Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

माँ कालरात्रि: भय के अंत और चेतना के जागरण की शक्ति

माँ कालरात्रि: भय के अंत और चेतना के जागरण की शक्ति

जब जीवन में ऐसा अंधकार उतर आता है जहाँ भय निर्णयों पर हावी हो जाता है और भीतर की स्पष्टता मौन हो जाती है, तब माँ कालरात्रि का स्मरण हमें एक कठोर सत्य से परिचित कराता है कि हर वह प्रकाश जिसे हम खोज रहे हैं, उसी अंधकार के पार स्थित है जिससे हम बचना […]

माँ कालरात्रि: भय के अंत और चेतना के जागरण की शक्ति Read More »

माँ कात्यायनी: साहस और धर्म की निर्णायक शक्ति

जब जीवन के मार्ग पर स्पष्टता धुंधली पड़ने लगे और साहस संदेह में बदलने लगे, तब माँ कात्यायनी का स्मरण हमें एक मूल सत्य का बोध कराता है कि धर्म केवल विचार या भावना नहीं, बल्कि उसे स्थापित करने का उत्तरदायित्वपूर्ण कर्म है। नवरात्रि की षष्ठी पर पूजित माँ कात्यायनी उस चेतना का स्वरूप हैं

माँ कात्यायनी: साहस और धर्म की निर्णायक शक्ति Read More »

माँ स्कन्दमाता – वह दिव्य शक्ति जो वीरों का पालन करती है

नवरात्रि की पंचमी का दिन हमें माँ स्कन्दमाता के उस दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है, जहाँ मातृत्व ही शक्ति का सर्वोच्च रूप बन जाता है। वे केवल भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) की जननी नहीं, बल्कि उस चेतना की प्रतीक हैं जो जीवन को जन्म देकर उसे धर्म, साहस और उद्देश्य के मार्ग पर अग्रसर करती

माँ स्कन्दमाता – वह दिव्य शक्ति जो वीरों का पालन करती है Read More »

माँ कूष्माण्डा: सृष्टि की आदिशक्ति और जीवन का प्रथम प्रकाश

माँ कूष्माण्डा: सृष्टि की आदिशक्ति और जीवन का प्रथम प्रकाश

जब सृष्टि अंधकार में डूबी थी और अस्तित्व का कोई स्वरूप नहीं था, तब एक दिव्य मुस्कान ने शून्य को प्रकाश में बदल दिया। वही मुस्कान माँ कूष्माण्डा की थी—आदिशक्ति की वह करुणामयी ज्योति, जिसने अपने सहज आनंद से सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सृजन किया। नवरात्रि का यह पावन क्षण हमें केवल पूजा के लिए नहीं

माँ कूष्माण्डा: सृष्टि की आदिशक्ति और जीवन का प्रथम प्रकाश Read More »

माँ चंद्रघंटा: जाग्रत शक्ति और संतुलन की दिव्य साधना

नवरात्रि की तृतीया का पावन प्रभात जब धीरे-धीरे धरती पर उतरता है, तो वह केवल एक और दिन का आरंभ नहीं होता वह अंतर में सुप्त पड़ी दिव्य शक्ति के जागरण का निमंत्रण होता है। यह वह क्षण है जब साधना की मौन अग्नि, माँ चंद्रघंटा के स्मरण से प्रज्वलित होकर चेतना को आलोकित करने

माँ चंद्रघंटा: जाग्रत शक्ति और संतुलन की दिव्य साधना Read More »

माँ ब्रह्मचारिणी

माँ ब्रह्मचारिणी: समर्पण की अग्नि, भक्ति का प्रकाश

नवरात्रि की तृतीया का यह पावन प्रभात मानो तप की एक शांत ज्योति लेकर आता है—माँ ब्रह्मचारिणी के स्वरूप में। न कोई आडंबर, न कोई शोर… केवल साधना की गहराई, संयम की शक्ति और एकाग्रता की दिव्यता। वे मौन में चलती हैं, पर उनका संदेश गूंजता है कि जीवन की हर ऊँचाई तप के पथ

माँ ब्रह्मचारिणी: समर्पण की अग्नि, भक्ति का प्रकाश Read More »

मां शैलपुत्री: नवरात्रि की प्रथम आराधना

मां शैलपुत्री: नवरात्रि की प्रथम आराधना

हर वर्ष नवरात्रि हमें यह याद दिलाती है कि दिव्य मां की शक्ति हमेशा हमारे जीवन में उपस्थित रहती है। इस पवित्र पर्व की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है। उनका शांत और शक्तिशाली स्वरूप आध्यात्मिक जागरण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन भक्त श्रद्धा से उनकी पूजा

मां शैलपुत्री: नवरात्रि की प्रथम आराधना Read More »

“जागो हिंदू जागो” नारा या धोखा? अपने बच्चों को विदेश भेजकर आम हिंदूओं की बलि चढ़ाते हैं नेता…चंदन गुप्ता से कन्हैयालाल तक कई नाम

चंदन गुप्ता से लेकर कन्हैया लाल तक, सड़कों पर आम हिंदू का ही खून बह रहा है। और दूसरी तरफ उनके ‘राजनीतिक ठेकेदार’ अपने बच्चों को विदेश में हार्वर्ड, लीड्स और पेनसिल्वेनिया की यूनिवर्सिटीज़ में भेज रहे हैं- उन सारे ताम-झाम से एकदम दूर, जिनका सामना करने के लिए वे दूसरों को उकसाते हैं। आख़िर

“जागो हिंदू जागो” नारा या धोखा? अपने बच्चों को विदेश भेजकर आम हिंदूओं की बलि चढ़ाते हैं नेता…चंदन गुप्ता से कन्हैयालाल तक कई नाम Read More »

गोंदेश्वर धाम: शिव की कृपा, श्रद्धा और शाश्वत स्थापत्य का दिव्य संगम

आज के समय में, जब अक्सर भारत के प्राचीन वैज्ञानिक ज्ञान को कम आँका जाता है, गोंदेश्वर मंदिर एक अलग सच्चाई सामने रखता है। यादव काल में बना यह मंदिर दिखाता है कि उस समय के शिल्पकारों को उन्नत इंजीनियरिंग का अच्छा ज्ञान था। उन्होंने बिना गारे के पत्थरों को जोड़कर ऐसी मजबूत संरचना बनाई,

गोंदेश्वर धाम: शिव की कृपा, श्रद्धा और शाश्वत स्थापत्य का दिव्य संगम Read More »

#YogiModelJustice: राजपूत बच्ची के साथ दरिंदगी के बाद हत्या, बिहार चुप? नेताओं का ‘स्वर्ण-दलित’ वोट बैंक का गंदा खेल

11 मार्च 2026 की दोपहर। छपरा (सारण) की रहने वाली 15 साल की एक बच्ची अपने पुराने घर से कुछ सामान लेने निकली थी। किसे पता था की वो कभी ज़िंदा लौटकर नहीं आएगी? पांच दरिंदे पहले से ही घात लगाए बैठे थे। उन्होंने उसे घसीटकर बाथरूम में खींचा, उसके साथ दुष्कर्म किया।  उसकी चीखें

#YogiModelJustice: राजपूत बच्ची के साथ दरिंदगी के बाद हत्या, बिहार चुप? नेताओं का ‘स्वर्ण-दलित’ वोट बैंक का गंदा खेल Read More »

Scroll to Top