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ज्ञानवापी को हिंदुओं को सौंप दो… ASI की रिपोर्ट आने के बाद VHP ने रखी डिमांड

वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हुए सर्वेक्षण की रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने जिला अदालत में सौंप दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मस्जिद परिसर में एक शिवलिंग मिला है। इस दावे के बाद से पूरे देश में इस मामले को लेकर बहस छिड़ गई है।

हिंदू पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग मंदिर का ही एक हिस्सा है और इस मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर किया गया था। उन्होंने मांग की है कि इस शिवलिंग को हिंदुओं को सौंप दिया जाए और मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग कोई मंदिर का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक फव्वारा है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

मामले पर आगे क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जिला अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है और जल्द ही कोई फैसला सुनाया जा सकता है।

ASI रिपोर्ट में क्या कहा गया?

ASI की रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यहां पहले एक मंदिर था। इन साक्ष्यों में शामिल हैं:

  • मस्जिद परिसर की पश्चिमी दीवार में एक शिवलिंग मिला है। इस शिवलिंग की लंबाई 12 फीट 3 इंच और व्यास 3 फीट 8 इंच है।
  • मस्जिद परिसर में कई ऐसे पत्थर मिले हैं जिन पर हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां बनी हुई हैं।
  • मस्जिद परिसर में कई ऐसे स्तंभ मिले हैं जिन पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीकों को उकेरा गया है।

हिंदू पक्ष ने क्या मांग की?

हिंदू पक्ष ने मांग की है कि इस शिवलिंग को हिंदुओं को सौंप दिया जाए और मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह शिवलिंग मंदिर का ही एक हिस्सा है और इस मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर किया गया था।

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा, “यह शिवलिंग मंदिर का ही एक हिस्सा है और इस मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर किया गया था। इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि ज्ञानवापी मस्जिद एक हिंदू मंदिर था। हम मांग करते हैं कि इस शिवलिंग को हिंदुओं को सौंप दिया जाए और मस्जिद को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।”

मुस्लिम पक्ष ने क्या कहा?

मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह शिवलिंग कोई मंदिर का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक फव्वारा है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

मुस्लिम पक्ष के वकील अभय नाथ यादव ने कहा, “यह शिवलिंग कोई मंदिर का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक फव्वारा है। इस रिपोर्ट में कई गलतियां हैं। हम इस रिपोर्ट को चुनौती देंगे।”

मामले पर आगे क्या होगा?

मामले पर आगे क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जिला अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है और जल्द ही कोई फैसला सुनाया जा सकता है।

यदि अदालत हिंदू पक्ष की मांग को स्वीकार करती है, तो यह एक ऐतिहासिक फैसला होगा। यह फैसला भारत के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

निष्कर्ष:

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में हुए सर्वेक्षण की रिपोर्ट ने पूरे देश में एक नई बहस छिड़ गई है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह शिवलिंग मंदिर का ही एक हिस्सा है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह कोई मंदिर का हिस्सा नहीं है।

मामले पर आगे क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह स्पष्ट है कि यह मामला भारत के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

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