पूरी दुनिया कर रही आसमान में जिहादी साज़िश नाकाम करने वाले ‘कैप्टन स्मित’ की तारीफ, लेकिन यहूदियों को बचाने की वजह से कांग्रेस ने फेर ली आंखें, क्या विपक्ष के लिए मुस्लिम तुष्टीकरण ही ‘असली राष्ट्रनीति’

हमारे देश की राजनीति का भी ना एक अलग ही मिज़ाज है। अगर गाज़ा या फीलस्तीन में किसी को एक खरोच भी आ जाये, तो हमारे देश की विपक्षी राजनीतिक पार्टियां आसमान सर पे उठा लेती हैं, ट्वीट्स पे ट्वीट्स (Tweets) छपने शुरू हो जाते हैं..

दिन रात हैशटैग ट्रेंड होने शुरू हो जाते हैं।

लेकिन जब कोई हिंदुस्तानी शेर अपनी जान पर खेलकर 175 लोगों की जान बचाता है, तो अचानक देश के एक खास राजनीतिक धड़े (विपक्ष) को सांप क्यों सूंघ जाता है?

आखिर ऐसा क्या हो गया की कल तक हर छोटी बात पर ट्वीट करने वाले नेताओं के उंगलियों में लकवा मार गया है?

इस ‘चुप्पी’ के पीछे का काला सच समझने के लिए आपको पहले उस खौफनाक घटना के ग्राउंड ज़ीरो पर चलना होगा।

आसमान में मौत से भिड़ता 38 साल का जांबाज भारतीय कैप्टन और 9/11 जैसा वो जिहादी प्लान

तारीख थी 30 सितंबर 2026। दुबई से इज़राइल के ‘तेल अवीव’ के लिए फ्लाईदुबई (Flydubai) एयरलाइंस की फ्लाइट FZ1073 ने उड़ान भरी।

प्लेन में कुल 174 यात्री और 6 क्रू मेंबर सवार थे। चूंकि फ्लाइट इज़राइल जा रही थी, इसलिए इसमें बैठे लगभग सभी यात्री इज़राइली नागरिक थे, यानी यहूदी (Jews) थे।

इस फ्लाइट के कैप्टन थे 38 साल के स्मित मच्छर (Smit Machchhar)। मूल रूप से गुजरात के रहने वाले कैप्टन स्मित बेहद अनुभवी, शांत और अपने काम के पक्के हिंदुस्तानी पायलट हैं।

लेकिन कैप्टन स्मित को भी अंदाज़ा नहीं था की उस दिन उनके बगल की सीट पर बैठा को-पायलट दरअसल इंसान के भेष में एक जिहादी आतंकी था।

आसमान में 34,000 फीट की ऊंचाई पर ओमान के रहने वाले उस मुस्लिम को-पायलट ने अपने बैग से एक बड़ा सा चाकू निकाला और कैप्टन स्मित पर पीछे से जानलेवा हमला कर दिया।

इस ओमानी को-पायलट का मकसद बिल्कुल साफ था- कैप्टन स्मित का गला रेतो, कॉकपिट पर कब्ज़ा करो और फिर उस भारी-भरकम बोइंग विमान को सीधे इज़राइल के किसी बड़े शहर में ले जाकर क्रैश करा दो। बिल्कुल अमेरिका के 9/11 हमले की तरह!

वो यहूदियों का एक बड़ा नरसंहार करना चाहता था।

खुद लहूलुहान होकर भारतीय पायलट ने आसमान में बचाई 175 यहूदियों की जान

अब आप उस 38 साल के हिंदुस्तानी शेर का जिगरा देखिए। कॉकपिट के अंदर वो आतंकी को-पायलट अंधाधुंध चाकू मार रहा था।

स्मित लहूलुहान हो चुके थे, खून की धार बह रही थी। इसी हाथापाई में प्लेन का कंट्रोल बिगड़ गया और वो भारी-भरकम विमान तेज़ी से नीचे की तरफ जाने लगा!

खून से लथपथ कैप्टन स्मित को एहसास हो गया था की अगर ये को-पायलट दरवाज़ा लॉक करने में कामयाब हो गया, तो पीछे बैठे 175 लोगों को कोई नहीं बचा पाएगा।

उस खौफनाक वक्त में स्मित ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और अपनी बची-खुची सारी ताकत बटोर कर उस आतंकी को पीछे धकेला।

जान जा रही थी, शरीर से खून बह रहा था, लेकिन इस हिंदुस्तानी शेर ने हार नहीं मानी। उसने झपटकर कॉकपिट का दरवाज़ा अंदर से अनलॉक कर दिया!

