अमूमन होता ये है की जब कोई मुजरिम या फ्रॉड कानून की नज़रों से भागता है, तो वो भगवान से बस यही दुआ करता है की पुलिस उसका केस फाइल किसी ठंडे बस्ते में डाल दे और उसे हमेशा के लिए भूल जाए।
लेकिन भारत का ये मोस्ट वांटेड भगोड़ा ‘जाकिर नाइक’ (Zakir Naik) तो एक अलग ही लेवल की मन्नतें मांग रहा है! ये भगवान से केस रफा-दफा करने की नहीं, बल्कि सीधे भारत की सरकार ही बदलने की दुआ कर रहा है।
हाल ही में रिपब्लिक टीवी (Republic TV) ने एक ऐसा अंडरकवर स्टिंग ऑपरेशन (Sting Operation) कर डाला है, जिसने दिल्ली से लेकर मलेशिया तक हड़कंप मचा दिया है।
रिपब्लिक के खुफिया कैमरे ने जो कुछ भी रिकॉर्ड किया है, वो सिर्फ एक न्यूज़ भर नहीं है बॉस।
ये इस बात का जीता-जागता सबूत है की भारत के दुश्मनों, आतंकवादियों और देश तोड़ने वालों को इस वक्त मोदी सरकार का कितना ज्यादा खौफ है, और उनकी आखिरी उम्मीदें किन राजनीतिक दलों पर टिकी हुई हैं।
मलेशिया के एक आलीशान फ्लैट में छिपा जाकिर नाइक और 105 मिनट का स्टिंग ऑपरेशन जिसने बेनकाब कर दिए इस आतंकी उपदेशक के इरादे
ज़रा इस स्टिंग ऑपरेशन की ग्राउंड रिपोर्ट और इनसाइड स्टोरी सुनिए। रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर अनिर्बान भकत ने बहुत ही शातिराना तरीके से व्हाट्सएप के जरिए जाकिर नाइक के करीबियों से संपर्क साधा।
मुलाकात तय हुई मलेशिया के पुत्राजया (Putrajaya) इलाके में। वहां की ‘तमारा रेजिडेंस’ नाम की एक बेहद पॉश बिल्डिंग है। उसी के टावर-C की 21वीं मंजिल पर जाकिर नाइक का आलीशान फ्लैट है।
रिपोर्टर जब वहां पहुंचा, तो नीचे मलेशियन पुलिस का कड़ा पहरा था। चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरे लगे हुए थे। और तो और, इस भगोड़े की पर्सनल सिक्योरिटी के लिए पाकिस्तान के पेशावर से आए हुए भारी-भरकम बॉडीगार्ड्स तैनात थे।
लेकिन कहते हैं ना की जब सच को बाहर आना होता है, तो कोई सिक्योरिटी काम नहीं आती। इन तमाम पहरेदारियों को धता बताते हुए रिपोर्टर का हिडन कैमरा पूरे 1 घंटा 45 मिनट (105 मिनट) तक बिना रुके चलता रहा।
और इसी खुफिया कैमरे के सामने जाकिर नाइक ने अपनी वो भड़ास, अपनी राजनीति और अपना वो खौफ उगला, जिसने पूरे इकोसिस्टम की कलई खोल कर रख दी है।
इतने सालों से जो आदमी खुद को सिर्फ एक ‘धार्मिक उपदेशक’ बताता फिर रहा था, वो दरअसल एक फुल-टाइम पॉलिटिशियन की तरह बातें कर रहा था जिसे भारत के चुनाव नतीजों की पल-पल की खबर है।
“जब मोदी और बीजेपी जाएंगे तभी मेरी वापसी होगी”, PM मोदी के खौफ से भारत में सत्ता बदलने का इंतजार कर रहा भगोड़ा जाकिर नाइक
इस पूरे 105 मिनट के स्टिंग का सबसे विस्फोटक और सबसे बड़ा डायलॉग वो था, जब रिपोर्टर ने सीधा सवाल दागा की “भाई, भारत कब लौट रहे हो?”
