कभी-कभी लगता है की इस देश के वामपंथी कभी सोते ही नहीं है। जब इन्हें चुनाव में जनता लात मारकर बाहर कर देती है, जब बैलेट बॉक्स से इनकी सत्ता हथियाने की साज़िशें फेल हो जाती हैं, तो ये अपनी औकात पर उतर आते हैं।
ये सीधे तौर पर देश में दंगे भड़काने और सड़कों पर अराजकता फैलाने का नया टूलकिट लॉन्च कर देते हैं। शाहीन बाग याद है? किसान आंदोलन के नाम पर लाल किले का वो नंगा नाच याद है?
बस! उसी विदेशी और गद्दार टूलकिट का नया अपडेटेड वर्ज़न इस वक्त देश में लॉन्च कर दिया गया है। और इस नए वामपंथी वायरस का नाम है- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)।
अगर आप सोच रहे हैं की ये कोई इंस्टाग्राम का मीम है या कुछ खाली बैठे लड़कों का मज़ाक है, तो आप दुनिया की सबसे बड़ी गलतफहमी में जी रहे हैं। ये कोई कॉमेडी-वोमेडी नहीं चल रही है।
ये सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रवादी सरकार को उखाड़ फेंकने, देश को अस्थिर करने और यहाँ ‘कलर रेवोल्यूशन’ (सत्ता पलट) कराने का एक खौफनाक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट है।
और इस पूरे ड्रामे के पीछे मास्टरमाइंड कौन है? वही अराजकता की असली जननी- ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP)! जब इनके बड़े-बड़े नेता घोटालों में अंदर जाने लगे, जब इन्हें लगा की अब जनता इनके झांसे में नहीं आ रही, तो इन्होंने अपनी एक ‘B-टीम’ बनाकर सड़कों पर उतार दी है।
ये कॉकरोच पार्टी असल में आम आदमी पार्टी का ही वो नया मुखौटा है, जिसके ज़रिए ये देश के युवाओं के दिमाग में ज़हर घोलना चाहते हैं।
ये चाहते हैं की देश का नौजवान पढ़ाई-लिखाई छोड़कर सड़कों पर उतरे, पुलिस पर पत्थर फेंके और देश में एक ऐसा गृहयुद्ध छिड़ जाए जिसे संभालना सरकार के बस की बात ना रहे।
अगर आज देश के सनातनियों और राष्ट्रवादियों ने इस ‘कॉकरोच’ नाम की दीमक को जूतों तले नहीं कुचला तो ये कल हमारे पूरे लोकतंत्र को खोखला कर देंगे।
अमेरिका में बैठा आम आदमी पार्टी का पुराना दलाल, और 2 करोड़ फर्जी फॉलोअर्स, ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का खुल्ला सच
अब ज़रा इस कॉकरोच पार्टी के पीछे छुपे उस मास्टरमाइंड चेहरे और उसकी विदेशी फंडिंग का नंगा सच देखिए, जिसे सुनकर आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी। इस पार्टी को किसने बनाया? इस पार्टी का फाउंडर है ‘अभिजीत दिपके’ नाम का एक आदमी।
और ये अभिजीत दिपके है कौन? भाई साहब, ये आम आदमी पार्टी का पुराना आईटी सेल (IT Cell) का वर्कर रह चुका है! ये कोई आम छात्र नहीं है, ये बाकायदा एक राजनीतिक पार्टी का पाला हुआ वो मोहरा है जिसे आज एक ‘क्रांतिकारी छात्र नेता’ के रूप में पेश किया जा रहा है।
और मजे की बात देखिए! ये आम आदमी पार्टी का गद्दार भारत में रहता ही नहीं है! ये अमेरिका के बोस्टन (Boston) में बैठकर अपने लैपटॉप से भारत को जलाने का ब्लूप्रिंट तैयार कर रहा है।
16 मई 2026 को ये पार्टी बनती है और रातों-रात इंस्टाग्राम पर इसके 2 करोड़ (20 मिलियन) से ज़्यादा फॉलोअर्स हो जाते हैं! अरे, 2 करोड़ फॉलोअर्स? क्या ये कोई मज़ाक चल रहा है?
