खुद को 'Gen Z' बताकर कश्मीर में सेना के खिलाफ ज़हर उगलने वाली ये कैसी अलगाववादी सोच, 'मॉडर्न' दिखने की आड़ में इन युवाओं को देश के रक्षकों से बदजुबानी करने का हक आखिर दिया किसने

खुद को ‘Gen Z’ बताकर कश्मीर में सेना के खिलाफ ज़हर उगलने वाली ये कैसी अलगाववादी सोच, ‘मॉडर्न’ दिखने की आड़ में देश के रक्षकों से बदजुबानी करने का हक आखिर इन युवाओं को दिया किसने

जब भी ‘सरहद’ का ज़िक्र आता है, तो हर सच्चे हिंदुस्तानी को ये याद कर लेना चाहिए की रात को जब हम अपने घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं, तब कोई अपना खून जमा देने वाली माइनस 40 डिग्री की ठंड में सरहद पर खड़ा होता है।

लेकिन, क्या हो जब देश के भीतर ही पल रही एक ऐसी नस्ल सामने आ जाए, जिसे आज़ादी की कीमत ही न पता हो?

आजकल एक नया ट्रेंड चल पड़ा है। दिल्ली, मुंबई और बड़े शहरों में पली-बढ़ी एक ऐसी ‘वोक’ (Woke) और लिबरल जनरेशन तैयार हो रही है, जिसे लगता है की चार अंग्रेज़ी के शब्द बोल देने से और खुद पर ‘मॉडर्न’ होने का ठप्पा लगा लेने से उन्हें देश के कानून और सेना को गालियां देने का लाइसेंस मिल गया है।

हाल ही में कश्मीर के कारगिल रूट से एक ऐसा वीडियो सामने आया, जिसने पूरे देश का खून उबाल दिया।

एक 25 साल की ‘पापा की परी’ बीच सड़क पर खड़ी होकर हमारी भारतीय सेना के जवानों के मुंह पर उंगली दिखाकर उन्हें जलील कर रही थी।

और मज़ाक देखिए, वो खुद को ‘Gen Z’ (आजकल की नई जनरेशन) बताकर अलगाववादियों वाला ज़हर भी उगल रही थी।

आखिर इन युवाओं के दिमाग में ये कचरा भर कौन रहा है? इन्हें सेना के खिलाफ बदज़ुबानी करने का हक किसने दे दिया?

आइए इस पूरे ‘Gen-Z’ ड्रामे और इसके पीछे की सड़ी हुई मानसिकता का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलते हैं।

कारगिल के मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर हुआ क्या था जो इस पापा की परी ने बीच सड़क पर शुरू कर दिया अपना ‘Gen-Z’ ड्रामा

अब ज़रा इस घटना की पूरी ग्राउंड रिपोर्ट और क्रोनोलॉजी समझिए। यह घटना 25 जुलाई 2026 की है, लेकिन इसका वीडियो अभी अगस्त के तीसरे हफ्ते में वायरल हुआ है।

जगह थी कारगिल और लद्दाख रूट पर स्थित ‘मिनिमार्ग’ (Minimarg) चेकपोस्ट। यह इलाका सुरक्षा के लिहाज़ से कितना हाई-अलर्ट पर रहता है, यह बताने की ज़रूरत नहीं है।

उस दिन देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सेना के प्रमुख (Army Chief) जनरल धीरज सेठ कारगिल के दौरे पर थे।

कारगिल विजय दिवस का मौका था और मौसम अचानक बेहद ख़राब हो गया। मौसम की खराबी के चलते उनका हेलीकॉप्टर नहीं उड़ पाया।

अब जब देश का रक्षा मंत्री और आर्मी चीफ सड़क के रास्ते (ज़ोजिला-गुमरी रूट से) जा रहे हों, तो ज़ाहिर सी बात है सुरक्षा का सबसे कड़ा प्रोटोकॉल लागू होगा।

इसी वजह से मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर सेना और पुलिस ने ट्रैफिक को कुछ देर के लिए रोक दिया था।

अरे भाई, जब रक्षा मंत्री या Army Chief सवेदनशील इलाकों से गुज़रते हैं, तो पूरी दुनिया में ऐसे ही प्रोटोकॉल फॉलो किए जाते हैं। इसमें कौन सी नई बात है?

