Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

राष्ट्रसेवी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या: फांसी ही एकमात्र न्याय है

राष्ट्रसेवी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या: फांसी ही एकमात्र न्याय है

अंकित शर्मा का आखिरी दिन 26 साल का युवा खुफिया ब्यूरो अधिकारी अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को घर से कुछ काम से निकला। वह कभी वापस नहीं लौटा। कुछ घंटों बाद उसका शव नाले में मिला। शरीर पर 51 गहरी चोटें। चेहरे पर चाकू के निशान। आंखें बाहर निकली हुईं। फेफड़े और दिमाग बुरी […]

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1978 की राख पर प्रोपगैंडा की नई लौ: राख सीरीज का सच्चा चेहरा

1978 की दिल्ली एक बदलते भारत की तस्वीर थी। आपातकाल के घाव अभी ताजा थे। राजनीतिक अस्थिरता, ऊंची महंगाई और शहर की बढ़ती आबादी के बीच लोग रोजमर्रा की जिंदगी जी रहे थे। इसी माहौल में दो मासूम बच्चे गीता और संजय एक शाम घर से निकले। वे ऑल इंडिया रेडियो पर युवा वाणी कार्यक्रम

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अमेरिका का सबसे मजबूत सहयोगी: इज़राइल का अजेय राजनीतिक कवच

अमेरिका का सबसे मजबूत सहयोगी: इज़राइल का अजेय राजनीतिक कवच

कल्पना कीजिए दुनिया की सबसे ताकतवर महाशक्ति की, जो देशों को झुका देती है, शासन बदल देती है और नीतियां थोप देती है। अमेरिका ने दुनिया भर में ऐसा किया है। लेकिन मध्य पूर्व का एक छोटा सा देश इज़राइल हर बार उसकी पहुँच से बाहर रह जाता है। यहाँ तक कि सबसे शक्तिशाली अमेरिकी

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'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' से खालिस्तानियों के फन कुचलने वाला वो 'सुपरकॉप', अगर KPS Gill न होते, तो आज भारत के नक्शे से अलग हो चुका होता पंजाब

‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ से खालिस्तानियों के फन कुचलने वाला वो ‘सुपरकॉप’, अगर KPS Gill न होते, तो आज भारत के नक्शे से अलग हो चुका होता पंजाब

जब आतंक ने बस रोकी और हिंदू परिवार खत्म हो गए: वो रातें जो फिल्म सतलुज कभी नहीं दिखाएगी कल्पना कीजिए। एक साधारण बस पंजाब की सड़क पर चल रही है। हिंदू परिवार अपनों के साथ घर लौट रहे हैं। अचानक खालिस्तानी आतंकी बस रोक लेते हैं। हिंदू यात्रियों को अलग कर दिया जाता है।

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1947 में भारत को 10 हिस्सों में विभाजित करने की ब्रिटिश योजना: जो कभी पूरी नहीं हुई

1947 में भारत को 10 हिस्सों में विभाजित करने की ब्रिटिश योजना: जो कभी पूरी नहीं हुई

कल्पना कीजिए 1947 की वह भयानक रात, जब भारत का विशाल नक्शा चिथड़ों में बंटा पड़ा है। कोई एक शक्तिशाली भारत नहीं, बल्कि दस छोटे-छोटे टुकड़े हिंदुस्तान, गंगिस्तान, बेंगासम, राजपूताना, मराठा कन्फेडरेशन और कई अन्य। नदियां जो कभी एकता का प्रतीक थीं, अब सीमाएं बनकर खून बहा रही हैं। किसान भूखे, कारखाने बंद, विदेशी ताकतें

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अंधेरे घर में उजाला भरने वाली मिट्टी की जादूगर: सोनाबाई की प्रेरणादायक यात्रा

अंधेरे घर में उजाला भरने वाली मिट्टी की जादूगर: सोनाबाई की प्रेरणादायक यात्रा

कल्पना कीजिए एक ऐसी महिला की, जिसे दुनिया ने घर की चार दीवारों में कैद कर दिया, लेकिन उसने उन दीवारों को अपनी कला से इतना जीवंत बना दिया कि आज पूरा देश और दुनिया उसकी रचनात्मकता का दीवाना है। यह है छत्तीसगढ़ की पुहपुत्रा गांव की सोनाबाई रजवार की कहानी। एक साधारण आदिवासी महिला,

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धूमावती महाविद्या का तांत्रिक स्वरूप: उद्गम कथा, यंत्र साधना

धूमावती महाविद्या का तांत्रिक स्वरूप: उद्गम कथा, यंत्र साधना

कल्पना कीजिए एक घने अंधेरे कमरे में आप अकेले बैठे हैं। चारों ओर जीवन की अनिश्चितताएँ, हानियाँ और दुखों का धुआँ फैला हुआ है। अचानक उस धुएँ के बीच से एक करुणामयी छाया उभरती है। वह हाथ फैलाकर कहती है, “बेटा, डरो मत। मैं हूँ ना।” यह हैं हमारी माँ धूमावती, धूम की देवी, जो

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परंपरा तोड़कर राजनीतिक दूत भेजना: दिनेश त्रिवेदी के जरिए भारत-बांग्लादेश संबंधों का नया अध्याय

जब कोई अनुभवी नेता सूटकेस हाथ में लेकर सड़क मार्ग से पड़ोसी देश की सीमा पार करता है, तो वह सिर्फ एक राजनयिक नहीं, बल्कि दो देशों के बीच नई उम्मीद और विश्वास का संदेश ले जाता है। ठीक यही दृश्य देखने को मिला जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी

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कश्मीरी पंडित नरसंहार का काला अध्याय: सरला भट्ट हत्या में यासिन मलिक और जेकेएलएफ का खुलासा

कश्मीरी पंडित नरसंहार का काला अध्याय: सरला भट्ट हत्या में यासिन मलिक और जेकेएलएफ का खुलासा

36 साल पहले कश्मीर घाटी में एक नर्स की चीखें दबा दी गईं, लेकिन उसकी कहानी आज भी गूंज रही है। 18 अप्रैल 1990 को, जब सरला भट्ट SKIMS सौरा के अस्पताल में मरीजों की सेवा कर रही थीं, जेकेएलएफ के आतंकियों ने उन्हें घसीटकर ले लिया। घंटों बाद उनका गोली से छलनी, बलात्कृत और

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जब लोकतंत्र पर ताला लगा था: आपातकाल की कहानी अब स्कूलों में

जब लोकतंत्र पर ताला लगा था: आपातकाल की कहानी अब स्कूलों में

कल्पना कीजिए कि आप स्कूल जा रहे हैं। अचानक पुलिस आपके पिता को बिना बताए उठा ले जाती है। घर पर अखबार नहीं आता। टीवी और रेडियो पर सिर्फ सरकार की बातें सुनाई देती हैं। आपकी आवाज निकालने का कोई अधिकार नहीं रह जाता। यह कोई फिल्म की कहानी नहीं है। यह 1975 का भारत

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