मुल्लों की 'चार बीवियों' वाली अय्याशी खत्म! हलाला से लेकर 'तीन तलाक' जैसी 'कुरीतियों' पर मध्य प्रदेश में 'परमानेंट बैन', 'मजहबी आतंकियों' को कुचलने के लिए पूरे देश को ऐसे ही बेखौफ UCC कानून की दरकार

मुल्लों की ‘चार बीवियों’ वाली अय्याशी खत्म! हलाला से लेकर ‘तीन तलाक’ जैसी ‘कुरीतियों’ पर मध्य प्रदेश में ‘परमानेंट बैन’, ‘मजहबी आतंकियों’ को कुचलने के लिए पूरे देश को ऐसे ही बेखौफ UCC कानून की दरकार

आज मध्य प्रदेश की ज़मीन पर से सेक्युलरिज्म की अर्थी उठ चुकी है। दशकों से कांग्रेस ने अपने वोटबैंक के लालच में इन मौलवियों और जिहादियों को सिर पर बिठा रखा था। पर अब? अब इनका ये जेहादी इकोसिस्टम ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है।

रविवार, 19 जुलाई 2026! ये वो ऐतिहासिक दिन बन गया है जब मुख्यमंत्री मोहन यादव की धाकड़ सरकार ने एक स्पेशल कैबिनेट मीटिंग बुलाई।

और ये मीटिंग कहाँ हुई? भोपाल के पास जगदीशपुर में। वही जगदीशपुर जिसका नाम मुगलों और जेहादियों ने बदलकर ‘इस्लामनगर’ रख दिया था।

उसी जगदीशपुर की ज़मीन पर बैठकर मोहन सरकार ने इन मुल्लों के शरिया की कब्र खोदते हुए ‘समान नागरिक संहिता (UCC) 2026’ के ड्राफ्ट को पूरी तरह से पास कर दिया।

इस ड्राफ्ट के जरिये मुल्लों के तीन तलाक़, बहुविवाह, और हलाला जैसी कुप्रथाओं पर मध्य प्रदेश में परमानेंट हथोड़ा मार दिया है।

आज 20 जुलाई 2026 से MP विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हो गया है और इस सत्र में ये UCC बिल सीधे टेबल पर आ रहा है।

जैसे ही ये खबर बाहर आई है ना, पूरे देश के कट्टरपंथियों, फतवेबाज़ मौलवियों और जेहादी ठेकेदारों की सांसें उखड़ गई हैं।

ये लोग छाती पीट-पीटकर रो रहे हैं की “हाय अल्लाह, हमारा शरिया खतरे में आ गया!”

अरे भाई, ये भारत है, यहाँ कोई सातवीं सदी का कबीलाई कानून नहीं चलेगा। अब तक ये लोग मुगलों वाले कानून की आड़ में जो दादागिरी काट रहे थे, उस पर अब मध्य प्रदेश में हमेशा के लिए फुल-स्टॉप लग चुका है।

चार बीवियों की अय्याशी का लाइसेंस रद्द, ‘तीन तलाक़’ और हलाला की दरिंदगी पर चला मध्य प्रदेश में खौफनाक बुलडोज़र

अब ज़रा इन फतवेबाज़ों के दर्द की असली वजह पर आते हैं। सालों से इन लोगों ने अपने मजहब की आड़ में औरतों को सिर्फ एक खिलौना समझ रखा था।

जब मन किया शादी कर ली, जब मन भर गया तो जुबानी तलाक-तलाक-तलाक बोलकर उस बेचारी औरत को सड़क पर धक्के खाने के लिए फेंक दिया।

और अगर दोबारा उसी बीवी को घर बसाना हो, तो ‘हलाला’ के नाम पर उस बेचारी को जिस्म की मंडी में धकेल दो, किसी और मौलवी के साथ सम्बन्ध बनाने पर मजबूर करो!

ज़रा सोचिए, क्या कोई सभ्य समाज ऐसी जानवरों वाली दरिंदगी बर्दाश्त कर सकता है?

