एक हिंदू सुबह उठता है, पाई-पाई जोड़कर अपना घर चलाता है और सरकार को ईमानदारी से अपना टैक्स भरता है। हम सोचते हैं की हमारे खून-पसीने के उस टैक्स के पैसे से देश में सड़कें बनेंगी, अस्पताल बनेंगे और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए अच्छे स्कूल खुलेंगे।
लेकिन जब इसी सेक्युलर सिस्टम का सबसे खौफनाक और नंगा सच सामने आता है, तो पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है।
अरे भाई! तुम्हारे और हमारे उसी टैक्स के पैसे से इस देश में कुछ ऐसा पल रहा है जो सीधे-सीधे तुम्हारी और हमारी आस्था के गले पर चाकू रख रहा है।
इस देश में चल रहे उन हज़ारों जिहादी मदरसों का पूरा का पूरा खर्चा, वहां पढ़ाने वाले मौलवियों की सैलरी और उनके भत्ते हमारे ही टैक्स के पैसों से दिए जा रहे हैं।
और सबसे बड़ा धोखा तो हमारे बच्चों की शिक्षा और भविष्य के साथ किया गया है। इस देश के बिकाऊ सिस्टम ने बेशर्मी की सारी दीवारें तोड़ते हुए इन जिहादी मदरसों की मज़हबी डिग्रियों को बाकायदा पूरे देश में वैलिड, यानी सरकारी मान्यता दे दी है!
जी हां। इन जिहादी मदरसों की वो फज़ूल डिग्री अब भारत में पूरी तरह से वैलिड हो चुकी है।
और सबसे भयानक बात क्या है? इन मदरसों के बंद दरवाज़ों के पीछे बच्चों को जो तालीम दी जा रही है, वो कोई गणित या विज्ञान नहीं है। वहां हमारे आराध्य भगवान राम और श्री कृष्ण को ‘हराम’ बताया जा रहा है।
ज़रा सोचिए इस खौफनाक सेक्युलर डकैती को! हम हिंदू अपना पेट काटकर सरकार को पैसा देते हैं, और ये सरकारें उसी पैसे से उन जिहादी कारखानों को मान्यता देती हैं जहाँ दिन-रात हमारी आस्था को गालियां दी जाती हैं।
ये कोई शिक्षा का मंदिर नहीं है मेरे भाई, ये भारत के अंदर एक ‘गज़वा-ए-हिंद’ का सरकारी टूलकिट है। जिस संविधान के नाम पर हमें डराया जाता है, उसी संविधान की आड़ लेकर इन कट्टरपंथियों को हमारा ही पैसा चूसने और हमारे ही सिस्टम में घुसने की खुली छूट दे दी गई है।
अगर आज भी हिंदू इस भयानक जिहादी डकैती पर चुप रहा, तो कल यही मदरसे की डिग्री वाले जिहादी हमारे हिन्दू बच्चों की मेहनत से हासिल की गयी डिग्री पर थूकेंगे!
संविधान का सरेआम मज़ाक और जिहादी मदरसों की मज़हबी डिग्री को दे दी देश में मान्यता
अगर कोई आपसे कहे की इस देश का सिस्टम धर्मनिरपेक्ष है, तो उसके मुंह पर ये सच्चाई मार दीजिएगा। हमारा संविधान साफ-साफ कहता है की सरकारी खज़ाने से किसी भी एक विशेष मज़हब की कट्टर तालीम देने वाले संस्थानों को पैसा नहीं दिया जा सकता।
लेकिन जब बात इस जिहादी इकोसिस्टम की आती है, तो सारे कानून और सारे नियम रातों-रात कूड़ेदान में डाल दिए जाते हैं।
हाल ही में जो सबसे बड़ा कानूनी फ्रॉड हमारे सामने हुआ है, उसने तो बेशर्मी की सारी हदें ही पार कर दी हैं। आपको याद होगा की कैसे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बहुत ही हिम्मत दिखाते हुए ‘यूपी मदरसा एक्ट’ को असंवैधानिक करार दिया था और डंके की चोट पर कहा था की मदरसों की पढ़ाई सेक्युलरिज्म के खिलाफ है।
हमें लगा था की चलो, अब जाकर इन जिहाद के अड्डों पर ताला लगेगा। लेकिन फिर क्या हुआ? ये पूरा का पूरा लिबरल और जिहादी इकोसिस्टम रोता-बिलखता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। और सुप्रीम कोर्ट ने उस ऐतिहासिक फैसले को पलटते हुए इन मदरसों को जीवनदान दे दिया।
अब ज़रा ज़मीनी हकीकत देखिए। आज यूपी, बिहार, बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मदरसों से मिलने वाली उन मज़हबी डिग्रियों (जैसे मौलवी, आलिम, कामिल) को बाकायदा 10वीं, 12वीं (CBSE और State Boards) के बराबर वैलिडिटी यानी मान्यता दे दी गई है!
