Zomato, Swiggy के डिलीवरी बॉय बनकर हमारे घरों तक घुस आए रोहिंग्या घुसपैठिए, फर्जी आधार कार्ड से देश भर में नौकरी कर रहे इन जिहादियों का खौफनाक सिंडिकेट

Zomato, Swiggy के डिलीवरी बॉय बनकर हमारे घरों तक घुस आए रोहिंग्या घुसपैठिए, फर्जी आधार कार्ड से देश भर में नौकरी कर रहे इन जिहादियों का खौफनाक सिंडिकेट

हम जिस झूठी सुरक्षा के भ्रम में जी रहे हैं, उसका पर्दाफाश होना बहुत ज़रूरी है। हम अपने घरों के बाहर बड़े-बड़े लोहे के गेट लगाते हैं, लाखों रुपये खर्च करके CCTV कैमरे लगवाते हैं, सिक्योरिटी गार्ड को सैलरी देते हैं ताकि कोई अनजान या खतरनाक आदमी हमारी फैमिली तक ना पहुंच सके।

रात को हम अपने रूम में AC चलाकर आराम से बैठते हैं, मोबाइल निकालते हैं और Zomato, Swiggy या Blinkit से पिज़्ज़ा और ग्रोसरी का ऑर्डर दे देते हैं।

आधे घंटे बाद दरवाज़े की घंटी बजती है। हम बिना कुछ सोचे-समझे दरवाज़ा खोलते हैं और उस लाल या नारंगी टी-शर्ट पहने हुए लड़के के हाथ से अपना पैकेट ले लेते हैं।

लेकिन ज़रा एक पल के लिए सोचिए, क्या आपने कभी जानने की कोशिश की है की वो जो टी-शर्ट पहनकर तुम्हारे दरवाज़े तक आया है, वो इंसान कौन है?

क्या वो भारत का कोई आम गरीब मज़दूर है, या फिर त्रिपुरा और बंगाल का बॉर्डर पार करके आया हुआ कोई खूंखार रोहिंग्या या बांग्लादेशी जिहादी?

आज इस देश की सबसे डरावनी सच्चाई यही है की जिस जिहादी घुसपैठिए को बॉर्डर पर हमारी BSF गोली मारने के लिए ढूंढ रही है, वही घुसपैठिया फर्जी आधार कार्ड बनवाकर एक डिलीवरी बॉय की आड़ में सीधा हमारे रूम के दरवाज़े तक पहुंच चुका है।

ये भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ‘सिक्योरिटी ब्रीच’ है। ये विदेशी जिहादी अब किसी झुग्गी-झोपड़ी में नहीं छुपे हैं, ये भारत की मेनस्ट्रीम इकॉनमी में घुस चुके हैं।

हमने खुद अपने हाथों से, अपने मोबाइल ऐप के ज़रिए इन खूंखार भेड़ियों को अपने घरों के अंदर बुलाने का रास्ता दे दिया है। ये पिज़्ज़ा का पैकेट नहीं, हमारी और आपकी सुरक्षा के लिए एक खौफनाक टाइम बम है जो हमारे घरों की दहलीज पार कर चुका है।

Zomato, Swiggy और कैब सर्विस कैसे बने जिहादियों के सबसे बड़े अड्डे, फर्जी नामों के पीछे छिपकर हमारे परिवारों की रेकी कर रहे घुसपैठिए

अब सवाल ये उठता है की आखिर ये विदेशी घुसपैठिए इतनी आसानी से इन बड़ी-बड़ी कंपनियों में घुस कैसे गए? इसका जवाब छुपा है इस ‘गिग इकॉनमी’ के उस सड़े हुए और गैर-ज़िम्मेदार सिस्टम में, जिसे सिर्फ और सिर्फ अपने मुनाफे से मतलब है।

इन डिलीवरी और कैब कंपनियों में नौकरी पाने के लिए किसी को भी कंपनी के ऑफिस जाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। सब कुछ ‘फेसलेस ऑनबोर्डिंग’ (Faceless Onboarding) से होता है।

मतलब, आपने ऐप डाउनलोड किया, उस पर अपना फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और एक फोटो अपलोड की, और लो जी, आधे घंटे के अंदर आप जोमैटो या स्विगी के पक्के डिलीवरी पार्टनर बन गए!

कंपनियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता की वो लड़का दिल्ली का रहने वाला है या ढाका का, उन्हें तो बस एक सस्ता मज़दूर चाहिए जो दिन-रात उनके पैकेट डिलीवर कर सके।

और इस खेल का सबसे खौफनाक और घिनौना हिस्सा क्या है, पता है? हिंदू नामों का फर्जीवाड़ा! आप जब अपने मोबाइल ऐप पर देखते हैं तो आपको डिलीवरी बॉय का नाम ‘राहुल’, ‘सूरज’ या ‘संदीप’ दिखाई देता है।

आप बेफिक्र हो जाते हैं की चलो, अपना ही कोई हिंदू भाई है। लेकिन जब वो लड़का पैकेट लेकर आपके सामने खड़ा होता है, तो उसके चेहरे की बनावट, उसके बात करने का लहज़ा और उसकी बंगाली-मिक्स ठेठ भाषा चीख-चीख कर बता रही होती है की ये कोई राहुल नहीं, बल्कि बांग्लादेश से भागकर आया हुआ कोई रकीबुल या मुस्तफा है।

अरे भाई, ये लोग सिर्फ डिलीवरी नहीं कर रहे हैं। ये डिलीवरी की आड़ में हमारे और आपके घरों की खौफनाक रेकी कर रहे हैं। जब ये तुम्हारे घर आते हैं, तो ये अपनी जिहादी आंखों से सब कुछ स्कैन कर लेते हैं।

किस घर में कौन अकेला रहता है, किस घर में कितनी महिलाएं हैं, कौन से घर में सुरक्षा कमज़ोर है- ये सारा का सारा डेटा इन घुसपैठियों के स्लीपर सेल तक पहुंच रहा है।

कल को अगर तुम्हारे मोहल्ले में कोई दंगा भड़क जाए या कोई क्राइम करना हो, तो इन्हें किसी गूगल मैप की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि तुम्हारी एक-एक गली का चप्पा-चप्पा इन जिहादी डिलीवरी बॉयज़ के दिमाग में छप चुका है।

चंद रुपयों में बिका देश का आधार और वोटर आईडी, रोहिंग्याओं को भारत का पक्का नागरिक बनाने वाले गद्दार बाबुओं का खौफनाक सिंडिकेट

ये घुसपैठिए भारत के सिस्टम को किस तरह अपनी जूतियों पर नचा रहे हैं, ज़रा उसका नंगा सच सुनिए। म्यांमार से खदेड़े गए रोहिंग्या और बांग्लादेश के जिहादी सबसे पहले त्रिपुरा, असम या मेघालय के उस टूटे हुए बॉर्डर से भारत में घुसते हैं जहाँ दलाल बैठे होते हैं।

वहां से ये लोग कंचनजंगा या कोरोमंडल एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें पकड़ते हैं और सीधा दिल्ली के आनंद विहार, बेंगलुरु के चामराजपेट या मुंबई के कुर्ला स्टेशन पर उतरते हैं।

अब भारत में नौकरी करने के लिए आधार कार्ड चाहिए। तो क्या आधार कार्ड बनवाना मुश्किल है? इस बिकाऊ सिस्टम में बिल्कुल नहीं! दिल्ली के निज़ामुद्दीन, शाहीन बाग, सीलमपुर और कोलकाता के बॉर्डर वाले इलाकों में इन जिहादियों के पक्के दलाल बैठे हैं।

ये दलाल 500 से 1000 रुपये लेते हैं और कंप्यूटर की छोटी सी दुकान में बैठकर फोटोशॉप के ज़रिए इन रोहिंग्याओं का पक्का आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी बना देते हैं।

ज़रा यूपी एटीएस (UP ATS) और दिल्ली पुलिस के ताज़ा छापों का रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए। अभी हाल ही में दिल्ली पुलिस की साउथ डिस्ट्रिक्ट टीम ने ऐसे खौफनाक गिरोहों का पर्दाफाश किया है जो लैपटॉप और फिंगरप्रिंट क्लोनिंग (Fingerprint Cloning) मशीनों के ज़रिए इन बांग्लादेशी घुसपैठियों को रातों-रात भारत का पक्का नागरिक बना रहे थे।

