जिस 'जिन्ना' ने लाखों हिंदुओं का कत्लेआम करके बनाया पाकिस्तान, उसी के वंसज आज 'अरबपति' बनके कर रहे भारत में ऐश, 'ब्रिटानिया' जैसी कंपनियों का डायरेक्ट 'पाकिस्तान कनेक्शन'

जिस ‘जिन्ना’ ने लाखों हिंदुओं का कत्लेआम करके बनाया पाकिस्तान, उसी के वंसज आज ‘अरबपति’ बनके कर रहे भारत में ऐश, ‘ब्रिटानिया’ जैसी कंपनियों का डायरेक्ट ‘पाकिस्तान कनेक्शन’

कभी-कभी इतिहास के पन्नों में ऐसे-ऐसे राज़ दफन मिलते हैं जिन्हें सुनकर इंसान का दिमाग सुन्न पड़ जाता है। हम भारतीय सुबह उठते हैं, चाय का कप हाथ में लेते हैं और उसके साथ Britannia कंपनी का ‘गुड डे’ (Good Day) या ‘मैरी गोल्ड’ (Marie Gold) बिस्किट खाते हैं।

जब IPL का सीज़न आता है, तो टीवी के सामने बैठकर ‘पंजाब किंग्स’ (Punjab Kings) का मैच देखकर तालियां बजाते हैं। हम मॉल में जाकर ‘बॉम्बे डाइंग’ (Bombay Dyeing) के महंगे कपड़े खरीदते हैं।

हम और आप अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये सब करते हैं, बिना ये जाने की हमारा पैसा आखिर जा किसकी जेब में रहा है।

अगर मैं आपसे कहूं की ये सारी की सारी हज़ारों करोड़ की कंपनियों का असली मालिक कोई और नहीं, बल्कि उसी मोहम्मद अली जिन्ना का सगा पोता है जिसने भारत के दो टुकड़े करके जेहादी पाकिस्तान बनाया था, तो क्या आप यकीन करेंगे?

जी हां! मोहम्मद अली जिन्ना। वो जिन्ना जिसने ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के नाम पर कलकत्ता की सड़कों को बेगुनाह हिंदुओं के खून से लाल कर दिया था।

वो जिन्ना जिसने इस्लाम के नाम पर एक अलग मुल्क (पाकिस्तान) मांगा क्योंकि उसे लगता था की ‘काफिरों’ यानी हिंदुओं के साथ मुसलमान कभी सुरक्षित नहीं रह सकते।

आज उसी जिन्ना की सगी औलादें भारत में रहती हैं! वो पाकिस्तान नहीं गए। वो इसी भारत में, इसी मुंबई के पॉश इलाकों में बैठकर 50 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का व्यापार चला रहे हैं, और ‘अरबपति’ बने हुए हैं।

ये इतिहास का वो सबसे बड़ा मज़ाक है, जो चीख-चीख कर बता रहा है कि जिन्ना की उस जिहादी सोच और ‘टू-नेशन थ्योरी’ की असली औकात क्या थी।

पूरे देश में आग लगाकर खुद जेहादी जिन्ना की सगी बेटी ने पाकिस्तान जाने से कर दिया था साफ इनकार

इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है साल 1939 में। जिन्ना उस वक्त पूरे भारत में मुसलमानों का सबसे बड़ा नेता बनने की कोशिश कर रहा था।

वो जगह-जगह जाकर ज़हर उगल रहा था की हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग कौमें हैं और इनका एक साथ रहना नामुमकिन है।

लेकिन जिन्ना के इस जिहादी गुरूर को सबसे पहला और सबसे तगड़ा तमाचा किसी और ने नहीं, बल्कि उसके अपने ही घर में, उसकी इकलौती सगी बेटी ‘दीना जिन्ना’ (Dina Jinnah) ने मारा था।

दीना जिन्ना एक बेहद आज़ाद ख्यालों वाली लड़की थी। उसे अपने बाप की उस कट्टरपंथी और बंटवारे वाली राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था।

1939 में दीना ने एक बहुत बड़े पारसी उद्योगपति ‘नेविल वाडिया’ (Neville Wadia) से शादी करने का फैसला कर लिया।

