चुनाव से पहले बड़े-बड़े मंचों से माइक पर चिल्ला-चिल्लाकर कसमें खाना बहुत आसान होता है। आपको याद ही होगा कैसे पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP सरकार ने वादे किए थे की “हमारी सरकार लाओ, महीनों के अंदर पंजाब से नशे का नामोनिशान मिटा देंगे।”
आज उसी पंजाब की सड़कों पर खून बह रहा है। और यह खून किसी अपराधी का नहीं, बल्कि उस आदमी का बह रहा है जो सिस्टम का काम खुद कर रहा था।
जिस राज्य में सरकार और 80 हज़ार की पुलिस फोर्स को नशे के तस्करों की कमर तोड़नी चाहिए थी, वहां आज हालत ये है की नशा बेचने वाले सरेआम छाती चौड़ी करके गोलियां चला रहे हैं, और नशा रोकने वाले शमशान पहुंच रहे हैं।
आज हम पंजाब के मानसा में 13 अक्टूबर को हुई उस खौफनाक वारदात का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलेंगे, जिसने ‘कट्टर ईमानदार’ होने का ढिंढोरा पीटने वाली ‘आम आदमी पार्टी’ और उसके पूरे सिस्टम को सरेआम बेनकाब कर दिया है।
Anti-drug activist Parwinder Singh Jhota was shot dead in broad daylight in Mansa today by a medical store owner.
AAP is turning Punjab into Jungle Raj 2.0 under Kejriwal’s leadership. pic.twitter.com/GiX1Bj7c6f
— RAHUL KUMAR (@CricCrazyRahull) October 16, 2026
उड़ता पंजाब की कड़वी हकीकत और कैमरा के सामने सरेआम एक नशा रोकने वाले शेर की हत्या
पंजाब के मानसा शहर की भरी बाज़ार का वो मंजर जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई। 13 अक्टूबर 2026 की दोपहर… एक सरदार जी अपने फोन में ‘फेसबुक लाइव’ ऑन करते हैं।
सरदार जी कैमरे के सामने एक मेडिकल स्टोर वाले की पोल खोल रहे थे की कैसे यह शख्स दवाइयों की आड़ में सरेआम ‘चिट्टा’ (ड्रग्स) और नशीली गोलियां बेचकर पंजाब की जवानी को शमशान पहुंचा रहा है।
लेकिन भाईसाहब, इसके बाद कैमरे पर जो हुआ, वो सीधे-सीधे सिस्टम के मुंह पर एक बहुत बड़ा तमाचा था। मेडिकल स्टोर का वो मालिक (अश्वनी कुमार) ज़रा भी नहीं घबराया।
उसके चेहरे पर ना तो पुलिस का कोई डर था, ना कानून का। उसने बड़े आराम से अपनी पिस्तौल निकाली और निहत्थे खड़े उस सरदार के सीने में सरेआम तीन गोलियां उतार दीं।
फेसबुक लाइव चल रहा था, पब्लिक खड़ी थी, दिन का उजाला था… लेकिन उस ड्रग माफिया के हाथ नहीं कांपे!
वो कातिल गोली मारकर वहां से भागा नहीं, बल्कि सड़क पर आकर अपनी पिस्तौल पब्लिक के सामने हवा में लहराने लगा, मानो कह रहा हो की “जाओ बुला लो अपनी पुलिस को, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
अस्पताल ले जाते-ले जाते उस नौजवान सरदार की मौत हो गई। ये कोई फिल्मी सीन नहीं था, ये आज के ‘उड़ता पंजाब’ की वो कड़वी हकीकत है जिसे सरकारी विज्ञापनों के मोटे-मोटे पर्दों के पीछे छिपाने की कोशिश की जा रही है।
“नशा रोको रोजगार दो” अभियान चलाने वाला वो निडर शेर जिसने अकेले ही सिस्टम की नींद उड़ा रखी थी

जिस सरदार जी को सरेबाज़ार गोलियों से भूना गया, उनका नाम परविंदर सिंह था। पूरे इलाके के लोग उन्हें प्यार से ‘झोटा’ (यानी सांड/शेर) कहते थे।
और वो शेर थे भी! परविंदर एक स्टेट-लेवल के पूर्व बॉक्सर थे, जिनका शरीर फौलाद का था। एक समय था जब वो खुद नशे की गिरफ्त में थे, लेकिन 2015 में जब उन्होंने अपने एक जिगरी दोस्त को ड्रग्स की ओवरडोज़ से तड़प-तड़प कर मरते देखा, तो उनकी ज़िंदगी बदल गई।
