Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

सोने का सिंहासन छोड़ पहनी ’10 पैरा कमांडो’ की वर्दी, 1971 में बिना टैंक और हवाई मदद के पाकिस्तान में 80 किलोमीटर अंदर घुसकर दुश्मनों की कब्र खोदने वाले भारत के अंतिम महाराजा ‘सवाई भवानी सिंह’

5 दिसंबर 1971 की रात थार का रेगिस्तान चुप था। जोंगा और जीपों की एक पतली कतार सीमा पार कर अंदर घुस रही थी। इंजन धीमे थे। रोशनी बंद थी। अस्सी किलोमीटर दुश्मन के इलाके में वे लोग जा रहे थे जिनके पास न टैंक था, न हवाई छत्र। कतार के आगे बैठे अफसर को […]

सोने का सिंहासन छोड़ पहनी ’10 पैरा कमांडो’ की वर्दी, 1971 में बिना टैंक और हवाई मदद के पाकिस्तान में 80 किलोमीटर अंदर घुसकर दुश्मनों की कब्र खोदने वाले भारत के अंतिम महाराजा ‘सवाई भवानी सिंह’ Read More »

विपक्ष नहीं बल्कि ये सायरन वाला ‘VIP कल्चर’ मार रहा बीजेपी के पैरों पर कुल्हाड़ी, उत्तराखंड BJP को टैक्स देने वाली पब्लिक को रोड ब्लॉक करके धूप और बारिश में तड़पाना डुबोएगा इन नेताओं की लुटिया

सुबह की धूप तेज है। देहरादून से मसूरी जाने वाली सड़क पर गाड़ियों की कतार खड़ी है। एक स्कूल बस में बच्चे बेचैन हो रहे हैं। बगल में एक ऑटो वाला बार-बार घड़ी देख रहा है। दूर से सायरन की आवाज आती है। लोग सोचते हैं शायद एंबुलेंस है। रास्ता खुल जाएगा। लेकिन सामने से

विपक्ष नहीं बल्कि ये सायरन वाला ‘VIP कल्चर’ मार रहा बीजेपी के पैरों पर कुल्हाड़ी, उत्तराखंड BJP को टैक्स देने वाली पब्लिक को रोड ब्लॉक करके धूप और बारिश में तड़पाना डुबोएगा इन नेताओं की लुटिया Read More »

लखनऊ का सबक: भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को योगी आदित्यनाथ से क्यों सीखना चाहिए

सत्ता लंबे समय तक चलने के बाद एक खास बीमारी पैदा करती है। ऊपर बैठे लोग धीरे-धीरे जमीन की आवाज सुनना बंद कर देते हैं। वे अपनी सफलता के शोर में खो जाते हैं। फीडबैक कमजोर पड़ जाता है। फैसले देर से होते हैं। और एक दिन अचानक चुनाव या सड़क का गुस्सा याद दिलाता

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तीन सौ चौंसठ दिन बंद: नागचंद्रेश्वर मंदिर का रहस्य

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की सबसे ऊँची मंजिल पर एक द्वार है जो वर्ष के अधिकांश दिनों चुप रहता है। तीन सौ चौंसठ दिन वह ताला बंद रहता है। आखिरी सीढ़ियाँ खाली पड़ी रहती हैं। कोई दीपक नहीं जलता। कोई घंटी नहीं बजती। कोई भक्त उन पायदानों पर नहीं चढ़ता। नीचे नगर अपनी दिनचर्या में

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खुदीराम बोस की अमर विरासत: भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी

खुदीराम बोस की अमर विरासत: भारत के सबसे युवा क्रांतिकारी

11 अगस्त 1908 की सुबह मुजफ्फरपुर जेल के आंगन में एक अठारह वर्ष का युवक शांत कदमों से फांसी के तख्ते की ओर बढ़ रहा था। हाथ में भगवद्गीता थी। चेहरे पर मुस्कान थी। अंग्रेज अधिकारी और कैदी दोनों अचंभित थे। उस मुस्कान ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया। वह युवक था खुदीराम बोस। भारत

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अग्नि की अटूट परंपरा: प्रताप सिंह बारहठ, सान्याल और भगत सिंह

अग्नि की अटूट परंपरा: प्रताप सिंह बारहठ, सान्याल और भगत सिंह

बरेली सेंट्रल जेल की अंधेरी कोठरी में मई 1918 की एक रात। पच्चीस वर्ष का एक राजस्थानी युवक कराह रहा था। शरीर पर यातनाओं के निशान थे। अंग्रेज अफसरों ने लालच दिए थे। पद का प्रस्ताव रखा था। परिवार की जब्त संपत्ति लौटाने की बात कही थी। माँ के आँसुओं का जिक्र किया था। कुंवर

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मंदिर में मर्यादा का महत्व: श्रद्धा की रक्षा

सुबह के समय एक प्राचीन मंदिर के प्रांगण में शांति फैली हुई है। दीये की लौ स्थिर है। पत्थर ठंडे हैं। दूर कहीं मंदिर की घंटी की मधुर आवाज आ रही है। एक भक्त चुपचाप खड़ा है। उसका मन शांत है। वह दर्शन के लिए तैयार है। तभी पीछे से तेज कदमों की आवाज आती

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मृत्यु, कर्म और मुक्ति: गरुड़ पुराण के छिपे रहस्य

रात के अंतिम पहर में एक पुरुष अपने बिस्तर पर लेटा सोच रहा था। घर में सब सो चुके थे। खिड़की से मंद रोशनी आ रही थी। अचानक उसके मन में एक सवाल उठा जो बहुत दिनों से दबा हुआ था। जब साँस रुक जाती है तो अंदर रहने वाला कौन आगे बढ़ता है? वह

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धरती के नीचे बसा देवताओं का नगर – पाताल भुवनेश्वर

लोहे की जंजीर ठंडी और नम है। आप उसे पकड़कर संकरी सुरंग में उतरते हैं। ऊपर की रोशनी धीरे-धीरे गायब हो जाती है। हवा बदल जाती है। ठंडी और भारी हो जाती है। गीले पत्थर और पुरानी मिट्टी की गंध आती है। पानी कहीं टपक रहा है। रास्ता मुड़ता है। अचानक जगह खुलती है और

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भारत का सीमा जागरण | अरुणाचल पर चीन का दावा और जेमिथांग की कहानी

भारत का सीमा जागरण | अरुणाचल पर चीन का दावा और जेमिथांग की कहानी

जेमिथांग की घाटी में आज भी न्यामजांग छू नदी बह रही है। पहाड़ों पर प्रार्थना के झंडे लहरा रहे हैं। लेकिन अब यह शांत तस्वीर अधूरी है। सीमा के पार से आने वाले दबाव, नक्शों में बदलते नाम और सैन्य हलचल ने इस सुदूर घाटी को नए अर्थ दे दिए हैं। यहीं मार्च 1959 में

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