जब ये बात जिन्ना को पता चली, तो उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जो आदमी पूरे देश के मुसलमानों का मसीहा बनने का नाटक कर रहा था, उसकी अपनी ही बेटी एक गैर-मुस्लिम से शादी कर रही थी! जिन्ना ने दीना को बहुत धमकाया।

ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताते हैं की जिन्ना ने अपनी बेटी से कहा था की “भारत में लाखों अच्छे मुस्लिम लड़के हैं, तुम किसी से भी शादी कर सकती हो।”

इस पर दीना ने पलटकर जो जवाब दिया, उसने जिन्ना की बोलती बंद कर दी थी। दीना ने कहा, “भारत में लाखों अच्छी मुस्लिम लड़कियां भी थीं, फिर आपने एक पारसी (जिन्ना की पत्नी रत्ती बाई पारसी थीं) से शादी क्यों की थी?”

इसके बाद जिन्ना ने अपनी इकलौती बेटी से सारे रिश्ते तोड़ लिए। 1947 का वो मनहूस साल आया। जिन्ना ने लाशों के ढेर पर अपना नया देश ‘पाकिस्तान’ हासिल कर लिया। वो कराची चला गया और पाकिस्तान का पहला गवर्नर जनरल बन गया।

उसने अपनी बेटी दीना को भी पाकिस्तान बुलाया। लेकिन दीना वाडिया ने साफ मना कर दिया। उसे बहुत अच्छे से पता था की इस्लाम और नफरत की बुनियाद पर बना वो मुल्क एक जहन्नुम से कम नहीं होगा।

दीना वाडिया अपने पारसी पति नेविल वाडिया के साथ मुंबई (भारत) में ही रुक गईं। ज़रा इस कॉस्मिक जोक को देखिए।

जिस आदमी ने कहा था की हिंदू देश में मुसलमान सेफ नहीं हैं, उसकी अपनी ही बेटी ने उस इस्लामी देश पर थूक दिया और हिंदुओं के उसी देश को अपना घर चुना।

दीना वाडिया 2017 तक ज़िंदा रहीं, न्यूयॉर्क और मुंबई में अपना जीवन बिताया, लेकिन वो पाकिस्तान में बसने कभी नहीं गईं।

Britannia से लेकर IPL टीम तक, जिन्ना का सगा नाती नुस्ली वाडिया जो आज हिंदुओं के ही पैसों से अरबपति बनकर कर रहा भारत में ऐश

ज़रा सोचिए, जो इंसान भारत माता के दो टुकड़े करने का सबसे बड़ा मुजरिम था, आज उसी का सगा खून हमारे ही देश में बैठकर अरबों रुपयों के गद्दे पर सो रहा है। दीना वाडिया (जिन्ना की बेटी) का एक बेटा है, जिसका नाम है- नुस्ली वाडिया (Nusli Wadia)।

रिश्ता सीधा और साफ है भाई, ये नुस्ली वाडिया उसी मोहम्मद अली जिन्ना का सगा नाती (Grandson) है जिसके हाथ हमारे लाखों पूर्वजों के खून से सने हुए हैं।

आज ये नुस्ली वाडिया कोई सड़क पर घूमने वाला आम आदमी नहीं है। ये इंसान भारत के सबसे पुराने और सबसे अमीर बिज़नेस घरानों में से एक ‘वाडिया ग्रुप’ (Wadia Group) का मालिक और चेयरमैन बना बैठा है।

अभी अगर आप फोर्ब्स (Forbes) या किसी भी बड़ी फाइनैंशियल मैगजीन का डाटा उठाकर देखेंगे, तो आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी।

इस जिन्ना के पोते की कुल संपत्ति 4 से 5 बिलियन डॉलर आंकी गई है! भारतीय रुपयों में हिसाब लगा लें तो ये करीब 35 से 40 हज़ार करोड़ रुपये बनता है!