उन्होंने उसी दिन नशे को लात मार दी और कसम खाई की जब तक शरीर में सांस है, वो पंजाब के युवाओं को इस ज़हर से बचाएंगे।
परविंदर ने “नशा रोको, रोजगार दो” नाम का एक बहुत तगड़ा अभियान शुरू किया। जब उन्होंने देखा की पुलिस और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं, तो उन्होंने खुद ही मोर्चा संभाल लिया।
देखते ही देखते उन्होंने मानसा, बठिंडा और आस-पास के दर्जनों गांवों में युवाओं की ‘नशा रोको कमेटियां’ खड़ी कर दीं।
ये कमेटियां पुलिस का इंतज़ार नहीं करती थीं। जहाँ भी खबर मिलती की कोई चिट्टा या नशीली दवा बेच रहा है, परविंदर अपनी टीम के साथ वहां पहुंच जाते।
वो खुद रेड मारते, तस्करों को पकड़ते और उनकी वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते।
अकेले उस एक लड़के ने पूरे ड्रग माफिया की नींद हराम कर रखी थी। जो काम करने की तनख्वाह पुलिस वालों को मिलती है, वो काम परविंदर अपनी जान हथेली पर रखकर मुफ़्त में कर रहे थे। और इसी बात की उन्हें सज़ा मिली।
दस बार रेड और तीन बार सस्पेंड होने के बाद भी कैसे धड़ल्ले से चल रही थी मौत बांटने वाली वो दुकान
अब ज़रा पंजाब सरकार के ड्रग कंट्रोलरों, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की असलियत भी सुन लीजिए। आप हैरान रह जाएंगे ये जानकर की जिस अश्वनी कुमार ने परविंदर को गोली मारी, उसका रिकॉर्ड कितना काला था।
अक्टूबर 2026 की लेटेस्ट सरकारी रिपोर्ट्स बता रही हैं की अश्वनी कुमार की उस दुकान पर पिछले 4 सालों में 10 बार रेड पड़ चुकी थी! 10 बार!
यहां तक की तीन बार उसका मेडिकल लाइसेंस भी सस्पेंड हो चुका था। अब सवाल ये उठता है की जिस आदमी का लाइसेंस सस्पेंड हो चुका हो, जिस पर इतनी बार छापे पड़े हों, वो अपनी दुकान का शटर खोलकर सरेआम कैसे बैठा था?
ये कौन सी अदृश्य ताकत थी जो उसे बचा रही थी?
और इससे भी बड़ा सवाल- एक हिस्ट्रीशीटर और नशा तस्कर को पंजाब पुलिस ने बंदूक (Revolver) का लाइसेंस कैसे दे दिया? हम और आप जैसे आम आदमी अगर बंदूक का लाइसेंस मांगने जाएं तो पुलिस जूते घिसवा देती है, दादा-परदादा तक का बैकग्राउंड चेक कर डालती है।
लेकिन एक सरेआम नशा बेचने वाले को लाइसेंसी पिस्तौल मिल गई! क्या ये पुलिस की मिलीभगत के बिना मुमकिन है? या ऊपर से किसी खादी वाले की तगड़ी ‘सेटिंग’ थी?
आपको बता दें की ये कोई पहला मौका नहीं था। जुलाई 2023 में भी परविंदर सिंह ने इसी अश्वनी कुमार को नशा बेचते हुए रंगे हाथों पकड़ा था।
गुस्से में आकर परविंदर ने उसे जूतों का हार पहना दिया था और पुलिस के हवाले कर दिया था। लेकिन सिस्टम का दोगलापन देखिए!
पुलिस ने उस ड्रग पेडलर का तो कुछ नहीं बिगाड़ा, उलटे परविंदर सिंह को ही गिरफ्तार करके 2 महीने के लिए जेल में डाल दिया!
मतलब जो ज़हर बेच रहा है उसे पुलिस की सुरक्षा, और जो ज़हर पकड़ा रहा है उसे जेल? दाल में काला नहीं है साहब, यहाँ पूरी की पूरी दाल ही काली है।
भगवंत मान के झूठे वादे और आम आदमी पार्टी के राज में नशामुक्त पंजाब के नाम पर चल रहा खौफनाक खेल
Joined @INCPunjab MLAs in burning the effigy of CM @BhagwantMann outside the Punjab Vidhan Sabha, demanding his resignation over the death of anti-drug activist Parminder Singh Jhota.
