दूसरों के घरों में आग लगाने वाले पाकिस्तान का खुद का घर हो गया ख़ाक ! ‘ना-पाक’ मुल्क के दोबारा दो टुकड़े करके ‘बलोचिस्तान’ को आजाद कराने वाले बलोच शेरों को 11 अगस्त की आज़ादी की दिल से मुबारकबाद

दुनिया में अगर बेशर्मी और दोगलेपन का कोई जीता-जागता पुतला है, तो वो पाकिस्तान है। जो मुल्क पिछले 79 सालों से हाथ में भीख का कटोरा लेकर पूरी दुनिया के सामने ‘कश्मीर-कश्मीर’ चिल्लाता फिरता है, ज़रा उसकी खुद की हालत तो देखिए!

दूसरों के घरों में तांक-झांक करने वाले और भारत में आतंक की आग लगाने वाले इस नापाक मुल्क का खुद का घर आज भयंकर आग में जलकर ख़ाक हो रहा है।

अरे भाई, जिस मुल्क की खुद की बुनियाद धोखे और गद्दारी पर टिकी हो, वो भला कितने दिन तक एक रह सकता है?

आज पूरा पाकिस्तान सुलग रहा है, और ये आग किसी और ने नहीं.. बल्कि उन्हीं बलोच शेरों ने लगाई है जिन्हें पाकिस्तानी फौज दशकों से अपने जूतों के नीचे कुचलने का मुगालता पाले बैठी थी।

कल 11 अगस्त था! ये वो ऐतिहासिक दिन बन गया जब बलोच भाई-बहनों ने अपनी आज़ादी का झंडा बुलंद किया और ‘बलोचिस्तान’ को एक ‘स्वतंत्र देश’ घोसित कर दिया.. उन्होंने घमंडी पाकिस्तानी हुक्मरानों के मुंह पर सरेआम कालिख पोत दी है।

आज भारत का हर सच्चा नागरिक, हर सनातनी और हर वो इंसान जो आज़ादी की कीमत समझता है, वो सीना ठोक कर इन बलोच लड़ाकों को सलाम कर रहा है।

कश्मीर का झूठा राग अलापने वाले भिखारी पाकिस्तान के अपने ही घर में बज गई है बर्बादी की घंटी.. बलोचिस्तान का अलग होना तय!

आप ज़रा इस भिखारी पाकिस्तान की टाइमिंग और इनका नाटक देखिए। अगस्त का महीना आते ही इस्लामाबाद में बैठे इनके जाहिल नेता और रावलपिंडी के भ्रष्ट जनरल कश्मीर के नाम पर आंसू बहाने लगते हैं।

दुनिया भर की संसदों और UN में जाकर झूठा रोना रोते हैं की कश्मीरियों पर ज़ुल्म हो रहा है। लेकिन यार, कोई इनसे पूछे की तुम्हारे अपने ही मुल्क के आधे हिस्से- बलोचिस्तान में जो कत्लेआम तुम लोग मचा रहे हो, उसका हिसाब कौन देगा?

कल 11 अगस्त को जब पूरा बलोचिस्तान और दुनिया भर में बैठे बलोच विद्रोही अपना ‘आज़ादी दिवस’ मना रहे थे, तो पाकिस्तानी फौज की हालत देखने लायक थी।

डर के मारे इनकी पैंट गीली हो रखी थी! इंटरनेट बंद कर दिया गया, पूरे सूबे को छावनी में बदल दिया गया। लेकिन क्या बलोचों का वो जज़्बा रुका? बिल्कुल नहीं!

इंटरनेट बंद होने के बावजूद ‘रिपब्लिक ऑफ़ बलोचिस्तान’ का ऑनलाइन मैसेज पूरी दुनिया में आग की तरह फैल गया।

इन बलोच शेरों ने डंके की चोट पर ऐलान कर दिया की “हम पाकिस्तानी नहीं हैं, हमारी ज़मीन हमारी है और हमारा आसमान हमारा है।”

बलोचों ने जारी किये गए ऑनलाइन वीडियो में दिखाया की कैसे लंदन की सड़कों से लेकर बलोचिस्तान के पहाड़ों तक, हर जगह आज़ाद बलोचिस्तान का झंडा लहरा रहा है।

बलोच, पश्तून, सिंधी… यहाँ तक की वहां रहने वाले हिंदू और सिखों को भी इस आज़ादी के जश्न की बधाइयां दी जा रही हैं।

