Sankalp

खून से सना बंगाल, सत्ता की चुप्पी

खून से सना बंगाल, सत्ता की चुप्पी

पश्चिम बंगाल अब गिरावट के दौर में नहीं है वह गिर चुका है, और यह गिरावट अब स्थायी होती दिख रही है। जो राज्य कभी देश की आर्थिक और बौद्धिक दिशा तय करता था, आज वहीं कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बन गया है। सबसे बड़ा सवाल सिर्फ राज्य सरकार पर नहीं […]

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जब BJP ने अपने ही प्रवक्ता से दूरी बना ली

जब अपनी ही बनाई आवाज़ को सबसे कठिन समय में चुप करा दिया जाए, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक निर्णय नहीं रहता यह उस पूरी व्यवस्था की मानसिकता को उजागर करता है। नूपुर शर्मा का मामला इसी असहज सच्चाई का प्रतीक है, जहाँ एक राष्ट्रीय प्रवक्ता, जिसने वर्षों तक पार्टी की विचारधारा को सबसे आक्रामक

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हनुमान जन्मोत्सव 2026: आस्था, शक्ति और समर्पण का पावन पर्व

हनुमान केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक विचार हैं—भक्ति का, अनुशासन का और अदम्य साहस का। हनुमान जयंती उसी विचार का उत्सव है, जो हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति समर्पण में निहित होती है, अहंकार में नहीं। हनुमान जन्मोत्सव भगवान हनुमान के अवतरण का उत्सव है—एक ऐसा दिव्य दिवस जो भक्ति, पराक्रम और निस्वार्थ

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भगवान महावीर: आत्मविजय, करुणा और सत्य का शाश्वत पथ

जब दुनिया तेज़ी, तनाव और तृष्णा की दौड़ में उलझी हुई है, तब भगवान महावीर का शांत और तपस्वी जीवन एक गूंजती हुई पुकार बनकर सामने आता है: क्या मनुष्य बाहर जीतकर भी भीतर हार रहा है? उनके जीवन से जुड़े तीर्थ पावापुरी, कुंडलपुर, गिरनार और पालिताना—सिर्फ भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि आत्मा की उस यात्रा

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मैहर माता मंदिर: आस्था का शिखर, चेतना का जागरण

मैहर माता मंदिर: आस्था का शिखर, चेतना का जागरण

त्रिकूट की ऊँचाइयों पर जब श्रद्धा कदम-कदम बढ़ती है, तब पूजा केवल एक विधि नहीं रह जाती वह आत्मा की यात्रा बन जाती है। मैहर माता के चरणों में की जाने वाली आराधना भी ऐसी ही एक अनुभूति है, जहाँ हर मंत्र, हर अर्पण और हर प्रार्थना मनुष्य को उसके भीतर छिपी दिव्यता से जोड़

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तिरुपति बालाजी की “पसीना बहाती” मूर्ति: आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम

तिरुपति बालाजी की “पसीना बहाती” मूर्ति: आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम

तिरुमला के पवित्र गर्भगृह में जब श्रद्धा सिर झुकाती है, तब मन केवल दर्शन नहीं करता वह दिव्यता को महसूस करता है। भगवान बालाजी की मूर्ति पर दिखाई देने वाली वह सूक्ष्म नमी भी इसी अनुभूति का हिस्सा बन जाती है। यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि वह क्षण है जहाँ विश्वास, भाव और भक्ति

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माँ सिद्धिदात्री: पूर्णता, सिद्धि और सदैव अनुग्रह की अधिष्ठात्री

माँ सिद्धिदात्री: पूर्णता, सिद्धि और सदैव अनुग्रह की अधिष्ठात्री

जब नौ दिनों की तपस्या, श्रद्धा और भक्ति अपने चरम पर पहुँचती है, तब हृदय में एक अद्भुत शांति उतरती है—मानो स्वयं माँ सिद्धिदात्री का आशीर्वाद मिल रहा हो। यह केवल एक पूजा नहीं, बल्कि आत्मा की उस यात्रा का अंतिम पड़ाव है, जहाँ हर प्रार्थना पूर्णता में बदल जाती है और हर समर्पण दिव्य

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माँ महागौरी: पवित्रता, शांति और दिव्य आभा की अधिष्ठात्री

माँ महागौरी: पवित्रता, शांति और दिव्य आभा की अधिष्ठात्री

जब आत्मा अपने ही बोझ से थककर शांति की तलाश में भीतर की ओर मुड़ती है, तब उसे जिस दिव्य स्पर्श का अनुभव होता है वह है माँ महागौरी की करुणामयी उपस्थिति। वे केवल एक देवी नहीं, बल्कि उस निर्मल प्रकाश की प्रतीक हैं, जो अंधकार को मिटाकर जीवन में संतुलन और शांति भर देता

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माँ कालरात्रि: भय के अंत और चेतना के जागरण की शक्ति

माँ कालरात्रि: भय के अंत और चेतना के जागरण की शक्ति

जब जीवन में ऐसा अंधकार उतर आता है जहाँ भय निर्णयों पर हावी हो जाता है और भीतर की स्पष्टता मौन हो जाती है, तब माँ कालरात्रि का स्मरण हमें एक कठोर सत्य से परिचित कराता है कि हर वह प्रकाश जिसे हम खोज रहे हैं, उसी अंधकार के पार स्थित है जिससे हम बचना

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माँ कात्यायनी: साहस और धर्म की निर्णायक शक्ति

जब जीवन के मार्ग पर स्पष्टता धुंधली पड़ने लगे और साहस संदेह में बदलने लगे, तब माँ कात्यायनी का स्मरण हमें एक मूल सत्य का बोध कराता है कि धर्म केवल विचार या भावना नहीं, बल्कि उसे स्थापित करने का उत्तरदायित्वपूर्ण कर्म है। नवरात्रि की षष्ठी पर पूजित माँ कात्यायनी उस चेतना का स्वरूप हैं

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