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हल्द्वानी हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक और बेटे अब्दुल मोईद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

हल्द्वानी हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक और बेटे अब्दुल मोईद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी

उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी, 2023 को नमाज स्थल विध्वंस को लेकर हुई हिंसक झड़प आज भी अपने जख्मों को समेटने की कोशिश कर रही है. इस मामले में एक ताजा घटनाक्रम सामने आया है, जहां पुलिस ने मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक और उनके बेटे अब्दुल मोईद के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया है. यह कदम इस जटिल मामले में कई सवालों को जन्म देता है और भविष्य की दिशा का संकेत देता है.

हिंसा की जड़ें और आरोपों का दायरा:

हल्द्वानी में बरसों पुराना नमाज स्थल हाईकोर्ट के आदेश पर तोड़ा गया. इस कार्रवाई को लेकर मुस्लिम समुदाय में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद हिंसक प्रदर्शन हुए. पुलिस का आरोप है कि मलिक और मोईद ने इस हिंसा भड़काने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें पथराव, आगजनी, पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. इन दोनों के अलावा अब तक 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 22 जेल में बंद हैं.  आरोपियों की तलाश जारी है.

लुकआउट नोटिस और इसके मायने:

लुकआउट नोटिस जारी होने का मतलब है कि मलिक और मोईद देश छोड़कर भाग नहीं पाएंगे. उनकी किसी भी सीमा पार करने के प्रयास पर उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा. यह कदम पुलिस की गंभीरता और उन्हें पकड़ने के इरादे को दर्शाता है. वहीं दूसरी ओर, सवाल यह भी उठता है कि आखिर वे भागने की फिराक में क्यों हो सकते हैं? क्या उन्हें कानून से डर है या उनके पास छिपाने के लिए कुछ और है?

राजनीतिक उबाल और सामाजिक सरोकार:

हल्द्वानी हिंसा एक राजनीतिक तूफान भी खड़ा कर चुकी है. भाजपा और कांग्रेस दोनों ही एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. भाजपा कांग्रेस पर तुष्टीकरण की नीति अपनाने का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा को ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगा रही है. ऐसे समय में सवाल यह उठता है कि क्या राजनीतिक हित सामाजिक सद्भाव से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है? क्या इस मामले में सियासी बयानबाजी से बचा जा सकता है?

आगे की राह और सबक:

हल्द्वानी हिंसा एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसने सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ा है. ऐसे में जरूरी है कि पुलिस निष्पक्ष जांच करे और दोषियों को सजा दे. साथ ही यह भी जरूरी है कि राजनीतिक दल इस मामले में एकजुट होकर शांति और भाईचारे का संदेश दें. हिंसा का रास्ता कभी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि बातचीत और कानून का रास्ता अपनाकर ही हम इस तरह की घटनाओं को रोक सकते हैं. हल्द्वानी से हमें सामाजिक सद्भाव की अहमियत समझने और उसकी रक्षा करने का सबक लेना चाहिए.

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