इसके जवाब में जाकिर नाइक बिना एक पल सोचे कहता है- “After BJP goes” (यानी जब मोदी और बीजेपी सत्ता से बाहर हो जाएंगे, मैं तभी भारत लौटूंगा)।
इतना ही नहीं, कैमरे पर वो मुंगेरीलाल के हसीन सपने भी बुनने लगा। वो बड़ी कॉन्फिडेंस से कह रहा था की बीजेपी 2029 का चुनाव किसी भी कीमत पर नहीं जीत पाएगी।
और अगर गलती से जीत भी गई, तो बहुमत नहीं होगा और वो सरकार चला नहीं पाएगी। मतलब, एक ग्लोबल आतंकी डिक्लेयर हो चुका आदमी, भारत की राजनीति की इतनी गहरी एनालिसिस कर रहा है!
लेकिन यहाँ हमें थोड़ा गहराई में जाकर एक सवाल पूछना चाहिए। आखिर भारत के गद्दारों और भगोड़ों को ऐसा पक्का यकीन क्यों है की मौजूदा सरकार के हटने के बाद भारत उनके लिए एकदम सुरक्षित ‘जन्नत’ बन जाएगा?
जाकिर नाइक जैसे इंसान को ऐसा क्यों लगता है की जिस दिन बीजेपी सत्ता से बाहर होगी, उसी दिन उसके लिए भारत के दरवाज़े खुल जाएंगे और उसके सारे गुनाह माफ हो जाएंगे?
क्या पिछली सरकारों के राज में इन भगोड़ों को दामाद की तरह ट्रीट किया जाता था? क्या इन्हें ये भरोसा है की अगर गलती से भी दिल्ली की कुर्सी पर ‘सेक्युलर’ चोला ओढ़ने वाली सरकार बैठ गई, तो फिर से इनका वही पुराना दबदबा लौट आएगा?
जाकिर नाइक के इस एक छोटे से वाक्य “After BJP goes” ने हमारे देश की राजनीति के उस काले सच को उजागर कर दिया है, जिसे लिबरल मीडिया हमेशा छुपाने की कोशिश करता है।
देश के दुश्मनों को अगर किसी एक विचारधारा से खौफ है, तो वो मौजूदा सरकार की नीतियां ही हैं।

राहुल गांधी से अचानक उमड़ा प्यार और कांग्रेस से उम्मीदें, आखिर एक आतंकी सरगना को विपक्ष में क्यों नज़र आ रहा अपना मसीहा
अब स्टिंग कैमरे पर इस भगोड़े का जो अगला रंग सामने आया, वो किसी भी पॉलिटिकल सस्पेंस थ्रिलर से ज्यादा तगड़ा है।
जब जाकिर नाइक से विपक्ष और कांग्रेस के बारे में पूछा गया, तो भाईसाहब की आंखों में एकदम चमक आ गई। ऐसा लगा जैसे कोई बिछड़ा हुआ यार मिल गया हो!
नाइक ने कैमरे पर राहुल गांधी की शान में जमकर कसीदे पढ़े। उसने कहा की राहुल गांधी भले ही “अनुभवहीन” (Inexperienced) हैं, लेकिन वो “मोदी से कहीं बेहतर” हैं।
उसने यहां तक कह दिया की राहुल गांधी एक ‘ईमानदार’ नेता हैं और उन्हें पूरा मौका मिलना चाहिए। इतना ही नहीं, वो बाकायदा ये इच्छा जता रहा था की भारत में किसी तरह कांग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार बन जाए, जिसमें ममता बनर्जी जैसी नेता भी शामिल हों।
अब आप ही सोचिए यार, एक ग्लोबल लेवल का वांटेड आदमी, जिसके भड़काऊ भाषण सुनकर आतंकी बम फोड़ते हों, वो अचानक राहुल गांधी की ईमानदारी का सर्टिफिकेट क्यों बांटने लगा?
इस अचानक उमड़े प्यार के तार अगर आप पीछे जाकर जोड़ेंगे तो पूरी कहानी शीशे की तरह साफ हो जाएगी।
ज़रा पुरानी यादों के पन्ने पलटिए। ये वही जाकिर नाइक है जिसने कभी कांग्रेस की ‘राजीव गांधी फाउंडेशन’ (RGF) को 50 लाख रुपये का मोटा डोनेशन (चंदा) दिया था।
ये वही दौर था जब कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह इसके साथ खुशी-खुशी मंच साझा करते थे और इसे “शांति का दूत” (Ambassador of Peace) बताकर इसके गले लगते थे।
तो क्या इसी ‘पुराने प्यार’ और डोनेशन वाले रिश्ते की वजह से जाकिर नाइक को राहुल गांधी में अपना तारणहार नज़र आ रहा है?
