एक आम हिंदू परिवार खुश होकर ये सोचता है की उनका 12 या 15 साल का बच्चा घर के अंदर कमरे में बैठा है, बाहर आवारागर्दी नहीं कर रहा, बस मोबाइल या लैपटॉप पर PUBG, ‘फ्री फायर’ या ‘फोर्टनाइट’ जैसे गेम ही तो खेल रहा है।
मां-बाप इस बात से बड़े खुश और बेफिक्र रहते हैं की बच्चा उनकी आंखों के सामने और पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन क्या आपने कभी उस बंद दरवाज़े और उस हेडफोन के पीछे की खौफनाक सच्चाई जानने की कोशिश की है?
अरे भाई, तुम्हारा बच्चा सुरक्षित नहीं है! तुम्हारी आंखों के सामने, तुम्हारे ही घर के वाई-फाई और तुम्हारे ही पैसों से दिलाए गए महंगे मोबाइल के ज़रिए तुम्हारे बच्चे का मानसिक खतना किया जा रहा है।
वो जिहादी भेड़िया जो कल तक खुले में जिहाद का जाल बिछाता था, वो अब तुम्हारे घर की चारदीवारी फांद कर सीधे तुम्हारे रूम तक पहुंच चुका है।
इसे कहते हैं- ‘साइबर जिहाद’ या ‘डिजिटल धर्मांतरण’। अब इन जिहादियों को हमारे बच्चों को बहकाने के लिए सड़कों पर आने की ज़रूरत नहीं है। ये कट्टरपंथी गेमिंग ऐप्स के चैट रूम और माइक के ज़रिए सीधे हमारे मासूम बच्चों के दिमाग में ज़हर घोल रहे हैं।
12 से 15 साल के बच्चे, जिन्हें अभी अपने सनातन धर्म, अपने वेदों और अपनी संस्कृति का ‘स’ भी नहीं पता, उन्हें बड़ी चालाकी से इस्लाम की तरफ मोड़ा जा रहा है। ये गज़वा-ए-हिंद का वो नया और हाई-टेक टूलकिट है जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद उड़ा दी है।
तुम्हारा दुश्मन अब सरहदों पर गोलियां नहीं चला रहा, वो तो गेमिंग सर्वर पर बैठकर तुम्हारी नस्लों को निगलने का खौफनाक षड्यंत्र रच रहा है। अगर हिंदू समाज आज भी इस डिजिटल खतरे को नहीं समझा, तो कल हमारे ही बच्चे हमारे आराध्य देवों की मूर्तियों पर पत्थर मारते हुए नज़र आएंगे।
गाज़ियाबाद का खौफनाक ‘गेमिंग’ धर्मांतरण कांड, मस्जिद के मौलवी द्वारा हिन्दू बच्चों को पढ़ाई जाती नमाज़
अगर किसी को लग रहा है की ये सब सिर्फ कहानियों में होता है, तो ज़रा गाज़ियाबाद के उस रूह कंपा देने वाले केस को याद कर लीजिए जिसने पूरे देश में भूचाल ला दिया था। ये कोई बहुत पुरानी बात नहीं है।
यूपी के गाज़ियाबाद (कविनगर इलाका) में रहने वाले एक बहुत ही इज़्ज़तदार हिंदू और जैन परिवार के होश तब उड़ गए, जब उन्हें पता चला की उनका 15 साल का मासूम बेटा छुप-छुप कर पांच वक्त की नमाज़ पढ़ रहा है।
जब पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने इस मामले की परतें उधेड़नी शुरू कीं, तो जो नंगा सच बाहर आया, उसने पूरे देश के सिस्टम को हिला कर रख दिया।
पुलिस की जांच में पता चला की सिर्फ वो जैन लड़का ही नहीं, बल्कि गाज़ियाबाद और आस-पास के 3 और हिंदू लड़कों को ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में कट्टर मुसलमान बना दिया गया था।
और इस पूरे खौफनाक सिंडिकेट का मास्टरमाइंड कौन था? महाराष्ट्र के मुंब्रा (ठाणे) में बैठा शाहनवाज़ खान उर्फ ‘बद्दो’ (Baddo)। मुंब्रा वही इलाका है जहाँ से पहले भी कई आतंकी और जिहादी स्लीपर सेल पकड़े जा चुके हैं।
ये बद्दो वहीं बैठकर इंटरनेट के ज़रिए पूरे भारत के हिंदू बच्चों को अपने जाल में फंसा रहा था। और इस काम में इसका लोकल पार्टनर कौन था? गाज़ियाबाद के संजय नगर सेक्टर-23 की जामा मस्जिद का मौलवी- अब्दुल रहमान!
