मोदी विरोध में Elon Musk के फैन बने राहुल गाँधी और वामपंथियों से हजार गुना बेहतर निकले ओवैसी, भारतीय कारोबारियों के खिलाफ जहर उगलते विदेशी अरबपति को दे दी कड़क नसीहत

राजनीति में एक-दूसरे का विरोध करना, कमियां निकालना और सत्ता के लिए लड़ना बहुत आम बात है। लोकतंत्र है, तो विपक्ष का काम ही है सरकार की नीतियों का विरोध करना।

लेकिन एक लाइन होती है, जिसे कभी पार नहीं किया जाता, और वो लाइन है ‘देश का स्वाभिमान और संप्रभुता (Sovereignty)’।

आज हमारे देश की राजनीति में ‘मोदी विरोध’ एक ऐसी लाइलाज बीमारी बन चुका है की कांग्रेस और वामपंथी इकोसिस्टम मोदी से नफरत करते-करते कब भारत से नफरत करने लगे, इसका अंदाज़ा इन्हें खुद भी नहीं है।

हाल ही में एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को लेकर जो बवाल मचा है, उसने इस देश के तथाकथित ‘लिबरल और सेक्युलर’ गैंग का पूरा सच जनता के सामने रख दिया है।

एक विदेशी अरबपति हमारे देश के 140 करोड़ लोगों के टेलीकॉम बाज़ार पर कब्ज़ा करने के लिए गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठा है। वो चाहता है की भारत सरकार उसके लिए सारे नियम-कानून ताक पर रख दे।

और जब सरकार ऐसा करने से मना करती है, तो वो बौखलाकर हमारे ही देश के सिस्टम और कारोबारियों को कोसने लगता है।

लेकिन मज़े की बात मस्क की बदतमीज़ी नहीं है। सदमा तो इस बात का है की जिस विदेशी गुंडे को खदेड़ कर बाहर कर देना चाहिए था, कांग्रेसी उसी मस्क के सामने घुटने टेकते और उसके एजेंट बनते नज़र आए।

और वहीं दूसरी तरफ, असदुद्दीन ओवैसी… जी हाँ, वही ओवैसी जो दिन-रात मोदी और बीजेपी को पानी पी-पीकर कोसते हैं, उन्होंने इस मामले में एक ऐसा स्टैंड लिया जिसने साबित कर दिया की वो कांग्रेस और बाकी लिबरलों से लाख गुना बेहतर हैं।

ओवैसी ने सरेआम उस गोरी चमड़ी वाले विदेशी को उसकी असली हैसियत याद दिला दी।

भारत के डिजिटल आसमान पर विदेशी गिद्ध की नज़र और अपने ही देश को नीचा दिखाने का कांग्रेस का खेल

अब ज़रा बैकग्राउंड समझिए की ये Elon Musk अचानक से इतना छटपटा क्यों रहा है।

एलन मस्क की कंपनी ‘स्टारलिंक’ भारत के स्पेस इंटरनेट मार्केट में घुसना चाहती है। लेकिन मस्क बाबू चाहते हैं की उन्हें स्पेक्ट्रम (Spectrum) की नीलामी (Auction) वाले पचड़े में न पड़ना पड़े।

वो चाहते हैं की भारत सरकार बस एक कागज़ पर साइन करे और उन्हें ‘एडमिनिस्ट्रेटिव एलोकेशन’ (Administrative allocation) के ज़रिए स्पेक्ट्रम दे दे।

जब मुकेश अंबानी की जियो (Jio) और सुनील भारती मित्तल की एयरटेल (Airtel) ने इसका विरोध किया और कहा की “भारत में कारोबार करना है तो सबके लिए नियम एक जैसे होने चाहिए, आपको भी स्पेक्ट्रम की नीलामी में हिस्सा लेना होगा,” तो एलन मस्क का ईगो हर्ट हो गया।

उन्हें लगा की वो अमेरिका के सबसे अमीर आदमी हैं, तो भारत भी उनकी उंगलियों पर नाचेगा। लेकिन जब भारत सरकार ने उन्हें सिक्योरिटी क्लीयरेंस (Security Clearance) और लोकल नियमों का कड़वा घूंट पिलाया, तो मस्क बिलबिला उठे और उन्होंने सीधे भारत के कारोबारियों पर हमला कर दिया।

लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे काला अध्याय तब लिखा गया, जब देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस ने इस मामले में एंट्री ली।

कायदे से तो राहुल गांधी को मस्क को खरी-खोटी सुनानी चाहिए थी की तुम हमारे देश के अंदरूनी मामलों में बोलने वाले कौन होते हो?

लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा। अपने ही देश की थाली में छेद करने का जो शर्मनाक खेल कांग्रेस ने खेला, उसने दिखा दिया की विदेशी आकाओं के सामने झुकने की इनकी पुरानी आदत आज भी नहीं गई है।

एलन मस्क का वो बदतमीज़ ट्वीट और बिना नियम कानून भारत में घुसपैठ करने की असली छटपटाहट

8 अक्टूबर को बौखलाए हुए एलन मस्क ने एक्स (Twitter) पर सरेआम भारत के सिस्टम का मज़ाक उड़ाते हुए एक निहायत ही बदतमीज़ ट्वीट किया।

मस्क ने मुकेश अंबानी पर ताना मारते हुए लिखा- “Is Ambani the real boss of India?” (क्या अंबानी भारत का असली बॉस है?)।

इतना ही नहीं, मस्क ने भारतीय उद्योगपतियों को “Oligarchs” (तानाशाह/बाज़ार पर कब्ज़ा करने वाले) तक कह डाला और आरोप लगाया की ये लोग भारत की जनता का शोषण कर रहे हैं और इंटरनेट को महंगा बना रहे हैं।

सोचिए ज़रा! एक अमेरिकी अरबपति हमारे देश की सरकार और हमारे देश के टैक्सपेयर्स के पैसों से खड़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को गाली दे रहा था।

इस पर भारत के टेलीकॉम मंत्रालय ने एकदम सधा हुआ और करारा जवाब दिया। सरकार ने साफ़ कर दिया की रिलायंस, एयरटेल और स्टारलिंक… सब इस वक़्त कतार में बराबर खड़े हैं। किसी के लिए कोई वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट नहीं है।

स्टारलिंक को भी बाकायदा सिक्योरिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया से गुज़रना पड़ेगा, क्योंकि भारत का डेटा और सुरक्षा किसी विदेशी कंपनी के हाथ में ऐसे ही नहीं सौंपी जा सकती।

यहाँ एलन मस्क का पाखंड (Hypocrisy) तो देखिए! जब बात अमेरिका की आती है, तो यही एलन मस्क अपनी टेस्ला (Tesla) EV कारों को बचाने के लिए वहां की सरकार से लॉबिंग करते हैं की चीन की ‘BYD’ EV कारों पर भारी बैन और टैक्स लगाया जाए ताकि टेस्ला का बाज़ार न गिरे।

वहां इन्हें अपना देश और अपना बाज़ार याद आता है। लेकिन जब बात भारत की आती है, तो ये चाहते हैं की भारत सरकार अपने घरेलू कारोबारियों (Local Industrialists) का गला घोंट दे और स्टारलिंक के लिए रेड कारपेट बिछा दे।

और जब दाल नहीं गली, तो बौखला कर ट्विटर पर ट्रोलिंग शुरू कर दी।

राहुल गांधी का विदेशी प्रेम जागा तो भूल गए देश का स्वाभिमान और सरेआम बन गए मस्क के जिगरी दोस्त

जब मस्क भारत के बड़े कारोबारियों और सरकार पर कीचड़ उछाल रहा था, तब राहुल गांधी की एंट्री होती है।

जो हरकत राहुल गांधी ने की, वो किसी भी स्वाभिमानी भारतीय का खून खौलाने के लिए काफी है। राहुल गांधी ने एक्स (X) पर मस्क को आईना दिखाने के बजाय, उसके उस बदतमीज़ ट्वीट का रिप्लाई करते हुए लिखा- “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy” (भारत में स्वागत है एलन, अभी रुको जब तक तुम्हें दूसरे आदमी के बारे में नहीं पता चलता)।

(ज़ाहिर सी बात है, उनका इशारा गौतम अडानी की तरफ था)।

इसके जवाब में मस्क ने भी हंसते हुए रिप्लाई ठोक दिया- “Thank you, Rahul. This is indeed troubling.”