बस यही वो मास्टरस्ट्रोक था जिसने उस जिहादी के 9/11 वाले प्लान की धज्जियां उड़ा दीं। दरवाज़ा खुलते ही बाहर से क्रू मेंबर और इज़राइली यात्री अंदर घुस आए और उन्होंने उस को-पायलट को दबोच लिया।

175 जानें बच गईं, और एक बहुत बड़ा इतिहास रच दिया गया।

इज़राइल से लेकर अमेरिका तक बज रहा डंका और दुनिया कर रही भारत के इस लाल की तारीफ

आज पूरी दुनिया इस हिंदुस्तानी पायलट के जज़्बे को सलाम ठोक रही है। एक निहत्थे इंसान ने हवा में वो कर दिखाया जो कई बार बड़े-बड़े कमांडोज़ भी नहीं कर पाते।

इज़राइल में तो कैप्टन स्मित आज किसी भगवान की तरह पूजे जा रहे हैं। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने सरेआम मीडिया में आकर कैप्टन स्मित को “सच्चा हीरो” (True Hero) बताया।

इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग और वहां की संसद के स्पीकर आमिर ओहाना ने इस भारतीय पायलट की बहादुरी के कसीदे पढ़े हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी की इज़राइल की सड़कों पर आम जनता इतनी भावुक है की वो कैप्टन स्मित के सम्मान में एक खास ‘इंडियन फूड डे’ (Indian Food Day) मनाने की मांग कर रही है। ये होता है असली सम्मान!

और सिर्फ इज़राइल ही क्यों? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) तक ने इस घटना पर बयान दिया है।

ट्रंप ने साफ़ शब्दों में कहा, “खून से लथपथ होने के बावजूद उस बुरी हालत में कॉकपिट का दरवाज़ा खोलने का सेंस (Presence of mind) दिखाना… वो सच में एक कमाल का हीरो है।”

अपने देश की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तुरंत अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कैप्टन स्मित से सीधे वीडियो कॉल पर बात की।

पीएम मोदी ने स्मित को असली ‘हीरो’ बताया और भरोसा दिया की भारत सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है। (बता दें की कैप्टन स्मित को अबू धाबी के एक बड़े अस्पताल में एयरलिफ्ट किया गया है, जहाँ वो चाकू के गहरे घावों से रिकवर कर रहे हैं)।

पूरी दुनिया इस हिंदुस्तानी शेर के सजदे में झुकी हुई है। लेकिन… और ये लेकिन बहुत बड़ा है दोस्त! इसी भारत में एक ऐसा राजनीतिक धड़ा भी है, जिसे इस बहादुरी में भी अपना ‘नुकसान’ नज़र आ रहा है।

एक तरफ जहां पूरी दुनिया तालियां पीट रही है, वहीं भारत की सबसे पुरानी पार्टी (कांग्रेस) और उनका पूरा ‘इंडी गठबंधन’ मानो कोमा में चला गया है।

“सेक्युलर” सन्नाटा… 175 जानें बचाने पर भी देश के विपक्ष के मुंह में क्यों जम गया है दही?

अब आते हैं इस पूरी कहानी के सबसे कड़वे हिस्से पर।

आज पूरी दुनिया में भारत का नाम चमक रहा है, इज़राइल से लेकर अमेरिका तक के अख़बारों के फ्रंट पेज पर हमारे देश के कैप्टन स्मित की तस्वीर छपी है।

लेकिन… ज़रा अपने देश के विपक्ष और इस तथाकथित ‘इंडी गठबंधन’ के बड़े-बड़े नेताओं के X (ट्विटर) हैंडल चेक कीजिए। वहां आपको एक अजीब सा, डरावना और “सेक्युलर” सन्नाटा पसरा हुआ मिलेगा!

जिन नेताओं की उंगलियां हर छोटी-मोटी घटना पर ट्वीट करने के लिए बेताब रहती हैं, जो विदेश में किसी अनजान से मुद्दे पर भी ज्ञान बांटने से पीछे नहीं हटते, आज उन्हें अचानक क्या हो गया?

