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लोकसभा चुनाव के बीच दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, AAP से गठबंधन पर खड़े किए सवाल

लोकसभा चुनाव के बीच दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, AAP से गठबंधन पर खड़े किए सवाल

लोकसभा चुनावों के बीच कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को चिट्ठी लिखकर अपना इस्तीफा दिया।

लवली ने कहा, दिल्ली कांग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी जो कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के एकमात्र आधार पर बनी थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने दिल्ली में AAP के साथ गठबंधन करने का निर्णय लिया।

‘भारी मन से लिख रहा हूं…’

लवली ने खरगे को लिखे पत्र में लिखा, ‘मैंने पिछले 7-8 महीनों में दिल्ली में पार्टी को फिर से स्थापित करने का पुरजोर और भरपूर प्रयास किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पार्टी फिर से उसी स्थिति में पहुंच जाए, जैसी कभी थी। आप अच्छी तरह से जानते हैं कि अगस्त 2023 में जब मुझे कार्यभार सौंपा गया था तब पार्टी इकाई किस स्थिति में थी।

तब से, मैंने कई उपाय करके पार्टी को फिर से खड़ा करने और अपने स्थानीय कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करने के लिए कड़ी मेहनत की है। मैंने सैकड़ों स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को फिर से पार्टी में शामिल किया, जो या तो पार्टी छोड़ चुके थे या निष्क्रिय हो गए थे।

इसके अलावा कई सालों से पार्टी ने शहर में कोई बड़ा आयोजन/रैली नहीं की थी, मैंने यह सुनिश्चित किया कि पिछले 7-8 महीनों में हर महीने कम से कम एक बड़ी रैली सफलतापूर्वक की जाए। ऐसा करके मैंने यह भी सुनिश्चित किया कि शहर की सभी 7 संसदीय सीटें कवर हो जाएं क्योंकि आम चुनावों के लिए बहुत कम समय बचा था। लवली ने लिखा, भारी मन से मैं आपको यह पत्र लिख रहा हूं मैं कई कारणों से खुद को दिल्ली पार्टी इकाई के अध्यक्ष के रूप में बने रहने में असमर्थ पा रहा हूं।

‘मेरे अनुरोध को किया गया खारिज’

उन्होंने कहा, दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा लिए गए सभी सर्वसम्मत निर्णयों को AICC महासचिव (दिल्ली प्रभारी) द्वारा एकतरफा वीटो कर दिया गया है। डीपीसीसी अध्यक्ष के रूप में मेरी नियुक्ति के बाद से, एआईसीसी महासचिव (दिल्ली प्रभारी) ने मुझे डीपीसीसी में कोई वरिष्ठ नियुक्ति करने की अनुमति नहीं दी है।

मीडिया के रूप में एक अनुभवी नेता की नियुक्ति के लिए मेरा अनुरोध खारिज कर दिया गया। आज तक एआईसीसी महासचिव (दिल्ली प्रभारी) ने डीपीसीसी को शहर के सभी ब्लॉक अध्यक्षों की नियुक्ति की अनुमति नहीं दी है। नतीजा, दिल्ली के 150 से ज्यादा ब्लॉकों में फिलहाल कोई ब्लॉक अध्यक्ष नहीं है।

आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन पर जताई नाराजगी

लवली ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, दिल्ली कांग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, जिसका गठन कांग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के एकमात्र आधार पर किया गया था और जिसके आधे कैबिनेट मंत्री वर्तमान में भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया।

हमने पार्टी के अंतिम निर्णय का सम्मान किया। मैंने न केवल सार्वजनिक रूप से निर्णय का समर्थन किया, बल्कि मैंने यह भी सुनिश्चित किया कि पूरी राज्य इकाई हाई कमान के अंतिम आदेश के अनुरूप हो। एआईसीसी महासचिव (संगठन) के निर्देश पर, मैं केजरीवाल की गिरफ्तारी की रात सुभाष चोपड़ा और संदीप दीक्षित के साथ उनके आवास पर भी गया था, बावजूद इसके कि वे इस मामले पर मेरी स्थिति के खिलाफ थे।

कांग्रेस उम्मीदवारों पर भी उठाए सवाल

लवली ने गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर कहा कि AAP से गठबंधन के दिल्ली को कांग्रेस में केवल 3 सीटों पर चुनाव लड़ने को मिला। दिल्ली में गठबंधन में कांग्रेस पार्टी को दी गई सीमित सीटों को देखते हुए और पार्टी के हित में मैंने अपना नाम वापस ले लिया और संभावित उम्मीदवार के रूप में विचार किए जाने से इनकार कर दिया।

इन 3 सीटों में से पीसीसी, सभी पर्यवेक्षकों और स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं के विचारों को खारिज करते हुए, उत्तर-पश्चिम दिल्ली और उत्तर-पूर्व दिल्ली की सीटें 2 उम्मीदवारों को दे दी गईं, जो दिल्ली कांग्रेस और पार्टी की नीतियों के लिए पूरी तरह से अजनबी थे। पार्टी उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय लेना हाईकमान का विशेषाधिकार है, हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार हाईकमान द्वारा दोनों उम्मीदवारों के संबंध में निर्णय लेने के बाद, औपचारिक रूप से पहले पीसीसी को सूचित भी नहीं किया गया था।

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