आज हर सच्चे सनातनी का सीना गर्व से 56 इंच का हो गया है। जब से यह ऐतिहासिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, तब से देश और दुनिया में बैठे उन जिहादियों की रातों की नींद हराम हो चुकी है, जो भारत और इजरायल दोनों को दुनिया के नक्शे से मिटाने का नापाक सपना देखते हैं।
ज़रा सोचिए, वो मिडिल ईस्ट का इलाका जहाँ चारों तरफ खूंखार जिहादी और आतंकवादी संगठन खून की नदियां बहाने के लिए तैयार बैठे हैं, ठीक उसी इलाके के बीचों-बीच अब हमारे अजेय हिन्दू सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज की एक भव्य और विशालकाय मूर्ति स्थापित होने जा रही है!
6 जून, यानी छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘शिवराज्याभिषेक दिन’ पर इजरायल के मुंबई स्थित वाणिज्य दूत ‘यानिव रेवाच’ ने जो डंके की चोट पर ऐलान किया है, उसने हर सनातनी के खून में वीर रस घोल दिया है।
इजरायल ने साफ कर दिया है की वो अपने किसी बड़े शहर के बीचों-बीच जिहादियों के सबसे बड़े काल, छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति स्थापित करेगा।
आप ज़रा इस बात की गहराई को समझिए। इजरायल दुनिया का वो इकलौता यहूदी देश है जो अपनी जान और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए चारों तरफ से खूंखार जिहादी भेड़ियों से घिरा हुआ है। हमास से लेकर हिजबुल्लाह तक, इन सभी जिहादी संगठनों का एक ही मकसद है- इजरायल का नामोनिशान मिटाना।
ठीक वैसे ही जैसे मुगलों का मकसद भारत से सनातन धर्म का नामोनिशान मिटाना था। जब इजरायल ने अपने अस्तित्व की इस खौफनाक लड़ाई में प्रेरणा ढूंढने की कोशिश की, तो उसे दुनिया के किसी अंग्रेज़ या अमेरिकी जनरल में वो आग नहीं दिखी।
इजरायल की नज़र सीधे हमारे भारत के उस महान हिन्दू शेर पर जाकर टिकी, जिसने अपनी मुट्ठी भर सेना के दम पर क्रूर और बर्बर जिहादी मुगलों की छाती फाड़ कर रख दी थी।
इजरायल का ये कदम सीधा उन शांतिदूतों के मुंह पर एक ऐसा तमाचा है जिसकी गूंज सदियों तक सुनाई देगी।
इज़रायली दूतावास का ऐलान, दुनिया देखेगी जिहादियों के काल ‘मराठा शेर’ छत्रपति शिवाजी महाराज’ का जलवा
अब ज़रा इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे की उस ज़मीनी हकीकत को देखिए, जिसने इस पूरे प्रोजेक्ट को एक महा-अभियान में बदल दिया है।
6 जून 2026 को जब पूरा महाराष्ट्र और देश छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का जश्न मना रहा था, ठीक उसी दिन इजरायल के वाणिज्य दूत यानिव रेवाच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निवास पर पहुंचे।
वहां कोई कूटनीतिक चर्चा नहीं हुई, बल्कि दो प्राचीन और महान सभ्यताओं के बीच जिहादी आतंकवाद को कुचलने के लिए एक नए युग की शुरुआत की गई।
यानिव रेवाच ने मुख्यमंत्री फडणवीस के सामने प्रस्ताव रखा की भारत और इजरायल की दोस्ती अब सिर्फ व्यापार और हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा की “हमने दोनों देशों के लोगों को सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से जोड़ने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज को चुना है।” ज़रा इस बात का वज़न देखिए!
