इंसान चाहे कितनी भी राजनीति कर ले, चाहे वैचारिक रूप से किसी का कितना भी बड़ा दुश्मन क्यों ना हो, लेकिन हमारे हिंदुस्तान में कुछ संस्कार, कुछ मर्यादाएं ऐसी हैं जिन्हें पार करने की इज़ाज़त किसी को नहीं दी जा सकती!
आप सरकार से लड़िए, आप मंत्रियों का पुतला फूंकिए, आप सड़कें जाम कर दीजिए…
लेकिन जब आपकी ज़बान से एक ‘माँ’ के लिए भद्दी गालियां निकलने लगें, जब आप देश की रक्षा करने वाली ‘भारतीय सेना’ को सरेआम गालियां बकने लगें, तो फिर आप किसी भी एंगल से छात्र नहीं रह जाते।
तब आप सिर्फ और सिर्फ सड़कछाप गुंडे हैं, और ऐसे गुंडों का इलाज पुलिस को सरेआम चौराहे पर इनकी हड्डियां तोड़कर करना चाहिए!
नीट (NEET) परीक्षा के नाम पर पिछले कुछ दिनों से देश की राजधानी दिल्ली और बाकी शहरों में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बैनर तले जो कुछ भी हो रहा है, उसने इंसानियत और छात्र राजनीति की सारी हदें पार कर दी हैं।
हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी की माँ, जो आज इस दुनिया में है ही नहीं, उन्हें सड़कों पर गालियां दी जा रही हैं! आखिर ये कौन सी किताबों में पढ़ाया जा रहा है भाई? क्या यही हमारे देश के भविष्य हैं?
विरोध अपनी जगह, पर एक गुज़र चुकी ‘माँ’ का क्या कसूर, सिस्टम से लड़ने का ड्रामा रचकर नीचता की सारी हदें पार कर गए NEET के ये ‘फर्जी छात्र’
Girls who abuse Modi ji and his mother should be put behind bars. Strict action should be taken against them. pic.twitter.com/LDud81fwvJ
— Krina Chauhan (@Krinachauhan03) July 27, 2026
ज़रा सोचकर देखिए! एक माँ का दर्ज़ा क्या होता है? हमारे शास्त्रों में कहा गया है की माँ का दर्ज़ा तो साक्षात भगवान से भी बड़ा होता है।
वो ‘माँ’ चाहे एक गरीब बच्चे की हो, जो दिन भर ईंटें ढोकर अपने बच्चों को पालती है, या फिर देश के ‘प्रधानमंत्री’ की हो, माँ तो आख़िरकार माँ ही होती है ना!
हम मानते हैं की नीट (NEET) के पेपर लीक हुए। हम मानते हैं की लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ। छात्रों का गुस्सा बिल्कुल जायज़ था।
अगर आपको सिस्टम से लड़ना था, अगर आपको शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से दिक्कत थी (जिन्हें दबाव में आकर इस्तीफा भी देना पड़ा), तो आप उनका घेराव करते।
आप नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के दफ्तर पर जाकर प्रदर्शन करते। इसमें किसी को कोई ऐतराज़ नहीं था। लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर इन लोगों ने जो गंद मचाई, उसे देखकर पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया।
इन ‘तथाकथित छात्रों’ के झुंड ने सड़कों पर खड़े होकर, कैमरों के सामने सरेआम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दिवंगत माँ को भद्दी-भद्दी गालियां दीं, जिनका राजनीति से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था।
एक 100 साल की बुज़ुर्ग माँ, जो अब इस दुनिया को छोड़कर जा चुकी है, उसके बारे में इतने गंदे और नीच शब्द इस्तेमाल किए गए की उन्हें यहाँ लिखा भी नहीं जा सकता।
अरे जाहिलों! तुम्हारी लड़ाई अगर सत्ता से थी तो तुमने एक गुज़र चुकी बुज़ुर्ग औरत को बीच में क्यों घसीटा? क्या तुम्हारी अपनी कोई माँ-बहन नहीं है?
क्या तुम्हारे घरों में यही संस्कार दिए जाते हैं की अगर सरकार से कोई शिकायत हो तो सीधे सामने वाले की माँ को गालियां बकना शुरू कर दो?