बड़े-बड़े हॉलीवुड स्टार्स और क्रिकेटरों के फॉलोअर्स बढ़ने में सालों लग जाते हैं, और इस वामपंथी के अकाउंट पर रातों-रात 2 करोड़ लोग आ गए?
ये कोई जनता का प्यार-व्यार नहीं है मेरे भाई! ये सीधे तौर पर जॉर्ज सोरोस जैसे भारत-विरोधी विदेशी अरबपतियों और इंटरनेशनल पीआर (PR) एजेंसियों की करोड़ों की फंडिंग का नंगा नाच है।
बॉट्स (Bots) खरीदकर, फर्जी अकाउंट्स बनाकर एक ‘आर्टिफिशियल क्रांति’ का माहौल बनाया जा रहा है ताकि दुनिया को लगे की भारत का युवा सरकार के खिलाफ बगावत कर चुका है।
ज़रा इनका स्लोगन सुनिए। इन्होंने अपना नारा रखा है- ‘Voice of the Lazy & Unemployed’ (आलसी और बेरोज़गारों की आवाज़)। मतलब, ये विदेशी इकोसिस्टम खुलेआम हमारे देश के युवाओं को कह रहा है की तुम ‘आलसी’ बने रहो।
तुम मेहनत मत करो, तुम कोई काम मत सीखो, बस सरकार को गालियां दो और निकम्मे बनकर सड़कों पर बवाल काटो!
ये हमारे देश की नई पीढ़ी को मानसिक रूप से नपुंसक और देश का गद्दार बनाने की एक खौफनाक वामपंथी साज़िश है। जो आम आदमी पार्टी दिल्ली में फ्री बिजली-पानी देकर लोगों को निकम्मा बना रही थी, उसी की ये बी-टीम अब पूरे देश के युवाओं को आलसी और बागी बना रही है।
NEET छात्रों की आड़ में दंगे भड़काने का खौफनाक प्लान, जंतर मंतर पर वामपंथी गुंडों का नंगा नाच
जब ये टूलकिट अमेरिका में पूरी तरह से तैयार हो गया, तो इन्हें भारत में दंगे भड़काने के लिए एक बहाना चाहिए था। और वो बहाना इन्हें मिल गया NEET परीक्षा के विवाद के रूप में।
देखिए, अगर किसी परीक्षा में कोई धांधली हुई है, तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए, इसमें कोई शक नहीं है।
लेकिन इन वामपंथी कॉकरोचों को छात्रों के दर्द या उनके भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है भाई! इन्हें तो बस अपनी राजनीति चमकाने और देश में आग लगाने के लिए कुछ ‘मुर्गे’ चाहिए थे।
अभी हाल ही में, 6 जून 2026 को ये लिबरल कीड़ा अभिजीत दिपके भारत आया था, और इसने अपने जैसे मक्कारों को जंतर मंतर में प्रदर्शन करने के लिए बुलाया था।
इन अर्बन नक्सलियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी NEET के मुद्दे की आड़ लेकर जो खौफनाक तांडव किया है, उसने इस कॉकरोच पार्टी की असली औकात देश के सामने ला दी है। जंतर-मंतर पर क्या हुआ? वहां छात्रों के हक की कोई बात नहीं हुई।
वहां सिर्फ और सिर्फ सरकार को गिराने, सिस्टम को गालियां देने और राष्ट्रवादियों से हाथापाई करने का नंगा नाच चला। इन आम आदमी पार्टी के पाले हुए गुंडों ने वहां ‘छात्र’ बनकर हमारे राष्ट्रवादी नेताओं और देशभक्त पत्रकारों के साथ सरेआम धक्का-मुक्की की।
ये भीड़ कोई अपने आप नहीं आई थी। इसके लिए बाकायदा विदेशों से फंडिंग आई थी, महंगे टेंट-वेंट लगाए गए थे, सबको बिरयानी और पैसे बांटे गए थे। और ज़रा इस इकोसिस्टम का इंटरनेशनल नेक्सस तो देखिए!
