लाल बहादुर शास्त्री और सन् 1965 का साहस
सोमवार की शाम है। शहर युद्ध में है, पर होटल का शटर पहले गिर रहा है। रसोई में चूल्हा ठंडा छोड़ दिया गया है। बच्चा पूछता है कि दूसरी रोटी कहाँ है। माँ कहती है, आज प्रधानमंत्री ने भी नहीं खाई। सीमा पर उस शाम टैंक की आवाज है। बंदरगाह पर उस शाम जहाज की […]
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