ये सिर्फ एक जश्न नहीं दोस्त, ये पाकिस्तान के सीने पर गाड़ा गया वो खंजर है जो हर दिन गहरा हो रहा है। बलोचों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से सीधे तौर पर कह दिया है की दुनिया हमें एक आज़ाद मुल्क के रूप में मान्यता दे।

ये ठीक वैसा ही माहौल बन चुका है जैसा 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में बना था।

तब भी ये पाकिस्तानी आर्मी वाले खुद को बहुत बड़ा तीसमारखां समझते थे, और फिर हिंदुस्तानी फौज ने इनके 93 हज़ार पैंट उतारे हुए सैनिकों से सरेंडर करवाया था।

आज वही बर्बादी की घंटी पाकिस्तान के अपने घर में बज रही है, और इस बार मुल्क के दो टुकड़े करने का ज़िम्मा खुद बलोच लड़ाकों ने उठा लिया है।

11 अगस्त 1947 की वो असली आज़ादी और जिन्ना का वो गद्दारी भरा ऐतिहासिक धोखा जिसे बलोच आज तक नहीं भूले

अब ज़रा इतिहास के उस पन्ने को पलटते हैं जिसे पाकिस्तान की झूठी किताबों में हमेशा के लिए दफन करने की कोशिश की गई।

आखिर बलोच लोग 11 अगस्त को ही अपनी आज़ादी का जश्न क्यों मनाते हैं? 14 अगस्त को क्यों नहीं?

क्योंकि सच ये है की बलोचिस्तान (जिसे तब कलात रियासत कहा जाता था) पाकिस्तान का कभी हिस्सा था ही नहीं!

जब अंग्रेज़ इस भारतीय उपमहाद्वीप को छोड़कर जा रहे थे, तब 11 अगस्त 1947 को ही कलात रियासत ने खुद को एक आज़ाद और संप्रभु देश घोषित कर दिया था।

मतलब पाकिस्तान के वजूद में आने से पहले ही बलोचिस्तान आज़ाद हो चुका था।

और अब सुनिए इस इतिहास का सबसे गंदा और खौफनाक सच! आपको जानकर हैरानी होगी की कलात के नवाब (मीर अहमद यार खान) का लीगल केस लड़ने वाला वकील कोई और नहीं, बल्कि खुद मोहम्मद अली जिन्ना था।

जी हाँ! वही जिन्ना जिसने पाकिस्तान बनाया। जिन्ना ने ही अंग्रेज़ों के सामने कलात की आज़ादी की पैरवी की थी और समझौते पर दस्तखत करवाए थे।

उस वक़्त जिन्ना ने बलोचों से मीठी-मीठी बातें कीं, उन्हें भरोसा दिलाया की पाकिस्तान हमेशा कलात की आज़ादी और संप्रभुता का सम्मान करेगा।

लेकिन भाई, जिसकी बुनियाद ही धोखे पर हो, वो अपनी फितरत कैसे बदल ले? जैसे ही पाकिस्तान बन गया, जिन्ना की लार टपकने लगी।

उसे बलोचिस्तान की वो अथाह ज़मीन और उसके नीचे दबा हुआ बेशकीमती खजाना (सोना, गैस, तांबा) दिखने लगा।

जिन्ना ने तुरंत अपना रंग बदला और कलात के खान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया की अपनी रियासत को पाकिस्तान में मिला दो।

जब बलोचों ने इस गुलामी को साफ तौर पर ठुकरा दिया और कहा की “हम भूखे मर जाएंगे लेकिन तुम्हारी गुलामी कबूल नहीं करेंगे,” तो पाकिस्तान ने अपनी असली औकात दिखा दी।

27 मार्च 1948 को, आज़ादी के सिर्फ 7 महीने बाद ही, पाकिस्तानी फौज ने टैंकों और तोपों के साथ कलात पर धावा बोल दिया।

एक आज़ाद मुल्क की पीठ में सरेआम छुरा घोंपा गया और बंदूक की नोक पर बलोचिस्तान को पाकिस्तान का हिस्सा बना लिया गया।

ये कोई विलय (Merger) नहीं था, ये एक सीधे-सीधे मिलिट्री ऑक्यूपेशन (Military Occupation) यानी जबरन कब्ज़ा था। इसी दिन से बलोचों के सीने में जो इंतकाम की आग भड़की थी, वो आज 78 साल बाद भी धधक रही है।