अरे भाई, ये कैसा अंधेर है? हमारा हिंदू बच्चा दिन-रात जागकर इतिहास, भूगोल, गणित और विज्ञान पढ़ता है। वो बोर्ड के एग्जाम में घिसटता है।
और दूसरी तरफ एक मदरसा छाप लड़का, जो सिर्फ और सिर्फ कुरान, हदीस और शरिया कानून रटकर आ रहा है, जिसे भारत का संविधान तक नहीं पता, उसकी उस मज़हबी डिग्री को तुम हमारे हिंदू बच्चों की डिग्री के बराबर खड़ा कर देते हो?
एक ऐसा देश जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहता है, वहां विशुद्ध रूप से एक मज़हब की कट्टर तालीम देने वाले मदरसों को सीबीएसई (CBSE) के बराबर कैसे मान्यता मिल सकती है? ये सीधे-सीधे इस देश के एजुकेशन सिस्टम में जिहादियों को पिछले दरवाज़े से घुसाने का एक बहुत बड़ा और खौफनाक षड्यंत्र है।
राम और कृष्ण को हराम बताने वाली तालीम, मदरसों के बंद दरवाज़ों के पीछे पल रहा गज़वा ए हिन्द का खौफनाक सिलेबस
अब ज़रा इन मदरसों की चारदीवारी के अंदर झांक कर देखते हैं की आखिर हमारे टैक्स के पैसों से वहां तैयार क्या हो रहा है। ये सेक्युलर राजनेता टीवी पर बैठकर दिन-रात ज्ञान बांचते हैं की “मदरसों में तो शांति और भाईचारे की तालीम दी जाती है।”
अच्छा जी? तो ज़रा इन जिहादी किताबों का वो नंगा सच सुन लीजिए जो आज मैं आपके सामने खोलने जा रहा हूँ। इन मदरसों में छोटे-छोटे बच्चों के दिमाग में बचपन से ही जो ज़हर भरा जा रहा है, वो किसी भी आतंकवादी ट्रेनिंग से कम नहीं है।
वहां बाकायदा डंके की चोट पर सिखाया जाता है की भगवान राम को मानना अपराध है! भगवान कृष्ण की पूजा करना हराम है!
ज़रा एक मिनट के लिए अपनी सांस रोककर सोचिए। जिस भगवान राम के लिए हमारे पूर्वजों ने 500 सालों तक अपनी गर्दनें कटवाईं, जिस कृष्ण की गीता पर इस देश की आत्मा टिकी है, उन आराध्य देवों को हमारे ही देश में, हमारे ही पैसों से चल रहे मदरसों में ‘हराम’ पढ़ाया जा रहा है।
बच्चों के दिमाग में भरा जाता है की भारत के त्योहार (दिवाली, होली) मनाना हराम है। भारत की सनातन संस्कृति हराम है। गुजरात चले जाइए, वहां के मदरसों में सिखाया जाता है की उमिया माता का दर्शन करना हराम है, स्वामीनारायण मंदिर जाना हराम है।
मतलब, जो कुछ भी इस देश का है, जो कुछ भी सनातन का है, वो सब इनके लिए ‘हराम’ और ‘कुफ्र’ है! ये अपने बच्चों को सिखा रहे हैं की हिंदू एक ‘काफिर’ है और उसकी कोई इज़्ज़त नहीं है।
अरे लानत है ऐसे सेक्युलर सिस्टम पर! मैं उन तमाम सोए हुए हिंदुओं से पूछना चाहता हूँ की क्या तुम्हारा खून पानी बन चुका है? तुम अपना पेट काटकर सरकार को टैक्स देते हो, और ये सेक्युलर सरकारें उसी तुम्हारे पैसे से उन मौलवियों को सैलरी देती हैं जो रोज़ अपने मदरसों में बैठकर तुम्हारे भगवान राम को गालियां दे रहे हैं!