ज़रा इस खौफनाक ‘जिहादी नेक्सस’ को समझिए भाई। एक मास्टरमाइंड महाराष्ट्र में बैठकर बच्चों का ऑनलाइन ब्रेनवाश करता था और उन्हें इस्लाम की तालीम देता था।
और जब बच्चा पूरी तरह से इनके जाल में फंस जाता था, तो उसे लोकल मस्जिद के मौलवी अब्दुल रहमान के पास भेज दिया जाता था। वो मौलवी उन बच्चों को नमाज़ पढ़ने का तरीका सिखाता था, उन्हें मस्जिद में बुलाता था और उनके दिमाग में कट्टरपंथ का ज़हर भरता था।
ये कोई दो-चार लोगों का काम नहीं था। ये बाकायदा एक ‘कन्वर्जन फैक्ट्री’ थी जो भारत की डेमोग्राफी को बदलने के लिए रात-दिन हमारे बच्चों का शिकार कर रही थी।
गेम जीतने का लालच और डिस्कॉर्ड ऐप पर ब्रेनवॉश, आयतें पढ़ोगे तो लेवल पार कर जाओगे का खौफनाक फ्रॉड
अब आपके दिमाग में ये सवाल आ रहा होगा की आखिर 12-15 साल के कॉन्वेंट और इंग्लिश मीडियम में पढ़ने वाले ये हिंदू बच्चे इन जिहादियों के जाल में फंस कैसे जाते हैं?
भाई, इनका तरीका इतना खौफनाक और चालाकी से भरा है की एक सीधा-सादा बच्चा कभी समझ ही नहीं पाएगा की उसके साथ क्या हो रहा है।
ये जिहादी Fortnite, Valorant और PUBG जैसे पॉपुलर मल्टीप्लेयर गेम्स में फर्जी हिंदू या मॉडर्न नाम रखकर गेम खेलते हैं। गेम के दौरान ये हमारे बच्चों से बड़ी मीठी-मीठी बातें करते हैं, उनसे दोस्ती करते हैं।
जब बच्चा गेम खेल रहा होता है और किसी मुश्किल लेवल पर जाकर हारने लगता है, तो पीछे से माइक पर ये जिहादी कहता है- “यार, मैं भी पहले बहुत हारता था, फिर मैंने कुरान की एक आयत पढ़ी और मैं गेम जीतने लगा। तू भी ये आयत पढ़ ले, पक्का जीत जाएगा।”
मासूम बच्चा गेम जीतने की ज़िद में वो अरबी आयत पढ़ देता है। और यहीं से शुरू होता है असली फ्रॉड! ये जिहादी या तो गेम में कोई ‘हैक’ (Hack) लगा देते हैं या जानबूझकर उस बच्चे को गेम जीतने देते हैं।
जैसे ही बच्चा वो लेवल पार करता है, उसके कच्चे दिमाग में ये बात बैठ जाती है की “अरे वाह! इस्लाम में और कुरान की आयतों में तो सच में कोई बहुत बड़ा जादू है।”
एक बार जब बच्चे के दिमाग में ये अंधविश्वास बैठ जाता है, तो ये जिहादी उसे गेम से निकालकर ‘डिस्कॉर्ड’ (Discord) ऐप पर ले जाते हैं। डिस्कॉर्ड एक ऐसा ऐप है जहाँ आप अपने प्राइवेट चैट रूम बना सकते हैं और वहां की बातें किसी बाहर वाले को पता नहीं चलतीं।
इसी डिस्कॉर्ड के गुप्त चैट रूम्स में घंटों तक इन मासूम बच्चों का खौफनाक ब्रेनवॉश किया जाता है। वहां इन्हें इस्लाम की झूठी महानता की कहानियां सुनाई जाती हैं और धीरे-धीरे इन्हें पूरी तरह से वैचारिक गुलाम बना लिया जाता है।
जाकिर नाइक के वीडियो और जिम के बहाने पांच वक्त की नमाज़, हिन्दू बच्चों को अपने ही धर्म से नफरत करना सिखा रहे ये गद्दार
जब बच्चा डिस्कॉर्ड ऐप पर इन जिहादियों के पूरी तरह कंट्रोल में आ जाता है, तो इस ब्रेनवाश का दूसरा और सबसे ज़हरीला फेज़ शुरू होता है।