बलोचों ने इस जबरन थोपी गई शादी को कभी दिल से नहीं माना। कलात के शासक के छोटे भाई, प्रिंस अब्दुल करीम ने उसी दिन हथियार उठा लिए थे और पाकिस्तानी फौज के खिलाफ पहला गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया था।

आज का जो ये बलोच विद्रोह है, वो कोई रातों-रात पैदा हुआ गुस्सा नहीं है। ये 1948 के उसी धोखे, उसी गद्दारी और उसी ज़ुल्म का नतीजा है।

जिन्ना ने सोचा था की बलोचों को डरा-धमका कर शांत कर देंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था की बलोच शेर होते हैं, वो लड़ते-लड़ते कट जाना पसंद करते हैं लेकिन किसी धोखेबाज़ के सामने घुटने नहीं टेकते।

बलोच लिबरेशन आर्मी के शेरों का वो खौफनाक तांडव जिसने पाकिस्तानी फौज को दिन में दिखा दिए हैं तारे

जिन्ना के उस गंदे धोखे का बदला आज कैसे लिया जा रहा है, ये अगर देखना हो तो ज़रा बलोचिस्तान के सुलगते हुए पहाड़ों की तरफ नज़र दौड़ा लीजिए।

पाकिस्तान को लगता था की वो अपनी फौज, टैंकों और हेलीकॉप्टरों के दम पर बलोचों की आवाज़ हमेशा के लिए दबा देगा। लेकिन वो भूल गए की बलोच कौम मिट्टी से बनी वो चट्टान है जो टूट तो सकती है, लेकिन झुकना उसके खून में नहीं है।

आज दांव पूरी तरह से उल्टा पड़ चुका है। जो पाकिस्तानी फौज कल तक वहां छाती तान कर घूमती थी, आज वो अपने ही कैंपों के अंदर कांप-कांप कर छुपने को मजबूर है।

आजकल बलोचिस्तान में ‘बलोच लिबरेशन आर्मी’ (BLA) और उनके साथ जुड़े अन्य विद्रोही संगठनों ने जो खौफनाक तांडव मचा रखा है ना, उसने रावलपिंडी में बैठे पाकिस्तानी जनरलों के सच में दिन में तारे दिखा दिए हैं।

ये अब कोई छोटी-मोटी बगावत नहीं रह गई है भाई! ये एक ‘फुल-फ्लेज्ड वॉर’ (Full-fledged war) है।

2026 के ताज़ा हालात तो इतने बदतर हो चुके हैं की बलोचिस्तान के गांव-देहात और दूर-दराज के इलाकों (Rural areas) में पाकिस्तान सरकार का कोई नामोनिशान ही नहीं बचा है।

वहां पुलिस और प्रशासन का नहीं, सिर्फ और सिर्फ बलोच लड़ाकों का सिक्का चलता है।

पाकिस्तानी आर्मी अगर सड़कों पर निकलती भी है, तो उनके काफिलों को रातों-रात बमों से उड़ा दिया जाता है। बलोच लड़ाके अब सीधे आर्मी के बड़े-बड़े कैंपों, पुलिस हेडक्वार्टर्स और चेक पोस्टों पर रॉकेट लॉन्चरों और भारी हथियारों से हमला कर रहे हैं।

अभी कुछ ही समय पहले की बात है, जब इन बलोच शेरों ने पाकिस्तान के माछ (Mach) शहर और वहां की जेल पर घंटों तक अपना कब्ज़ा जमाए रखा था और पाकिस्तानी आर्मी दूर खड़ी तमाशा देखती रही।

और भाई, BLA की सबसे घातक विंग ‘मजीद ब्रिगेड’ (Majeed Brigade) का नाम सुनते ही तो पाकिस्तानी फौजी और आईएसआई (ISI) के एजेंट पसीना-पसीना हो जाते हैं।

ये मजीद ब्रिगेड वो आत्मघाती (Fidayeen) स्क्वाड है जो मौत से बिल्कुल नहीं डरता। ये अपने सीने पर बम बांधकर सीधे पाकिस्तानी नौसेना के ठिकानों, एयरबेस और हाई-सिक्योरिटी वाले दफ्तरों में घुस जाते हैं और सामने वाले के चीथड़े उड़ा देते हैं।

इनका सीधा सा फलसफा है- या तो हमारी ज़मीन खाली करो, या फिर जहन्नुम जाने के लिए तैयार रहो। आज पाकिस्तानी आर्मी की हालत ये हो गई है की उनके पास इस गुरिल्ला युद्ध का कोई तोड़ नहीं बचा है।

चीन और पाकिस्तान का लुटेरा गठजोड़ और ग्वादर पोर्ट पर बलोचों का सीधा और जानलेवा प्रहार

अब ज़रा बात कर लेते हैं पाकिस्तान के नए आका और दुनिया के सबसे बड़े कब्ज़ाखोर- चीन की! आप सोच रहे होंगे की आखिर पाकिस्तान बलोचिस्तान को छोड़ना क्यों नहीं चाहता?