ये गद्दार सरकारी बाबू और दलाल चंद रुपयों के लालच में इस देश की डेमोग्राफी और राष्ट्रीय सुरक्षा का सरेआम चीरहरण कर रहे हैं।

एक आम हिंदुस्तानी को अपने आधार कार्ड में नाम या पता बदलवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं, चप्पलें घिस जाती हैं। लेकिन इन विदेशी जिहादियों को रातों-रात ‘भारतीय’ होने का सर्टिफिकेट मिल जाता है।

और एक बार जब इनके हाथ में वो फर्जी आधार कार्ड आ गया, तो फिर भारत की ये जोमैटो, स्विगी, उबर (Uber) और ओला (Ola) जैसी कंपनियां इनके लिए हाथ खोल कर खड़ी हो जाती हैं।

महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक पुलिस के छापों में खुले खौफनाक राज़, डिलीवरी बॉय की आड़ में पकड़े गए खूंखार बांग्लादेशी

अगर किसी सेक्युलर कीड़े को लग रहा है की मैं ये सब हवा में बोल रहा हूं, तो ज़रा आज की ताज़ा ज़मीनी हकीकत और पुलिस के छापों का रिकॉर्ड देख लीजिए।

अभी हाल ही में महाराष्ट्र में जब धड़ाधड़ ऐसे मामले सामने आए की डिलीवरी बॉय की आड़ में विदेशी क्रिमिनल काम कर रहे हैं, तो वहां की सरकार की भी नींद उड़ गई।

बीजेपी के फायरब्रांड नेता किरीट सोमैया ने जब डंके की चोट पर इन डिलीवरी कंपनियों के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया, तो महाराष्ट्र के श्रम मंत्री को विधानसभा में आकर सख्त आदेश पारित करने पड़े।

महाराष्ट्र सरकार ने साफ और कड़क फरमान जारी कर दिया की Zomato, Swiggy, Zepto और Blinkit जैसी कंपनियों के हर एक डिलीवरी बॉय का ‘पुलिस वेरिफिकेशन’ अनिवार्य होगा।

कंपनियों को चेतावनी दी गई की अगर उनके प्लेटफॉर्म पर कोई भी अवैध विदेशी या क्रिमिनल पाया गया, तो कंपनी के बड़े अफसरों पर सीधे केस दर्ज होगा।

और ज़रा हैदराबाद का वो मोहम्मद हसीबुल वाला खौफनाक केस याद कर लीजिए, जिसने पूरे देश के पैरों तले ज़मीन खिसका दी थी। मोहम्मद हसीबुल नाम का एक पक्का बांग्लादेशी जिहादी 25 हज़ार रुपये दलालों को देकर भारत के बॉर्डर में घुसता है।

वो सीधा हैदराबाद पहुंचता है। वहां वो फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवाता है। इसके बाद वो जोमैटो और स्विगी में डिलीवरी बॉय बनकर मलकपेट इलाके में काम शुरू कर देता है।

लेकिन इस जिहादी की असली साज़िश क्या थी? डिलीवरी करते-करते उसने फेसबुक पर एक हिंदू लड़की (जया चौधरी) को फंसा लिया।

अपना फर्जी नाम बताकर, अपना हिंदू रूप दिखाकर उसने उस मासूम हिंदू बेटी को लव जिहाद के जाल में फंसाया और उससे शादी भी कर ली! जब पुलिस को शक हुआ और उन्होंने छापा मारा, तब जाकर उस हसीबुल का असली बांग्लादेशी और जिहादी चेहरा दुनिया के सामने आया।

ज़रा सोचिए भाई! एक विदेशी घुसपैठिया हमारे देश में आता है, हमारी ही कंपनियों में नौकरी करता है, और हमारे ही घर की बेटी को लव जिहाद का शिकार बना लेता है। और हमारी पुलिस, हमारी खुफिया एजेंसियां और ये बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां बस तमाशा देखती रहती हैं!

