“सौ चूहे खाकर बिल्ली चली हज को!” ये पुरानी कहावत तो आप सबने सुनी ही होगी, लेकिन आज हमारे देश की राजनीति में ये एकदम सच साबित हो रही है।
सोचिए ज़रा, जिस आदमी का पूरा राजनीतिक इतिहास ही बाहुबल, गुंडागर्दी और दबंगई का रहा हो, वो आज अचानक से नैतिकता का चोला ओढ़कर देश को ज्ञान बांटने निकल पड़ा है।
और ज्ञान भी कैसा? सीधे हमारे सनातन धर्म, हमारे पवित्र भगवे और हमारे साधु-संतों को चोर साबित करने का!
ये पप्पू यादव जैसे नेता अपनी राजनीति चमकाने के चक्कर में इतने अंधे हो चुके हैं की अब सरेआम हमारे धर्म का मज़ाक उड़ाने लगे हैं।
राम मंदिर चंदा-चोरी के विरोध के नाम पर जो घटिया और नीच नौटंकी इस पप्पू यादव ने संसद के बाहर की है ना, उसने पूरे हिंदू समाज के सीने में आग लगा दी है।
संसद भवन के बाहर खेला गया सनातन को नीचा दिखाने का सबसे शर्मनाक खेल, पप्पू यादव का राम मंदिर चंदे पर बेशर्म नाटक
तारीख थी 31 जुलाई 2026। जगह थी संसद भवन का मकर द्वार।
वहां पूर्णिया से जीतकर आए निर्दलीय सांसद (जिन्हें पूरा बिहार एक बाहुबली के रूप में जानता है) पप्पू यादव एक ऐसा भेष बनाकर बैठ गए जिसे देखकर किसी भी सनातनी का खून खौल उठे।
पप्पू यादव पूरे भगवा कपड़े पहनकर, गले में बड़ी-बड़ी रुद्राक्ष की मालाएं डालकर और माथे पर तिलक लगाकर एक साधु के भेष में ज़मीन पर बैठे थे।
उनके सामने एक दान पेटी रखी थी, जिस पर राम मंदिर के चंदे का ज़िक्र था।
अब आप इस ‘स्ट्रीट प्ले’ यानी नुक्कड़ नाटक की नीचता का लेवल देखिए। इस नाटक में जान फूंकने के लिए वहां INDI Alliance के युवराज राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी के सांसद भी पहुँच गए।
बकायदा कैमरे ऑन थे, मीडिया खड़ी थी। राहुल गांधी आते हैं और पप्पू यादव की उस दान पेटी में चंदा डालते हैं।
और उसके बाद? उसके बाद ये पप्पू यादव, जो एक हिंदू साधु का भेष बनाए बैठा था, उस दान पेटी से पैसे निकालता है, अपनी जेब में ठूंसता है और कैमरे के सामने ‘चंदा चोर’ होने की एक्टिंग करता है!
मतलब हद है यार! विरोध राम मंदिर ट्रस्ट का करना था या सरकार का करना था, लेकिन तुमने अपने नाटक के लिए भेष किसका चुना? एक हिंदू साधु का!
ये लोग पूरी दुनिया के सामने क्या मैसेज देना चाहते थे? यही ना, की भगवा पहनने वाले, रुद्राक्ष धारण करने वाले हमारे संन्यासी और साधु-संत असल में चोर और लुटेरे होते हैं जो पब्लिक का पैसा डकार जाते हैं?
ये सीधे-सीधे हिंदू धर्म की छवि को मिट्टी में मिलाने का एक ज़हरीला एजेंडा था।
वक्फ घोटालों पर मौलवी की टोपी पहनने में आती इन्हें मौत, पर भगवा पहनकर हमारे साधुओं को सरेआम बता दिया चोर
अगर तुम्हें किसी ट्रस्ट के खिलाफ प्रदर्शन करना ही था, तुम्हें किसी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाना ही था, तो तुम नॉर्मल कुर्ता-पैजामा पहनकर भी तो तख्ती लेकर खड़े हो सकते थे! तुमने भगवा क्यों पहना? गले में रुद्राक्ष क्यों डाला?
इन लिबरल नेताओं के अंदर सनातन को लेकर जो भयंकर नफरत भरी है, वो इस नाटक के ज़रिए संसद के दरवाज़े पर उल्टी की तरह बाहर आ गई।
मैं आज इन INDI गठबंधन वालों से और खासकर पप्पू यादव से एक सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ।
क्या तुम्हारी कभी इतनी हिम्मत होगी की तुम वक्फ बोर्ड के हज़ारों करोड़ के ज़मीन घोटालों पर ऐसा कोई नाटक कर सको?