जैसे ही जंतर-मंतर पर ये वामपंथी ड्रामा शुरू हुआ, वैसे ही कतर का ‘अल जज़ीरा’ (Al Jazeera) और ब्रिटेन का ‘द गार्डियन’ (The Guardian) जैसे भारत-विरोधी विदेशी न्यूज़ पोर्टल रातों-रात इस ‘कॉकरोच’ आंदोलन पर बड़े-बड़े आर्टिकल छापने लगे।
अरे भाई, अमेरिका में कोई छोटी सी घटना होती है तो ये विदेशी मीडिया वाले सोते रहते हैं, लेकिन भारत में कुछ खाली बैठे वामपंथी सड़क पर तमाशा करते हैं, तो इन्हें अचानक से ‘भारतीय लोकतंत्र खतरे में है’ दिखने लगता है! ये सब एक स्क्रिप्टेड ड्रामा है।
इन कॉकरोचों ने छात्रों के कंधे पर अपनी वामपंथी बंदूक रख दी है और ये उस बंदूक से सीधे सनातन भारत के अस्तित्व पर गोलियां चला रहे हैं।
न्यायपालिका के बयान को हथियार बनाकर विक्टिम कार्ड खेलने वाले इन अर्बन नक्सलियों की मक्कारी
अब एक और खौफनाक सच सुनिए की इस पार्टी का नाम ‘कॉकरोच’ पड़ा कैसे। ये अर्बन नक्सल इतने बड़े मक्कार और धूर्त हैं की ये अपने ही गाल पर थप्पड़ मारकर पूरी दुनिया में रोने का नाटक करते हैं।
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बहुत ही तल्ख टिप्पणी की थी। सीजेआई ने उन लोगों को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ (Parasite) कहा था, जो फर्जी डिग्रियां लेकर, सिस्टम के अंदर बैठकर व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं और देश के माहौल में ज़हर घोल रहे हैं।
चीफ जस्टिस ने किसी आम छात्र या देश के गरीब युवा को कॉकरोच नहीं कहा था! उन्होंने तो सीधे तौर पर उन दीमकों पर प्रहार किया था जो इस देश की जड़ों को खा रहे हैं।
लेकिन इन आम आदमी पार्टी के प्यादों और वामपंथी गिद्धों ने क्या किया? इन्होंने 16 मई को सीजेआई के उस बयान को बड़ी चालाकी से तोड़-मरोड़ दिया।
इन्होंने पूरे सोशल मीडिया पर विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया और देश के आम युवाओं का ब्रेनवाश करते हुए कहा- “देखो, ये देश की न्यायपालिका, ये सुप्रीम कोर्ट और ये सिस्टम तुम्हें कॉकरोच कह रहा है! तुम कीड़े-मकोड़े हो इनके लिए!”
ज़रा इनकी इस गंदी साज़िश को समझिए। ये न्यायपालिका और सरकार के खिलाफ एक बहुत भयंकर नफरत पैदा कर रहे हैं। इन्होंने खुद को ‘कॉकरोच’ मान लिया और कहा की “हां, हम कॉकरोच हैं और हम इस सिस्टम को गंदा करेंगे।”
सच कहूं तो सीजेआई साहब ने बिल्कुल सही और एकदम सटीक शब्द चुना था। ये अर्बन नक्सल, ये आम आदमी पार्टी के आईटी सेल वाले गुर्गे और ये विदेशी एजेंट सच में इस देश के सिस्टम को अंदर ही अंदर खाने वाले कॉकरोच और परजीवी ही तो हैं!
