Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

तीन सौ चौंसठ दिन बंद: नागचंद्रेश्वर मंदिर का रहस्य

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की सबसे ऊँची मंजिल पर एक द्वार है जो वर्ष के अधिकांश दिनों चुप रहता है। तीन सौ चौंसठ दिन वह ताला बंद रहता है। आखिरी सीढ़ियाँ खाली पड़ी रहती हैं। कोई दीपक नहीं जलता। कोई घंटी नहीं बजती। कोई भक्त उन पायदानों पर नहीं चढ़ता। नीचे नगर अपनी दिनचर्या में […]

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खुदीराम बोस की अमर विरासत: भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी

खुदीराम बोस की अमर विरासत: भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी

11 अगस्त 1908 की सुबह मुजफ्फरपुर जेल के आंगन में एक अठारह वर्ष का युवक शांत कदमों से फांसी के तख्ते की ओर बढ़ रहा था। हाथ में भगवद्गीता थी। चेहरे पर मुस्कान थी। अंग्रेज अधिकारी और कैदी दोनों अचंभित थे। उस मुस्कान ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया। वह युवक था खुदीराम बोस। भारत

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अग्नि की अटूट परंपरा: प्रताप सिंह बारहठ, सान्याल और भगत सिंह

अग्नि की अटूट परंपरा: प्रताप सिंह बारहठ, सान्याल और भगत सिंह

बरेली सेंट्रल जेल की अंधेरी कोठरी में मई 1918 की एक रात। पच्चीस वर्ष का एक राजस्थानी युवक कराह रहा था। शरीर पर यातनाओं के निशान थे। अंग्रेज अफसरों ने लालच दिए थे। पद का प्रस्ताव रखा था। परिवार की जब्त संपत्ति लौटाने की बात कही थी। माँ के आँसुओं का जिक्र किया था। कुंवर

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मंदिर में मर्यादा का महत्व: श्रद्धा की रक्षा

सुबह के समय एक प्राचीन मंदिर के प्रांगण में शांति फैली हुई है। दीये की लौ स्थिर है। पत्थर ठंडे हैं। दूर कहीं मंदिर की घंटी की मधुर आवाज आ रही है। एक भक्त चुपचाप खड़ा है। उसका मन शांत है। वह दर्शन के लिए तैयार है। तभी पीछे से तेज कदमों की आवाज आती

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मृत्यु, कर्म और मुक्ति: गरुड़ पुराण के छिपे रहस्य

रात के अंतिम पहर में एक पुरुष अपने बिस्तर पर लेटा सोच रहा था। घर में सब सो चुके थे। खिड़की से मंद रोशनी आ रही थी। अचानक उसके मन में एक सवाल उठा जो बहुत दिनों से दबा हुआ था। जब साँस रुक जाती है तो अंदर रहने वाला कौन आगे बढ़ता है? वह

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धरती के नीचे बसा देवताओं का नगर – पाताल भुवनेश्वर

लोहे की जंजीर ठंडी और नम है। आप उसे पकड़कर संकरी सुरंग में उतरते हैं। ऊपर की रोशनी धीरे-धीरे गायब हो जाती है। हवा बदल जाती है। ठंडी और भारी हो जाती है। गीले पत्थर और पुरानी मिट्टी की गंध आती है। पानी कहीं टपक रहा है। रास्ता मुड़ता है। अचानक जगह खुलती है और

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भारत का सीमा जागरण | अरुणाचल पर चीन का दावा और जेमिथांग की कहानी

भारत का सीमा जागरण | अरुणाचल पर चीन का दावा और जेमिथांग की कहानी

जेमिथांग की घाटी में आज भी न्यामजांग छू नदी बह रही है। पहाड़ों पर प्रार्थना के झंडे लहरा रहे हैं। लेकिन अब यह शांत तस्वीर अधूरी है। सीमा के पार से आने वाले दबाव, नक्शों में बदलते नाम और सैन्य हलचल ने इस सुदूर घाटी को नए अर्थ दे दिए हैं। यहीं मार्च 1959 में

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कलंगल से कोयंबटूर तक - जी.डी. नायडू की अनोखी कहानी

कलंगल से कोयंबटूर तक – जी.डी. नायडू की अनोखी कहानी

कोयंबटूर की व्यस्त सड़कों पर आज पंप, मोटर और मशीन टूल्स के कारखाने नजर आते हैं। शहर को दक्षिण भारत का इंजीनियरिंग केंद्र कहा जाता है। लेकिन इस पहचान के पीछे एक ऐसा नाम छिपा है जिसे ज्यादातर लोग अभी भी नहीं जानते। गोपालस्वामी दोरैस्वामी नायडू। स्कूल की तीसरी कक्षा छोड़ने वाला लड़का, जिसने मोटरसाइकिल

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गौरी केदारेश्वर मंदिर: मुक्ति की फसल जहाँ उगती है

केदार घाट की सीढ़ियाँ धीरे-धीरे ऊपर चढ़ती हैं। गंगा की लहरें किनारे से बातें करती हुई बह रही हैं। हवा में घंटी की मधुर आवाज और अगरबत्ती की हल्की खुशबू घुली हुई है। यहीं, इस शांत से घाट पर एक ऐसा मंदिर है जहाँ साधारण खिचड़ी कभी भगवान शिव का रूप बन गई थी। गौरी

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बियॉन्ड पॉसिबल: निम्सदाई की असाधारण कहानी

पहाड़ कभी किसी को आसानी से नहीं अपनाते। वे सिर्फ उन लोगों को याद रखते हैं जो अपनी सीमाओं को बार-बार तोड़ते हैं। 30 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर एक हिमस्खलन ने दस पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया। उनमें से एक थे निर्मल पुरजा। दुनिया जिन्हें निम्सदाई के नाम से

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