Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

1876-78 का मद्रास अकाल: जब दक्षिण भारत सूख गया, अनाज बन्दरगाहों से बाहर जाता रहा, और अंग्रेजी राज की उदासीनता ने लाखों भारतीयों को भूख, बीमारी और मौत के हवाले कर दिया

1885 याद है। कांग्रेस बनी। एलन ऑक्टेवियन ह्यूम और विलियम वेडरबर्न के नाम पाठ्यक्रम में आ जाते हैं। उस धक्के का साल कम याद है। 1876 से 1878 तक दक्षिण चुप था। मद्रास प्रेसीडेंसी, मैसूर, हैदराबाद और बॉम्बे दक्कन एक साथ संकट में थे। संकट फिर मध्य प्रांत और उत्तर-पश्चिमी प्रांत के कुछ हिस्सों तक […]

1876-78 का मद्रास अकाल: जब दक्षिण भारत सूख गया, अनाज बन्दरगाहों से बाहर जाता रहा, और अंग्रेजी राज की उदासीनता ने लाखों भारतीयों को भूख, बीमारी और मौत के हवाले कर दिया Read More »

ना कोई आरक्षण कोटा और ना ही किसी राज्य से सब्सिडी, BITS पिलानी में दया या जाति के नाम पर नहीं, बल्कि सिर्फ काबिलियत देख कर बांटी जाती सीटें

पिलानी का फाटक एक शर्त पर खुला था। राज्य आए, तब कक्षा चले, यह शर्त नहीं थी। 1946 में घनश्याम दास बिड़ला ने शेखावाटी के एक कस्बे में इंजीनियरिंग कॉलेज खोला, ताकि तकनीकी पढ़ाई दिल्ली की फाइल का इंतजार न करे। अस्सी वर्ष बाद उस शर्त का आज का रूप एक सूची है। BITSAT का

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बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 9: राहुल गाँधी का मुख्य सलाहकार हिमंत से ज्यादा अपने ‘कुत्ते’ को सम्मान, घुसपैठियों को बचाने की ज़िद, और मूल असमियों से गद्दारी, कांग्रेस के वो महापाप जिससे 2016 में BJP को मिली असम की महाविजय

15 साल एक मुख्यमंत्री 52 / 78 हिमंत के साथ विधायक 9 जिले 2011 जनगणना 86 / 126 NDA, 2016 26 कांग्रेस, 2016 अध्याय 2016 में असम में ज़मीनी हकीकत से पूरी तरह कटी कांग्रेस दशकों तक मुख्यमंत्री रहे ‘तरुण गोगोई’ का अंधा पुत्रमोह गैर-गंभीर राहुल गांधी और उनके कुत्ते ‘पिद्दी’ का वो ‘बिस्किट’ वाला

बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 9: राहुल गाँधी का मुख्य सलाहकार हिमंत से ज्यादा अपने ‘कुत्ते’ को सम्मान, घुसपैठियों को बचाने की ज़िद, और मूल असमियों से गद्दारी, कांग्रेस के वो महापाप जिससे 2016 में BJP को मिली असम की महाविजय Read More »

आतंकियों को ट्रेनिंग देने वाले अमेरिकी को पकड़कर पहले खूब लूटी वाहवाही, फिर विदेशी दबाव में आकर वापस भेज दिया अमेरिका, राष्ट्रवाद का चोला ओढ़े भाजपा बनती जा रही नई कांग्रेस

सितंबर 2026 के आखिरी दिनों में एक आदमी विमान में बैठा। भारत ने उसे आतंकी साजिश के आरोप में पकड़ा था। मैथ्यू एरन वैन डाइक, बाल्टीमोर का अमेरिकी नागरिक, उम्र करीब 47। वह तिहाड़ से निकला और अमेरिका उड़ गया। अल जज़ीरा ने लिखा कि 28 सितंबर तक वह परिवार के साथ था। छह महीने

आतंकियों को ट्रेनिंग देने वाले अमेरिकी को पकड़कर पहले खूब लूटी वाहवाही, फिर विदेशी दबाव में आकर वापस भेज दिया अमेरिका, राष्ट्रवाद का चोला ओढ़े भाजपा बनती जा रही नई कांग्रेस Read More »

चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव Episode 3: हर साल 2 करोड़ रोजगार बनाने के कागजी दावे और 10 लाख खाली सरकारी पदों के बावजूद सड़कों पर धक्के खाता बेरोज़गार युवा, कैसे सिस्टम की सुस्ती खिसका रही BJP की सियासी जमीन