क्या दुनिया के किसी भी देश में ऐसा होता है की कोई इंसान अपना ही पैसा देकर अपनी आस्था और अपने धर्म का ऐसा चीरहरण करवाए? ये हमारा नहीं, ये हमारी आने वाली पीढ़ियों के गले पर रखा गया वो जिहादी चाकू है जिसे हम खुद अपने पैसों से धार लगा रहे हैं।
हिन्दू के टैक्स से जिहादी मौलवियों की मौज, बंगाल से केरल तक हज़ारों करोड़ का सेक्युलर खजाना लुट रहा मदरसों पर
अगर आपको लग रहा है की ये सिर्फ कुछ लाख रुपयों की बात है, तो ज़रा इन सेक्युलर सरकारों का वो बजट खोलकर देख लीजिए। आंकड़े चीख-चीख कर बता रहे हैं की ये कोई छोटी-मोटी लूट नहीं है, ये आज़ाद भारत की सबसे बड़ी ‘मज़हबी डकैती’ है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारें मिलकर ‘SPQEM’ (मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा योजना) के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये लुटा रही हैं। अब ज़रा बंगाल का नंगा नाच देखिए।
बंगाल सरकार साइंस और टेक्नोलॉजी जैसे ज़रूरी विभाग के लिए पूरे साल का बजट सिर्फ 80-90 करोड़ रुपये देती है। लेकिन जब बात इन्हीं मदरसों की आती है, तो इन जिहादी अड्डों पर 5700 करोड़ रुपये का खज़ाना खोल कर दिया जाता है!
हाँ भाई, 5700 करोड़! और नीचे केरल चले जाइए। वहां कम्युनिस्टों और जिहादियों के खौफनाक गठजोड़ ने तो बेशर्मी की सारी दीवारें ही तोड़ दी हैं। केरल में लगभग 21 हज़ार मदरसे चल रहे हैं।
उन मदरसों में पढ़ाने वाले मौलवियों और उस्तादों की सैलरी, उनका घर-खर्च और यहां तक की उनकी पेंशन के लिए सरकारी खज़ाने से 7500 करोड़ रुपये फूंके जा रहे हैं। ये 7500 करोड़ रुपये कोई अल्लाह की देन नहीं है, ये केरल और देश भर के उस आम हिंदू का पैसा है जो दिन-रात गधे की तरह पिस रहा है।
और सबसे भयानक फ्रॉड तो ये है की एक तरफ इन जिहादी फैक्ट्रियों को पालने के लिए हज़ारों करोड़ लुटाए जा रहे हैं, और दूसरी तरफ हमारे भव्य हिंदू मंदिरों पर सरकारी गिद्धों ने कब्ज़ा कर रखा है।
तिरुपति से लेकर गुरुवायुर और मीनाक्षी मंदिर तक, जो पैसा एक आम सनातनी अपने भगवान की हुंडी (दानपात्र) में चढ़ाता है, उस पैसे को ये सेक्युलर सरकारें ‘HRCE एक्ट’ के तहत खुलेआम लूट लेती हैं।
ये हिंदुओं को आर्थिक और वैचारिक रूप से कुचलने का एक ऐसा खौफनाक सिंडिकेट है जिसने इस देश के पूरे सिस्टम को अपनी मुट्ठी में जकड़ लिया है।
जब तक इस सरकारी खज़ाने की लूट पर परमानेंट ताला नहीं लगेगा, तब तक ये जिहादी इकोसिस्टम इसी तरह हमारी छाती पर चढ़कर हमारे भगवानों को गालियां देता रहेगा।
शिक्षा के आधुनिकीकरण का वो सफेद झूठ जो मदरसे से निकले ‘स्लीपर सेल’ को सिस्टम के अंदर बैठा रहा है
जब भी इस देश का कोई सच्चा सनातनी इन मदरसों की करोड़ों की सरकारी फंडिंग पर सवाल उठाता है, तो ये सेक्युलर सरकारें तुरंत अपना ज्ञान बांचने आ जाते हैं।
ये बड़ी बेशर्मी से एक मीठी गोली हमें खिलाने की कोशिश करते हैं की “अरे डरो मत! सरकार तो बस मदरसों का आधुनिकीकरण कर रही है। जब हम इन बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर देंगे, तो ये मुख्यधारा से जुड़ेंगे। ये बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस बनेंगे।”