क्या उन्हें बलोच लोगों से कोई प्यार है? अरे खाक प्यार है! असली खेल तो वहां दबे हुए अथाह खजाने का है।

बलोचिस्तान कोई सूखी और बंजर ज़मीन नहीं है दोस्त। वहां के पहाड़ों और ज़मीन के नीचे प्राकृतिक गैस, सोना, तांबा और बेशकीमती खनिजों का ऐसा भंडार दबा है जिसे देखकर चीन और पाकिस्तान की राल टपक रही है।

पूरे पाकिस्तान के घरों और फैक्ट्रियों में जो गैस जलती है, वो बलोचिस्तान के ‘सुई’ (Sui) इलाके से आती है।

लेकिन मज़ाक देखिए… जिस बलोचिस्तान की गैस से इस्लामाबाद और लाहौर के चूल्हे जलते हैं, उसी बलोचिस्तान के आम आदमी को आज भी अपने घरों में खाना बनाने के लिए सूखी लकड़ियां जलानी पड़ती हैं। वहां पीने को साफ पानी तक नहीं है।

चीन और पाकिस्तान ने मिलकर CPEC (China-Pakistan Economic Corridor) नाम का एक ऐसा लुटेरा गठजोड़ बनाया है, जिसका इकलौता मकसद बलोचिस्तान को दिन-दहाड़े लूटना है।

चीन की नज़रों में बलोचिस्तान का ‘ग्वादर पोर्ट’ (Gwadar Port) बस एक मिलिट्री बेस है, जहां से वो अरब सागर पर कब्ज़ा जमा सके।

बलोच लोग इस नापाक साज़िश को बहुत अच्छे से समझते हैं। उन्हें साफ-साफ दिख रहा है की ये दोनों मुल्क मिलकर उनकी आने वाली पीढ़ियों का हक़ मार रहे हैं।

और जब पानी सिर के ऊपर से गुज़र गया, तो बलोच शेरों ने सीधा और जानलेवा प्रहार करना शुरू कर दिया।

BLA ने डंके की चोट पर ऐलान कर दिया है की चीन हो या कोई और, जो भी हमारी ज़मीन का खजाना लूटेगा, वो ज़िंदा वापस नहीं जाएगा।

और भाई, उन्होंने ये करके भी दिखा दिया! बलोच लड़ाके चुन-चुन कर चीन के इंजीनियरों, कामगारों और उनके प्रोजेक्ट्स को निशाना बना रहे हैं।

बुलेटप्रूफ गाड़ियों में घूमने वाले चीनी नागरिकों को सरेआम उड़ाया जा रहा है। ग्वादर पोर्ट की तरफ जाने वाली सप्लाई लाइन्स को काट दिया गया है।

इस बगावत का खौफ इतना भयंकर है की आज चीन खुद डरा हुआ है। बीजिंग से पाकिस्तान को रोज़ गालियां और धमकियां मिल रही हैं की “हमारे लोगों को सुरक्षा दो, वरना हम अपने प्रोजेक्ट बंद कर देंगे।”

लेकिन पाकिस्तान करे भी तो क्या करे? जो पाकिस्तानी फौज खुद अपनी जान बचाकर बंकरों में दुबकी बैठी हो, वो चीनी इंजीनियरों को क्या खाक सुरक्षा देगी?

बलोचों ने CPEC के इस करोड़ों डॉलर के लुटेरे प्रोजेक्ट की ऐसी खटिया खड़ी की है की आज चीन भी सिर पकड़ कर रो रहा है कि वो किस कंगाल और नाकारा मुल्क के चक्कर में फंस गया।

इंटरनेट बैन और रातों-रात गायब होते नौजवानों का खौफनाक सच जिसे दुनिया से छुपा रहा है पाकिस्तान

जब कोई फौज सामने से लड़ने की हिम्मत हार जाती है ना दोस्त, तो वो अपनी खीझ निहत्थे और बेगुनाह लोगों पर उतारती है।