सेना ने कोई शौक से या मज़े लेने के लिए तो गाड़ियां रोकी नहीं थीं। लेकिन इसी जाम में फंसी एक 25 साल की ‘टूरिस्ट’ लड़की से यह बर्दाश्त नहीं हुआ।

उसे लगा की भई वो तो बहुत बड़ी महारानी है, उसका एक सेकंड भी बर्बाद कैसे हो गया!

बस फिर क्या था, मैडम गाड़ी से बाहर उतरीं और सीधे सड़क पर खड़े भारतीय सेना और पुलिस के जवानों से जा भिड़ीं।

उसने जवानों को सरेआम हड़काना शुरू कर दिया, उन पर चिल्लाने लगी और हाथ नचा-नचा कर अंग्रेज़ी में उन्हें गालियां देने लगी।

सामने हथियार लिए खड़े जवान पूरी मर्यादा में, पूरे धैर्य के साथ उसे समझा रहे थे, लेकिन उस लड़की के सिर पर तो ‘Gen-Z’ होने का भूत सवार था।

उसने वो सब बकना शुरू कर दिया जो अक्सर किसी वामपंथी धरने में या किसी देश-विरोधी टूलकिट में सुनाई देता है।

‘हम Gen Z हैं’ कहकर सेना पर रौब झाड़ने की ये कैसी बीमारी, क्या मॉडर्न होने का मतलब देश के जवानों को गालियां देना है

वीडियो में उस लड़की का एक डायलॉग सुनकर तो सच में किसी का भी माथा ठनक जाए। वो कैमरे पर उंगली दिखाते हुए चीख-चीख कर कह रही थी, “We are Gen Z… we will not tolerate this nonsense!” (हम जेन-ज़ेड हैं, हम ये बकवास बर्दाश्त नहीं करेंगे)।

मतलब हद हो गई! ये ‘Gen Z’ का बिल्ला लगाकर क्या तुम देश के संविधान से ऊपर हो गए? ये ‘Gen Z’ क्या कोई वीआईपी पास है जो तुम्हें भारतीय सेना के जवानों को बेज़्ज़त करने का अधिकार दे देता है?

एक ज़माना था जब सड़क छाप गुंडे पुलिस से पकड़े जाने पर कहते थे, “तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है!” आज उसी डायलॉग का ये नया और मॉडर्न वर्ज़न आ गया है- “We are Gen Z!”

इन बच्चों को लगता है की इंस्टाग्राम पर चार रील बना लेने से, अमेरिकन स्लैंग (Slang) में अंग्रेज़ी बोल लेने से और खुद को ‘वोक’ बता लेने से ये दुनिया के सबसे ज्ञानी लोग बन गए हैं।

इन्हें लगता है की सेना का जवान जो वहां धूप और बर्फ में खड़ा है, वो तो अनपढ़ है, उसे क्या पता!

ये जो ‘Gen Z’ होने का फर्जी घमंड है ना, यह दरअसल उस खोखली परवरिश का नतीजा है जहां बच्चों को यह तो सिखाया जाता है की उनके ‘अधिकार’ क्या हैं, लेकिन यह कभी नहीं बताया जाता की देश के प्रति उनके ‘कर्तव्य’ क्या हैं।

बॉर्डर पर जब दुश्मन की गोली चलती है ना, तो वो यह पूछकर नहीं आती की सामने वाला ‘मिलेनियल’ (Millennial) है, ‘बूमर’ (Boomer) है या ‘Gen Z’ है।

गोली सिर्फ जिस्म चीरती है। और उस गोली को अपने सीने पर खाने वाला जवान कोई ‘Gen Z’ का टैग नहीं लगाता, वो सिर्फ एक ‘भारतीय सैनिक’ होता है।

इस लड़की को यह मुगालता था की वो अंग्रेज़ी में चार लाइनें बोलकर और ‘Nonsense’ कहकर सेना को डरा देगी। उसे लगा की वो कैमरे पर विक्टिम कार्ड खेलेगी और पूरा लिबरल ईकोसिस्टम उसके सपोर्ट में उतर आएगा।

लेकिन उसे ये नहीं पता था की वो हिंदुस्तान के उन रक्षकों से पंगा ले रही है, जिनकी एक दहाड़ से बॉर्डर पार बैठे आतंकियों के पसीने छूट जाते हैं।

हमारे जवानों का संयम देखिए, उन्होंने उस लड़की पर कोई बल प्रयोग नहीं किया, चुपचाप उसकी बदतमीज़ी सहते रहे। क्योंकि सेना को संस्कार सिखाए जाते हैं, जो शायद इस लड़की के घर वालों ने इसे कभी नहीं सिखाए।

मेरे टैक्स के पैसों से तुम्हारी सैलरी आती है… देश के रक्षकों को बिकाऊ समझने वाली इस सड़ी हुई लिबरल सोच का असली सच

वीडियो में उस लड़की का एक और डायलॉग था। कैमरे पर चिल्लाते हुए वो मैडम कह रही थीं, “हमारे टैक्स के पैसों से तुम्हारी सैलरी आती है! हम तुम्हें पैसा देते हैं तब तुम्हारे घर चलते हैं!”