Today, the @AAPPunjab government ran away from its responsibilities, spending ₹1 crore for a… pic.twitter.com/dYr7NQmbbZ
— Partap Singh Bajwa (@Partap_Sbajwa) October 22, 2026
दिल्ली से लेकर पंजाब तक अखबारों के फुल-पेज विज्ञापन छपते हैं। टीवी पर मुस्कुराते हुए चेहरों के साथ बताया जाता है की हमारी सरकार ने पंजाब में ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ (Yudh Nasheyan Virudh) छेड़ रखा है।
हम ‘कट्टर ईमानदार’ हैं। लेकिन परविंदर सिंह की लाश ने इन सारे विज्ञापनों के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है।
पूरे पंजाब में 80 हज़ार से ज़्यादा पुलिसकर्मियों की फौज है। इतनी बड़ी फोर्स आख़िर कर क्या रही है? क्या पंजाब पुलिस का काम सिर्फ वीआईपी (VIP) मंत्रियों के काफिले में सायरन बजाना और उनके बंगलों के बाहर संतरी की ड्यूटी देना रह गया है?
जब एक एक्टिविस्ट को खुद सड़कों पर उतरकर क्रिमिनल्स को पकड़ना पड़ रहा है, तो फिर इस सिस्टम पर ताला क्यों नहीं लगा देते?
सुशासन का ये कैसा ढोंग है? अगर कोई आम आदमी नशा माफिया के खिलाफ आवाज़ उठाता है, तो आपकी पुलिस उसे ही अंदर कर देती है।
और जब वही माफिया सरेआम फेसबुक लाइव पर उस आम आदमी को भून देता है, तो सरकार सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस करके और मुआवज़े का झुनझुना थमाकर पल्ला झाड़ लेती है।
आज पंजाब की जनता पूछ रही है की क्या ‘नशामुक्त’ पंजाब का यही वो मॉडल था जिसका सपना चुनाव से पहले बेचा गया था?
“मेरे पोते-पोतियों को बचा लो मोदी जी…” एक बेबस पिता की वो पुकार जो पंजाब सरकार के लिए शर्मनाक है
जब एक जवान बेटे की लाश घर के आंगन में आती है, तो एक बाप की क्या हालत होती है, ये कोई कागज़ों पर नहीं लिख सकता।
लेकिन परविंदर सिंह के पिता ने जो कहा, वो आपको अंदर तक झकझोर कर रख देगा। एक तरफ उनका दिल रो रहा था, लेकिन दूसरी तरफ उनकी आंखों में वो फौलादी आग थी जो शायद ही किसी ने देखी हो।
सड़क पर उतरे उस बूढ़े पिता ने छाती ठोक कर कहा- “मैं अभी ज़िंदा हूँ! जब तक मेरे शरीर में आखिरी सांस चलेगी, मैं पंजाब में नशे के खिलाफ अपनी जंग लड़ता रहूंगा। मेरे बेटे की शहादत बेकार नहीं जाएगी।”
लेकिन इस पूरी घटना में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश क्या था? वो था इस परिवार का पंजाब सरकार से पूरी तरह उठ चुका भरोसा।
परविंदर के पिता ने साफ-साफ कह दिया की उन्हें भगवंत मान और पंजाब पुलिस से अब रत्ती भर भी न्याय की उम्मीद नहीं है।
उन्होंने सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से गुहार लगाई की “कृपा करके मेरे पोते-पोतियों की जान बचा लीजिए, वरना ये ड्रग माफिया मेरे पूरे परिवार को खत्म कर देंगे।”
ज़रा सोचिए! जिस राज्य की जनता ने 92 सीटें देकर एक सरकार चुनी हो, आज उसी राज्य का एक पीड़ित पिता न्याय और सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की तरफ देख रहा है।
यह इस बात का सबसे बड़ा सुबूत है की पंजाब की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर जा चुकी है।
The daylight killing of anti-drug activist Parminder Singh Jhota is deeply tragic.
This is the reality of @BhagwantMann’s so-called “Yudh Nasheyan Virudh.” Drug mafias are emboldened, while those who raise their voices against drugs are being killed or driven to desperate… pic.twitter.com/qbXhe1PRVM
— Pargat Singh (@PargatSOfficial) October 13, 2026
सिलेक्टिव आउटरेज वाले लिबरल इन्फ्लुएंसर्स की शर्मनाक चुप्पी क्योंकि यहाँ उनके राजनीतिक आकाओं की सरकार है
अब ज़रा इंटरनेट पर ज्ञान बांटने वाले इन ‘सो-कॉल्ड’ बुद्धिजीवियों और लिबरल इन्फ्लुएंसर्स का पाखंड भी देख लीजिए।
विदेश में बैठकर हर दूसरे दिन भारत में ‘लोकतंत्र के खतरे में’ होने का ढिंढोरा पीटने वाले ध्रुव राठी जैसे यूट्यूबर्स आज एकदम गूंगे-बहरे हो गए हैं। ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) का फैक्ट-चेक करने वाला वो पूरा ईकोसिस्टम अचानक कोमा में चला गया है।
और वो कॉकरोच जनता पार्टी किधर छुप के बैठी है?