वाह रे सेक्युलर गद्दारों! ज़रा ज़मीन पर जाकर देखो की इस आधुनिकीकरण का खौफनाक नतीजा क्या निकल रहा है।
जब तुम मदरसे की उस कट्टर जिहादी तालीम में इंटरनेट और मॉडर्न टेक्नोलॉजी का तड़का लगाते हो, तो वहां से कोई देश का वफादार डॉक्टर या साइंटिस्ट नहीं निकलता।
वहां से निकलते हैं वो पढ़े-लिखे और हाई-टेक जिहादी, जो अब डार्क वेब और टेलीग्राम के ज़रिए ‘गज़वा-ए-हिंद’ का स्लीपर सेल नेटवर्क चलाते हैं।
अरे भाई, मदरसे का पूरा का पूरा ढांचा, उसका सिलेबस और उसका माहौल सिर्फ और सिर्फ ‘शरिया’ और मज़हबी कट्टरपंथ पर टिका होता है।
वहां भारत के संविधान, हमारे गौरवशाली इतिहास या राष्ट्रवाद की कोई जगह नहीं होती। जब एक बच्चा बचपन से यही रट रहा है की राम और कृष्ण को मानना ‘हराम’ है, जब उसे सिखाया जा रहा है की काफिरों से कैसे नफरत करनी है, तो उसे कंप्यूटर थमा देने से उसकी सोच कैसे बदल जाएगी?
वो कंप्यूटर का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अपने जिहादी मंसूबों को और तेज़ी से फैलाने के लिए करेगा।
और सबसे खौफनाक साज़िश तो अब शुरू हुई है। जब तुम इन जिहादी मदरसों की मज़हबी डिग्रियों (मौलवी, आलिम) को सीबीएसई (CBSE) या 10वीं-12वीं के बराबर मान्यता दे देते हो, तो तुम असल में इनके लिए सिस्टम के दरवाज़े खोल रहे हो।
इन्हीं वैलिड डिग्रियों के दम पर अब ये मदरसा छाप लोग सरकारी नौकरियों, पुलिस, प्रशासन और यहां तक कि यूपीएससी (UPSC) में घुसपैठ कर रहे हैं।
ज़रा सोचिए इस भयंकर भविष्य को! जो लड़का मदरसे में ये पढ़कर आया है की हिंदू एक काफिर है और भारत की संस्कृति हराम है, वो अगर कल को तुम्हारे ज़िले का कलेक्टर या एसपी (SP) बन गया, तो क्या होगा? वो कुर्सी पर बैठकर संविधान नहीं चलाएगा, वो अपनी कलम से शरिया चलाएगा।
जब रामनवमी का जुलूस निकलेगा, तो वो उसी कलम से पुलिस को आदेश देगा की हिंदुओं पर लाठियां चलाओ और जुलूस बैन कर दो। तुम सरकारी पैसों से इन जिहादी स्लीपर सेल्स को सिस्टम के अंदर घुसा रहे हो।
ये शिक्षा का आधुनिकीकरण नहीं है मेरे दोस्त, ये सीधे-सीधे भारत की नौकरशाही को अंदर से इस्लामिक बनाने का एक क्रूर और साइलेंट जिहाद है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) जो की बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाली सबसे बड़ी संवैधानिक संस्था है, उसने ही डंके की चोट पर इन जिहादी मदरसों का पूरा का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल कर रख दिया है।
NCPCR ने अपनी रिपोर्ट में साफ-साफ कहा है की इन मदरसों में बच्चों को शिक्षा के अधिकार (RTE) से महरूम रखा जा रहा है। वहां कोई आधुनिक शिक्षा नहीं है, बल्कि बच्चों के दिमाग में सिर्फ और सिर्फ मज़हबी कट्टरपंथ और शरिया का ज़हर भरा जा रहा है।
आयोग ने डंके की चोट पर सभी राज्य सरकारों को नोटिस भेजा और सिफारिश की कि “मदरसों को मिलने वाली हर तरह की सरकारी फंडिंग तुरंत प्रभाव से बंद की जाए, क्योंकि ये शिक्षा के नियम कानून का सरेआम मज़ाक उड़ा रहे हैं।”
और सबसे खौफनाक खुलासा तो ये था की इन मदरसों को ज़्यादा से ज़्यादा सरकारी फंड और स्कॉलरशिप लूटने के लिए कई जगह गैर-मुस्लिम (हिंदू) बच्चों का भी फर्जी एडमिशन दिखाया गया था!