कैप्टन स्मित के सम्मान में कांग्रेस या किसी भी विपक्षी पार्टी के नेता के मुंह से एक ‘उफ़’ तक नहीं निकली।

क्या यहूदियों को बचाना कोई ‘पॉलिटिकल गुनाह’ है? विपक्ष का मुस्लिम वोटबैंक का वो खौफ जिसने इंसानियत को कर दिया तीतर-बितर

अब आप सोच रहे होंगे की आख़िर विपक्ष को कैप्टन स्मित की तारीफ करने में दिक्कत क्या है? क्या ये महज़ अनदेखी है?

जी नहीं! राजनीति में कोई भी चुप्पी बिना वजह नहीं होती। इस सन्नाटे के पीछे एक बहुत गहरी और घिनौनी साइकोलॉजी काम कर रही है।

आप क्रोनोलॉजी समझिए। अगर आज कांग्रेस या कोई भी विपक्षी नेता कैमरे के सामने आकर कैप्टन स्मित की पीठ थपथपाता है, तो इसका सीधा सा मतलब क्या होगा?

इसका मतलब होगा की वो नेता उस ओमानी को-पायलट की जिहादी और आतंकी सोच की सरेआम निंदा कर रहा है! इसका मतलब होगा की वो इज़राइल और यहूदियों के प्रति हमदर्दी दिखा रहा है।

और यहीं आकर विपक्ष के पसीने छूट जाते हैं।

इन्हें रात-दिन बस एक ही खौफ सताता रहता है- “हमारा घरेलू मुस्लिम वोट बैंक खिसक जाएगा!”

विपक्ष को लगता है की अगर उन्होंने यहूदियों को बचाने वाले एक हिंदू/भारतीय पायलट की तारीफ कर दी, तो उनके जो कट्टरपंथी वोटर हैं, वो उनसे खफ़ा हो जाएंगे।

ये कोई मज़ाक नहीं है, ये हमारे देश की राजनीति का वो कड़वा सच है जिसे देखकर किसी भी इंसान का खून खौल जाए।

वोटों की इस भूख ने हमारी राजनीति को इतना अंधा कर दिया है की आज इंसानियत, एक आम नागरिक का शौर्य और देश का गौरव भी ‘वोट बैंक’ के तराज़ू में तौला जाने लगा है।

विपक्ष को डर है की कहीं उनके मुंह से निकली एक तारीफ उनके उस वोट बैंक को नाराज़ न कर दे, जो इज़राइल के नाम से ही भड़कता है।

ये कैसी अजीब अकल्पनीय सोच है यार! मतलब आप अपने ही देश के एक असली हीरो को सिर्फ इसलिए इग्नोर कर रहे हैं क्योंकि उसने ‘गलत’ धर्म के लोगों की जान बचा ली?

शौर्य की कोई जात नहीं होती, पर भारत में तुष्टिकरण का मजहब जरूर होता है

जब कैप्टन स्मित 34,000 फीट की ऊंचाई पर कॉकपिट के अंदर मौत से दो-दो हाथ कर रहे थे.. तब क्या उन्होंने पीछे मुड़कर देखा था की केबिन में बैठे लोग हिंदू हैं, मुस्लिम हैं, ईसाई हैं या यहूदी हैं? बिल्कुल नहीं!

उस गुजराती शेर के लिए उस वक़्त सिर्फ एक ही चीज़ सर्वोपरि थी- इंसानियत और एक कैप्टन के तौर पर अपनी ड्यूटी। स्मित ने जान बचाते वक़्त किसी का धर्म नहीं पूछा।

लेकिन कितनी शर्मनाक बात है की हमारे देश की राजनीति इतनी गिर चुकी है की यहाँ किसी की बहादुरी और उसके बहाए गए खून को भी ‘वोट बैंक’ के फिल्टर से छाना जाता है।

जिस इंसान की तारीफ आज दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्कों के राष्ट्राध्यक्ष कर रहे हैं, उस इंसान को अपने ही देश के विपक्ष से एक शाबाशी तक नसीब नहीं हुई।

पूरी दुनिया कह रही है- “सैल्यूट टू इंडिया, सैल्यूट टू कैप्टन स्मित!” लेकिन हमारे विपक्ष का ये ‘तुष्टिकरण वाला सन्नाटा’ चीख-चीख कर गवाही दे रहा है की इनके लिए देश और इंसानियत से बढ़कर सिर्फ और सिर्फ इनका वोट बैंक है।

Scroll to Top