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भारत का वो ‘ब्रह्मांड का ज्ञाता’ जिसे अंतरिक्ष के रहस्य खोजने के लिए 7 बार किया गया ‘नोबेल प्राइज’ के लिए नॉमिनेट, देश में विशाल बांधों और न्यूक्लियर रिसर्च की नींव रखने वाले महान वैज्ञानिक ‘मेघनाद साहा’

कभी रात के समय खुले आसमान में चमकते हुए अनगिनत तारों को गौर से देखिएगा। हमें और आपको ये तारे बस टिमटिमाते हुए सफेद बिंदु लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की जब नासा (NASA) या हमारी अपनी स्पेस एजेंसी इसरो (ISRO) का कोई बड़ा से बड़ा वैज्ञानिक आज भी अपनी शक्तिशाली दूरबीन से […]

भारत का वो ‘ब्रह्मांड का ज्ञाता’ जिसे अंतरिक्ष के रहस्य खोजने के लिए 7 बार किया गया ‘नोबेल प्राइज’ के लिए नॉमिनेट, देश में विशाल बांधों और न्यूक्लियर रिसर्च की नींव रखने वाले महान वैज्ञानिक ‘मेघनाद साहा’ Read More »

गदर पार्टी बनाकर अंग्रेजों की नींद उड़ाने वाला वो बागी जो मेक्सिको में बना भगवान, सात समंदर पार हरित क्रांति लाने के बावजूद अपने ही वतन में एक लैब को तरसने वाले महान कृषि वैज्ञानिक ‘पांडुरंग खानखोजे’

हमारे देश के इतिहास की किताबों में एक बहुत बड़ी दिक्कत है। पन्ने पलटते जाइए, आपको बस गिने-चुने नाम और उनके दिए गए भाषण ही मिलेंगे। हमारी जो आज़ादी की कहानी हमें रटाई जाती है, उसे पढ़कर ऐसा लगता है जैसे हमें आज़ादी चंद लोगों की अपीलों और शांति वार्ताओं से मिल गई। लेकिन क्या

गदर पार्टी बनाकर अंग्रेजों की नींद उड़ाने वाला वो बागी जो मेक्सिको में बना भगवान, सात समंदर पार हरित क्रांति लाने के बावजूद अपने ही वतन में एक लैब को तरसने वाले महान कृषि वैज्ञानिक ‘पांडुरंग खानखोजे’ Read More »

जहां खत्म होती परिंदों की उड़ान, वहां से शुरू होता हमारी वायुसेना का आसमान, 94 सालों से हर एक दिशा से देश की हिफाज़त करने वाले हमारे वायुवीरों को ‘भारतीय वायुसेना दिवस’ पर अनंत शुभकामनाएं

आज 8 अक्टूबर है। आज हमारा पूरा हिंदुस्तान गर्व से अपना 94वां भारतीय वायुसेना दिवस (Indian Air Force Day) मना रहा है। पूरे 94 साल हो गए हमारे इस आसमान के रखवालों को! सच कहूं तो, जहां परिंदों के पर जवाब दे जाते हैं ना, जहां हवा इतनी पतली हो जाती है की सांस लेना

जहां खत्म होती परिंदों की उड़ान, वहां से शुरू होता हमारी वायुसेना का आसमान, 94 सालों से हर एक दिशा से देश की हिफाज़त करने वाले हमारे वायुवीरों को ‘भारतीय वायुसेना दिवस’ पर अनंत शुभकामनाएं Read More »

अपनों को आखिरी विदाई देने का सबसे पवित्र तीर्थ बिहार का ‘गया जी’, हर साल पितृपक्ष में आकर लाखों सनातनी अपने पूर्वजों को दिखाते सीधे ‘बैकुंठ’ का रास्ता

जब हम अपने किसी अज़ीज़ को खोते हैं, तो वो एक ऐसा दर्द होता है जो कभी पूरी तरह से नहीं भरता। इंसान चला जाता है, लेकिन उसकी यादें, उसका आशीर्वाद और कभी-कभी मन में रह जाने वाला वो पछतावा की “काश उनके लिए कुछ और कर पाते”… ये सब उम्र भर हमारे साथ चलता

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हमारे शास्त्रों ने हजारों साल पहले ही सुलझा ली थी ‘टाइम ट्रैवल’ की गुत्थी, पतंजलि ‘योगसूत्र’ का उपयोग कर के भगवान परशुराम पलक झपकते कर लेते थे हजारों किलोमीटर का सफर

चलिए, इस लेख को शुरू करने से शुरू करने से पहले एक छोटा सा एक्सपेरिमेंट करते हैं। आप जहाँ भी बैठे हैं, अपनी आँखें बंद कीजिए और मन ही मन निकल पड़िए सीधे शिव जी के धाम, कैलाश पर्वत की ओर। बर्फ से ढकी चोटियाँ, डमरू की गूंज… पहुँच गए? कितना टाइम लगा आपको? एक

हमारे शास्त्रों ने हजारों साल पहले ही सुलझा ली थी ‘टाइम ट्रैवल’ की गुत्थी, पतंजलि ‘योगसूत्र’ का उपयोग कर के भगवान परशुराम पलक झपकते कर लेते थे हजारों किलोमीटर का सफर Read More »