2 करोड़ 24 करोड़ 83% 67% 9.79 लाख हर साल का वादा 12 साल का हिसाब बेरोजगारों में युवा ग्रेजुएट हिस्सेदारी खाली केंद्र पद राजनीति में वादों की उम्र बहुत छोटी होती है, नेता वादे करते हैं और जनता उन्हें भूल जाती है। लेकिन कुछ वादे ऐसे होते हैं जो इतिहास के पन्नों पर पत्थर

चाणक्य-नीति भी बन जाती घाव, जब सत्ता चल देती गलत दांव Episode 3: हर साल 2 करोड़ रोजगार बनाने के कागजी दावे और 10 लाख खाली सरकारी पदों के बावजूद सड़कों पर धक्के खाता बेरोज़गार युवा, कैसे सिस्टम की सुस्ती खिसका रही BJP की सियासी जमीन Read More »

ज्ञानवापी में महादेव का मजाक उड़ाने वाले जिहादियों पर सिस्टम की खामोशी, लेकिन हदीस का सच बोलने वाली अपनी कार्यकर्ता नूपुर शर्मा को BJP ने छोड़ दिया लावारिस

अमरावती की रात स्कूटर से खत्म हुई। दुकान बंद हुई। बेटा पीछे चला। फिर सड़क ने एक आदमी को निगल लिया। उमेश कोल्हे ने कोई बहस नहीं जीती थी। उन्होंने एक संदेश आगे बढ़ाया था। उस संदेश का मूल स्वर एक स्टूडियो में पैदा हुआ था। 26 मई 2022। ज्ञानवापी। शिवलिंग का मजाक। उत्तर में

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पूरा तंत्र अंपायर के पीछे क्यों पड़ा है

ज्ञानेश कुमार ने वोटर लिस्ट छुई, तो लेफ्ट से स्टूडियो तक एक साथ क्यों निकले। देश ने एक हफ्ते में दो अदालतें चला लीं। एक अदालत पत्थर की है। उसमें तारीख लगती है, जमानत थमती है, फाइल सालों चलती है। दूसरी अदालत प्रकाश की है। उसमें रिपोर्ट सुबह आती है, सजा शाम को पढ़ दी

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राम मंदिर और पी.वी. नरसिम्हा राव: वो कहानी जो इतिहास के पन्नों में दब गई

अयोध्या का गर्भगृह 22 जनवरी 2024 को खुला. कैमरे पत्थर पर थे. मंत्र प्राण प्रतिष्ठा पर थे. भीड़ राम नाम पर थी. उस भीड़ में एक नाम लगभग नहीं था. पी.वी. नरसिम्हा राव 2004 में चल बसे. उनकी सरकार 1996 में गिर चुकी थी. उनकी पार्टी ने शव को 24, अकबर रोड के अंदर नहीं

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पहले मुखिया, बाद में देवता, गोगा जी की असली कथा नाग से नहीं, गाय से शुरू होती है

खेजड़ी के नीचे एक थान काफी होता है। संगमरमर नहीं माँगता। सिंहासन नहीं माँगता। एक नीला कपड़ा माँगता है। कभी पत्थर पर नाग। कभी बाँस पर झंडा। कभी घोड़े वाला चेहरा। गाँव उसी को गोगा जी कहता है। शहर अक्सर यहीं रुक जाता है। साँप का देवता। भादों की नवमी। काटे की दवा। फाइल भर

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जिस ख्वाजा की किताबों और ज़ेवियर के पत्रों में दर्ज सनातन को मिटाने का कड़वा सच, उन्हीं के पर्व पर सरकारें पढ़ रही भाईचारे के कसीदे, वर्तमान को खुश रखने की दौड़ में दर्दनाक स्मृति की जा रही दफन

दो वाक्य, एक मेज एक मेज पर दो सरकारी वाक्य रखिए और देखिए वे बैठते नहीं। एक अजमेर शरीफ के उर्स की चादर है, ताकि अवसर सुख, शांति, प्रेम और भाईचारा लाए। यह वार्षिक राज-रीति है। दूसरा सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर के पर्व का वाक्य है। 3 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री ने लिखा कि यह अवसर

जिस ख्वाजा की किताबों और ज़ेवियर के पत्रों में दर्ज सनातन को मिटाने का कड़वा सच, उन्हीं के पर्व पर सरकारें पढ़ रही भाईचारे के कसीदे, वर्तमान को खुश रखने की दौड़ में दर्दनाक स्मृति की जा रही दफन Read More »

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