लेकिन पुरानी सरकारों ने मुल्लों के वोटबैंक के लिए इस नंगे नाच को खुली छूट दे रखी थी। मुगलों के इसी शरिया की आड़ में ये कट्टरपंथी 4-4 बीवियां रखकर अय्याशी काटते थे और सूअरों की तरह बच्चे पैदा करके हमारी डेमोग्राफी का बैलेंस बिगाड़ रहे थे।

पर अब मध्य प्रदेश में इन जेहादियों की ये अय्याशी हमेशा के लिए खत्म कर दी गई है। नए UCC कानून ने साफ कर दिया है की बहुविवाह (Polygamy) अब पूरी तरह से गैर-कानूनी है।

चाहे तुम किसी भी मजहब के हो, शादी सिर्फ एक ही होगी। और वो जो तीन तलाक और हलाला वाली घिनौनी प्रथा थी ना? उसे तो सरकार ने सीधा दंडनीय अपराध (Criminal Offence) बना दिया है।

मतलब, अब अगर किसी जेहादी ने हलाला के नाम पर किसी औरत की इज्जत के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की, तो पुलिस उसे सीधा कॉलर से पकड़कर जेल की चक्की पीसने के लिए अंदर डाल देगी।

सीएम मोहन यादव ने डंके की चोट पर पूरे आंकड़े खोलकर रख दिए हैं। उन्होंने साफ बताया है कि राज्य की 80% से ज्यादा मुस्लिम औरतें इस UCC बिल के फुल सपोर्ट में खड़ी हैं।

और यही बात इन शरिया के दलालों को सबसे ज्यादा चुभ रही है। मौलवियों को दिख गया है की अब उनकी फतवों वाली दुकान बंद हो गई है।

अब वो औरतों को डरा-धमका कर अपना मजहबी सिक्का नहीं चला पाएंगे। उनका ये जो 4-4 शादियों वाला अय्याशी का लाइसेंस था, उसे मोहन सरकार ने फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया है।

लिव इन रिलेशनशिप के नाम पर लव जिहाद करने वाले भेड़ियों का परमानेंट इलाज, अब होगी सीधे जेल

भाई, ये वाला जो नियम आया है ना, इसने तो पूरे लव जिहाद वाले सिंडिकेट की बैंड बजा कर रख दी है। आजकल हो क्या रहा था?

नाम छुपाओ, हाथ में कलावा बांधो, माथे पर तिलक लगाओ और हमारी मासूम हिंदू बेटियों को अपने झूठे प्यार के जाल में फंसा लो।

फिर ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ (Live-in Relationship) के नाम पर उन्हें किराए के फ्लैट में रखो, उनका ब्रेनवॉश करो, उन्हें इस्लाम कुबूल करने पर मजबूर करो और अगर लड़की ना माने, तो उसे सूटकेस में या फ्रिज में काटकर फेंक दो!

ये लव जिहाद कोई नॉर्मल क्राइम नहीं था, ये बाकायदा एक पूरी की पूरी जेहादी इंडस्ट्री बन चुका था। पर अब मोहन यादव ने नए UCC ड्राफ्ट के तहत लिव-इन रिलेशनशिप पर ऐसा खौफनाक डंडा चलाया है की अच्छे-अच्छों का पसीना छूट गया है।

अब नियम ये है की अगर कोई भी जोड़ा लिव-इन में रहना चाहता है, तो उसे 1 महीने के अंदर सरकार के पास बाकायदा अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

पूरी कुण्डली देनी पड़ेगी की लड़का कौन है, उसका असली मजहब क्या है और वो कहाँ से आया है। मतलब, अब कोई ‘अब्दुल’ अपना नाम ‘राहुल’ या ‘रवि’ बताकर हमारी हिंदू बेटियों को लिव-इन के धोखे में नहीं रख पाएगा।

और अगर किसी ने ज्यादा होशियारी दिखाई? अगर किसी ने अपनी पहचान छिपाई या सरकार को बिना बताए लिव-इन में अय्याशी करने की कोशिश की?

तो भाई, कानून एकदम सख्त है! बिना किसी रहम के सीधे 3 से 6 महीने तक की जेल होगी और साथ में 25,000 रुपये तक का भारी जुर्माना भी ठोंका जाएगा।

ज़रा सोचिए, इस एक कानून ने लव जिहादियों के पूरे नेटवर्क में कैसी भयंकर आग लगा दी है। अब किसी भी हिंदू बेटी को अपनी गंदी नज़र और कट्टरपंथ का शिकार बनाने से पहले इन जेहादियों को सौ बार सोचना पड़ेगा, क्योंकि इन्हें पता है की अब राज्य में वो सरकार है जो सीधे जेल में ठूंसती है और इनका सारा जेहादी भूत उतार देती है।

बेटियों को संपत्ति में बराबर का हक देकर मध्य प्रदेश सरकार ने काट दी मुस्लिम पर्सनल लॉ की जड़ें

इस UCC ड्राफ्ट का एक और ऐसा खौफनाक हथौड़ा है, जिसने सीधे मुस्लिम पर्सनल लॉ की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। वो है- संपत्ति में महिलाओं को बराबरी का अधिकार।

