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गर्व से कहो हम हिंदू हैं – स्वामी विवेकानंद जी

भारत के आधुनिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं जो केवल अपने समय तक सीमित नहीं रहते। वे काल, परिस्थितियों और पीढ़ियों को पार कर चेतना बन जाते हैं। स्वामी विवेकानंद ऐसे ही व्यक्तित्व थे। वे केवल एक संत, संन्यासी या वक्ता नहीं थे—वे हिंदू चेतना का निर्भीक स्वर, आत्मगौरव की ज्वाला और गुलामी की […]

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राजमाता जीजाबाई: जिनके संस्कारों ने गढ़ा हिंदवा सूर्य शिवाजी

मातृशक्ति, संस्कार और स्वराज की नींव भारत का इतिहास केवल युद्धों, राजाओं और साम्राज्यों का क्रम नहीं है। यह उन घरों की भी कहानी है जहाँ संस्कारों की लौ जलती रही, और उन माताओं की गाथा है जिनकी शिक्षा ने आने वाली पीढ़ियों का चरित्र गढ़ा। ऐसी ही एक महान नारी थीं राजमाता जीजाबाई। 12

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जय जवान–जय किसान: राष्ट्रभक्ति की अमर मिसाल — लाल बहादुर शास्त्री जी

भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो भाषणों से नहीं, बल्कि अपने आचरण से पहचान बनाते हैं। लाल बहादुर शास्त्री जी उसी परंपरा के नेता थे। वे सत्ता में रहते हुए भी सत्ता से ऊपर दिखाई देते थे। न उनका व्यक्तित्व दिखावे से भरा था, न उनकी राजनीति अवसरवाद से संचालित

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5 जनवरी: क्रांतिकारी बारीन्द्र कुमार घोष — यातनाओं से नहीं टूटा साहस, अंडमान की जेल में भी गूंजा ‘वंदे मातरम्’

भारत की आज़ादी की कहानी जितनी गौरवशाली है, उतनी ही अधूरी भी। अधूरी इसलिए, क्योंकि आज़ादी के संघर्ष में जिन असली क्रांतिकारियों ने अपना पूरा जीवन, सुख-चैन और भविष्य दांव पर लगा दिया, वे इतिहास के हाशिए पर चले गए। 5 जनवरी ऐसी ही एक तारीख़ है, जो हमें बारीन्द्र कुमार घोष की याद दिलाती

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धर्म की रक्षा से ही राष्ट्र सुरक्षित, जिहादी मानसिकता पर ताबड़तोड़ ऐक्शन सही: जगद्गुरु शंकराचार्य

देश में बढ़ते सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़े मुद्दों के बीच धर्म, राष्ट्र और आंतरिक सुरक्षा को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। इसी क्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “धर्म की रक्षा से ही राष्ट्र सुरक्षित रह सकता है” और जिहादी मानसिकता के खिलाफ सख्त

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27 दिसंबर: जब धर्मनिरपेक्ष पर्सिया इस्लामिक ईरान बना—तब शरणार्थियों को मिला हिंदू राजाओं का सहारा

27 दिसंबर की तारीख पश्चिम एशिया के इतिहास में अक्सर एक जटिल बहस के साथ जोड़ी जाती है—पर्सिया से ईरान तक के सफ़र की। सोशल मीडिया और जन-चर्चा में यह दावा बार-बार सामने आता है कि 27 दिसंबर 1934 को धर्मनिरपेक्ष पर्सिया को “इस्लामिक ईरान” में बदल दिया गया। लेकिन ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस कहानी को

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मुगलों की सत्ता को चुनौती देने वाले जाट योद्धा महाराजा सूरजमल की वीरता की कहानी

जाट चेतना का उदय और महाराजा सूरजमल का प्रारंभिक जीवन भारतीय इतिहास में 18वीं शताब्दी वह दौर था जब मुगल साम्राज्य ऊपर से विशाल लेकिन भीतर से खोखला हो चुका था। दिल्ली की सत्ता कमजोर थी, सूबेदार निरंकुश हो चुके थे और हिंदू समाज—विशेषकर ग्रामीण भारत—लगातार अत्याचार, भारी कर और धार्मिक अपमान झेल रहा था।

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24 दिसंबर: भोपाल का युद्ध — जब मराठा शौर्य के आगे निज़ाम-मुग़ल गठजोड़ की 70 हज़ार की फौज ढह गई

भारतीय इतिहास में कुछ तारीख़ें ऐसी हैं जिन्हें जानबूझकर हल्का कर दिया गया। 24 दिसंबर 1737 उन्हीं में से एक है। यह वह दिन था जब भारतीय मराठा शक्ति ने यह साफ़ कर दिया कि इस देश की धरती पर सिर्फ़ विदेशी सल्तनतों का राज नहीं चलेगा। भोपाल की धरती पर मराठाओं ने अकेले दम

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राजा मेदिनी राय — एक भूला-बिसरा हिंदू योद्धा

भारतीय इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनका उल्लेख होते ही साहस, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की छवि उभर आती है। महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज या राणा सांगा जैसे शासक आज भी जनमानस में जीवित हैं। लेकिन इसी इतिहास में कई ऐसे हिंदू योद्धा भी हैं, जिन्होंने उतना ही दृढ़ प्रतिरोध किया, उतना ही बड़ा

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Vijay Diwas 2025: 13 दिन, 93 हजार सैनिक और एक ऐतिहासिक जीत – विजय दिवस की पूरी कहानी

हर वर्ष 16 दिसंबर को भारत विजय दिवस मनाता है। यह दिन केवल एक सैन्य जीत की याद नहीं है, बल्कि साहस, बलिदान, मानवीय संवेदना और ऐतिहासिक न्याय का प्रतीक है। वर्ष 1971 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जो निर्णायक विजय हासिल की, उसने न केवल दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक नक्शा बदल दिया, बल्कि

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