नुस्ली वाडिया आज की तारीख में भारत के टॉप अरबपतियों में गिने जाते हैं। इनके दो बेटे हैं- नेस वाडिया (Ness Wadia) और जहांगीर वाडिया (Jehangir Wadia), जो जिन्ना के परपोते (Great-grandsons) हैं।

आज भारत का हर आम नागरिक जाने-अनजाने में इस परिवार की कंपनियों का कोई ना कोई प्रोडक्ट ज़रूर इस्तेमाल कर रहा है।

आप रोज़ सुबह जिस ‘ब्रिटानिया’ (Britannia Industries) के बिस्किट खाते हैं, चाहे वो ‘Good Day’ हो, 50-50 हो या Marie Gold.. इस पूरी की पूरी ब्रिटानिया कंपनी का मालिकाना हक इसी वाडिया ग्रुप के पास है। नुस्ली वाडिया ही इसके चेयरमैन रहे हैं।

भारत की सबसे मशहूर और पुरानी कपड़ा मिलों में से एक ‘बॉम्बे डाइंग’ (Bombay Dyeing) भी जिन्ना के इन्ही वंशजों की कंपनी है। इसके तौलिए, इसके बेडशीट और इसके कपड़े हर दूसरे घर में मिल जाएंगे।

हम उसी बेडशीट पर चैन की नींद सोते हैं जो जिन्ना के पोते की फैक्ट्री से बनकर आती है। आसमान में उड़ने वाली ‘Go First’ एयरलाइंस को भी जहांगीर वाडिया ने ही शुरू किया था।

और तो और, जब आप क्रिकेट के सबसे बड़े त्योहार आईपीएल (IPL) का मज़ा लेते हैं, तो उसमें जो ‘पंजाब किंग्स’ (Punjab Kings) की टीम है, उसके को-ओनर नेस वाडिया ही हैं।

वही नेस वाडिया जिनका बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा के साथ अफेयर और बाद में विवाद बहुत ज़्यादा चर्चा में रहा था।

अब एक पल के लिए इस पूरी स्थिति की कल्पना कीजिए। भारत के लाखों-करोड़ों हिंदू इन कंपनियों में काम कर रहे हैं, इनके बिस्किट खरीद रहे हैं, इनकी क्रिकेट टीमों को चीयर कर रहे हैं।

हम भारतीय कितने सहज और सहनशील हैं! हमने कभी जिन्ना की उस खौफनाक नफरत का बदला उसके नाती-पोतों से नहीं लिया। हमने कभी नहीं कहा की तुम जिन्ना के खून हो तो हम तुम्हारा बिस्किट नहीं खाएंगे।

लेकिन दूसरी तरफ ज़रा उस पाकिस्तान को देखिए जिसे जिन्ना ने बनाया था! आज वो मुल्क दाने-दाने को मोहताज है। वहां आटा खरीदने के लिए लोग ट्रकों के पीछे दौड़ते हुए कुचल कर मर रहे हैं।

आईएमएफ (IMF) से भीख का कटोरा लेकर पूरी दुनिया में घूम रहे हैं। और जिस आदमी ने वो जहन्नुम बनाया, उसका खुद का खून, उसके अपने सगे नाती-पोते आज भारत में 50 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा के अंपायर के मालिक बनकर बैठे हैं।

क्या पाकिस्तान में किसी बड़े हिंदू या सिख नेता के परिवार को इस तरह से अरबपति बनकर जीने की छूट मिलती? वहां तो उन्हें कबका ईशनिंदा के झूठे केस में फंसाकर सरेआम फांसी पर लटका दिया गया होता या भीड़ उन्हें पत्थरों से मार डालती।

मुंबई में जिन्ना की बेटी का ‘जिन्ना हाउस’ के लिए वो हाई प्रोफाइल ड्रामा और भारत सरकार का पाकिस्तान पर डंडा

इस पूरे ड्रामे में एक और चीज़ है जो आज भी मुंबई के सबसे पॉश इलाके ‘मालाबार हिल’ (Malabar Hill) में खड़ी है और जिसे देखकर पाकिस्तानियों की रूह में आग लग जाती है। वो है ‘जिन्ना हाउस’ (Jinnah House)।

बंटवारे से पहले, जब जिन्ना मुंबई में रहता था, तो उसने मालाबार हिल में 2.5 एकड़ की एक बेहद आलीशान ज़मीन पर एक शानदार बंगला बनवाया था।

उस ज़माने में उस बंगले को बनाने में लाखों रुपये लगे थे और इटली से मार्बल मंगाया गया था। 1947 में जब जिन्ना पाकिस्तान भाग गया, तो ये बंगला भारत में ही रह गया।