ज़रा रुकिए और इस घटिया मानसिकता को समझिए। इस देश में एक बहुत बड़ा और जाहिल वर्ग पैदा हो गया है, जिसे लगता है की सरकार को चंद रुपयों का इनकम टैक्स देकर उन्होंने देश की सेना, पुलिस और सिस्टम को खरीद लिया है।

अरे मैडम! तुम सिर्फ अपना टैक्स देती हो, लेकिन वो जवान सरहद पर अपनी ‘जान’ देता है! क्या दुनिया की कोई भी करंसी, कोई भी दौलत उस जवान की सांसों की कीमत चुका सकती है?

सेना की नौकरी कोई 9 से 5 की कॉर्पोरेट जॉब नहीं है, जहां AC में बैठकर लैपटॉप पर खट-खट किया और महीने के अंत में सैलरी आ गई।

जब माइनस 40 डिग्री में खून जमने लगता है ना, जब सामने से दुश्मन की गोलियों की बौछार हो रही होती है, तब तुम्हारा ये टैक्स का पैसा किसी जवान के सीने को छलनी होने से नहीं बचाता।

वहां सिर्फ उसका जज़्बा और उसकी देशभक्ति ढाल बनकर खड़ी होती है।

और सबसे बड़ी बात, इन अनपढ़ और ‘वोक’ युवाओं को ये किसने बता दिया की सेना के जवान टैक्स नहीं देते?

अरे जाहिलों, सेना का जो जवान बाज़ार से साबुन, तेल या राशन खरीदता है, क्या वो उस पर जीएसटी (GST) नहीं चुकाता? क्या एक अफसर की सैलरी से इनकम टैक्स नहीं कटता?

आर्मी की सर्विस को सिर्फ ‘सैलरी और टैक्स’ के तराज़ू में तोलने वालों से बड़ा नीच इंसान इस देश में कोई नहीं हो सकता।

तुम चंद हज़ार रुपये टैक्स देकर खुद को देश का मालिक समझने लगे हो, और जो अपनी पूरी जवानी देश के नाम लिख देता है, उसे तुम अपना नौकर बता रहे हो? लानत है ऐसी सोच पर!

“तुम कश्मीरियों को बंधक बनाकर रखते हो…” अलगाववादियों वाली ये भाषा आखिर इस मॉडर्न लड़की के दिमाग में भरी किसने

लेकिन इस पूरे वीडियो का सबसे खौफनाक और ज़हरीला हिस्सा वो था, जब इस ‘Gen Z’ लड़की ने सेना पर सीधा इल्ज़ाम लगाया।

उसने चिल्लाते हुए कहा, “तुम लोग कश्मीरियों को तो ऐसे ही बंद करके (लॉक अप करके) रखते हो, अब हम टूरिस्टों के साथ भी यही कर रहे हो!”

ये लाइन पढ़ते ही दिमाग ठनकना चाहिए आपका। एक 25 साल की मॉडर्न लड़की, जो दिल्ली या मुंबई के किसी पॉश इलाके से टूरिज़्म का मज़ा लेने आई है, उसके मुंह से अचानक हुर्रियत और पत्थरबाज़ों वाली भाषा कैसे निकलने लगी?

एक ‘टूरिस्ट’ के दिमाग में कश्मीर और सेना को लेकर ये नैरेटिव (Narrative) आखिर भरा किसने?

