Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

Reble: The Northeast Voice That Redefined Bollywood’s Sound

Reble: The Northeast Voice That Redefined Bollywood’s Sound

For years, Bollywood dictated the sound of Indian music until a voice from the margins refused to follow the script. Reble didn’t arrive to fit in; she arrived to disrupt. With Dhurandhar, her raw, unfiltered energy didn’t just add to the soundtrack it challenged the very idea of what mainstream music is allowed to sound […]

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माता पन्ना धाय: अपने लाल का सिर चढ़ाकर राजकुमार की रक्षा करने वाली अदम्य वीरता की प्रतिमूर्ति

माता पन्ना धाय: अपने लाल का सिर चढ़ाकर राजकुमार की रक्षा करने वाली अदम्य वीरता की प्रतिमूर्ति

यह केवल एक माँ की कहानी नहीं यह राष्ट्रधर्म की वह अग्नि है, जिसमें एक हृदय जलता है ताकि एक सभ्यता बच सके। पन्ना धाय ने उस क्षण जो निर्णय लिया, उसने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा राष्ट्रनिर्माण तलवारों से नहीं, बल्कि त्याग से होता है। जब इतिहास डगमगा रहा था, तब एक माँ

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भोपाल गैस त्रासदी: कांग्रेस का खून से लिखा सौदा

भोपाल गैस त्रासदी: कांग्रेस का खून से लिखा सौदा

2-3 दिसंबर 1984 की रात को भोपाल को मौत के मैदान में बदल दिया गया। भोपाल गैस त्रासदी ने न सिर्फ हजारों लोगों को मार डाला, बल्कि एक ऐसे सिस्टम को भी उजागर कर दिया जो बाद में उन्हें उतने ही विनाशकारी तरीके से असफल कर देगा। क्योंकि गैस लीक होने के बाद जो हुआ,

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खून से सना बंगाल, सत्ता की चुप्पी

खून से सना बंगाल, सत्ता की चुप्पी

पश्चिम बंगाल अब गिरावट के दौर में नहीं है वह गिर चुका है, और यह गिरावट अब स्थायी होती दिख रही है। जो राज्य कभी देश की आर्थिक और बौद्धिक दिशा तय करता था, आज वहीं कानून-व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बन गया है। सबसे बड़ा सवाल सिर्फ राज्य सरकार पर नहीं

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जब BJP ने अपने ही प्रवक्ता से दूरी बना ली

जब अपनी ही बनाई आवाज़ को सबसे कठिन समय में चुप करा दिया जाए, तो यह सिर्फ एक राजनीतिक निर्णय नहीं रहता यह उस पूरी व्यवस्था की मानसिकता को उजागर करता है। नूपुर शर्मा का मामला इसी असहज सच्चाई का प्रतीक है, जहाँ एक राष्ट्रीय प्रवक्ता, जिसने वर्षों तक पार्टी की विचारधारा को सबसे आक्रामक

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हनुमान जन्मोत्सव 2026: आस्था, शक्ति और समर्पण का पावन पर्व

हनुमान केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक विचार हैं—भक्ति का, अनुशासन का और अदम्य साहस का। हनुमान जयंती उसी विचार का उत्सव है, जो हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति समर्पण में निहित होती है, अहंकार में नहीं। हनुमान जन्मोत्सव भगवान हनुमान के अवतरण का उत्सव है—एक ऐसा दिव्य दिवस जो भक्ति, पराक्रम और निस्वार्थ

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भगवान महावीर: आत्मविजय, करुणा और सत्य का शाश्वत पथ

जब दुनिया तेज़ी, तनाव और तृष्णा की दौड़ में उलझी हुई है, तब भगवान महावीर का शांत और तपस्वी जीवन एक गूंजती हुई पुकार बनकर सामने आता है: क्या मनुष्य बाहर जीतकर भी भीतर हार रहा है? उनके जीवन से जुड़े तीर्थ पावापुरी, कुंडलपुर, गिरनार और पालिताना—सिर्फ भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि आत्मा की उस यात्रा

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मैहर माता मंदिर: आस्था का शिखर, चेतना का जागरण

मैहर माता मंदिर: आस्था का शिखर, चेतना का जागरण

त्रिकूट की ऊँचाइयों पर जब श्रद्धा कदम-कदम बढ़ती है, तब पूजा केवल एक विधि नहीं रह जाती वह आत्मा की यात्रा बन जाती है। मैहर माता के चरणों में की जाने वाली आराधना भी ऐसी ही एक अनुभूति है, जहाँ हर मंत्र, हर अर्पण और हर प्रार्थना मनुष्य को उसके भीतर छिपी दिव्यता से जोड़

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माँ सिद्धिदात्री: पूर्णता, सिद्धि और सदैव अनुग्रह की अधिष्ठात्री

माँ सिद्धिदात्री: पूर्णता, सिद्धि और सदैव अनुग्रह की अधिष्ठात्री

जब नौ दिनों की तपस्या, श्रद्धा और भक्ति अपने चरम पर पहुँचती है, तब हृदय में एक अद्भुत शांति उतरती है—मानो स्वयं माँ सिद्धिदात्री का आशीर्वाद मिल रहा हो। यह केवल एक पूजा नहीं, बल्कि आत्मा की उस यात्रा का अंतिम पड़ाव है, जहाँ हर प्रार्थना पूर्णता में बदल जाती है और हर समर्पण दिव्य

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माँ महागौरी: पवित्रता, शांति और दिव्य आभा की अधिष्ठात्री

माँ महागौरी: पवित्रता, शांति और दिव्य आभा की अधिष्ठात्री

जब आत्मा अपने ही बोझ से थककर शांति की तलाश में भीतर की ओर मुड़ती है, तब उसे जिस दिव्य स्पर्श का अनुभव होता है वह है माँ महागौरी की करुणामयी उपस्थिति। वे केवल एक देवी नहीं, बल्कि उस निर्मल प्रकाश की प्रतीक हैं, जो अंधकार को मिटाकर जीवन में संतुलन और शांति भर देता

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