कार्तिकेय के उपासक यौधेय: राजपूत परंपरा की प्राचीन जड़ें
सतलुज और यमुना के बीच की पुरानी धरती आज भी चुपचाप बोलती है। कभी-कभी एक किसान की फावड़े में तांबे की छोटी मुद्रा चिपक जाती है। उस पर एक युवा देवता खड़े होते हैं। हाथ में भाला। चरणों में मोर। किनारे पर ब्राह्मी अक्षरों में लिखा होता है: यौधेय गणस्य जय। यह मुद्रा किसी राजा […]
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