यहीं पर आकर इस ‘लिबरल ईकोसिस्टम’ का सबसे बड़ा और काला सच नंगा हो जाता है। ये कोई अचानक गुस्से में निकली बात नहीं थी।

ये उस ज़हर का नतीजा है, जो पिछले कई सालों से यूट्यूब, विदेशी फंडिंग पर पलने वाले फैक्ट-चेकर्स और वामपंथी पोर्टल्स के ज़रिए हमारे युवाओं के दिमाग में घोला जा रहा है।

ध्रुव राठी और ‘ऑल्ट न्यूज़’ जैसे स्वयंभू ज्ञानियों का पूरा एक नेक्सस है, जो दिन-रात यही प्रोपेगेंडा चलाता है की कश्मीर में सेना ‘ज़ुल्म’ कर रही है, वहां मानवाधिकारों का हनन हो रहा है।

ये लोग कभी आतंकियों के हाथों मारे गए निहत्थे हिंदुओं का दर्द नहीं दिखाएंगे, लेकिन आतंकियों के जनाज़े में छाती ज़रूर पीटेंगे।

इसी इकोसिस्टम ने आज की इस जनरेशन का इस कदर ब्रेनवॉश कर दिया है की इन्हें अपनी ही सेना दुश्मन लगने लगी है और पत्थरबाज़ बेचारे लगने लगे हैं।

इस लड़की के मुंह से जो “कश्मीरियों को बंधक बनाने” वाली बात निकली, वो सीधा-सीधा वामपंथी और अलगाववादी मानसिकता का हिस्सा है। यही ‘सॉफ्ट-अलगाववाद’ है, जो अब हमारे देश के युवाओं की नसों में उतारा जा रहा है।

ये ‘Gen Z’ का चोला ओढ़कर दरअसल अर्बन-नक्सलों वाली ज़ुबान बोल रहे हैं। इन्हें ये तो दिखता है की चेकिंग के नाम पर सेना ने उन्हें 10 मिनट रोक दिया, लेकिन इन्हें वो 35 साल का खूनी इतिहास नहीं दिखता जहां कश्मीर में पाकिस्तान के पाले हुए आतंकियों ने खून की नदियां बहा दीं।

‘शेरशाह’ का वो खौफनाक सीन याद करो जहां आम नागरिकों की चेकिंग करते हुए हमारे जवानों के सीने में उतार दी जाती हैं गोलियां

आजकल की इस जनरेशन को शायद लगता है की कश्मीर कोई गोवा या मनाली जैसा पिकनिक स्पॉट है। जब सेना बैरिकेड लगाकर चेकिंग करती है, तो इन मैडम लोगों को लगता है की भई हमारे मानवाधिकारों का हनन हो रहा है!

अगर आपको समझना है की कश्मीर में सेना इतनी सख्ती क्यों बरतती है, तो आपको कुछ साल पहले आई फिल्म ‘शेरशाह’ (Shershaah) का वो रोंगटे खड़े कर देने वाला सीन याद करना चाहिए।

फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा अपनी टुकड़ी के साथ एक चेकपोस्ट पर गाड़ियों की चेकिंग कर रहे होते हैं। तभी एक लाल रंग की मारुति कार वहां आकर रुकती है। उसमें एक बुज़ुर्ग कपल बैठा होता है।

वो बुज़ुर्ग आदमी भी बिल्कुल इसी लड़की की तरह झल्लाते हुए कहता है, “अरे तुम लोगों ने तो हमें परेशान करके रखा हुआ है, कैद कर देते हो फलाना-ढिमकाना।”

कैप्टन बत्रा मुस्कुराकर बड़े अदब से उसे समझाते हैं की “बाबा, हम आपकी हिफाज़त के लिए ही चेकिंग कर रहे हैं।”

और फिर क्या होता है? अगले ही सेकंड उस कार के पीछे छिपे आतंकी ताबड़तोड़ AK-47 से गोलियां बरसाना शुरू कर देते हैं! पहली ही गोली जाकर हमारे जवान के सीने में लगती है।

यही कश्मीर की असली और खौफनाक ज़मीनी हकीकत है! आतंकी कभी माथे पर ‘आतंकी’ का स्टिकर लगाकर नहीं आते।

वो इन्हीं लाल-नीली आम गाड़ियों में, आम कपड़ों में, औरतों या बुज़ुर्गों का भेस बनाकर आते हैं। अगर उस चेकपोस्ट पर खड़े सेना के जवान से चेकिंग में 10 सेकंड की भी ढील हो जाए ना, तो उसे सीधे सीने पर गोली खानी पड़ती है।

क्या ये AC गाड़ियों में घूमने वाली ‘Gen Z’ लड़कियां उस मौत के खतरे का एक प्रतिशत भी समझ सकती हैं? जो जवान उस चेकपोस्ट पर तुम्हारी गाड़ी रोक रहा है, वो मज़े के लिए नहीं कर रहा।

उसे नहीं पता की सामने वाली गाड़ी से कोई लड़की निकलेगी या बुर्के में बैठा कोई खूंखार जिहादी जो उस पर ग्रेनेड फेंक देगा! तुम्हारी सुरक्षा पक्की करने के लिए वो अपनी जान दांव पर लगा रहा है, और तुम उसे सड़क पर गालियां दे रही हो?