ज़रा इस घिनौने पॉलिटिकल खेल को समझिए यार! आपका अपने देश के मुकेश अंबानी और गौतम अडानी से वैचारिक या राजनीतिक विरोध हो सकता है।

आप देश के भीतर उन पर जितने चाहे सवाल उठाएं, ये आपका लोकतांत्रिक हक़ है। लेकिन जब एक अमेरिकी नागरिक पूरी दुनिया के सामने आपके देश के सिस्टम और कारोबारियों की बेइज़्ज़ती कर रहा है, तो आप उसके साथ मिलकर ‘हा-हा ही-ही’ कर रहे हैं?

आप एक विदेशी गुंडे के साथ टीम बनाकर अपने ही देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का सरेआम मज़ाक उड़ा रहे हैं?

ये कौन सी राजनीति है भाई? मोदी सरकार से नफरत करते-करते कांग्रेस इतनी अंधी हो चुकी है की वो भारत के डिजिटल भविष्य को अमेरिकी अरबपति के हाथों में सौंपने के लिए उसकी जिगरी बन गई।

बीजेपी ने बिल्कुल सही नाम दिया है इन्हें- ‘सरेंडर गांधी’ (Surrender Gandhi)।

कांग्रेस का दोगलापन तो इस हद तक है की कुछ ही महीने पहले इनके बड़े नेता जयराम रमेश बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कह रहे थे की “स्टारलिंक का भारत में आना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा हो सकता है, सरकार इसे एंट्री कैसे दे रही है?”

और आज? आज अचानक से राहुल गांधी उसी एलन मस्क के ‘फैन बॉय’ बन गए हैं? सिर्फ इसलिए क्योंकि मस्क ने अंबानी को ट्रोल कर दिया?

ये दिखाता है की कांग्रेस की कोई विचारधारा नहीं है, इनका सिर्फ एक ही एजेंडा है- किसी भी तरह, किसी भी कीमत पर मोदी का विरोध करो, चाहे उसके लिए देश की इज़्ज़त विदेशी हाथों में ही क्यों न बेचनी पड़े।

जब बात देश की संप्रभुता की आई तो असदुद्दीन ओवैसी का स्वदेशी स्वाभिमान कांग्रेस पर भारी पड़ गया, Elon Musk को सुना दी दो-टूक

अब ज़रा सिक्के का दूसरा पहलू देखिए। एक तरफ खुद को देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी का वारिस बताने वाले राहुल गांधी थे, जो विदेशी मस्क की पोस्ट पर जाकर ‘वेलकम-वेलकम’ खेल रहे थे।

और दूसरी तरफ थे एआईएमआईएम (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी। वही ओवैसी जिनकी राजनीति ही पूरी तरह से बीजेपी और पीएम मोदी के विरोध पर टिकी है।

ओवैसी भी संसद से लेकर सड़क तक अडानी और अंबानी के खिलाफ खूब ज़हर उगलते हैं। लेकिन जब बात भारत की संप्रभुता (Sovereignty) और एक विदेशी के दखल की आई, तो ओवैसी का जो स्वदेशी स्वाभिमान जागा, उन्होंने राहुल गांधी और पूरे वामपंथी गैंग को चुल्लू भर पानी में डूब मरने पर मजबूर कर दिया।

12 अक्टूबर को ओवैसी ने एक जनसभा में जो दहाड़ मारी, उसने पूरे लुटियंस में सन्नाटा खींच दिया।

ओवैसी ने ने अपनी रैली में एलन मस्क को बुरी तरह धो डाला और सरेआम उसके लिए ‘गोरी चमड़ी’ (Gori Chamdi) शब्द का इस्तेमाल किया।

ओवैसी ने डंके की चोट पर कहा, “हमारे वैचारिक मतभेद अपनी जगह हैं, हम मोदी से लड़ेंगे, लेकिन राष्ट्रीय हित के मुद्दे पर हम किसी भी बाहरी दबाव या इस ‘गोरी चमड़ी’ वाले के आगे घुटने नहीं टेकेंगे।”

इतना ही नहीं, ओवैसी ने सीधे पीएम मोदी से भी कहा की “आप 140 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री हैं, आप इस गोरी चमड़ी वाले मस्क को मुंहतोड़ जवाब क्यों नहीं दे रहे? क्या हम किसी विदेशी अरबपति से डरने वाले हैं?”