क्या कभी किसी मदरसे के भ्रष्टाचार का विरोध करने के लिए तुम ‘मौलवी की टोपी’ और ‘नकली दाढ़ी’ लगाकर संसद के बाहर बैठोगे?
क्या कभी कैमरे के सामने किसी मौलवी का भेष बनाकर उसे चोर साबित करने की जुर्रत करोगे?
नहीं ना! वहां तुम्हारी रूह कांप जाएगी। वहां तुम्हें फतवे का डर सताने लगेगा। लेकिन जब बात हिंदुओं की आती है, तो इन्हें पता है की हिंदू सहिष्णु है, हिंदू कुछ नहीं बोलेगा।
इसलिए कभी फिल्मों में पंडितों का मज़ाक उड़ाओ, कभी संसद के बाहर भगवे को गालियां दो।
कलियुग के कंस पप्पू यादव पर फूटा देशभर के संतों का गुस्सा और दर्ज हुई धार्मिक भावनाएं आहत करने की FIR
इस घटिया हरकत के बाद पूरे देश का सनातनी समाज सुलग उठा है। गली-गली में इस इंडी गठबंधन के खिलाफ भयंकर आक्रोश है।
मथुरा से लेकर हरिद्वार तक के साधु-संतों ने इस बाहुबली नेता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष ट्रस्ट और चित्रगुप्त पीठ के स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने तो खुलेआम पप्पू यादव को ‘कलियुग का कंस’ घोषित कर दिया है।
संतों ने सड़कों पर उतरकर पप्पू यादव का पुतला फूंका और डंके की चोट पर कहा की जो व्यक्ति हमारे भगवे और साधु समाज का सरेआम अपमान कर रहा है, उसे तो जूतों से पीटना चाहिए।
वहीं, योग गुरु बाबा रामदेव ने भी इस पर बेहद कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया की भगवा, भगवान राम और हमारे संतों का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
और ये मामला सिर्फ बयानों तक नहीं रुका है। कानून का डंडा भी चल पड़ा है।
इस नीच हरकत के खिलाफ दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में सूर्य मैथिल नाम के एक सनातनी याचिकाकर्ता ने पप्पू यादव पर ‘धार्मिक भावनाएं आहत करने’ की एफआईआर (FIR) दर्ज करवा दी है।
अब पुलिस भी इनसे पूछेगी की चंदे का विरोध करने के लिए हिंदू धर्म का मज़ाक उड़ाने का लाइसेंस तुम्हें किसने दिया था!
जब हिंदू समाज ने दिखाया अपना रौद्र रूप तो रुद्राक्ष पर पानी चढ़ाकर भीगी बिल्ली बन गया ये लप्पू
पप्पू यादव को लगा था की भगवा पहनकर वो हिंदुओं का मज़ाक उड़ाएगा, राहुल गांधी की गुडबुक्स में आ जाएगा और लिबरल गैंग उसकी पीठ थपथपाएगा।
लेकिन जब पूरे देश में बवाल कटा, एफआईआर दर्ज हुई और संतों ने इसे बजाना शुरू किया, तो इस बाहुबली की सारी हेकड़ी एक ही दिन में हवा हो गई।
जब कुर्सी हिलती नज़र आई और लगा की अब हिंदू समाज सड़कों पर जूते लेकर इंतज़ार कर रहा है, तो पप्पू यादव तुरंत ‘भीगी बिल्ली’ बन गया।
डैमेज कंट्रोल का ऐसा ढोंग रचा की देखकर हंसी आ जाए। रातों-रात इंस्टाग्राम पर एक नौटंकी भरा वीडियो डाल दिया!
उस वीडियो में पप्पू यादव हाथ में रुद्राक्ष की माला लिए हुए है, उस पर पानी चढ़ा रहा है और गिड़गिड़ाते हुए सफाई दे रहा है की “मेरा रुद्राक्ष और सनातन से कोई विरोध नहीं है, मैं तो खुद शिव भक्त हूँ, मेरा विरोध सिर्फ चंदा चोरों से है।”
अरे भाई, अब इन मगरमच्छ के आंसुओं से क्या होगा? जब संसद के बाहर पूरी दुनिया के मीडिया के सामने तुम भगवा पहनकर चंदा चुराने की एक्टिंग कर रहे थे, तब तुम्हारी शिव भक्ति कहाँ गई थी?
तीर कमान से निकल चुका है दोस्त! तुम्हारे इस पानी चढ़ाने वाले झूठे वीडियो से हिंदुओं के सीने पर लगा वो घाव नहीं भरेगा जो तुमने और तुम्हारे इंडी गठबंधन के साथियों ने मिलकर दिया है।
इस कलियुग के कंस को और इसके संरक्षकों को सनातन समाज कभी नहीं भूलेगा, और ना ही कभी माफ करेगा!