अगर इतनी ही घुटन महसूस होती है सेना की चेकिंग से, तो एक काम करो ना! सीरिया, लेबनान या पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जाकर टूरिज़्म का मज़ा लो।

वहां कोई इंडियन आर्मी तुम्हें रोकने-टोकने वाली नहीं होगी। तब समझ में आएगा की बिना रक्षकों के आज़ादी का स्वाद कैसा होता है!

लद्दाख पुलिस के डंडे का खौफ और रातों-रात निकल गई सारी हेकड़ी, कैमरे के सामने रोते हुए कैसे भीगी बिल्ली बन गई ये ‘Gen-Z’ शेरनी

जब इन ‘वोक’ और लिबरल लोगों पर कानून का डंडा पड़ता है, तो इनकी सारी अंग्रेज़ी और सारा ‘Gen Z’ का घमंड मिनटों में हवा हो जाता है।

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे देश का गुस्सा फूट पड़ा। हर सच्चे हिंदुस्तानी ने उस लड़की की और उस पूरे लिबरल इकोसिस्टम की धज्जियां उड़ानी शुरू कर दीं।

कश्मीर में 15 कॉर्प्स के कमांडर रह चुके रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल डी.पी. पांडे (Lt Gen DP Pandey) जैसे दिग्गजों ने इस लड़की की जमकर क्लास लगाई।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा था की मैं चंदा इकट्ठा करके इस लड़की की एक महीने की सैलरी देने को तैयार हूँ, बस ये एक महीना सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर सेना की तरह ड्यूटी करके दिखा दे।

बवाल इतना भयंकर हुआ की लद्दाख पुलिस भी एक्शन मोड में आ गई। पुलिस ने साफ कर दिया की संवेदनशील इलाके (Sensitive Zone) में ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाबलों के काम में बाधा डालना और उनका अपमान करना एक गंभीर अपराध है, और इस पर सख्त एफआईआर (FIR) होगी।

बस फिर क्या था! जिस लड़की ने “वी आर जेन-ज़ेड, वी विल नॉट टॉलरेट” कहते हुए आसमान सिर पर उठा रखा था, पुलिस के डंडे और जेल की हवा खाने के खौफ ने उसकी सारी हेकड़ी रातों-रात निकाल दी।

अभी हाल ही में, 20 अगस्त 2026 को इस तथाकथित शेरनी का एक और वीडियो सामने आया। लेकिन इस बार वो दहाड़ नहीं रही थी, बल्कि भीगी बिल्ली की तरह कैमरे के सामने रो रही थी।

उसने हाथ जोड़कर और नाक रगड़कर भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांगी।

रोते-रोते सफाई दी की “मैं फ्रस्ट्रेशन (ट्रैफिक जाम) में अपना आपा खो बैठी थी, मेरा इरादा सेना का अपमान करना नहीं था।”

अरे मैडम, फ्रस्ट्रेशन में इंसान चीखता है, लेकिन फ्रस्ट्रेशन में किसी के मुंह से ‘कश्मीरियों को बंधक बनाने’ वाली अलगाववादी भाषा नहीं निकलती!

ये माफ़ीनामा तुम्हारे पछतावे का नहीं है, ये सिर्फ और सिर्फ कानून के उस डंडे का खौफ है जो अगर पड़ जाता, तो तुम्हारा सारा ‘मॉडर्न’ करियर तबाह हो जाता।

इस देश के हर युवा और हर नागरिक को एक बात बहुत गहराई से समझ लेनी चाहिए। आपको जो ये रात को बेखौफ सड़कों पर घूमने की आज़ादी मिली है, पब और डिस्को में जाकर नाचने की आज़ादी मिली है, और सोशल मीडिया पर अपनी ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ का ज्ञान बघारने की आज़ादी मिली है ना…

वो आज़ादी इसलिए है क्योंकि बॉर्डर पर कोई जवान अपना खून जमाकर सीना ताने खड़ा है।

जिस दिन वो जवान वहां से हट गया या जिस दिन उसने अपना संयम खो दिया, उस दिन तुम्हारी इस ‘Gen Z’ आज़ादी के परखच्चे उड़ने में एक दिन भी नहीं लगेगा।

वन्दे मातरम! जय हिन्द! भारतीय सेना अमर रहे!

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