Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' से खालिस्तानियों के फन कुचलने वाला वो 'सुपरकॉप', अगर KPS Gill न होते, तो आज भारत के नक्शे से अलग हो चुका होता पंजाब

‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ से खालिस्तानियों के फन कुचलने वाला वो ‘सुपरकॉप’, अगर KPS Gill न होते, तो आज भारत के नक्शे से अलग हो चुका होता पंजाब

जब आतंक ने बस रोकी और हिंदू परिवार खत्म हो गए: वो रातें जो फिल्म सतलुज कभी नहीं दिखाएगी कल्पना कीजिए। एक साधारण बस पंजाब की सड़क पर चल रही है। हिंदू परिवार अपनों के साथ घर लौट रहे हैं। अचानक खालिस्तानी आतंकी बस रोक लेते हैं। हिंदू यात्रियों को अलग कर दिया जाता है। […]

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1947 में भारत को 10 हिस्सों में विभाजित करने की ब्रिटिश योजना: जो कभी पूरी नहीं हुई

1947 में भारत को 10 हिस्सों में विभाजित करने की ब्रिटिश योजना: जो कभी पूरी नहीं हुई

कल्पना कीजिए 1947 की वह भयानक रात, जब भारत का विशाल नक्शा चिथड़ों में बंटा पड़ा है। कोई एक शक्तिशाली भारत नहीं, बल्कि दस छोटे-छोटे टुकड़े हिंदुस्तान, गंगिस्तान, बेंगासम, राजपूताना, मराठा कन्फेडरेशन और कई अन्य। नदियां जो कभी एकता का प्रतीक थीं, अब सीमाएं बनकर खून बहा रही हैं। किसान भूखे, कारखाने बंद, विदेशी ताकतें

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अंधेरे घर में उजाला भरने वाली मिट्टी की जादूगर: सोनाबाई की प्रेरणादायक यात्रा

अंधेरे घर में उजाला भरने वाली मिट्टी की जादूगर: सोनाबाई की प्रेरणादायक यात्रा

कल्पना कीजिए एक ऐसी महिला की, जिसे दुनिया ने घर की चार दीवारों में कैद कर दिया, लेकिन उसने उन दीवारों को अपनी कला से इतना जीवंत बना दिया कि आज पूरा देश और दुनिया उसकी रचनात्मकता का दीवाना है। यह है छत्तीसगढ़ की पुहपुत्रा गांव की सोनाबाई रजवार की कहानी। एक साधारण आदिवासी महिला,

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धूमावती महाविद्या का तांत्रिक स्वरूप: उद्गम कथा, यंत्र साधना

धूमावती महाविद्या का तांत्रिक स्वरूप: उद्गम कथा, यंत्र साधना

कल्पना कीजिए एक घने अंधेरे कमरे में आप अकेले बैठे हैं। चारों ओर जीवन की अनिश्चितताएँ, हानियाँ और दुखों का धुआँ फैला हुआ है। अचानक उस धुएँ के बीच से एक करुणामयी छाया उभरती है। वह हाथ फैलाकर कहती है, “बेटा, डरो मत। मैं हूँ ना।” यह हैं हमारी माँ धूमावती, धूम की देवी, जो

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परंपरा तोड़कर राजनीतिक दूत भेजना: दिनेश त्रिवेदी के जरिए भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया अध्याय

जब कोई अनुभवी नेता सूटकेस हाथ में लेकर सड़क मार्ग से पड़ोसी देश की सीमा पार करता है, तो वह सिर्फ एक राजनयिक नहीं, बल्कि दो देशों के बीच नई उम्मीद और विश्वास का संदेश ले जाता है। ठीक यही दृश्य देखने को मिला जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी

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कश्मीरी पंडित नरसंहार का काला अध्याय: सरला भट्ट हत्या में यासिन मलिक और जेकेएलएफ का खुलासा

कश्मीरी पंडित नरसंहार का काला अध्याय: सरला भट्ट हत्या में यासिन मलिक और जेकेएलएफ का खुलासा

36 साल पहले कश्मीर घाटी में एक नर्स की चीखें दबा दी गईं, लेकिन उसकी कहानी आज भी गूंज रही है। 18 अप्रैल 1990 को, जब सरला भट्ट SKIMS सौरा के अस्पताल में मरीजों की सेवा कर रही थीं, जेकेएलएफ के आतंकियों ने उन्हें घसीटकर ले लिया। घंटों बाद उनका गोली से छलनी, बलात्कृत और

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जब लोकतंत्र पर ताला लगा था: आपातकाल की कहानी अब स्कूलों में

जब लोकतंत्र पर ताला लगा था: आपातकाल की कहानी अब स्कूलों में

कल्पना कीजिए कि आप स्कूल जा रहे हैं। अचानक पुलिस आपके पिता को बिना बताए उठा ले जाती है। घर पर अखबार नहीं आता। टीवी और रेडियो पर सिर्फ सरकार की बातें सुनाई देती हैं। आपकी आवाज निकालने का कोई अधिकार नहीं रह जाता। यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है। यह 1975 का भारत

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नीलाचल पर मां की दिव्य लीला: अम्बुबाची मेला शक्ति, रहस्य और भक्ति का अनुपम संगम

नीलाचल पर मां की दिव्य लीला: अम्बुबाची मेला शक्ति, रहस्य और भक्ति का अनुपम संगम

नीलाचल पहाड़ियों पर मानसून की पहली झड़ी पड़ते ही ब्रह्मपुत्र नदी का जल लाल हो उठता है। हजारों भक्तों के जयकारों से आसमान गूंज उठता है। गेरुए वस्त्रों में साधु, मां के नाम का जप करते परिवार और दिव्य ऊर्जा से भरा वातावरण यह दृश्य देखकर हृदय रोमांचित हो जाता है। यह है पूर्वोत्तर भारत

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2600 वर्ष पहले का भारतीय सर्जन: सुश्रुत और उनकी अमर संहिता

2600 वर्ष पहले का भारतीय सर्जन: सुश्रुत और उनकी अमर संहिता

कल्पना कीजिए, २६०० वर्ष पहले गंगा के पावन तट पर काशी की प्राचीन गुरुकुल भूमि। एक ब्राह्मण ऋषि-चिकित्सक सुश्रुत अपने शिष्यों के सामने खड़े हैं। उनके हाथ में एक तीखा यंत्र है और सामने एक रोगी जिसकी नाक युद्ध में कट गई है। कुछ ही घंटों में सुश्रुत उसकी नाक को नए सिरे से गढ़

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नर्रई नाला की शहीद रानी: दुर्गावती की वीर गाथा

भारत की धरती वीरों और वीरांगनाओं की गाथाओं से भरी पड़ी है। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी हैं जो सदियों बाद भी रोंगटे खड़े कर देती हैं। 16वीं शताब्दी में, जब मुगल साम्राज्य अपना विस्तार कर रहा था, तब एक राजपूत-गोंड रानी ने तलवार उठाई। वह रानी दुर्गावती थीं। कालिंजर किले में जन्मी यह शेरनी गोंडवाना

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