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कांग्रेस ने किया सनातन का अपमान, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से दूरी बनाकर कर रही ऐतिहासिक भूल

अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को राम मंदिर का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इस समारोह में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने शिरकत की। हालांकि, इस समारोह में कांग्रेस पार्टी ने भाग नहीं लिया। कांग्रेस ने इस आयोजन को बीजेपी-आरएसएस का राजनीतिक कार्यक्रम करार दिया और कहा कि यह धर्म का व्यक्तिगत मामला है।

कांग्रेस के इस फैसले को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस ने यह फैसला सही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को धर्म के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस का यह फैसला एक ऐतिहासिक भूल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को नेहरू के सोमनाथ वाले फैसले से सीख लेनी चाहिए थी।

कांग्रेस के फैसले के समर्थन में तर्क:

कांग्रेस के फैसले के समर्थन में लोग तर्क देते हैं कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है और वह किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में भाग नहीं लेती है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण समारोह में भी जवाहरलाल नेहरू नहीं गए थे।

कांग्रेस के इस तर्क की कई तरह से आलोचना की जा सकती है। सबसे पहले, यह कहना कि कांग्रेस एक धर्मनिरपेक्ष पार्टी है, गलत है। कांग्रेस ने हमेशा हिंदू विरोधी नीतियों को अपनाया है। उदाहरण के लिए, कांग्रेस ने 1984 में सिख विरोधी दंगों को अंजाम दिया था।

दूसरे, यह कहना कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण समारोह में जवाहरलाल नेहरू नहीं गए थे, इसका मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी नहीं जाना चाहिए था। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण एक ऐतिहासिक घटना थी, लेकिन राम मंदिर का निर्माण एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है।

कांग्रेस के फैसले के विरोध में तर्क:

कांग्रेस के फैसले के विरोध में लोग तर्क देते हैं कि राम मंदिर एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है और कांग्रेस को इस अवसर पर शामिल होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के इस फैसले से पार्टी के हिंदू वोट बैंक को नुकसान पहुंच सकता है।

कांग्रेस के इस तर्क में भी दम है। भारत में हिंदू आबादी का बहुमत है। ऐसे में कांग्रेस को हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होना चाहिए था। कांग्रेस के इस फैसले से पार्टी के हिंदू वोट बैंक से मोहभंग हो सकता है।

कांग्रेस के फैसले के संभावित परिणाम:

कांग्रेस के इस फैसले के कई संभावित परिणाम हो सकते हैं। एक संभावना यह है कि इससे पार्टी के हिंदू वोट बैंक को नुकसान पहुंच सकता है। कई हिंदू वोटरों का मानना है कि कांग्रेस ने राम मंदिर के प्रति अपनी निष्ठा का परिचय नहीं दिया है। इससे इन वोटरों का कांग्रेस से मोहभंग हो सकता है।

दूसरी संभावना यह है कि इस फैसले से कांग्रेस की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस के इस फैसले से भारत के लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठेंगे।

निष्कर्ष:

कुल मिलाकर, कांग्रेस का राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में न जाने का फैसला एक ऐतिहासिक भूल है। इस फैसले से पार्टी को राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। कांग्रेस को इस फैसले से सीख लेनी चाहिए और भविष्य में ऐसी भूलें नहीं करनी चाहिए।

विशेष विश्लेषण:

कांग्रेस के इस फैसले पर विशेष रूप से दो बातों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

पहली बात यह है कि कांग्रेस ने एक बार फिर सनातन धर्म का अपमान किया है। कांग्रेस ने राम मंदिर को एक धार्मिक कार्यक्रम करार देकर यह दिखा दिया है कि वह हिंदू धर्म के प्रति सम्मान नहीं रखती है।

दूसरी बात यह है कि कांग्रेस ने एक बार फिर अपने हिंदू विरोधी चरित्र को उजागर किया

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