उसे लगता है की अगर पुराने आका वापस गद्दी पर बैठ गए, तो शायद फिर से उसे वही ‘शांतिदूत’ वाला वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट मिलने लगेगा।
चुनाव आयोग और गृह मंत्री के खिलाफ प्रदर्शनों का खुला समर्थन, देश के भीतर चल रहे ड्रामे के तार आखिर कहाँ से जुड़े हैं
स्टिंग का ये हिस्सा सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला है। आप सोच रहे होंगे की मलेशिया में छिपा बैठा एक मुजरिम सिर्फ अपने केस की बातें करेगा। लेकिन नहीं! ये जनाब भारत के अंदरूनी मामलों में भी पूरी तरह घुसे हुए हैं।
कैमरे पर नाइक बड़ी दिलचस्पी से देश के भीतर चल रहे उन तथाकथित विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रहा था, जिनमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा मांगा जा रहा है।
अब सवाल ये है की विदेश में बैठे एक आतंकी उपदेशक को भारत के चुनाव आयोग और गृह मंत्रालय से इतनी क्या दिक्कत है? दिक्कत है, क्योंकि अमित शाह के गृह मंत्रालय ने ही इसके इकोसिस्टम की कमर तोड़ी है।
ये कोई मामूली बात नहीं है। ये इस बात का बहुत बड़ा सुबूत है की जो टूलकिट (Toolkit) विदेशों में बैठकर भारत को अस्थिर (Destabilize) करने की कोशिश कर रही है, वो देश के अंदर बैठे कुछ खास राजनैतिक धड़ों के साथ एकदम ‘सुर में सुर’ मिला रही है।
भारत में जब भी सरकार के खिलाफ कोई प्रोपेगेंडा सेट किया जाता है, तो मलेशिया, कनाडा या अमेरिका में बैठे ये भारत-विरोधी तत्त्व अचानक से एक्टिव क्यों हो जाते हैं?
क्योंकि इनका एजेंडा एक ही है- किसी भी तरह मौजूदा सिस्टम को कमज़ोर करना, ताकि ये अपना पुराना ‘धंधा’ फिर से शुरू कर सकें।
ढाका आतंकी हमले से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक, अपने सारे काले कारनामों को झूठा बताने वाले इस भगोड़े का असली सच क्या है
कैमरे पर ज्ञान बांटने वाले इस इंसान की ज़रा क्रिमिनल हिस्ट्री भी याद कर लेनी चाहिए, ताकि इसका पाखंड पूरी तरह से नंगा हो सके।
आपको 2016 का वो खौफनाक ढाका (बांग्लादेश) कैफे आतंकी हमला तो याद ही होगा? उस हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों ने पकड़े जाने पर सरेआम कुबूल किया था की वे जाकिर नाइक के भड़काऊ भाषणों से प्रेरित थे।
उसके ज़हरीले वीडियो देखकर ही उन्होंने बेगुनाहों को गोलियों से भून दिया था।
इसके बाद ही मोदी सरकार ने इसके एनजीओ ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ (IRF) पर कड़ा बैन ठोक दिया। एनआईए (NIA) ने इसके खिलाफ UAPA (आतंकवाद विरोधी कानून) के तहत केस दर्ज किया और ईडी (ED) ने इसकी करोड़ों की मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलकर इसके खिलाफ अरेस्ट वारंट निकाल दिए।
तब से ये जनाब भारत से दुम दबाकर भागे हुए हैं।
मज़े की बात तो ये है की जब खुफिया कैमरे में रिपोर्टर ने इससे इन मुकदमों के बारे में पूछा, तो ये बड़ी ही बेशर्मी से हंसते हुए बोला की ये सब महज़ “झूठे आरोप” (Just allegations) हैं!
अब आप ही बताइए यार, अगर तुम इतने ही दूध के धुले हो और तुम पर लगे सारे आरोप झूठे हैं, तो फिर 2016 से मलेशिया में क्यों दुबके बैठे हो?