अब ज़रा पाकिस्तानियों की बेशर्मी देखिए! ये भिखारी देश दशकों से भारत सरकार के सामने गिड़गिड़ाता आ रहा है की “ये जिन्ना हाउस हमारे राष्ट्रपिता का घर है।

हमारी भावनाएं इससे जुड़ी हैं। ये बंगला हमें दे दो ताकि हम वहां मुंबई में अपना पाकिस्तानी दूतावास (Consulate) खोल सकें।”

लेकिन इसी बीच कहानी में एक ज़बरदस्त ट्विस्ट आ गया। जिन्ना की बेटी दीना वाडिया ने भारत की अदालत में एक केस ठोक दिया।

दीना ने कोर्ट में कहा की “मैं मोहम्मद अली जिन्ना की इकलौती सगी वारिस हूं। इसलिए इस जिन्ना हाउस पर सिर्फ और सिर्फ मेरा हक़ है। पाकिस्तान का इस प्रॉपर्टी से कोई लेना-देना नहीं है।”

सोचिए, पाकिस्तान के लिए इससे बड़ी बेइज़्ज़ती क्या होगी की उनके अपने राष्ट्रपिता की बेटी ही उन्हें ठेंगा दिखा रही थी! हालांकि, भारत सरकार भी किसी को ये बंगला खैरात में देने के मूड में नहीं थी।

भारत सरकार ने बहुत ही कड़ा रुख अपनाते हुए ‘शत्रु संपत्ति कानून’ (Enemy Property Act) का डंडा चला दिया।

सरकार ने डंके की चोट पर ऐलान कर दिया की जो लोग 1947 में भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे, उनकी सारी संपत्तियां अब ‘शत्रु संपत्ति’ मानी जाएंगी और उस पर सिर्फ और सिर्फ भारत सरकार का हक़ होगा।

आज वो करोड़ों-अरबों रुपये का आलीशान जिन्ना हाउस भारत सरकार के कब्ज़े में है। पाकिस्तान वहां अपना झंडा फहराने का जो ख्वाब देख रहा था, उस पर हमारी सरकार ने पानी फेर दिया है।

सरकार इस बंगले को इंटरनेशनल कल्चरल सेंटर (International Cultural Centre) या किसी सरकारी इस्तेमाल में लाने की तैयारी में है। जिस घर में बैठकर भारत के टुकड़े करने की साज़िश रची गई थी, आज उस घर पर भारत का कानून चलता है!

पारसी समुदाय की शांति और जिन्ना के जिहादी मंसूबों का भारत की मिट्टी में हमेशा के लिए दफन होना

इस पूरे ऐतिहासिक ड्रामे का एक और बहुत बड़ा सच है, जिसे देश के आम नागरिक को जानना ही चाहिए। मोहम्मद अली जिन्ना ने क्या कहकर भारत को तोड़ा था?

उसने दुनिया भर में चीख-चीख कर कहा था की ‘इस्लाम खतरे में है’ और मुसलमानों को अपना मज़हब बचाने के लिए एक ‘अलग इस्लामिक देश’ चाहिए।

लेकिन आज ज़रा जिन्ना के अपने खानदान को देख लीजिए। दीना जिन्ना ने जब नेविल वाडिया से शादी की, तो वो वाडिया परिवार एक पारसी परिवार था।

नेविल वाडिया के पिता एक पारसी थे जिन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था, लेकिन नेविल वाडिया ने बाद में वापस अपना मूल पारसी धर्म अपना लिया था।

दीना जिन्ना (वाडिया) ने अपने बाप के उस कट्टर इस्लामिक मज़हब को उसी दिन ठोकर मार दी थी जब उन्होंने एक गैर-मुस्लिम से शादी की थी।

आज नुस्ली वाडिया, नेस वाडिया और जहांगीर वाडिया खुद को पारसी मानते हैं। पारसी समुदाय भारत का वो समुदाय है जिसने कभी इस देश से कोई अलग ज़मीन नहीं मांगी, जिसने कभी इस देश में कोई दंगा नहीं किया।

टाटा से लेकर वाडिया तक, इस पारसी समुदाय ने भारत की अर्थव्यवस्था को अपने खून-पसीने से सींचा है।

ज़रा सोचिए उस जिन्ना की आत्मा आज जहां भी होगी, वो कितनी तड़प रही होगी! जिस आदमी ने इस्लाम और जिहादी कट्टरपंथ के नाम पर बीस लाख बेगुनाहों का खून बहाया, उस आदमी का अपना सगा खून, उसकी अपनी पीढ़ियां आज उस मज़हब को मानती ही नहीं हैं!