पाकिस्तानी आर्मी के साथ भी बिल्कुल यही हो रहा है। जब ये बुज़दिल फौजी बलोच लड़ाकों से आमने-सामने की जंग में पिटने लगे, तो इन्होंने बलोचिस्तान के आम नागरिकों पर वो बर्बर दमन चक्र (Military Crackdown) शुरू कर दिया, जो किसी शैतान को भी शर्मिंदा कर दे।

आज अगर आप बलोचिस्तान की ग्राउंड रियलिटी देखेंगे, तो वो एक खुली जेल बन चुका है। बलोचों की चीखें दुनिया तक ना पहुंचें, इसके लिए पाकिस्तान ने पूरे सूबे में इंटरनेट बंद कर रखा है।

मोबाइल सेवाएं महीनों-महीनों तक ठप रहती हैं। मीडिया को वहां जाने की इजाज़त नहीं है। लेकिन दीवारों के कान होते हैं भाई, और सच कभी छुपता नहीं।

वहां का सबसे खौफनाक और दर्दनाक सच है- ‘मिसिंग पर्सन्स’ (Enforced Disappearances) यानी रातों-रात गायब कर दिए जाने वाले लोग!

पाकिस्तानी आर्मी और ISI ने वहां बाकायदा ‘डेथ स्क्वॉड’ (Death Squads) बना रखे हैं। रात के अंधेरे में ये वर्दी वाले गुंडे बलोच नौजवानों, छात्रों, वकीलों और पत्रकारों के घरों के दरवाज़े तोड़ते हैं और उन्हें जानवरों की तरह घसीटते हुए जीपों में डालकर ले जाते हैं।

सालों-सालों तक उन लड़कों का कोई अता-पता नहीं चलता। उनकी बूढ़ी माएं और बहनें पुलिस थानों और कोर्ट के बाहर उनकी तस्वीरें लेकर रोती रहती हैं, लेकिन किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगती।

और फिर अचानक एक दिन किसी वीराने से उनकी लाशें मिलती हैं! ‘किल एंड डंप’ यानी मारो और फेंक दो… पाकिस्तानी फौज की यही खौफनाक पॉलिसी है।

बलोचिस्तान के तूताक (Tootak) जैसे इलाकों में कई बार सामूहिक कब्रें (Mass Graves) मिल चुकी हैं, जहाँ दर्जनों बलोच नौजवानों की सड़ी-गली लाशें एक साथ दफनाई गई थीं।

उन लाशों पर टॉर्चर और ज़ुल्म के ऐसे निशान होते हैं जिन्हें देखकर रूह कांप जाए।

और यार, यहाँ सबसे बड़ा गुस्सा तो उन पश्चिमी देशों, मानवाधिकार संगठनों (Human Rights NGOs) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के दोगलेपन पर आता है!

भारत में शांतिदूतों को कोई छोटी सी खरोंच भी आ जाए, तो ये लोग छाती पीटने लगते हैं। मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए भारत को ज्ञान बांटने आ जाते हैं।

लेकिन बलोचिस्तान में पिछले 7 दशक से जो नरसंहार चल रहा है, जो कत्लेआम पाकिस्तानी आर्मी मचा रही है, उस पर इन सारे ‘ठेकेदारों’ ने अपनी आँखें और कान क्यों बंद कर रखे हैं?

क्या बलोचों की जान की कोई कीमत नहीं है? सच तो ये है की ये सब के सब दोगले हैं, जिन्हें मानवाधिकार नहीं, सिर्फ अपना प्रोपेगेंडा चलाना होता है।

औरतों और बच्चों ने भी उठा ली है बगावत की झंडी और अब 1971 की तरह तय है पाकिस्तान का दूसरा भयंकर बंटवारा

पाकिस्तान को लगता था की वो घर के मर्दों को गायब कर देंगे, नौजवानों को मार देंगे, तो बगावत अपने आप दम तोड़ देगी।

लेकिन वो इस बलोच कौम की रगों में बहने वाले खून को नहीं पहचान पाए। जब घर के मर्द गायब हो गए, तो बलोच औरतों ने अपने सिर पर कफ़न बांध लिया और सड़कों पर उतर आईं।

आज बलोचिस्तान का विद्रोह सिर्फ पहाड़ों की गुफाओं और खाइयों में नहीं लड़ा जा रहा है। आज मेहरंग बलोच (Dr. Mahrang Baloch) जैसी बहादुर और निडर बलोच बेटियों ने इस आंदोलन की कमान संभाल ली है।