ज़रा सोचिए इस जिहादी साज़िश को! हमारे ही हिंदू बच्चों के नाम का इस्तेमाल करके ये कट्टरपंथी मौलवी सरकारी खज़ाना डकार रहे हैं और उसी खज़ाने से अपने मदरसों की मीनारें ऊंची कर रहे हैं।
लेकिन क्या इस देश के सेक्युलर सिस्टम ने NCPCR की इस खौफनाक रिपोर्ट पर कोई एक्शन लिया? बिल्कुल नहीं! ये हमारे ही पैसों से हमारे खिलाफ एक ऐसी खूंखार फौज तैयार करने का सरकारी टूलकिट है, जिसे अगर आज नहीं रोका गया, तो कल ये हमारे बच्चों का जीना हराम कर देंगे।
जिहादी मदरसों की सरकारी फंडिंग रोककर एक देश एक शिक्षा लागू करने का आ गया वक्त
अब हिंदू समाज इस दोगले और बिकाऊ सेक्युलर सिस्टम के आगे गिड़गिड़ाना बंद कर चुका है। हम सरकार से डंके की चोट पर एक ही बात कहना चाहते हैं- हमें इस देश में “एक देश, एक शिक्षा कानून” चाहिए।
हमारी सबसे पहली और सबसे आक्रामक मांग ये होनी चाहिए की मदरसों को मिलने वाली एक-एक पैसे की सरकारी ग्रांट तुरंत प्रभाव से बंद की जाए। हमारा टैक्स का पैसा कोई खैरात नहीं है जो उन मौलवियों पर लुटाया जाए जो हमारे ही देवी-देवताओं को हराम बताते हैं।
जिन जिहादी मदरसों की डिग्रियों को सीबीएसई (CBSE) या 10वीं-12वीं के बराबर मान्यता दी गई है, सरकार रातों-रात उस मान्यता को रद्द करे और उन डिग्रियों को रद्दी के कागज़ में तब्दील करे।
अरे भाई, जो मदरसा भारत के संविधान को नहीं मानता, जो राष्ट्रगान गाने से इंकार कर देता है, उसे इस देश की मुख्य शिक्षा के बराबर कैसे खड़ा किया जा सकता है? ये हमारे उन बच्चों का सरेआम अपमान है जो रात-दिन एक करके अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं।
इसके साथ ही, राज्य सरकारों द्वारा हिंदू मंदिरों की हुंडी (दानपात्र) को लूटने वाले उस काले ‘एचआरसीई एक्ट’ (HRCE Act) को तुरंत फाड़कर फेंका जाना चाहिए। हमारा पैसा हमारे गुरुकुलों को ज़िंदा करने के लिए है, किसी जिहादी मदरसे का कंप्यूटर खरीदने के लिए नहीं।
संसद में बैठे हमारे हिंदूवादी नेताओं को ये बात अपने दिमाग में अच्छे से बैठा लेनी चाहिए की अब हम किसी ‘शांति समिति की बैठकों’ में समझौता नहीं करेंगे।
जो सरकार हमारे अस्तित्व को बचाने के लिए मदरसों की ये अवैध मान्यता खत्म करेगी, अब हिंदू सिर्फ और सिर्फ उसी को अपना वोट देगा।
ये कोई छोटी-मोटी बहस नहीं है। ये हमारी सनातन संस्कृति, हमारे टैक्स के पैसे और हमारे बच्चों के भविष्य को बचाने का अंतिम धर्मयुद्ध है।
जो हमारे भगवान राम और कृष्ण को हराम बताएगा, हम इस भारत की ज़मीन से उसका पूरा वजूद ही हराम कर देंगे!
जय श्री राम! भारत माता की जय!