दिल्ली के कालिंदी कुंज, शाहीन बाग और बेंगलुरु के चामराजपेट में रोज़ पुलिस रेड मार रही है। और हर रेड में दर्जनों ऐसे डिलीवरी बॉय पकड़े जा रहे हैं जिनके पास भारत का कोई असली कागज़ नहीं है।

ये सब के सब वो खूंखार बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं जो अपने देश में क्राइम करके भारत में छुपने आए हैं। ये वो जिहादी कैंसर है जो डिलीवरी बैग के अंदर छुपकर पूरे भारत की रगों में फैल रहा है, और अगर आज हमने इस कैंसर का इलाज नहीं किया, तो कल ये हमारे पूरे समाज को निगल जाएगा।

केंद्रीय मंत्री की खुली चेतावनी और हैदराबाद में हथियारों के साथ पकड़ा गया ज़ोमैटो का जिहादी डिलीवरी बॉय

ज़रा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की उस डंके की चोट वाली ललकार को याद कर लीजिए। गिरिराज सिंह जी ने सरेआम, कैमरों के सामने पूरे देश को चेतावनी दी थी की ज़ोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों में डिलीवरी बॉय के वेश में रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए भर चुके हैं।

उन्होंने साफ और कड़क शब्दों में कहा था की ये कोई आम मज़दूर नहीं हैं, बल्कि ये देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा हैं और राज्य की पुलिस को तुरंत इन्हें कॉलर से पकड़कर जेल में ठूंसना चाहिए।

लेकिन भाई, जब भी कोई सच्चा सनातनी नेता देश की सुरक्षा के लिए ऐसी बात बोलता है, तो वामपंथी पत्रकारों के पेट में भयानक दर्द शुरू हो जाता है।

वो तुरंत छाती पीटने लगते हैं की “ये तो हेट स्पीच है, गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है।” पर गिरिराज सिंह की उस चेतावनी का खौफनाक सच क्या था, ये मई 2026 में हैदराबाद की सड़कों पर सरेआम नंगा हो गया।

ज़रा हैदराबाद के उस रूह कंपा देने वाले ताज़ा केस को देखिए जिसने खुफिया एजेंसियों तक की नींद उड़ा दी है। मोहम्मद अबूबाकर नाम का एक 27 साल का कट्टरपंथी, जो दिन के उजाले में बड़ी मासूमियत से Zomato का एक डिलीवरी बॉय बनकर लोगों के घरों में खाना पहुंचाता था, उसका असली और खौफनाक चेहरा पुलिस के छापे में सामने आया।

जब पुलिस की स्पेशल टीम ने इस जिहादी को दबोचा, तो उसके पास से क्या निकला? डिलीवरी वाले बैग में पिज़्ज़ा या बर्गर नहीं था मेरे भाई! उसके पास से धारदार खतरनाक हथियार, पुलिस की फर्जी वर्दियां और फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुए।

ये कोई छोटा-मोटा सड़क छाप चोर-उचक्का नहीं था। ये बाकायदा एआई (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पुलिस अफसर बनकर आम लोगों को डरा-धमका रहा था और एक खौफनाक नेक्सस चला रहा था।

ज़रा सोचिए इस आतंकवादी मानसिकता को! जो लड़का दिन में तुम्हारे घर की घंटी बजाकर तुम्हें खाना दे रहा है, वो असल में हथियारों से लैस एक ऐसा जिहादी स्लीपर सेल है जो मौका मिलते ही किसी की भी जान ले सकता है।

उसे तुम्हारे घर का एड्रेस पता है, तुम्हारी हाउसिंग सोसाइटी की सिक्योरिटी का सारा लूपहोल पता है।

क्या अब भी किसी सेक्युलर कीड़े को और सबूत चाहिए? ये डिलीवरी बॉयज़ के वेश में भारत के शहरों में घूम रहे वो चलते-फिरते टाइम बम हैं, जो किसी भी दिन हमारे परिवारों पर फट सकते हैं।

ये सिर्फ खाना डिलीवर नहीं कर रहे, ये हथियारों की स्मगलिंग कर रहे हैं। जब तक इन डिलीवरी कंपनियों के दफ्तरों पर NIA के छापे नहीं पड़ेंगे और इन विदेशी जिहादियों को घसीटकर बाहर नहीं निकाला जाएगा, तब तक इस देश का कोई भी घर सुरक्षित नहीं है। हमारी सुस्ती ही हमारी सबसे बड़ी कातिल बन रही है।

