दुनिया हमेशा से यही ताना मारती थी ना की गुरुकुल के बच्चे तो बस पूजा-पाठ और कर्मकांड तक ही सीमित रह जाते हैं? उन्हें तो दुनियादारी और आधुनिक तकनीक का कुछ पता ही नहीं होता!
जैन उद्योगपति गौतम अडानी ने उन सब तानों का ऐसा करारा जवाब दिया है की सबकी बोलती बंद हो गई।
उन्होंने साबित कर दिया है की अगर हमारे वेदों का ज्ञान और आज के ज़माने का विज्ञान एक साथ मिल जाएं, तो भारत को फिर से ‘विश्वगुरु’ बनने से किसी का ताऊ नहीं रोक सकता।
चलिए आपको बताते हैं की कैसे जैन समाज आज सनातन धर्म की सबसे मजबूत और अभेद्य ढाल बनकर खड़ा है।।
अयोध्या की पावन धरती पर वेद और विज्ञान का महासंगम, जब गुरुकुल के शिष्यों के हाथों में आया आधुनिक कंप्यूटर का ब्रह्मास्त्र
अयोध्या के श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय में विद्यार्थियों को आधुनिक कंप्यूटर लैब के माध्यम से तकनीक से जुड़ते देखना सुखद है। उनकी एक छोटी-सी इच्छा पूरी करने में हम सहभागी बन सके, यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है।
हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ने का यह… pic.twitter.com/JuFco2bf0O
— Gautam Adani (@gautam_adani) August 25, 2026
अयोध्या… वो पावन धरा जहां की हवाओं में हर वक्त राम नाम और वेद के मंत्र गूंजते हैं, वहां अब एक बिल्कुल नई और अद्भुत धुन सुनाई दे रही है।
ये धुन है कीबोर्ड की खट-खट की! माथे पर भस्म और सिर पर शिखा (चोटी), बदन पर धोती-कुर्ता और गले में जनेऊ धारण किए हुए छोटे-छोटे शिष्य, आधुनिक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर कोडिंग और इंटरनेट की दुनिया खंगाल रहे हैं।
कल ही की बात है, 25 अगस्त 2026 को गौतम अडानी जी ने अपने X अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया।
उसमें अयोध्या के ‘श्री निःशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय’ के छोटे-छोटे बच्चे एकदम हाई-टेक और चमचमाती कंप्यूटर लैब में बैठकर पढ़ाई कर रहे थे।
अडानी फाउंडेशन ने रातों-रात इस गुरुकुल में एक ऐसी आधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित कर दी है, जो शायद दिल्ली-मुंबई के बड़े-बड़े कॉन्वेंट स्कूलों को भी टक्कर दे दे।
अडानी जी ने वो वीडियो शेयर करते हुए जो बातें लिखीं, उसने तो सीधे दिल जीत लिया।
उन्होंने साफ-साफ लिखा की “यह हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा को डिजिटल युग से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों के करीब आ सके।”
ये कोई मामूली दान-पुण्य नहीं है दोस्तों। ये अडानी जी के उन ‘जैन’ संस्कारों की देन है जो हमेशा सनातन और देश के लिए एक ढाल बनकर खड़े रहते हैं।
हनुमान जयंती पर रामलला के दर से किया गया वो ऐतिहासिक वादा जिसे गौतम अडानी ने बिना किसी शोर-शराबे के कर दिया पूरा
अब बात करते हैं की आखिर इस पूरी कहानी की शुरुआत कहां से हुई। आजकल के सफेदपोशों की आदत होती है की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और भूल जाते हैं।
लेकिन एक सच्चा सनातनी और मारवाड़ी-जैन व्यापारी जो ज़बान दे देता है, उसे पत्थर की लकीर मानता है।
कहानी फ्लैशबैक में जाती है इसी साल अप्रैल (2026) में। हनुमान जयंती का बहुत ही पावन मौका था। गौतम अडानी अपने पूरे परिवार के साथ रामलला के दर्शन करने अयोध्या पहुंचे थे।
दर्शन करने के बाद वे सीधे पहुंचे इसी ‘श्री निःशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय’ में। वहां उन्होंने ज़मीन पर बैठकर उन छोटे-छोटे शिष्यों से बातचीत की, उनके श्लोक सुने और उनकी जीवनशैली देखी।
उसी दिन अडानी जी के दिल में करुणा आ गयी। उन्होंने वहां खड़े होकर कहा था की “जब शिक्षा संस्कारों से जुड़ी होती है, तो वह केवल व्यक्ति का नहीं बल्कि राष्ट्र का भविष्य गढ़ती है।”