इन मासूम बच्चों के मोबाइल पर भारत में बैन हो चुके खूंखार आतंकी Zakir Naik और पाकिस्तान के कट्टरपंथी मौलाना तारिक जमील के भड़काऊ वीडियो भेजे जाते हैं।
इन वीडियोज़ में जाकिर नाइक बड़ी चालाकी से हिंदू देवी-देवताओं का मज़ाक उड़ाता हुआ नज़र आता है। वो बच्चों के दिमाग में ये ज़हर भरता है की “मूर्ति पूजा करना सबसे बड़ा पाप है, हिंदू धर्म झूठा है, तुम्हारे भगवान पत्थर हैं जो खुद अपनी रक्षा नहीं कर सकते, दुनिया का इकलौता सच्चा दीन सिर्फ इस्लाम है।”
जब एक 13-14 साल का बच्चा रोज़ाना घंटों तक ये वीडियो देखता है और उसे काउंटर करने के लिए उसे अपने हिंदू धर्म का कोई ज्ञान नहीं होता, तो वो बच्चा धीरे-धीरे अपने ही माता-पिता, अपने ही धर्म और अपने ही भगवानों से नफरत करने लगता है।
गाज़ियाबाद के उस जैन लड़के की कहानी सुनकर तो किसी भी बाप की रूह कांप जाएगी। वो 15 साल का लड़का अपने घर से दिन में पांच बार ये बोलकर निकलता था की “पापा, मैं जिम जा रहा हूं” या “मैं बाहर टहलने जा रहा हूं।”
घर वालों को लगता था की बेटा अपनी फिटनेस पर ध्यान दे रहा है। लेकिन असल में वो लड़का सीधे सेक्टर-23 की उस मस्जिद में जाता था, वहां जाकर टोपी पहनता था और मौलवी अब्दुल रहमान के पीछे खड़े होकर पांच वक्त की नमाज़ पढ़ता था!
ज़रा सोचिए उस मां-बाप पर क्या बीती होगी जब उन्होंने अपने बेटे के मोबाइल में इस्लामिक वीडियोज़, आयतें और मौलवियों की चैट देखी होगी।
जिस बेटे को उन्होंने इतने लाड़-प्यार से पाला, जिसके लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की, उस बेटे के दिमाग को इन जिहादियों ने पूरी तरह से हैक कर लिया था। वो लड़का घर में अपने ही माता-पिता की पूजा-पाठ पर सवाल उठाने लगा था।
ये गद्दार हमारे बच्चों को सिर्फ धर्म से नहीं काट रहे, ये उन्हें कल का वो आतंकवादी बना रहे हैं जो अपने ही देश और अपने ही परिवार का खून बहाने से पीछे नहीं हटेगा। ये गेमिंग जिहाद हमारे सनातन के भविष्य पर किया गया अब तक का सबसे खौफनाक और नंगा प्रहार है!
30 पाकिस्तानी नंबर और ATS की जांच, गेमिंग जिहाद के पीछे पाकिस्तान और इंटरनेशनल आतंकियों की करोड़ों की फंडिंग
अब ज़रा इस गेमिंग जिहाद के इंटरनेशनल कनेक्शन और उस खौफनाक नेक्सस को देखिए, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छों के पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी।
जब गाज़ियाबाद का ये धर्मांतरण वाला मामला पुलिस के पास पहुंचा, तो यूपी पुलिस और एटीएस (Anti Terrorist Squad) हरकत में आई।
पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे और फिर अलीबाग में ताबड़तोड़ छापे मारे और इस पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड शाहनवाज़ उर्फ ‘बद्दो’ को कॉलर से पकड़ कर धर दबोचा।
लेकिन असली खेल तो तब खुला जब इस बद्दो का मोबाइल और लैपटॉप खंगाला गया। भाई साहब, जांच एजेंसियों की आंखें फटी की फटी रह गईं!
