडारों पर एक इमरजेंसी कोड फ्लैश होने लगा। पहले सिस्टम से ‘7700’ (जनरल इमरजेंसी) का कोड ट्रांसमिट हुआ और फिर चंद ही सेकंड बाद वो कोड बदलकर ‘7500’ हो गया।

एविएशन की दुनिया में ‘7500’ कोड का मतलब होता है- ‘हाईजैक’ (Hijack) या विमान पर किसी ने कब्ज़ा कर लिया है!

जैसे ही ये कोड इज़राइल के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के रडार पर चमका, वहां हड़कंप मच गया। इज़राइल को लगा की ये कोई मिसाइल की तरह उनके शहर पर गिरने आ रहा है।

आनन-फानन में इज़राइल ने अपने लड़ाकू विमान (Fighter Jets) हवा में उड़ा दिए ताकि अगर ये प्लेन उनके एयरस्पेस में घुसे, तो उसे हवा में ही उड़ा दिया जाए। मतलब मौत नीचे से भी आ रही थी और सामने से भी।

लहूलुहान शेर की तरह लड़ा हमारा सनातनी पायलट, अपनी आखिरी सांस और ताकत लगाकर खोला कॉकपिट का दरवाज़ा

उस ओमानी जिहादी को लगा की उसने भारतीय कैप्टन का काम तमाम कर दिया है। खून से लथपथ स्मित फर्श पर पड़े थे और प्लेन पागलों की तरह ज़मीन की तरफ गोते खा रहा था।

9/11 के बाद से एविएशन का नियम है की कॉकपिट का दरवाज़ा अंदर से लॉक हो जाता है और बाहर से कोई उसे तब तक नहीं खोल सकता, जब तक अंदर बैठा पायलट उसे अनलॉक न करे।

मतलब केबिन में बैठे मुसाफिर चाहकर भी अंदर घुसकर उस जिहादी को नहीं रोक सकते थे। सब कुछ खत्म होने ही वाला था!

लेकिन.. हमारा वो शेर मरा नहीं था! शरीर पर चाकुओं के अनगिनत घाव, फर्श पर बहता खून और उखड़ती हुई सांसें… इन सबके बावजूद स्मित मछार ने हार मानने से साफ इंकार कर दिया।

उन्हें पता था की अगर उन्होंने अभी दम तोड़ दिया, तो बाहर बैठे उन 27 मासूम बच्चों सहित 174 मुसाफिरों की लाशें भी नहीं मिलेंगी।

स्मित ने अपनी बची-खुची आखिरी ताकत बटोरी। वो कॉकपिट के फर्श पर रेंगते हुए आगे बढ़े। जब उस जिहादी को-पायलट ने स्मित को दोबारा उठते देखा, तो वो घबरा गया।

दोनों के बीच उस छोटी सी जगह में हाथापाई शुरू हो गई। स्मित का एक ही मकसद था- किसी भी तरह उस कॉकपिट के दरवाज़े का ‘रिलीज़ स्विच’ (Release Switch) दबाना!

जिहादी ने उन्हें रोकने की बहुत कोशिश की, लेकिन एक घायल शेर सबसे ज्यादा खतरनाक होता है भाईसाहब! स्मित ने अपना सारा ज़ोर लगाकर उस ओमानी गद्दार को पीछे धकेला और अपने खून से सने हाथों से उस दरवाज़े का लॉक खोल दिया।

यही वो एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ बटन था, जिसने हवा में लिखी जा रही मौत की स्क्रिप्ट को पूरी तरह से पलट कर रख दिया!

मुसाफिरों का हल्लाबोल और सऊदी अरब में लैंडिंग, फेल हुआ एक और ‘9/11’

जैसे ही ‘क्लिक’ की आवाज़ के साथ कॉकपिट का दरवाज़ा अनलॉक हुआ, बाहर केबिन में बैठे लोगों को मौका मिल गया। प्लेन के मुसाफिरों में किस्मत से एक ‘ऑफ-ड्यूटी’ क्रू भी सफर कर रहा था।

दरवाज़ा खुलते ही प्लेन में बैठे एक ऑफ-ड्यूटी पायलट, एक डेंटिस्ट और एक प्लंबर सहित कई मुसाफिर सीधे कॉकपिट में घुस गए। उन्होंने धावा बोल दिया भाई!

उन सबने मिलकर उस ओमानी जिहादी को दबोच लिया। हवा में ही मुसाफिरों ने उस आतंकी को ऐसी धोबिया पछाड़ दी की उसकी सारी जिहादी हेकड़ी निकल गई।

उसे बुरी तरह पीटकर ज़मीन पर पटका गया और उसी की सीट बेल्ट और रस्सियों से बांधकर एक कोने में डाल दिया गया।

उधर प्लेन लगातार नीचे गिर रहा था। तब उसी फ्लाइट में सफर कर रहे एक ऑफ-ड्यूटी ब्रिटिश पायलट ने तुरंत कैप्टन की कुर्सी संभाली।

उसने प्लेन के कंट्रोल्स को अपने हाथ में लिया, नोज को ऊपर उठाया और प्लेन को क्रैश होने से बचा लिया। अगर स्मित मछार ने दरवाज़ा खोलने में 10 सेकंड की भी और देरी की होती, तो शायद प्लेन टुकड़ों में तब्दील हो चुका होता।

इज़राइल और सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से तुरंत संपर्क किया गया। प्लेन को डाइवर्ट करके सऊदी अरब के ‘ताबूक एयरपोर्ट’ (Tabuk Airport) की तरफ मोड़ा गया।

कुछ ही देर में उस खौफनाक मंज़र से गुज़रने के बाद फ्लाइट ने ताबूक के रनवे पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर ली। भगवान का शुक्र है की सभी 174 मुसाफिर ज़िंदा बच गए!

लैंड करते ही सऊदी पुलिस ने प्लेन को घेर लिया और उस ओमानी जिहादी को गिरफ्तार कर लिया। हमारे हीरो स्मित मछार की हालत बहुत गंभीर थी।

उन्हें तुरंत ताबूक के इमरजेंसी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उनकी कई घंटों तक सर्जरी चली। ताज़ा खबर ये है की स्मित अब खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्टेबल है।

नेतन्याहू से लेकर मोदी तक सबने माना भारतीय जांबाज का लोहा

कल की इस वारदात ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। आज पूरी दुनिया हमारे उस भारतीय शेर के आगे नतमस्तक है।

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने खुद एक वीडियो जारी करके स्मित मछार की बहादुरी को सलाम किया है।

उन्होंने साफ कहा की, “वो पायलट एक सच्चा हीरो है। चाकुओं से गोदने के बाद भी वो आख़िरी साँस तक लड़ा और उसने 174 इज़राइलियों को एक भयंकर आतंकी तबाही से बचा लिया। इज़राइल इस भारतीय जांबाज़ का हमेशा कर्ज़दार रहेगा।”

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना के बाद ट्वीट करके कैप्टन स्मित मछार को देश का गौरव बताया है। मोदी जी ने लिखा की स्मित की इस दिलेरी पर पूरे हिंदुस्तान को गर्व है।

Scroll to Top