उसी वक्त उन्होंने ये संकल्प लिया था की आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के इस दौर में गुरुकुल संस्कृति को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने वादा किया था की वो इस गुरुकुल को वो सारे हाई-टेक तकनीक देंगे जो आज के वक़्त में दुनिया से कदम मिलाने के लिए ज़रूरी हैं।
और देखिए! चार महीने भी ठीक से नहीं बीते.. और अडानी फाउंडेशन ने अपना वादा चुपचाप पूरा कर दिया। इसे कहते हैं असली सेवा! बिना ढिंढोरा पीटे अपनी संस्कृति के लिए अपना खज़ाना खोल देना।
राम मंदिर से मात्र दस मिनट की दूरी पर खड़ा वो गुरुकुल जहां शिखा और सूत्र वाले छात्र अब AI सीखेंगे
वैसे आपको बता दूं की श्री निःशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय’ राम जन्मभूमि मंदिर से मात्र 10 मिनट की दूरी पर स्थित है।
ये वो तपोभूमि है जहां गरीब और आम परिवारों के बच्चे बिना एक भी पैसा दिए (बिल्कुल फ्री में) अपनी सनातन संस्कृति, वेद, उपनिषद, और पुराणों की शिक्षा ग्रहण करते हैं।
सोचिए ज़रा… जिन बच्चों के माता-पिता के पास कॉन्वेंट स्कूलों की लाखों रुपये की फीस भरने की आमदनी नहीं है, वो बच्चे यहां अपने धर्म के संस्कार सीखते हैं।
और अब, गौतम अडानी की वजह से, यही बच्चे दुनिया की सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी सीखेंगे। अब हमारे ये शिखा और जनेऊ धारी बच्चे सिर्फ हवन-पूजन तक नहीं रुकने वाले भाई!
अब ये एआई (Artificial Intelligence), कोडिंग, और इंटरनेट की दुनिया में भी अपने दिमाग के झंडे गाड़ेंगे।
संस्कृत भाषा को वैसे भी दुनिया भर के वैज्ञानिक कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए सबसे परफेक्ट भाषा मानते हैं। अब जब इन बच्चों की संस्कृत की तार्किक शक्ति के साथ कंप्यूटर की स्पीड मिलेगी, तो आप खुद अंदाज़ा लगा लीजिए की कैसा भयंकर चमत्कार होने वाला है।
जब जब सनातन की जड़ों को सींचने की बात आती है तो जैन समाज सबसे आगे रहता है, कैसे ये जैन व्यापारी बने हुए हैं हिंदू धर्म की अभेद्य ढाल
अगर आप भारत का इतिहास उठाकर देखेंगे, तो एक बात बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो जाएगी। चाहे मुगलों का वो खूंखार और क्रूर दौर रहा हो, या अंग्रेजों की गुलामी का वक्त…
जब-जब हमारी सनातन संस्कृति, हमारे मंदिरों और हमारे धर्म पर कोई भी संकट आया, तो ढाल बनकर सबसे आगे कौन खड़ा हुआ? जवाब है- हमारा जैन समाज!
सच कहूं तो जैन समाज ने कभी भी अपने धर्म और अपनी संस्कृति के लिए अपनी तिजोरी के दरवाज़े बंद नहीं किए। आपको महाराणा प्रताप के वो परम मित्र और दानवीर ‘भामाशाह’ तो याद ही होंगे! वो भी एक जैन थे।
जब महाराणा प्रताप को मुगलों से लड़ने के लिए हथियारों और सेना की ज़रूरत पड़ी, तो भामाशाह ने बिना एक पल सोचे अपनी पूरी ज़िंदगी की कमाई राष्ट्र और धर्म के चरणों में रख दी थी। गौतम अडानी भी उसी महान जैन परंपरा के आज के नायक हैं।
आज के इस तथाकथित ‘सेक्युलर’ दौर में, जहां बहुत से बड़े-बड़े उद्योगपति वामपंथी एनजीओ (NGO) या विदेशी अजेंडों पर पैसा लुटाकर झूठी वाहवाही लूटने में लगे रहते हैं, वहां गौतम अडानी जैसे जैन सेठ बिल्कुल अलग मिट्टी के बने हैं।
जब कहीं कोई भव्य मंदिर बनवाना हो, किसी पुरानी गौशाला का जीर्णोद्धार करना हो, या फिर अयोध्या जैसे पवित्र शहर में किसी गुरुकुल को हाई-टेक बनाना हो…
ये जैन व्यापारी बिना किसी मीडिया कवरेज के, बिना किसी से कोई ‘सेक्युलर सर्टिफिकेट’ मांगे अपना खज़ाना खोल देते हैं।
गौतम अडानी खुद एक पक्के जैन संस्कारी परिवार से आते हैं। उनका अयोध्या के इस गुरुकुल को कंप्यूटर लैब देना कोई कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी का काम नहीं है।
वो जानते हैं की अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को बचाना है, तो हमें अपने गुरुकुलों को बचाना होगा।
जय जिनेन्द्र! जय सनातन!