दिन-दहाड़े, कैमरे के सामने एक एक्टिविस्ट को सरेबाज़ार 3 गोलियां मार दी गईं, लेकिन मजाल है की इनमें से किसी ने एक ट्वीट तक किया हो!
क्यों? क्योंकि भाई साहब, यहाँ पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार नहीं है। यहाँ शासन कर रही है आम आदमी पार्टी (AAP)।
अगर यही घटना यूपी, मध्य प्रदेश या गुजरात में हुई होती, तो अब तक इन्होंने आसमान सिर पर उठा लिया होता।
इन्होंने 10-10 वीडियो बनाकर भारत और हिंदू समाज को दुनिया भर में बदनाम कर दिया होता। लेकिन चूंकि यहाँ इनके राजनीतिक ‘आका’ अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की साख दांव पर है, इसलिए इन सबके मुंह में दही जम गया है।
ये है इनका असली चेहरा! ये ‘सिलेक्टिव आउटरेज’ (Selective Outrage) की दुकान चलाते हैं। इनके लिए किसी की जान की कीमत इस बात से तय होती है की वो किस राज्य में मारा गया है और वहाँ सरकार किस पार्टी की है।
जो सरकार खुद नशा बंद नहीं करा पा रही, वो नशा बंद कराने वालों को ही सरेआम मरने के लिए छोड़ रही है, और ये लिबरल गैंग उस कातिल सरकार के बचाव में मौन व्रत धारण करके बैठा है।
CBI की एंट्री और सुलगते पंजाब का आक्रोश, ड्रग माफिया और उन्हें पालने वाले भ्रष्ट राजनेता का अंत करीब
परविंदर सिंह की मौत कोई मामूली घटना नहीं थी, यह एक ऐसा ज्वालामुखी था जिसने पूरे पंजाब को अंदर तक सुलगने पर मजबूर कर दिया।
जैसे ही खबर फैली, पब्लिक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। लोगों ने मानसा में उस कातिल अश्वनी कुमार की दुकान का शटर तोड़ दिया, पूरा सामान बाहर फेंका और उसे आग के हवाले कर दिया।
पूरे पंजाब में ‘पंजाब बंद’ का ऐलान हो गया था।
जब पब्लिक ने सरकार का गिरेबान पकड़ा और सड़कों पर चक्का जाम किया, तब जाकर पुलिस की नींद टूटी। जिस कातिल को ये पहले नहीं पकड़ पा रहे थे, पब्लिक के दबाव में उसी हत्यारे अश्वनी कुमार को पुलिस ने राजस्थान के सालासर से भागकर गिरफ्तार किया।
अपनी इज्जत बचाने के लिए प्रशासन को उसी ‘यूपी मॉडल’ की याद आई जिसका ये विरोध करते थे, और हत्यारे के घर पर बुलडोज़र चला दिया गया। लेकिन ये सब बहुत देर से उठाया गया कदम था।
पंजाब पुलिस की लिपापोती और निकम्मेपन को देखते हुए आखिरकार केंद्र को दखल देना ही पड़ा। 21 अक्टूबर 2026 को सीबीआई (CBI) ने इस खौफनाक हत्या और इसके पीछे छिपे पूरे ‘ड्रग्स नेक्सस’ (Drugs Nexus) की जांच अपने हाथों में ले ली और नई एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली।
अब जाकर उम्मीद जगी है की सिर्फ वो गोली चलाने वाला मोहरा ही नहीं, बल्कि उसे बचाने वाले वो सफेदपोश आका भी पकड़े जाएंगे जो खादी पहनकर नशे का कारोबार चला रहे हैं।
परविंदर सिंह ‘झोटा’ तो इस दुनिया से चला गया, लेकिन वो जाते-जाते पंजाब की रगों में ऐसी आग फूंक गया है जो अब बुझने वाली नहीं।
पंजाब का युवा जाग चुका है। वो समझ चुका है की ये विज्ञापनों वाली AAP सरकार सिर्फ धोखा दे सकती है, असली लड़ाई तो उन्हें खुद ही लड़नी पड़ेगी।
परविंदर की शहादत उस महासंग्राम की शुरुआत है, जिसमें पंजाब को खोखला करने वाले ये ड्रग माफिया और उन्हें पालने वाले भ्रष्ट राजनेता, दोनों की चिता जलना तय है।