आकर फेस करो ना कोर्ट को! सच तो ये है की इसका डर वो मुकदमे नहीं हैं। इसका असली डर दिल्ली में बैठी वो ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ वाली सरकार है, जिसे पता है की आतंकवादियों और उनके आकाओं का इलाज कैसे किया जाता है।
“दाऊद इब्राहिम से लेकर जाकिर नाइक तक सबको है सरकार बदलने का इंतज़ार”, बीजेपी ने पलटवार करके विपक्ष पर साधा निशाना

ज़ाहिर सी बात है, जैसे ही रिपब्लिक टीवी का ये बम फूटा, भारत की राजनीति में भूचाल आ गया। बीजेपी ने बिना एक मिनट बर्बाद किए इस पूरे इकोसिस्टम की वो धोबिया पछाड़ की है, जिसका जवाब देते विपक्ष से बन नहीं रहा है।
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके विपक्ष को सीधे आईना दिखा दिया। उन्होंने बहुत ही गहरा और कड़क तंज कसते हुए कहा की-
“भारत के जितने भी बड़े-बड़े भगोड़े और दुश्मन हैं, सबकी सोच आज कांग्रेस से क्यों मिल रही है? दाऊद इब्राहिम भी पाकिस्तान में बैठकर यही चाहता है की भारत में रिजीम चेंज (Regime Change) हो, और जाकिर नाइक भी मलेशिया में बैठकर राहुल गांधी की सरकार बनने की दुआएं कर रहा है!”
संबित पात्रा का ये सवाल सीधा निशाने पर लगा है। सच में यार, आखिर आतंकवादियों के आकाओं को कांग्रेस के आते ही खुद के सुरक्षित होने की गारंटी क्यों महसूस होने लगती है?
मज़े की बात देखिए, जिन दिग्विजय सिंह और कांग्रेसी नेताओं को बात-बात पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की आदत है, जाकिर नाइक का ये स्टिंग सामने आने के बाद वो एकदम सन्नाटे में चले गए हैं।
लिबरल मीडिया, जो दिन भर ‘लोकतंत्र खतरे में है’ का राग अलापता है, उसने इस इतनी बड़ी ख़बर से पूरी तरह किनारा कर लिया है। जब सच इतना कड़वा हो की निगला न जाए, तो ये इकोसिस्टम ऐसे ही मुंह छुपाकर बैठ जाता है।
कुर्सी बदलने का सपना देखने वाले ये गद्दार शायद भूल गए हैं की अब हिंदुस्तान बहुत आगे निकल चुका है
खैर, जाकिर नाइक मलेशिया के अपने उस 21वीं मंजिल वाले एसी फ्लैट में बैठकर मुंगेरीलाल के चाहे जितने हसीन सपने देख ले।
वो ख्याली पुलाव पकाता रहे की 2029 में सत्ता बदलेगी, राहुल गांधी आएंगे, उसके लिए भारत में रेड कार्पेट बिछाया जाएगा और वो फिर से लोगों का ब्रेनवॉश करने की अपनी दुकान सजा लेगा।
लेकिन ये गद्दार शायद एक बहुत बड़ी हकीकत भूल गया है। ये 2004 या 2008 का भारत नहीं है जहां तुष्टिकरण की राजनीति के नाम पर देश की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया जाता था।
आज का हिंदुस्तान और यहाँ का वोटर बहुत आगे निकल चुका है। भारत की जनता अब पहले वाली नहीं रही जो इन मीठी-मीठी बातों को समझ ना पाए।
सरकारें तो लोकतंत्र का हिस्सा हैं, वो आती हैं और जाती हैं। लेकिन अगर किसी देशद्रोही को ये लगता है की वो सत्ता बदलने का इंतज़ार करके भारत के कानून और यहाँ की जनता को बेवकूफ बना लेगा, तो उसे भारत के लोगों की जागरूकता का कोई अंदाज़ा ही नहीं है।
देश अब किसी भी हाल में उन लोगों को माफ़ करने के मूड में नहीं है जिनकी वजह से बेगुनाहों का खून बहा हो।
जाकिर मियां! अपने उन पेशावर वाले बॉडीगार्ड्स के साथ मलेशियन बिरयानी का मज़ा लो। क्योंकि तुम चाहे जितनी दुआएं कर लो, भारत का ‘मौसम’ तुम्हारे लिए अब हमेशा के लिए खराब हो चुका है।
तुम्हारी वो नफरत की दुकान अब यहाँ कभी नहीं खुलेगी, चाहे कोई भी आ जाए!
