Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

मृत्यु, कर्म और मुक्ति: गरुड़ पुराण के छिपे रहस्य

रात के अंतिम पहर में एक पुरुष अपने बिस्तर पर लेटा सोच रहा था। घर में सब सो चुके थे। खिड़की से मंद रोशनी आ रही थी। अचानक उसके मन में एक सवाल उठा जो बहुत दिनों से दबा हुआ था। जब साँस रुक जाती है तो अंदर रहने वाला कौन आगे बढ़ता है? वह […]

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धरती के नीचे बसा देवताओं का नगर – पाताल भुवनेश्वर

लोहे की जंजीर ठंडी और नम है। आप उसे पकड़कर संकरी सुरंग में उतरते हैं। ऊपर की रोशनी धीरे-धीरे गायब हो जाती है। हवा बदल जाती है। ठंडी और भारी हो जाती है। गीले पत्थर और पुरानी मिट्टी की गंध आती है। पानी कहीं टपक रहा है। रास्ता मुड़ता है। अचानक जगह खुलती है और

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भारत का सीमा जागरण | अरुणाचल पर चीन का दावा और जेमिथांग की कहानी

भारत का सीमा जागरण | अरुणाचल पर चीन का दावा और जेमिथांग की कहानी

जेमिथांग की घाटी में आज भी न्यामजांग छू नदी बह रही है। पहाड़ों पर प्रार्थना के झंडे लहरा रहे हैं। लेकिन अब यह शांत तस्वीर अधूरी है। सीमा के पार से आने वाले दबाव, नक्शों में बदलते नाम और सैन्य हलचल ने इस सुदूर घाटी को नए अर्थ दे दिए हैं। यहीं मार्च 1959 में

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कलंगल से कोयंबटूर तक - जी.डी. नायडू की अनोखी कहानी

कलंगल से कोयंबटूर तक – जी.डी. नायडू की अनोखी कहानी

कोयंबटूर की व्यस्त सड़कों पर आज पंप, मोटर और मशीन टूल्स के कारखाने नजर आते हैं। शहर को दक्षिण भारत का इंजीनियरिंग केंद्र कहा जाता है। लेकिन इस पहचान के पीछे एक ऐसा नाम छिपा है जिसे ज्यादातर लोग अभी भी नहीं जानते। गोपालस्वामी दोरैस्वामी नायडू। स्कूल की तीसरी कक्षा छोड़ने वाला लड़का, जिसने मोटरसाइकिल

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गौरी केदारेश्वर मंदिर: मुक्ति की फसल जहाँ उगती है

केदार घाट की सीढ़ियाँ धीरे-धीरे ऊपर चढ़ती हैं। गंगा की लहरें किनारे से बातें करती हुई बह रही हैं। हवा में घंटी की मधुर आवाज और अगरबत्ती की हल्की खुशबू घुली हुई है। यहीं, इस शांत से घाट पर एक ऐसा मंदिर है जहाँ साधारण खिचड़ी कभी भगवान शिव का रूप बन गई थी। गौरी

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बियॉन्ड पॉसिबल: निम्सदाई की असाधारण कहानी

पहाड़ कभी किसी को आसानी से नहीं अपनाते। वे सिर्फ उन लोगों को याद रखते हैं जो अपनी सीमाओं को बार-बार तोड़ते हैं। 30 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर एक हिमस्खलन ने दस पर्वतारोहियों को अपनी चपेट में ले लिया। उनमें से एक थे निर्मल पुरजा। दुनिया जिन्हें निम्सदाई के नाम से

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पहाड़ों में छिपी शक्ति: माँ जयंती और जयंतिया की विरासत

पश्चिम जयंतिया पहाड़ियों की शांत घाटियों में, जहाँ चीड़ के पेड़ कोहरे में झुकते हैं और मिन्तांग नदी नीचे बहती रहती है, एक सादा मंदिर एक प्राचीन रहस्य संजोए बैठा है। ज्यादातर यात्री मेघालय से गुजर जाते हैं और इसका नाम भी नहीं सुनते। लेकिन जो लोग नर्तियांग की छोटी पहाड़ी पर चढ़ते हैं, उन्हें

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25 तबादले, शून्य समझौते: आईएएस तुकाराम मुंढे की अडिग यात्रा

2026 की गर्मी में महाराष्ट्र भर में वीडियो फैलने लगे। एफडीए की टीमें रसोईघर सील कर रही थीं। दूध के डिब्बे बाहर निकालकर फेंके जा रहे थे। दुकानों के शटर दिन में बंद हो रहे थे। ग्राहक बाहर खड़े होकर देख रहे थे। छापे अचानक थे, बड़े पैमाने पर थे और असामान्य रूप से सख्त

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प्राग्ज्योतिष: पूर्व की ज्योति, आज का असम

भोर की पहली रोशनी में ब्रह्मपुत्र के ऊपर कोहरा तैरता है। नदी धीरे-धीरे बहती है जैसे पानी के साथ यादें भी ले जा रही हो। उसके किनारों पर पुराने नाम बसते हैं। प्राग्ज्योतिष। कामरूप। बाद में वे लोग आए जिन्होंने पहाड़ियाँ पार कीं और छह सौ साल तक टिके रहे। यह कहानी है कि कैसे

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खुले आसमान के नीचे: डाकिनी पहाड़ी के भीमाशंकर

खुले आसमान के नीचे: डाकिनी पहाड़ी के भीमाशंकर

गुवाहाटी की सड़कें पीछे छूटती जाती हैं। हर मोड़ के साथ शोर कम होता जाता है। बाँस दोनों तरफ घने होने लगते हैं। हवा बदल जाती है। वह ठंडी, साफ और लगभग स्थिर हो जाती है। फिर पानी की आवाज सुनाई देती है। कोमल और निरंतर। थोड़ी सी चढ़ाई के बाद आप एक काले पत्थर

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