जिन्ना के परपोते आज मंदिरों में भी जाते हैं, पारसी अगियारी में भी जाते हैं और भारत के उसी सेक्युलर और बहुलवादी समाज का हिस्सा बनकर जी रहे हैं जिसे जिन्ना मिटाना चाहता था।

जिन्ना की वो ‘टू-नेशन थ्योरी’ (Two-Nation Theory) उसी के घर में, उसी की बेटी और उसके नाती-पोतों ने जूतों तले कुचल कर भारत की मिट्टी में हमेशा-हमेशा के लिए दफन कर दी।

गजवा ए हिंद का सपना देखने वाले जिहादियों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है जिन्ना का खानदान

आज हमारे ही देश में, हमारे ही मोहल्लों में कुछ ऐसे मुल्ले और गद्दार बैठे हैं जो आज भी पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के जीतने पर छतों पर जाकर पटाखे फोड़ते हैं।

जिन्हें आज भी लगता है की शरिया कानून भारत के संविधान से बड़ा है और जो दिन-रात ‘गज़वा-ए-हिंद’ का खौफनाक सपना देखते हैं।

अरे गद्दारों! ज़रा अपनी आंखें खोलो और अपने उस ‘कायदे आज़म’ जिन्ना के खानदान की तरफ देखो। जिस आदमी ने तुम्हारे दिमाग में ये ज़हर भरा था की काफिरों (हिंदुओं) के देश में तुम महफूज़ नहीं रह सकते, उस आदमी की अपनी सगी बेटी ने उसी काफिरों के देश को अपना घर चुना था।

जिन्ना को पता था की उसने जो पाकिस्तान बनाया है, वो असल में एक सुलगता हुआ जहन्नुम है। वहां ना तो कोई कानून है, ना कोई इंसानियत है और ना ही कोई भविष्य है। आज पाकिस्तान की हालत क्या है?

वहां शिया-सुन्नी आपस में एक-दूसरे की मस्जिदों में बम फोड़ रहे हैं। वहां का युवा आटे की बोरियों के लिए ट्रकों के पीछे जानवरों की तरह भाग रहा है। वहां की सरकारें विदेशी कर्ज़े चुकाने के लिए अपने देश के गधे और सूअर तक चीन को बेच रही हैं।

और दूसरी तरफ वो भारत है जिसे जिन्ना ने नफरत की आग में जलाया था। आज वही भारत दुनिया की सबसे तेज़ भागती हुई अर्थव्यवस्था है।

और सबसे बड़ा मज़ाक तो ये है की भारत की उसी अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा खुद जिन्ना के अपने नाती-पोते (वाडिया ग्रुप) चला रहे हैं।

ये इस बात का सबसे बड़ा और चीखता हुआ सुबूत है कि शांति, सुरक्षा, दौलत और आज़ादी सिर्फ और सिर्फ सनातनियों की ज़मीन पर मिल सकती है।

जहाँ हिंदू बहुसंख्यक है, वहां जिन्ना का परपोता भी अरबपति बनकर सीना तानकर घूम सकता है। लेकिन जहाँ जिहादी बहुसंख्यक हो जाएं (जैसे पाकिस्तान), वहां खुद जिन्ना का बनाया हुआ देश भी भीख का कटोरा लेकर पूरी दुनिया में जलील होता है।

अगर भारत के उन कट्टरपंथी शांतिदूतों में ज़रा सी भी शर्म बची है, तो उन्हें वाडिया परिवार के इस इतिहास को फ्रेम करवाकर अपने घरों में टांग लेना चाहिए।

ये उन्हें रोज़ याद दिलाएगा की भारत से गद्दारी करने वालों का अंजाम हमेशा खौफनाक होता है और सुकून सिर्फ सनातन की मिट्टी में है।

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