ये कोई छात्र नहीं हो सकते भाई! कोई भी असली छात्र, जो दिन-रात किताबों में सिर खपाकर डॉक्टर बनने का सपना देख रहा हो, वो कभी ऐसी गटर छाप हरकत नहीं कर सकता।
ये वो गुंडे हैं जो छात्र आंदोलन की आड़ में अपना कुंठित एजेंडा चला रहे हैं। और ऐसे नीच उपद्रवियों पर पुलिस को अपना सबसे तगड़ा ‘डंडा’ चलाना चाहिए, ताकि इनकी आने वाली पुश्तें भी किसी माँ को गाली देने से पहले सौ बार कांपें।
‘मैं भी तो एक बेटा हूँ’ जब अपनी माँ को दी गई गालियों पर छलक उठा था प्रधानमंत्री का दर्द
राजनीति के इस गंदे और घिनौने खेल में मोदी जी की माँ को पहली बार निशाना नहीं बनाया गया है। आपको याद होगा मोदी जी का वो पुराना वीडियो, जिसे देखकर आज भी किसी का भी दिल पसीज जाता है।
भरे मंच से जब देश के प्रधानमंत्री का गला रो गया था और उन्होंने भारी मन से कहा था की “मेरी माँ को गालियां दी गई हैं… लेकिन ये गालियां सिर्फ मेरी माँ का अपमान नहीं, बल्कि इस देश की हर माँ, हर बहन और हर बेटी का अपमान है।”
ज़रा सोचिए यार! वो इंसान जो दिन-रात इस देश के लिए काम करता है, जब वो भरे गले से कहता है की “आखिर मैं भी तो एक बेटा हूँ”, तो उस बेटे के दिल पर क्या गुज़रती होगी?
जब ये अर्बन-नक्सल मोदी जी का बाल भी बांका नहीं कर पाते, तो ये अपनी सबसे नीच औकात पर उतर आते हैं और एक गुज़र चुकी माँ को गालियां बकने लगते हैं।
नीट के नाम पर सड़कों पर गंद मचाने वाले इन जाहिलों ने फिर से उसी नीच मानसिकता का सबूत दिया है।
लेकिन ये सड़कछाप गुंडे भूल गए हैं की जब भी किसी बेटे का ऐसा दर्द छलककर बाहर आता है, तो हिंदुस्तान की हर माँ उसे अपना आशीर्वाद देने के लिए चट्टान की तरह खड़ी हो जाती है।
‘भारतीय सेना’ को गालियां और अल्लाहू अकबर के नारे, शिक्षा के नाम पर देश को सुलगाने वाला ये वही पुराना ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’
अब आते हैं इस आंदोलन के सबसे खौफनाक और घिनौने पहलू पर। आप मुझे एक बात समझाइए… मेडिकल की परीक्षा, पेपर लीक, और NTA के लचर सिस्टम का हमारी ‘भारतीय सेना’ (Indian Army) से क्या लेना-देना है?
जब दिल्ली की सड़कों पर ये प्रोटेस्ट चल रहा था, तो अचानक से वहां ‘भारतीय सेना’ को गालियां क्यों दी जाने लगीं?
जो फौजी भाई सियाचिन की माइनस 40 डिग्री की ठंड में और राजस्थान की 50 डिग्री की तपती रेत में खड़े होकर देश की सरहदों की रक्षा कर रहे हैं, ताकि ये सड़कछाप जाहिल आराम से सड़कों पर घूम सकें, उन्हीं फौजियों को ये लोग गन्दी-गन्दी गालियां दे रहे थे।
ये कोई छात्र-वात्र नहीं हैं, ये सीधे तौर पर ‘गुंडे-मवाली’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के लोग हैं।
इन प्रोटेस्ट में शिक्षा की तो बात ही नहीं हो रही थी। वहां नारे लग रहे थे- “We want freedom from India” (हमें भारत से आज़ादी चाहिए)! वहां नारे लग रहे थे- “Restore Article 370” (कश्मीर में फिर से धारा 370 लागू करो)!
हद तो तब हो गई जब शिक्षा के इस तथाकथित आंदोलन में ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे गूंजने लगे और भगवान राम और माता सीता का सरेआम घोर अपमान किया गया!
