Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

पीले रंग की दिव्य स्थिरता: बनखंडी का माँ बगलामुखी मंदिर, जहाँ तूफान ठहरता है और वाणी मौन हो जाती है

धौलाधार की तलहटी में एक मंदिर पीले रंग में चमकता है। भक्त भी पीले कपड़े पहनकर आते हैं, हाथ में पीले फूल और बेसन के लड्डू लिए। अंदर बड़ी अग्नि जलती रहती है और लाल मिर्च बाएँ हाथ से चढ़ाई जाती हैं। यह बनखंडी का बगलामुखी मंदिर है। यहाँ माँ बगलामुखी को शत्रुओं को स्थिर […]

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चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव, Episode 6: जिस ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने भ्रामक ख़बरों से चुनाव आयोग को बदनाम करने का खेला खेल, कुछ दिन बाद उसी के कार्यक्रमों में हाजिरी लगाएंगे मोदी जी और BJP नेता, अपनों का ही मनोबल तोड़ने वाली ये आदत BJP को कर रही खोखला

विषय-सूची चुनाव आयोग को बदनाम करने वाला 13 करोड़ वोटरों का वो सफेद झूठ लोकतंत्र के रक्षकों पर वार करने के लिए Indian Express ने गढ़ा फर्जी नैरेटिव कांग्रेस की 81 लाख की वो सीक्रेट डील और महेश जेठमलानी का खुलासा सुपारी जर्नलिज़्म या चुनावी फंडिंग रामनाथ गोयनका अवार्ड्स से लेकर Express Adda तक राजा

चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव, Episode 6: जिस ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने भ्रामक ख़बरों से चुनाव आयोग को बदनाम करने का खेला खेल, कुछ दिन बाद उसी के कार्यक्रमों में हाजिरी लगाएंगे मोदी जी और BJP नेता, अपनों का ही मनोबल तोड़ने वाली ये आदत BJP को कर रही खोखला Read More »

बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 11: 1960 में कांग्रेस का देश तोड़ने वाले जिन्ना की विचारधारा से जन्मी IUML के साथ सरकार बनाने का वो ब्लंडर, केरल में मुसलमानों का अलग देश मांगने वालों से इस यारी ने कैसे हर सच्चे देशभक्त को जोड़ दिया बीजेपी के साथ

🤔 शुरू करने से पहले सोचें: लोग अक्सर पूछते हैं कि बीजेपी चुनाव दर चुनाव कैसे जीतती जा रही है। क्या आपके पास इसका कोई जवाब है? नीचे पढ़ते हुए अपने विचार नोट करते रहें। साल (Year) ऐतिहासिक घटना कांग्रेस का ‘सेल्फ-गोल’ 1948 मद्रास में जिन्ना के वारिसों ने IUML बनाई सरदार पटेल की ‘पाकिस्तान

बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 11: 1960 में कांग्रेस का देश तोड़ने वाले जिन्ना की विचारधारा से जन्मी IUML के साथ सरकार बनाने का वो ब्लंडर, केरल में मुसलमानों का अलग देश मांगने वालों से इस यारी ने कैसे हर सच्चे देशभक्त को जोड़ दिया बीजेपी के साथ Read More »

दिल्ली का जंतर मंतर: तीन सौ साल पुरानी वेधशाला और आज की आवाज

दिल्ली के बीचोंबीच एक ऐसी जगह है जहां पत्थर की विशाल दीवारें सूरज की छाया से समय बताती थीं। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ धरना स्थल के रूप में जानते हैं। हाल ही में पहलवानों का प्रदर्शन यहां लगा था और जगह फिर चर्चा में आ गई। लेकिन जंतर मंतर सिर्फ विरोध की जगह नहीं है।

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चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव Episode 5: दिन-रात सरकार को बदनाम करने वालों को मिल रहा सत्ता से इनाम, वहीं वफादारी निभाने वाले समर्थकों को पार्टी से निकालकर कर दिया बेगाना, अपनों की पीठ में छुरा घोंपने का ये खेल BJP को पड़ेगा भारी

हमारे बचपन में एक कहावत सिखाई जाती थी- ‘घर की मुर्गी दाल बराबर’। मतलब जो अपना है, जो हमेशा वफादारी से आपके साथ खड़ा है, उसकी कोई इज़्ज़त नहीं होती। लेकिन आज के समय में BJP सरकार ने इस कहावत को जिस नेक्स्ट लेवल पर पहुंचा दिया है ना, वो सिर्फ हैरानी भरा नहीं, बल्कि

चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव Episode 5: दिन-रात सरकार को बदनाम करने वालों को मिल रहा सत्ता से इनाम, वहीं वफादारी निभाने वाले समर्थकों को पार्टी से निकालकर कर दिया बेगाना, अपनों की पीठ में छुरा घोंपने का ये खेल BJP को पड़ेगा भारी Read More »

