पटरियों पर पड़ा एक शव: क्या इंदिरा गांधी के दौर ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को न्याय देने में असफलता दिखाई?
कुछ मौतें दुखद होती हैं। कुछ संदिग्ध होती हैं और कुछ ऐसी होती हैं, जो किसी राष्ट्र की दिशा बदल देती हैं। 11 फरवरी 1968 को दीनदयाल उपाध्याय का शव पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के पास रेलवे पटरियों के किनारे मिला। वे केवल 51 वर्ष के थे। उस दिन भारत ने सिर्फ भारतीय जनसंघ के […]









