Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

शीला दीक्षित: वो महिला जिसने वो दिल्ली बनाई जिसमें हम रोज़ चलते हैं

दिल्ली की याददाश्त अक्सर नारों में बंट जाती है। रोज की दिल्ली उन नारों से छोटी है। वह ट्रेन है जो समय पर आती है। वह सोकेट है जिसमें उजाला टिकता है। वह नल है जो केवल अफवाह नहीं रहा। शीला दीक्षित की कहानी इन्हीं छोटी चीजों से शुरू होती है। जब दिल्ली न सांस […]

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60 मौतें, 40 हजार घर, और सेना: मुजफ्फरनगर दंगों की कहानी और 2026 का पोस्टर वार

सड़क पहले बोलती है, सरकार बाद में। सात सितंबर 2026 की सुबह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दीवारें वही वाक्य दोहराती हैं जो तेरह साल से दबे परिवारों के घरों में पड़ा है— न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे। लखनऊ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर। होर्डिंग रात में लगे। सुबह पुलिस उन्हें उतारती है। बगल में

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सतलुज ने कुछ नहीं भुलाया: विस्मृत हरियाणा नायक हरफूल जाट जुलानीवाला

उन्हें सतलुज में इसलिये फेंका गया कि चिता न जले, भीड़ न जुटे, हरियाणा भूल जाए। शरीर बह गया। नाम नहीं बहा। बारवास का लड़का जुलानीवाला बनकर आल्ह में खड़ा रहा। फाइल ने उसे डाकू लिखा। गाँव ने सवा शेर कहा। दोनों लिखाइयाँ एक ही रस्सी से बँधी हैं। उसे सतलुज में इसलिए फेंका ताकि

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पंद्रह साल की बच्ची के हाथ में माइक किसने थमाया?

प्रदर्शन अभी जमीन पर है कि देश जमीन छोड़ चुका होता है। एक फोन उठता है। कुछ सेकंड काफी होते हैं। उसके बाद बहस उस लीक पेपर की नहीं रहती जो एक युवा जिंदगी बिगाड़ सकता है। बहस नोएडा की पंद्रह वर्षीय लड़की की हो जाती है, बैठे प्रधानमंत्री की, उस माँ की जो जवाब

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बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 4: ‘दामाद श्री’ का DLF जमीन घोटाला, 70% बहुसंख्यक गैर-जाट वोटों को नजरअंदाज, क्षेत्रीय पक्षपात, ‘पर्ची-खर्ची’ कल्चर.. विपक्ष के वो ऐतिहासिक ‘सेल्फ-गोल’ जो 4 सीटों वाली बीजेपी को 2014 हरियाणा चुनाव में ले गए 47 के पार

राजनीति में अक्सर लोग कहते हैं की जब कोई ‘लहर’ आती है, तो बड़े-बड़े किले ढह जाते हैं। टीवी पर बैठे विश्लेषक भी यही कहते हैं की किसी पार्टी ने रातों-रात कोई ऐसा जादू कर दिया की पूरी जनता उसकी दीवानी हो गई। लेकिन सच कहूं तो, ज़मीनी राजनीति किसी जादू से नहीं चलती। राजनीति

बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 4: ‘दामाद श्री’ का DLF जमीन घोटाला, 70% बहुसंख्यक गैर-जाट वोटों को नजरअंदाज, क्षेत्रीय पक्षपात, ‘पर्ची-खर्ची’ कल्चर.. विपक्ष के वो ऐतिहासिक ‘सेल्फ-गोल’ जो 4 सीटों वाली बीजेपी को 2014 हरियाणा चुनाव में ले गए 47 के पार Read More »

हल्दीघाटी रक्तभूमि: वह पीली घाटी जो लाल हो गई

जूते पर पहले खून नहीं लगता। हल्दी लगती है। खमनोर और बालिचा के बीच पहाड़ ऐसे सिमटते हैं कि दो घोड़े भी भीड़ लगते हैं। नीचे मैदान है, तालाब है, नाम रक्त तलाई है। कुछ सौ मीटर पर सड़क हॉर्न से बोलती है। चेतक की छलांग अब डामर के ऊपर कही जाती है। 18 जून

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बीजेपी अजेय नहीं विपक्ष ही अनाड़ी है, Episode 3- किसानों का मजाक, 70 हज़ार करोड़ का सिंचाई घोटाला, चुनाव से पहले गठबंधन तोड़ना, कांग्रेस-NCP के वो तीन ‘सेल्फ-गोल’ जिससे BJP को महाराष्ट्र 2014 चुनाव में मिली 122 सीटों की जीत की दावत

एक बात बहुत साफ़-साफ़ समझ लीजिए, बीजेपी इसलिए नहीं जीतती की वो कभी गलती नहीं करती, बल्कि वो इसलिए बंपर जीत से सत्ता में आती है क्योंकि सामने बैठा हमारा विपक्ष अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने में PhD कर चुका है। जब-जब विपक्ष इस देश के आम आदमी को, किसान को या बहुसंख्यक समाज

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मिर्जापुर, लहुरिया दाह, और आईएएस दिव्या मित्तल की वह कहानी जो इस्तीफे से पहले पानी से शुरू हुई

इस्तीफे के दूसरे दिन विपक्ष ने वाक्य काट दिया। आईएएस दिव्या मित्तल को मजबूर किया गया। ईमानदार अधिकारी को निकाला गया। 2023 का नल, 2023 का तबादला, 2026 का पत्र: एक ही साजिश। फाइल इतनी साफ नहीं। 30 अगस्त 2023 को लहुरिया दाह में जल पूजन हुआ। 1 सितंबर को तबादला हुआ। 4 सितंबर को

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कुम्भयोनि से दक्षिणी आकाश तक: अगस्त्य मुनि की पूरी यात्रा

सागर का पान करने वाला और पर्वत का अतिथि बनने से पहले केवल एक अग्नि थी और एक घड़ा जो बहने से इनकार करता था। पुरोहित लौ के चारों ओर घूमते थे। यज्ञ के दो रक्षक, मित्र और वरुण, वह ऊष्मा अपने शरीर में न रख सके। प्रकाश की एक स्त्री आँगन पार गई। जो

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मनुस्मृति का सच और राहुल गांधी का झूठ

पुणे का मंच, एक श्लोक, और शर्म नाम का शब्द वाक्य मनु से नहीं शुरू हुआ. 22 अगस्त 2026 को पुणे के एआईएसएसएमएस मैदान पर युवा स्त्रियों का हाल था. विपक्ष के नेता राहुल गांधी एक छोटा सा खलनायक चाहते थे, जो एक हाथ में समा जाए. उन्होंने कहा, स्त्री को तीन डिब्बों में रखा

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