इन औरतों ने अपने गायब किए गए भाइयों, पतियों और बेटों की तस्वीरें हाथों में लेकर इस्लामाबाद तक वो ऐतिहासिक ‘लॉन्ग मार्च’ निकाला, जिसने पूरी पाकिस्तानी हुकूमत की चूलें हिला कर रख दीं।

जब हज़ारो की तादाद में बलोच औरतें और छोटे-छोटे बच्चे कड़ाके की ठंड में इस्लामाबाद की सड़कों पर बैठे थे, तो वो पाकिस्तान के मुँह पर पड़ा अब तक का सबसे बड़ा तमाचा था।

पाकिस्तानी हुक्मरानों ने इन औरतों पर भी लाठियां चलवाईं, वाटर कैनन (Water cannon) का इस्तेमाल किया, लेकिन वो एक इंच भी पीछे नहीं हटीं।

ये बलोच औरतें पाकिस्तान की आँखों में आँखें डालकर कह रही हैं की “तुमने हमारे घरों को उजाड़ा है, हम तुम्हारे इस मुल्क की ईंट से ईंट बजा देंगे।”

भाई साहब, ये माहौल और ये जज़्बा कोई आम बात नहीं है। अगर आप इतिहास के पन्नों को पलटेंगे, तो आपको बिल्कुल यही तस्वीर 1971 में दिखाई देगी।

तब भी पश्चिमी पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान) के घमंडी जनरलों ने पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) के बंगालियों पर ऐसे ही ज़ुल्म ढाए थे।

तब मुजीब-उर-रहमान और उनकी ‘मुक्ति बाहिनी’ (Mukti Bahini) ने हथियार उठाए थे। पाकिस्तान ने तब भी औरतों का रेप किया था, नौजवानों का कत्लेआम किया था।

लेकिन नतीजा क्या हुआ? हिंदुस्तान की फौज ने ऐसा घुसा मारा की पाकिस्तान हमेशा के लिए दो टुकड़ों में बंट गया और एक नया आज़ाद मुल्क ‘बांग्लादेश’ बन गया।

आज बलोचिस्तान में बिल्कुल वही 1971 वाला इतिहास खुद को दोहरा रहा है। फर्क सिर्फ इतना है की तब ‘मुक्ति बाहिनी’ थी, आज ‘बलोच लिबरेशन आर्मी’ है।

मुल्क के एक बड़े हिस्से में बगावत इतनी गहरी हो चुकी है की उसे कोई गोली या बंदूक अब रोक नहीं सकती। और सच कहूं तो, आप लिख कर ले लीजिए…

पाकिस्तान का दूसरा बंटवारा अब कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि पत्थर की लकीर बन चुका है। जो मुल्क खून और धोखे की नींव पर खड़ा हो, वो अपनी ही आग में जलकर ख़ाक होने के लिए अभिशप्त है।

बलोचिस्तान की जश्न-ए-आज़ादी पर भारत और हर सच्चे हिंदुस्तानी की तरफ से बलोच वीरों को सलाम

बात जब आज़ादी की कीमत चुकाने की आती है ना दोस्त, तो हम हिंदुस्तानियों से बेहतर इसे कोई नहीं समझ सकता। हमने भी अपना खून बहाकर अंग्रेज़ों को खदेड़ा था।

हम वो देश हैं जिसने 1971 में मज़लूमों का साथ देकर पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे, और आज भले ही हमारी फौज बलोचिस्तान में सीधे तौर पर ना लड़ रही हो, लेकिन वैचारिक, मानसिक और जज़्बाती तौर पर भारत का बच्चा-बच्चा बलोच भाइयों और बहनों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है।

कल 11 अगस्त को जो जश्न-ए-आज़ादी बलोचों ने मनाई है, वो पाकिस्तान के ताबूत में ठुकी हुई वो आखिरी कील है, जिसे अब कोई उखाड़ नहीं सकता।

ये एक ऐसा अलार्म है जिसने पूरी दुनिया को बता दिया है की पाकिस्तान का अंत अब बहुत नज़दीक है।

आज हम भारतवासी, उन तमाम बलोच शेरों, उन निडर औरतों और उन मासूम बच्चों को 11 अगस्त की आज़ादी की ढेरों मुबारकबाद देते हैं, जो बंदूक के सामने बिना पलक झपकाए सीना तानकर खड़े हैं।

वो दिन अब दूर नहीं जब ‘रिपब्लिक ऑफ़ बलोचिस्तान’ शान से अपना झंडा लहराएगा।

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