उस मामूली से दिखने वाले लड़के के मोबाइल और कंप्यूटर से पाकिस्तान के एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 30 से ज़्यादा मोबाइल नंबर मिले! और ये कोई आम नंबर नहीं थे। इन नंबरों के ज़रिए वो लगातार सरहद पार बैठे अपने जिहादी आकाओं के संपर्क में था।
अरे भाई! ये कोई गली-मोहल्ले का धर्मांतरण रैकेट नहीं चल रहा था। ये सीधे-सीधे पाकिस्तान की खूंखार खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और इंटरनेशनल आतंकी संगठनों का करोड़ों रुपये का फंडेड प्रोजेक्ट था।
पाकिस्तान में बैठे इन आतंकवादियों को समझ आ गया है की अब बॉर्डर पर सेना से लड़ना उनके बस की बात नहीं है। कश्मीर में हमारी सेना ने इन्हें कुत्तों की तरह भून डाला है। इसलिए अब इन्होंने भारत को तबाह करने का ये नया डिजिटल तरीका निकाला है।
बद्दो जैसे मोहरों को पैसा देकर, उन्हें गेमिंग सर्वर हैक करने की ट्रेनिंग देकर भारत के मासूम हिंदू बच्चों के पीछे लगा दिया गया है। ये कोई छोटा क्राइम नहीं है, ये देश की आंतरिक सुरक्षा में लगाई गई सबसे बड़ी सेंध है।
बद्दो ने इंटरनेट पर अपनी पहचान छुपाने के लिए डार्क वेब और छह-छह फर्जी ईमेल आईडी का जाल बिछा रखा था ताकि पुलिस उस तक पहुंच ही ना पाए।
ज़रा सोचिए, जो दिमाग डार्क वेब और VPN का इतना खतरनाक इस्तेमाल कर रहा हो, वो कोई आम इंसान कैसे हो सकता है?
ये लोग भारत के 12-15 साल के बच्चों का शिकार करके उन्हें कल का कसाब और ओसामा बिन लादेन बनाने की साज़िश रच रहे थे। ये हमारे ही घरों में बैठकर हमारे खिलाफ ‘स्लीपर सेल’ की एक पूरी फौज तैयार कर रहे थे, और हम अपने बच्चों को मोबाइल देकर आराम से सो रहे थे।
इन गेमिंग सर्वर्स पर सुरक्षा एजेंसियां रखे पैनी नज़र, और हिंदू माँ-बाप को अपनी सोई नींद से जागने की जरुरत
सबसे पहले तो केंद्र सरकार को इन विदेशी गेमिंग कंपनियों और इनके सर्वर्स की गर्दन मरोड़नी होगी। भारत की सुरक्षा एजेंसियों को इन In-game chats और Discord जैसे ऐप्स पर 24 घंटे नज़र रखने के लिए एक खौफनाक और सख्त साइबर कानून लाना चाहिए।
और ये जो बद्दो और अब्दुल रहमान जैसे जिहादी कीड़े पकड़े जाते हैं, इन पर कोई साधारण IPC की धारा लगाकर जेल नहीं भेजना चाहिए। इन पर सीधे देशद्रोह और यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) लगना चाहिए।
इस पूरे मामले में अगर हम सिर्फ जिहादियों को गाली दें, तो ये हमारे खुद के साथ बेईमानी होगी। सबसे बड़ा दोष तो उन हिंदू माता-पिता का है जिनकी सोई हुई चेतना इस जिहाद को उनके ही रूम में पाल रही है।
आज के दौर में मां-बाप का एक खोखला स्टेटस सिंबल बन गया है। हम अपने 10-12 साल के बच्चे के हाथ में एक लाख रुपये का iPhone थमा देते हैं, उसके कमरे में हाई-स्पीड इंटरनेट और गेमिंग PC लगा देते हैं, और फिर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
हम ये देखने की ज़हमत भी नहीं उठाते की हमारा बच्चा रात के 2 बजे कान में हेडफोन लगाकर किस विदेशी जिहादी से बात कर रहा है! वो डिस्कॉर्ड पर किन लोगों के साथ चैट कर रहा है!
हमने अपने बच्चों को रामायण और महाभारत नहीं पढ़ाई, हमने उन्हें गीता के श्लोक नहीं सिखाए, और ना ही हमने उन्हें अपने सनातन धर्म की महानता बताई।
और जब आप अपने बच्चे के दिमाग को खाली छोड़ देंगे, तो उस खाली दिमाग में कोई ना कोई जिहादी भेड़िया आकर अपनी कट्टरपंथी सोच तो भरेगा ही। ये हमारी अपनी नाकामी है की हम अपने बच्चों को संस्कार नहीं दे पा रहे और फिर रोते हैं की हमारा बच्चा हमारे ही धर्म को गालियां क्यों दे रहा है!