एक विदेशी मुल्क डंके की चोट पर कह रहा है की हम तुम्हारे उस भगवान स्वरूप राजा की मूर्ति अपने देश में लगाएंगे जिसने भारत को इस्लामी आक्रांताओं की गुलामी से बचाया था।
जैसे ही यह प्रस्ताव सामने आया, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक सच्चे शिवभक्त की तरह इसका पूरे जोश के साथ स्वागत किया।
फडणवीस ने डंके की चोट पर आश्वासन दिया की महाराष्ट्र सरकार इस ऐतिहासिक प्रतिमा के निर्माण, उसके ऐतिहासिक दस्तावेज़ीकरण और डिजाइन के लिए अपना पूरा खज़ाना और समर्थन इजरायल के लिए खोल देगी।
देखा जाये तो ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न का नतीजा है जब उन्होंने Jerusalem की ऐतिहासिक यात्रा की थी और भारत-इजरायल के रिश्तों को एक नई ऊंचाई दी थी।
इजरायल को आज ये बहुत अच्छी तरह समझ आ गया है की अगर जिहादी आतंकवाद को जड़ से उखाड़ना है, तो उन्हें उस हिन्दू राजा के आदर्शों को अपनी धरती पर स्थापित करना होगा जिसने औरंगज़ेब जैसे क्रूर जिहादी को उसी की ज़मीन पर घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था।
जब इजरायल की सड़कों पर हमारे महाराज की वो भव्य घोड़े वाली प्रतिमा स्थापित होगी और उसके नीचे उनकी वीरगाथाएं लिखी जाएंगी, तो दुनिया भर से इजरायल आने वाला हर व्यक्ति ये जानेगा की जब भारत पर जिहादियों का कहर टूटा था, तो एक हिन्दू शेर ने अकेले अपने दम पर पूरे जिहादी इकोसिस्टम की कमर तोड़ दी थी।
सनातन और यहूदी सभ्यता का एक जैसा दर्द, अपनी ही मातृभूमि बचाने के लिए विदेशी जिहादियों से लड़ा गया खूनी संघर्ष
अगर हम इतिहास के पन्नों को पलटें, तो ये समझना बहुत आसान हो जाता है की आखिर इजरायल को छत्रपति शिवाजी महाराज में अपना अक्स क्यों नज़र आता है।
इजरायल के वाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने जब कहा की “भारत और इजरायल दोनों देशों का इतिहास एक जैसा रहा है, दोनों को अपनी ज़मीन के लिए लड़ना पड़ा है”, तो उन्होंने असल में उस हज़ारों साल के खौफनाक दर्द और संघर्ष की बात की थी जो यहूदियों और सनातनियों ने झेला है।
ज़रा यहूदियों के इतिहास को देखिए। दुनिया भर के जिहादियों और विदेशी आक्रांताओं ने उन्हें उनकी अपनी ही ज़मीन (यरूशलम) से खदेड़ दिया था।
सदियों तक यहूदी दर-दर की ठोकरें खाते रहे, उनका कत्लेआम होता रहा, होलोकॉस्ट में उन्हें गैस चैंबरों में ज़िंदा जलाया गया।
लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी मातृभूमि को वापस पाने की कसम खाई और जब 1948 में उन्होंने अपने इजरायल का निर्माण किया, तो चारों तरफ बैठे इस्लामिक जिहादी देशों ने उन पर हमला कर दिया।
लेकिन उन यहूदियों ने हार मानने के बजाय हर जिहादी मुल्क को उनके घर में घुसकर ऐसा पीटा की आज तक मिडिल ईस्ट में इजरायल का खौफ कायम है।
अब ज़रा अपने सनातन भारत की तरफ नज़र घुमाइए। क्या हमारा इतिहास भी ऐसा ही खून से सना हुआ नहीं है? जब अरब, तुर्क और मुगलों की खूंखार जिहादी आंधियां भारत पर टूटी थीं, तो क्या हुआ था? हमारे लाखों भव्य मंदिरों को मलबे में तब्दील कर दिया गया।
हमारी लाखों बहन-बेटियों ने अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए धधकती आग में जौहर कर लिया। हमारे करोड़ों पूर्वजों को तलवार की नोक पर मज़हब बदलने के लिए मजबूर किया गया।
काशी, मथुरा और अयोध्या की छाती पर कब्ज़ा करके जिहादियों ने अपने झंडे गाड़ दिए। पूरा उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक एक ही खौफनाक आवाज़ गूंज रही थी- ‘दारुल इस्लाम’।
ऐसे खौफनाक दौर में, जब बड़े-बड़े राजा-महाराजा मुगलों की गुलामी कबूल कर रहे थे, तब महाराष्ट्र की पहाड़ियों से एक आवाज़ गूंजी थी- ‘हर हर महादेव’!
