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Ram Mandir: ‘पाप धोने का मौका खोया…’, कांग्रेस के राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का न्योता ठुकराने पर भड़की भाजपा

अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन समारोह को लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है। इस समारोह में देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को आमंत्रित किया गया था। लेकिन, कांग्रेस ने इस समारोह का बहिष्कार करने का फैसला किया है। इस फैसले पर भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है।

भाजपा ने कहा कि कांग्रेस अब बहिष्कार पार्टी बन गई है। इन्होंने भगवान राम तक को काल्पनिक कहा था, जबकि महात्मा गांधी खुद राम-राज्य की कल्पना करते थे। भाजपा ने आरोप लगाया कि यह कांग्रेस अब गांधी की नहीं नेहरु की बन कर रह गई है। इन्होंने कुछ समय पहले ही कांग्रेस के नेता रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भारत रत्न सम्मान समारोह तक का बहिष्कार किया था।

कांग्रेस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह एक धार्मिक समारोह है और कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। कांग्रेस ने कहा कि वह राम मंदिर के निर्माण का समर्थन करती है, लेकिन वह इस समारोह में शामिल नहीं होगी।

कांग्रेस के इस फैसले को लेकर देश में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस का फैसला सही है, क्योंकि यह एक धार्मिक समारोह है और कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस का फैसला गलत है, क्योंकि यह एक ऐतिहासिक घटना है और कांग्रेस को इस समारोह में शामिल होना चाहिए था।

कांग्रेस के फैसले के पीछे क्या कारण है?

कांग्रेस के इस फैसले के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक कारण यह हो सकता है कि कांग्रेस इस समारोह को बीजेपी का राजनीतिक आयोजन मानती है। कांग्रेस का मानना है कि यह समारोह बीजेपी की सत्ता में वापसी के लिए एक प्रचार कार्यक्रम है।

दूसरा कारण यह हो सकता है कि कांग्रेस इस समारोह में शामिल होने से मुस्लिम वोट बैंक को नाराज करने से बचना चाहती है। कांग्रेस को लगता है कि अगर वह इस समारोह में शामिल होती है, तो इससे मुस्लिम वोट बैंक नाराज हो सकता है।

तीसरा कारण यह हो सकता है कि कांग्रेस इस समारोह में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थी। कांग्रेस को इस समारोह की तैयारियों के बारे में जानकारी नहीं थी और वह इस समारोह में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थी।

कांग्रेस के फैसले के क्या मायने हैं?

कांग्रेस के इस फैसले के कई मायने हैं। एक मायने यह है कि यह कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता की भावना को दर्शाता है। कांग्रेस ने दिखाया है कि वह एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और वह किसी भी धार्मिक समारोह में शामिल नहीं होगी।

दूसरा मायने यह है कि यह कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ते टकराव को दर्शाता है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच पिछले कुछ वर्षों में टकराव बढ़ रहा है। इस फैसले से यह टकराव और बढ़ सकता है।

तीसरा मायने यह है कि यह कांग्रेस की कमजोरी को दर्शाता है। कांग्रेस इस फैसले से खुद को कमजोर कर रही है। यह फैसला कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक नुकसान है।

भविष्य में क्या होगा?

कांग्रेस के इस फैसले के बाद भविष्य में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन, एक बात तो तय है कि यह फैसला कांग्रेस के लिए एक चुनौती है। कांग्रेस को इस फैसले के कारण होने वाले नुकसान से बचने के लिए कोई नया तरीका खोजना होगा।

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