बाड़ के पार देवता, बंदूक के पार गाँव: गाईडिनल्यु का हेराका
पुलोमी की वह सुबह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं थी। वह उस लड़की की आखिरी खुली साँस थी जिसे साम्राज्य ने आतंक कहा था, और जिसे गाँवों ने बेचा नहीं था। सोलह वर्ष की गाईडिनल्यु हथकड़ी में चली, पर उसके पीछे पहाड़, आस्था और हेराका की रीढ़ चलती रही। यह लेख उसी चलते रहने की कहानी […]
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