महीनों की घेराबंदी से खिलजी ने रणथंभौर का दाना-पानी कर दिया था पूरी तरह बंद, फिर भी हम्मीर देव ने शरणागत को सौंपने की ठुकरा दी मांग, एक वचन के लिए राजपूतों ने लुटा दी अपने साम्राज्य की जान

थम्भोर की पहाड़ी पर जंगल इतना घना है कि किला अचानक सामने आ जाता है। चौदहवीं सदी की शुरुआत में इसे रणस्तम्भपुर कहते थे। यहाँ हम्मीर देव का शासन था, पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद बची चौहान शाखा का अंतिम मजबूत राजा। 1301 में उसने दो व्यक्तियों को शरण दी और उन्हें सौंपने से

महीनों की घेराबंदी से खिलजी ने रणथंभौर का दाना-पानी कर दिया था पूरी तरह बंद, फिर भी हम्मीर देव ने शरणागत को सौंपने की ठुकरा दी मांग, एक वचन के लिए राजपूतों ने लुटा दी अपने साम्राज्य की जान Read More »

बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 10: A.O. Hume के डीएनए से जन्मी कांग्रेस कैसे आज़ादी के बाद भी नहीं छोड़ पाई अपनी वो रजवाड़े वाली मानसिकता, जनता को सिर्फ वोटबैंक समझने वाली इसी विदेशी सोच ने BJP के लिए सजा दी सत्ता की दावत

अगर आप आज भी देश के किसी पुराने गांव की चौपाल पर चले जाएं और वहां बैठे किसी बुजुर्ग से पूछें की नब्बे के दशक में आज़ादी मिलने के बाद आम हिंदुस्तानी की ज़िंदगी में क्या बदला? तो वो आपको बिल्कुल यही बताएगा की “बदला कुछ नहीं बाबू, बस गोरे अंग्रेजों की जगह दिल्ली में

बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 10: A.O. Hume के डीएनए से जन्मी कांग्रेस कैसे आज़ादी के बाद भी नहीं छोड़ पाई अपनी वो रजवाड़े वाली मानसिकता, जनता को सिर्फ वोटबैंक समझने वाली इसी विदेशी सोच ने BJP के लिए सजा दी सत्ता की दावत Read More »

सिंगिरी की हार के बाद सुहुंगमुंग ने संधि नहीं की, और ब्रह्मपुत्र ने 1533 में वह युद्ध खत्म किया जो खुले मैदान ने शुरू किया था

अप्रैल 1532 में तुरबक की छावनी सिंगिरी के सामने खड़ी थी, और उसे पार आने की ज़रूरत नहीं थी। क़रीब एक हज़ार घोड़े, तीस हाथी, पैदल, और तोपों का पार्क। पानी के उसकी तरफ़ का मैदान धावे के लिए ठीक था। आहूमों को ही पार होना था, अगर वे उसे उसकी शर्त पर लड़ना चाहते

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जिस औरत ने गणराज्य तोड़ा: इंदिरा गांधी की नीतियाँ और भारत का नुकसान

मैं इस लेख को इमरजेंसी की रात से नहीं खोलती। वह रात याद रहती है, क्योंकि उसमें तारीख है, नाम हैं, और एक अखबार है जिसकी बत्ती काट दी गई। मैं जब पहली बार वह रात पढ़ती हूँ, लगता है कि क्षति वहीं सिमट गई। फिर फाइलें सामने आती हैं, और रात छोटी पड़ जाती

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चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव Episode 4: एक झटके में भ्रष्टाचार मिटाने का बताया फॉर्मूला, लेकिन ATM लाइनों में मिट गईं 100 से ज़्यादा जिंदगियां, महीनों तक कैश क्रंच से लहूलुहान रही इकॉनमी, BJP का ‘2016 नोटबंदी’ का वो दांव जो दे गया एक गहरा राजनीतिक घाव

86% नकदी एक रात में बाहर 15.41 लाख करोड़ रुपये रद्द 99.3% नोट बैंक में वापस आए 15 लाख नौकरियाँ, CMIE आंकड़े लेख के अंदर दिए गए दावों और नतीजों से लिए गए हैं. राजनीति में एक बड़ा ही दिलचस्प शब्द है- ‘मास्टरस्ट्रोक’। जब सत्ता में किसी सरकार या नेता को प्रचंड बहुमत का नशा

चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव Episode 4: एक झटके में भ्रष्टाचार मिटाने का बताया फॉर्मूला, लेकिन ATM लाइनों में मिट गईं 100 से ज़्यादा जिंदगियां, महीनों तक कैश क्रंच से लहूलुहान रही इकॉनमी, BJP का ‘2016 नोटबंदी’ का वो दांव जो दे गया एक गहरा राजनीतिक घाव Read More »

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