सालों से इस देश में क्या चल रहा था? मुस्लिम पर्सनल लॉ के नाम पर बेटियों के हकों पर सरेआम डाका डाला जा रहा था।

इस्लामी कानून के हिसाब से अगर किसी बाप की जायदाद बंटती थी, तो बेटे को बेटी के मुकाबले दोगुना या पूरा हिस्सा मिल जाता था और बेचारी बेटी को ना के बराबर कुछ टुकड़ों पर संतोष करना पड़ता था।

क्या ये न्याय है? क्या ये औरतों का सम्मान है? लेकिन पुरानी तुष्टिकरण वाली सरकारें इस नाइंसाफी पर अपनी आंखें मूंदे बैठी थीं, क्योंकि उन्हें मौलवियों का वोटबैंक प्यारा था। पर मध्य प्रदेश सरकार ने इस नाइंसाफी की जड़ें हमेशा के लिए उखाड़ फेंकी हैं।

नए UCC कानून ने डंके की चोट पर लिख दिया है की चाहे तुम किसी भी मजहब के हो, बाप की संपत्ति में बेटे और बेटी का हिस्सा एकदम 50-50 होगा।

कोई भी शरिया या कोई भी मौलवी अब किसी बेटी का हक नहीं मार सकता।

और ज़रा देखिए, आज वो कांग्रेसी फेमिनिस्ट औरतें कहाँ छुपकर बैठी हैं जो दिन-रात महिला सशक्तिकरण का ज्ञान बांटती हैं?

जब मध्य प्रदेश सरकार मुस्लिम औरतों को उनका असली और कानूनी हक दिला रही है, तब इन सेक्युलर गैंग की औरतों के मुंह में दही क्यों जम गया है?

क्योंकि इनका एजेंडा सिर्फ हिंदुओं को गाली देना है। जब बात कट्टरपंथियों के शरिया पर आती है, तो इन सबकी ज़बान को लकवा मार जाता है।

मोहन सरकार ने इन दोगले वामपंथियों और कट्टरपंथियों दोनों के मुंह पर एक साथ ऐसा तमाचा जड़ा है, जिसकी गूंज दशकों तक सुनाई देगी।

मध्य प्रदेश ने दिखा दिया रास्ता, अब मजहबी कट्टरपंथियों को सबक सिखाने के लिए पूरे देश को चाहिए ऐसा ही बेखौफ UCC कानून

मध्य प्रदेश ने आज पूरे देश को एक ऐसा ‘रोल मॉडल’ दे दिया है, जिसे अब रुकना नहीं चाहिए।

अगर हमें अपने सनातन को बचाना है, अगर हमें अपनी डेमोग्राफी को सुरक्षित रखना है और इस देश को ‘गज़वा-ए-हिंद’ बनाने का सपना देखने वाले कट्टरपंथियों को कुचलना है, तो ये ‘मोहन यादव मॉडल’ ही एकमात्र रास्ता है।

हमेशा से हम यही तो कहते आए हैं की जब देश एक है, तिरंगा एक है, तो ये मजहब के नाम पर अलग-अलग कानूनों की दुकानें क्यों चलनी चाहिए?

मध्य प्रदेश ने तो अपना काम कर दिया, अब बारी है केंद्र सरकार और देश के बाकी राज्यों की। चाहे वो उत्तर प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो या कोई और राज्य- जहाँ-जहाँ ये मजहबी ठेकेदार अपनी जड़ों को मज़बूत कर रहे हैं, वहां इसी तरह का बेखौफ और निर्दयी बुलडोज़र चलना चाहिए।

अब देश की संसद को बिना किसी देरी के, पूरे भारत के लिए एक कड़क और राष्ट्रीय ‘समान नागरिक संहिता’ (UCC) लानी चाहिए।

जो लोग इसका विरोध करें, जो सड़कों पर उतरकर दंगा करने की धमकी दें, उनका इलाज वही होना चाहिए जो आज उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हो रहा है।

बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान के आर्टिकल 44 में जिस ‘एक देश एक कानून’ का सपना देखा था, उसे नेहरू और कांग्रेस ने वोटबैंक के लिए मार दिया था।

लेकिन अब वक्त आ गया है की उस सपने को पूरे देश की ज़मीन पर उतारा जाए। ये भारत माता की धरती है, यहाँ कोई जिहादी शरिया नहीं चलेगा, यहाँ चलेगा तो सिर्फ और सिर्फ अखंड भारत का एक विधान!

जब तक आखिरी इस्लामिक कुरीति को इस पवित्र ज़मीन से बाहर नहीं फेंक दिया जाता, तब तक ये धर्मयुद्ध जारी रहेगा।

भारत माता की जय!

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