सलमान, शाहरुख से लेकर ओवैसी तक ने पढ़ा ‘कैप्टन स्मित’ की बहादुरी का कसीदा, लेकिन राहुल गांधी की टोली की जुबान पर अभी भी ताला, जनता का दिल जीत नहीं पाते और हारने पे कोसते EVM को

सियासत में हिप्पोक्रेसी की कोई हद नहीं होती, लेकिन जब बात देश के गौरव की हो, तो कम से कम वहां तो इंसान को अपनी गंदी राजनीति साइड में रख देनी चाहिए। आजकल बाज़ार में एक ‘मोहब्बत की दुकान’ बहुत मशहूर है। इस दुकान के मालिक दुनिया भर के मामलों पर, खास तौर पर जब

सलमान, शाहरुख से लेकर ओवैसी तक ने पढ़ा ‘कैप्टन स्मित’ की बहादुरी का कसीदा, लेकिन राहुल गांधी की टोली की जुबान पर अभी भी ताला, जनता का दिल जीत नहीं पाते और हारने पे कोसते EVM को Read More »

सुख के सब साथी लेकिन दुख में न कोय.. कल तक प्रेमानंद महाराज जी के चरणों में बैठने वाले ये बॉलीवुड सितारे आज उनके बुरे समय में किधर हो गए गायब

दुनिया सच में कितनी मतलबी है ना! जब आपके पास शोहरत होती है, आपकी ज़िंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा होता है.. तो आपके पीछे पूरी दुनिया दुम हिलाते हुए चलती है। लेकिन जैसे ही आप पर कोई संकट आता है, तो वही लोग आपको ऐसे भूल जाते हैं जैसे कभी आपको जानते ही

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जो सत्ता से दूर रहकर सिर्फ किसान और मिट्टी के हक़ के लिए लड़े, जिनकी आवाज़ को अपना भगवान मानते थे देश भर के अन्नदाता, किसानों के उस निडर मसीहा ‘महेंद्र सिंह टिकैत’ जी को जयंती पर शत-शत नमन

जब भी हिंदुस्तान के खेतों, खलिहानों और असली किसान मसीहा का ज़िक्र आता है, तो आँखों के सामने एक ही तस्वीर उभरती है। एक ऐसा इंसान जिसके माथे पर मिट्टी का तिलक हो, सिर पर सफेद गांधी टोपी, बदन पर ढीला-ढाला सा कुरता, हाथों में एक मज़बूत लाठी और पास रखा हो एक सुलगता हुआ

जो सत्ता से दूर रहकर सिर्फ किसान और मिट्टी के हक़ के लिए लड़े, जिनकी आवाज़ को अपना भगवान मानते थे देश भर के अन्नदाता, किसानों के उस निडर मसीहा ‘महेंद्र सिंह टिकैत’ जी को जयंती पर शत-शत नमन Read More »

अकबर की पचास हज़ार की सेना पर भारी पड़ी इस हिन्दू शेरनी की मुट्ठी भर टुकड़ी, 16 सालों तक मुग़लों को लोहे के चने चबवाने वाली गोंडवाना की महारानी ‘दुर्गावती’ को 502वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि

आज 5 अक्टूबर है। वही पावन दिन जब 502 साल पहले इस धरती पर एक ऐसी हिन्दू शेरनी ने जन्म लिया था, जिसने अपनी आज़ादी और अपने स्वाभिमान के लिए मुगलों की पचास हज़ार की तोपखाना लिए खड़ी फौज के दाँत खट्टे कर दिए थे। हम बात कर रहे हैं गोंडवाना की अजेय महारानी, वीरांगना

अकबर की पचास हज़ार की सेना पर भारी पड़ी इस हिन्दू शेरनी की मुट्ठी भर टुकड़ी, 16 सालों तक मुग़लों को लोहे के चने चबवाने वाली गोंडवाना की महारानी ‘दुर्गावती’ को 502वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि Read More »

पूर्ण बहुमत के बावजूद सरदार पटेल से छीन ली गई थी सत्ता की चाबी और ‘जीरो’ समर्थन वाले नेहरू बने प्रधानमंत्री, आज दूसरों को ‘वोट चोर’ कहने वाली कांग्रेस के इतिहास में दर्ज सत्ता हथियाने का सबसे बड़ा खेल

आजकल टीवी खोलो या सोशल मीडिया देखो, तो आपको एक बहुत ही सेट पैटर्न नज़र आएगा। जैसे ही कहीं चुनाव के नतीजे आते हैं और एक खास पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ता है, तो झट से एक रटा-रटाया टूलकिट एक्टिव हो जाता है। पत्रकारों को बुलाकर कैमरे के सामने चिल्लाया जाता है की

पूर्ण बहुमत के बावजूद सरदार पटेल से छीन ली गई थी सत्ता की चाबी और ‘जीरो’ समर्थन वाले नेहरू बने प्रधानमंत्री, आज दूसरों को ‘वोट चोर’ कहने वाली कांग्रेस के इतिहास में दर्ज सत्ता हथियाने का सबसे बड़ा खेल Read More »

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