गिग इकॉनमी में बिना वेरिफिकेशन नो एंट्री, और देश भर में कड़क NRC लागू करने का आ गया वक्त

अब बात बहुत साफ है भाई। बहुत हो गया ये पिज़्ज़ा और बर्गर का शौक! अगर आज हम हिंदू नहीं जागे, तो कल हमारे ही घरों में हमारे बच्चों की लाशें बिछी होंगी और ये जिहादी डिलीवरी बॉय हमारी ही छतों पर अपना हरा झंडा गाड़ चुके होंगे।

अब हिंदू समाज को इन कंपनियों- Zomato, Swiggy, Zepto, Blinkit, Uber और Ola- की कॉलर पकड़कर डंके की चोट पर जवाब मांगना होगा।

सरकार को रातों-रात एक ऐसा खौफनाक कानून लाना चाहिए की अगर किसी भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर एक भी अवैध घुसपैठिया या फर्जी आधार कार्ड वाला जिहादी काम करता हुआ पाया गया, तो उस कंपनी के सीईओ (CEO) पर सीधे देशद्रोह और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत मुकदमा ठोका जाए।

कंपनियों पर करोड़ों का जुर्माना लगे और उनका लाइसेंस उसी दिन रद्द कर दिया जाए। जब तक इन कॉर्पोरेट कंपनियों के मालिकों के अंदर जेल जाने का खौफ नहीं बैठेगा, तब तक ये चंद रुपयों के मुनाफे के लिए हमारी सुरक्षा को ऐसे ही दांव पर लगाते रहेंगे।

और इस धर्मयुद्ध में सिर्फ सरकार की ज़िम्मेदारी नहीं है। सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी उस आम हिंदू की है जो घर बैठकर ऑर्डर देता है। अपनी सोई हुई चेतना को जगाओ!

जब भी तुम्हारे घर कोई सामान देने आए, तो सिर्फ पैकेट मत लो। उस लड़के का नाम पूछो। अगर ज़रा भी शक हो की वो अपनी पहचान छुपा रहा है, तो बेझिझक उससे उसका असली आधार कार्ड मांगो।

अगर वो आनाकानी करे या उसकी भाषा संदिग्ध लगे, तो उसे वहां से जाने मत दो, तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल लगाओ।

अपनी सोसाइटी में कड़े नियम बनाओ की बिना पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी डिलीवरी वाला गेट के अंदर कदम नहीं रखेगा। तुम्हारी सुस्ती ही तुम्हारे घर की तबाही का सबसे बड़ा कारण बन रही है।

संसद में बैठे हमारे राष्ट्रवादी नेताओं को भी अब ये बात समझ लेनी चाहिए की 2026 के इस नए भारत में अब ‘सबका साथ’ वाली मीठी गोलियां नहीं चलेंगी।

देश भर के करोड़ों सनातनी आज एक सुर में सिर्फ और सिर्फ एक चीज़ मांग रहे हैं- ‘राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर’! अब बिना किसी देरी के, बिना किसी सेक्युलर विरोध की परवाह किए पूरे देश में सबसे कड़क NRC लागू होना चाहिए।

एक-एक गली, एक-एक मोहल्ले और एक-एक मदरसे को छान मारो। जिन गद्दार बाबुओं ने 500 रुपये लेकर इनके फर्जी आधार कार्ड बनाए हैं, उन्हें बीच चौराहे पर नंगा करके पीटो और जेल में सड़ा दो।

इन विदेशी जिहादी घुसपैठियों को कॉलर से पकड़ो, इन्हें जानवरों की तरह डिटेंशन कैंपों में ठूंसो और फिर बॉर्डर के उस पार लात मारकर फेंक दो।

भारत कोई अंतरराष्ट्रीय धर्मशाला या जिहादियों का अनाथालय नहीं है जहाँ दुनिया भर का कोई भी कीड़ा-मकोड़ा आकर बस जाएगा और हमारी थाली का खाना छीनेगा।

Scroll to Top