ये वो कीड़े हैं जो अंधेरे और गटर में पनपते हैं और जैसे ही देश में कोई विकास या राष्ट्रवाद की रोशनी आती है, ये तुरंत बिलबिलाने लगते हैं।
इन वामपंथी कॉकरोचों ने बड़ी चालाकी से सुप्रीम कोर्ट के बयान को अपनी ‘विक्टिम PR’ का हिस्सा बना लिया। ये चाहते हैं की देश का आम नौजवान भी खुद को कॉकरोच समझे और अपनी ही सरकार, अपनी ही न्यायपालिका और अपने ही पुलिस-प्रशासन को अपना दुश्मन मान ले।
ये एक ऐसा मनोवैज्ञानिक ज़हर है जिसे ये अभिजीत दिपके अमेरिका में बैठकर हमारे बच्चों के दिमाग में इंजेक्ट कर रहा है। और हमारे देश का वो लिबरल इकोसिस्टम इस ज़हर को दिन-रात अपने टीवी चैनलों और पोर्टल्स के ज़रिए प्रमोट कर रहा है।
भारत को सीरिया बनाने का ब्लूप्रिंट और आम आदमी पार्टी का देश विरोधी खौफनाक षड्यंत्र
अब ज़रा इस पूरी साज़िश के पीछे छुपे उस खौफनाक विदेशी ब्लूप्रिंट को समझिए, जिसे ‘रेजीम चेंज’ (Regime Change) या ‘कलर रेवोल्यूशन’ कहा जाता है।
जब अमेरिका और यूरोप में बैठे भारत-विरोधी अरबपतियों को लगने लगा की भारत की राष्ट्रवादी सरकार को बैलेट बॉक्स (चुनाव) के ज़रिए नहीं हराया जा सकता, तो इन्होंने भारत को एक नया सीरिया या बांग्लादेश बनाने का प्लान तैयार कर लिया।
इनका मकसद चुनाव जीतना है ही नहीं, इनका इकलौता मकसद है भारत की सड़कों पर इतना भयानक दंगा और खून-खराबा भड़काना की देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो जाए।
और इस इंटरनेशनल साज़िश को भारत की ज़मीन पर लागू करने का ठेका किसने लिया है? उसी पार्टी ने जिसकी पैदाइश ही सड़कों पर अराजकता फैलाने से हुई थी- ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP)!
ज़रा आम आदमी पार्टी का पिछला रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए भाई। जब भी इस देश में कोई विकास का काम होता है या राष्ट्रवाद की बात होती है, तो ये लोग क्या करते हैं?
कभी ये सीएए (CAA) के नाम पर शाहीन बाग वालों को पाल कर सड़कों पर बैठा देते हैं, कभी किसान आंदोलन के नाम पर लाल किले का अपमान करवाने के लिए अपने गुर्गे भेज देते हैं।
और अब जब विपक्ष के पास चुनाव में हारने के बाद कोई मुद्दा ही नहीं बचा, तो इन्होंने देश के युवाओं का ब्रेनवाश करने के लिए अपनी इस ‘बी-टीम’ यानी कॉकरोच पार्टी को लॉन्च कर दिया है।
ये आम आदमी पार्टी की पुरानी फितरत है की वो खुद सीधे आग नहीं लगाते, बल्कि वो अपने आईटी सेल (IT Cell) के वर्करों को रातों-रात ‘छात्र नेता’, ‘समाज सुधारक’ और ‘मीम क्रिएटर’ का मुखौटा पहनाकर सड़कों पर छोड़ देते हैं।
ये अभिजीत दिपके क्या है? ये उसी आम आदमी पार्टी की नर्सरी से निकला हुआ वो ज़हरीला पौधा है, जिसे आज अमेरिका में बैठकर विदेशी पानी से सींचा जा रहा है।
ये वामपंथी गद्दार चाहते हैं की भारत का नौजवान अपनी पढ़ाई-लिखाई, अपना करियर और अपनी मेहनत छोड़कर बस सड़कों पर टायर जलाए, सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाए और देश के सिस्टम को गालियां दे।
जब देश का युवा ‘आलसी’ और निकम्मा हो जाएगा, तो भारत का विकास अपने आप रुक जाएगा। और यही तो विदेशी आका चाहते हैं!
आम आदमी पार्टी और इन अर्बन नक्सलियों ने मिलकर हमारे ही बच्चों के कंधों पर बंदूक रखकर भारत माता की छाती छलनी करने का जो ये टूलकिट बनाया है, वो आज तक की सबसे खौफनाक साज़िश है।
जल्द से जल्द इस गद्दार वामपंथी टूलकिट को जूतों तले कुचलने की हुंकार
सबसे पहले मैं देश के उन करोड़ों सनातनी और राष्ट्रभक्त युवाओं को एक सीधी चेतावनी देना चाहता हूँ! आम आदमी पार्टी और इन अर्बन नक्सलियों के इस ‘मीम और कॉमेडी’ वाले जाल में भूलकर भी मत फंसना!