वो आवाज़ थी छत्रपति शिवाजी महाराज की। उन्होंने उस बिखरे हुए और डरे हुए हिन्दू समाज को इकट्ठा किया।
उन्होंने मुगलों, आदिलशाहों और निज़ामों की उस विशालकाय जिहादी फौज की आंखों में आंखें डालकर कहा की “ये हमारी ज़मीन है, ये हमारे भगवानों की ज़मीन है, और हम यहाँ हिन्दवी स्वराज्य की स्थापना करेंगे।”
शिवाजी महाराज ने अपनी मातृभूमि को वापस छीनने के लिए जो खूनी और अजेय संघर्ष किया, वही संघर्ष आज इजरायल अपने वजूद को बचाने के लिए कर रहा है। दोनों सभ्यताओं ने अपने ही घर में विस्थापन का दर्द झेला है। दोनों ने जिहादियों की बर्बरता को अपनी आंखों से देखा है।
और दोनों ही सभ्यताओं ने उस क्रूर आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देकर अपना स्वाभिमान वापस छीना है। इसीलिए आज जब इजरायल शिवाजी महाराज की मूर्ति अपने यहाँ लगा रहा है, तो वह असल में अपने ही उस जुझारू और अजेय जज़्बे को सलाम कर रहा है जिसे शिवाजी महाराज ने आज से साढ़े तीन सौ साल पहले जिया था।
जिहादियों की मज़ारें पूजने वाले सेक्युलरों को इजरायल की सीख, अपने असली नायकों को पहचानो वरना इतिहास तुम्हे मिटा देगा
ज़रा आज के हमारे सेक्युलर भारत की सड़ी हुई सोच पर नज़र डालिए। आज भी इस देश में ऐसे हज़ारों-लाखों मूर्ख हिन्दू हैं, जो उन जिहादी लुटेरों की दरगाहों और मज़ारों पर जाकर चादर चढ़ाते हैं, जिन्होंने हमारे पूर्वजों को काटा था और हमारी बहन-बेटियों का सरेआम चीरहरण किया था।
क्या आपको इजरायल में कोई ऐसा यहूदी मिलेगा जो हिटलर की कब्र पर फूल चढ़ाता हो? क्या दुनिया में कोई ऐसा देश है जो अपने ही लोगों का कत्लेआम करने वाले जल्लादों की इबादत करता हो? नहीं! लेकिन हमारे देश में ऐसा होता है।
यहाँ औरंगज़ेब के नाम पर सड़कें थीं, बाबर के नाम पर शहर थे और बख्तियार खिलजी (जिसने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाकर राख कर दिया था) उसके नाम पर आज भी बिहार में ‘बख्तियारपुर’ रेलवे स्टेशन छाती तानकर खड़ा है।
हम किस कदर मानसिक रूप से गुलाम हो चुके हैं की जो जिहादी आक्रांता हमारे मंदिरों को तोड़कर उसी के मलबे पर अपनी मस्जिदें खड़ी कर गए, आज भी हमारा सेक्युलर सिस्टम उन्हें ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का प्रतीक बताकर उनकी पूजा करवाता है।
इजरायल से सीखो मेरे भाई! एक देश जो अपने असली नायकों को भूल जाता है, जो अपने रक्षकों का सम्मान करना नहीं जानता, वो देश इतिहास के कूड़ेदान में दफन हो जाता है।
इजरायल अपने नायकों को पूजता है, इसलिए वो आज ज़िंदा है और सीना तानकर अपने दुश्मनों की आंख में आंख डालकर लड़ रहा है। इजरायल जानता है की जिहादी मानसिकता से कभी समझौते नहीं किए जाते, उन्हें सिर्फ और सिर्फ तलवार की भाषा समझ आती है।
इजरायल की ज़मीन पर अब सिर्फ यहूदी प्रार्थनाएं नहीं गूंजेंगी, बल्कि वहां से एक ऐसा शंखनाद उठेगा जो पूरे मिडिल ईस्ट के जिहादियों को उनकी असली औकात याद दिलाएगा।
जब वो भवानी तलवार इजरायल की धूप में चमकेगी, तो वो हर उस जिहादी के लिए मौत का पैगाम होगी जो इंसानियत और सनातन धर्म के खिलाफ साज़िश रचता है।
अब रुकना नहीं है! हमारे इतिहास के उन पन्नों को वापस छीनने का वक्त आ गया है। इजरायल ने रास्ता दिखा दिया है, अब उस रास्ते पर चलकर पूरे देश से जिहादी मानसिकता को हमेशा-हमेशा के लिए मलबे में तब्दील करना हमारी ज़िम्मेदारी है।
जय भवानी! जय शिवाजी!