सच कहूं तो ओवैसी के इस एक बयान ने उन सारे वामपंथी पत्रकारों, यूट्यूबर्स और कांग्रेसी प्रवक्ताओं को शीशा दिखा दिया है।

जो लिबरल गैंग कल तक एलन मस्क के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर करके ‘हाहाकार’ मचा रहा था और खुश हो रहा था की ‘देखो-देखो मस्क ने भारत की बेइज़्ज़ती कर दी’, ओवैसी के इस स्टैंड के बाद वो सब अपने बिलों में छुप गए।

जिस ओवैसी को ये वामपंथी अपना पोस्टर बॉय बनाना चाहते हैं, उसी ने आज इन्हें सच्चा राष्ट्रवाद सिखा दिया।

मोदी विरोध के अंधेपन में भारत का डिजिटल भविष्य बेचने को तैयार वामपंथी गैंग को ओवैसी ने पढ़ाया राष्ट्रवाद का पाठ

सच कहूं तो आज की इस पूरी ‘लेफ्ट-लिबरल’ और कांग्रेसी राजनीति को देखकर शर्म आने लगी है। ‘मोदी विरोध’ अब इनके लिए कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह एक भयंकर मानसिक बीमारी बन चुका है।

आज हालात ये हो गए हैं की अगर कल को मस्क या कोई विदेशी ताकत भारत को अपना गुलाम बनाने की शर्त रख दे, और कह दे की “इसमें मोदी और अंबानी-अडानी का नुकसान है”, तो मैं गारंटी के साथ कह सकता हूँ की ये वामपंथी और कांग्रेसी नेता उस गुलामी के दस्तावेज़ पर भी खुशी-खुशी अपने दस्तखत कर देंगे।

इन्हें देश के भविष्य के तबाह होने की कोई फिक्र नहीं है, बस इनका सियासी एजेंडा सेट होना चाहिए।

इतिहास इस बात को याद रखेगा की जब भारत के टेलीकॉम बाज़ार और हमारे उद्योगपतियों को एक अमेरिकी विदेशी गुंडा सरेआम धमका रहा था, तब देश का तथाकथित मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी उस गोरे के साथ खड़ा होकर अपने ही देश पर हंस रहा था।

लेकिन उसी दौर में एक असदुद्दीन ओवैसी भी था, जिसने अपने तमाम राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों को एक झटके में किनारे फेंक दिया और देश की संप्रभुता की ढाल बनकर खड़ा हो गया।

सियासत में हर चीज़ भूल जाई जा सकती है, लेकिन जब बात देश की मिट्टी और इज़्ज़त की हो, तब जो गद्दारी करता है, पब्लिक उसे कभी माफ नहीं करती।

स्टारलिंक के बहाने भारत के डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा में सेंध लगाने की साज़िश जिसे कांग्रेस मज़े से हवा दे रही है

अब ज़रा उस खतरे की बात कर लेते हैं जो कांग्रेस और उनके पूरे इकोसिस्टम को समझ नहीं आ रहा है, या फिर वो जानबूझकर अनजान बन रहे हैं।

ये ‘स्टारलिंक’ (Starlink) कोई गली के नुक्कड़ वाला वाई-फाई (Wi-Fi) कनेक्शन नहीं है। यह सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट है।

इसका सीधा सा मतलब ये है की अगर इसे बिना कड़े नियमों के भारत में घुसने दिया गया, तो भारत के करोड़ों नागरिकों का पर्सनल डेटा, हमारी बैंकिंग डिटेल्स और हमारी प्राइवेसी… सब कुछ सीधे अमेरिका में बैठे मस्क के सर्वर्स में जाएगा।

क्या हम इतने बेवकूफ़ हैं की अपनी ‘डेटा संप्रभुता’ (Data Sovereignty) एक ऐसे विदेशी अरबपति के हाथ में दे दें जो किसी नियम को नहीं मानता?

एलन मस्क की तानाशाही का सबसे बड़ा सबूत तो रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के दौरान पूरी दुनिया ने देखा था।

जब युद्ध चल रहा था, तब मस्क ने अपनी मर्ज़ी से यूक्रेन के ऊपर स्टारलिंक का इंटरनेट बंद कर दिया था, जिससे यूक्रेन की सेना के ड्रोन और कम्यूनिकेशन ठप पड़ गए थे।

ज़रा सोचिए! अगर कल को भारत और किसी दुश्मन देश के बीच जंग छिड़ जाए, और अमेरिकी सरकार उस पर दबाव डाल दे, तो वो एक बटन दबाकर भारत का पूरा कम्यूनिकेशन सिस्टम ब्लैकआउट (Blackout) कर सकता है!

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