तुम्हें लगेगा की इंस्टाग्राम पर ‘Voice of the Lazy’ का बैच लगाकर और सरकार का मज़ाक उड़ाकर तुम बहुत ‘कूल’ बन रहे हो। लेकिन असल में तुम अपने ही हाथों से अपने देश की कब्र खोद रहे हो।
ये कोई कॉमेडी नहीं है मेरे भाई, ये देश से गद्दारी है। तुम्हें मोहरा बनाकर, तुम्हें सड़क पर उतारकर ये वामपंथी नेता और ये विदेशी एजेंट अपना बैंक बैलेंस भर रहे हैं।
जिस दिन पुलिस की लाठी पड़ेगी या तुम्हारा करियर बर्बाद होगा, उस दिन ये आम आदमी पार्टी के नेता और ये अमेरिका में बैठा अभिजीत दिपके तुम्हें बचाने नहीं आएंगे।
लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सबको है, लेकिन लोकतंत्र की आड़ में देशद्रोहियों और विदेशी फंडेड गुंडों को दिल्ली के दिल में बैठकर गुंडागर्दी करने का लाइसेंस किसने दे दिया?
हम पुलिस और गृह मंत्रालय से डंके की चोट पर पूछना चाहते हैं की इन राजनीतिक कॉकरोचों के सामने प्रशासन इतना नरम रवैया क्यों अपना रहा है?
जब एक आम नागरिक सड़क पर कोई छोटा सा नियम तोड़ दे तो पुलिस उसका चालान काट देती है। लेकिन जब आम आदमी पार्टी के पाले हुए ये अर्बन नक्सल खुलेआम देश के सिस्टम को हैक करने की बात करते हैं, राष्ट्रवादियों पर हमले करते हैं, तो इन्हें चाय-पानी क्यों पिलाया जा रहा है?
अगर कोई सड़क पर उतरकर विदेशी एजेंडा चलाएगा, अगर कोई देश की शांति भंग करने की साज़िश रचेगा, तो उसका इलाज कोई शांति वार्ता नहीं है!
जब तक इस देश का कानून इन गद्दारों के साथ कड़ाई से पेश नहीं आएगा, तब तक ये विदेशी फंडेड गिद्ध यूं ही हमारे लोकतंत्र के सर पर बैठ के नाचते रहेंगे। इन कॉकरोचों को उसी भाषा में समझाना होगा जो भाषा ये समझते हैं, और वो भाषा सिर्फ डंडे और बुलडोज़र की है!
अब देश के आम नागरिक को इस सिस्टम को जगाने के लिए खुद हुंकार भरनी होगी। हम भारत सरकार, गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों से डंके की चोट पर मांग करते हैं की इस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और इसके फाउंडर अभिजीत दिपके की तुरंत NIA और ईडी ED से सबसे कड़क जांच कराई जाए।
रातों-रात 2 करोड़ फॉलोअर्स लाने के लिए जो Bots खरीदे गए, जंतर-मंतर पर जो महंगे टेंट लगे, उसका पैसा जॉर्ज सोरोस के किस NGO से आया? आम आदमी पार्टी के किन बड़े नेताओं ने इस पैसे को हवाला के ज़रिए भारत मंगाया? इन सबके बैंक अकाउंट सीज़ होने चाहिए।
सरकार को एक मिनट की भी देरी किए बिना इस अभिजीत दिपके का पासपोर्ट रद्द करना चाहिए। इस पर रासुका (NSA) लगाकर इसे तिहाड़ जेल की उस काल कोठरी में सड़ाना चाहिए जहाँ ये दिन-रात सिर्फ ‘कॉकरोचों’ के साथ ही अपनी ज़िंदगी गुज़ारे।
वंदे मातरम! भारत माता की जय!