अब आप ही बताइए, जो लड़का नीट क्लीयर करके डॉक्टर बनना चाहता है, क्या वो कश्मीर में धारा 370 वापस लाने की मांग करेगा? क्या वो भारत से आज़ादी मांगेगा? क्या वो राम-सीता का अपमान करेगा? बिल्कुल नहीं!
सीधी सी बात है की असली छात्रों की नाराज़गी और उनके दर्द को उसी पुराने जेएनयू (JNU) वाले अर्बन-नक्सल और वामपंथी ईकोसिस्टम ने हाईजैक कर लिया है।
ये वही लोग हैं जिन्हें ना तो नीट से कोई मतलब है और ना ही छात्रों के भविष्य से। इनका इकलौता मक़सद है किसी भी मुद्दे की आड़ में देश को जलाना, ‘भारतीय सेना’ का मनोबल तोड़ना और हिंदुत्व को गालियां देना।
2800 से ज़्यादा ‘क्रिमिनल्स’ की भीड़ और फाइव स्टार होटल में जश्न, अभिजीत दिपके और CJP की इस ‘फर्जी क्रांति’ का खौफनाक सच
अगर आपको अभी भी लग रहा है की ये कुछ भटके हुए छात्रों का काम था, तो दिल्ली पुलिस की जो लेटेस्ट इंटरनल रिपोर्ट सामने आई है, वो आपकी आँखें खोल देगी।
जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आस-पास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और फेशियल रिकग्निशन (Facial Recognition) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया, तो जानते हैं क्या निकला?
पुलिस की रिपोर्ट के मुताबाकि इस भीड़ में 2873 से ज़्यादा ऐसे लोग शामिल थे जिनका एक लंबा-चौड़ा क्रिमिनल रिकॉर्ड है!
हाँ भाई, ये कोई मेडिकल के स्टूडेंट नहीं थे। इनमें से कईयों पर हत्या, लूट, दंगे भड़काने और यहाँ तक की रेप जैसे संगीन केस दर्ज़ हैं।
क्या ये मर्डर और रेप के आरोपी नीट (NEET) की तैयारी कर रहे थे? क्या ये अस्पताल में ऑपरेशन करने वाले थे?
ये भाड़े के वो टट्टू थे जिन्हें सड़कों पर सिर्फ इसलिए उतारा गया था ताकि वो पुलिस पर पत्थर फेंक सकें, दंगा भड़का सकें और हमारी ‘भारतीय सेना’ को गालियां देकर माहौल खराब कर सकें।
और इस पूरी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कर्ता-धर्ता कौन है? अभिजीत दिपके! इस आदमी ने सोशल मीडिया पर एक मीम (Meme) पेज की तरह इसे शुरू किया और फिर रातों-रात इसे एक राजनीतिक टूल बना दिया।
सबसे बड़ा मज़ाक तो ये है की जब गरीब और असली छात्र सड़कों पर बारिश में भीग कर पुलिस के डंडे खा रहे थे, पुलिस की बैरिकेडिंग से टकरा रहे थे, तब अभिजीत दिपके और उसकी गैंग के बाकी कोर मेंबर्स दिल्ली के महंगे फाइव स्टार होटलों में जश्न मना रहे थे!
इनके वायरल वीडियोज़ चीख-चीख कर सच बता रहे हैं की कैसे इन्होंने आम छात्रों को पुलिस की लाठियां खाने के लिए चारे की तरह इस्तेमाल किया और खुद AC कमरों में बैठकर अपनी ‘क्रांति’ का मज़ा लूटते रहे।
और सबसे बड़ा सवाल जो आज पूरे देश को पूछना चाहिए… रातों-रात इस CJP के पास इतने टेंट, इतने माइक, इतने झंडे, और दिल्ली में हज़ारों की भीड़ जुटाने की फंडिंग कहाँ से आ गई?
क्या गरीब छात्रों ने चंदा इकट्ठा किया था? बिल्कुल नहीं! इस पूरे बवाल के पीछे विदेशी फंडिंग और देश-विरोधी ताकतों की बहुत गहरी साज़िश की बू आ रही है।
विदेश मंत्रालय (MEA) तक से इस मामले में सवाल पूछे जा रहे हैं की क्या पाकिस्तान और विदेशी एनजीओ (NGOs) के पैसे से भारत में ये अराजकता फैलाई जा रही है?
सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इन ‘हरामखोरों’ का पक्का इलाज कर रही पुलिस, ‘माँ’ को गालियां बकने वालों की हो रही जेल में परमानेंट बुकिंग
भाई, जब आप सड़क पर उतरकर देश के खिलाफ ज़हर उगलेंगे, पुलिस पर पत्थर चलाएंगे और एक गुज़र चुकी ‘माँ’ को गालियां बकेंगे, तो क्या आप उम्मीद करते हैं की पुलिस आपकी आरती उतारेगी? बिल्कुल नहीं!
अब इन सड़कछाप गुंडों का वही पक्का इलाज हो रहा है जिसके ये असली हक़दार हैं। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, पुलिस का डंडा अब ऐसा बोल रहा है की इन ‘फर्जी छात्रों’ की नानी याद आ गई है।
ताज़ा मामला बेंगलुरु का ही ले लीजिए। 23 जुलाई 2026 को वहां एक इंस्टाग्राम यूज़र (जिसका हैंडल ‘हडसन’ बताया जा रहा है) ने अपनी औकात दिखाते हुए मोदी जी और उनकी माता जी को भद्दी गालियां देते हुए एक पोस्ट डाली।
लेकिन तुरंत एक बीजेपी नेता ने शिकायत ठोकी और उस ‘हडसन’ नाम के जाहिल पर BNS (भारतीय न्याय संहिता) और आईटी (IT) एक्ट की सबसे कड़ी धाराओं में FIR दर्ज़ हो गई है।
अब वो बैठकर जेल की चक्की पीसेगा और अपनी ‘क्रांति’ जेल की दीवारों को सुनाएगा।
सिर्फ बेंगलुरु ही नहीं, दिल्ली पुलिस ने भी अब अपना सबसे रौद्र रूप दिखा दिया है। 27 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने सीधे ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया कंपनियों की गर्दन पकड़ते हुए उन्हें सख्त नोटिस थमा दिया है।
एआई (AI) और डीपफेक का इस्तेमाल करके जो भी नीच इंसान देश के प्रधानमंत्री की ‘माँ’ और ‘भारतीय सेना’ को गालियां दे रहा था, उन सबकी पोस्ट्स को तुरंत उड़ाने का फरमान जारी हो गया है।
पुलिस की रडार पर 450 से ज़्यादा ऐसे अकाउंट हैं जो ये ज़हर फैला रहे थे।
सच कहूँ तो मैं दिल्ली पुलिस के एक्शन का 100 प्रतिशत समर्थन करता हूँ। जब ये उपद्रवी बैरिकेड तोड़कर पुलिस वालों का सिर फोड़ेंगे, सरेआम ‘अल्लाहू अकबर’ चिल्लाकर ‘भारतीय सेना’ का मनोबल तोड़ेंगे, तो क्या पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहेगी?
इन जाहिलों पर जो लाठीचार्ज हुआ है, जो आंसू गैस के गोले दागे गए हैं, वो बिल्कुल सही हैं। जब जुबान से इंसानियत खत्म हो जाए ना, तो डंडा ही वो इकलौती भाषा है जो इन जैसे गद्दारों को समझ में आती है।
FIR वापस लेने की धमकी देने वाले इन ‘सड़कछाप गुंडों’ के आगे झुकना नहीं है सरकार, अब वक्त है सबसे भारी ‘डंडा’ चलाने का
अब ज़रा इन कॉकरोचों (CJP) का नया ड्रामा सुनिए। जब पुलिस ने इनकी हड्डियों का डिज़ाइन बदलना शुरू किया और धड़ाधड़ FIR दर्ज़ होने लगीं, तो इनकी सारी ‘क्रांति’ का भूत उतर गया। अब ये डरे हुए उपद्रवी ब्लैकमेलिंग पर उतर आए हैं।
अभी 27 जुलाई की ही बात है, ये CJP वाले अब बड़े-बड़े महंगे वकीलों की आड़ लेकर सरकार को सरेआम धमकियां दे रहे हैं!
इनका कहना है की अगर सभी प्रदर्शनकारियों पर से पुलिस केस वापस नहीं लिए गए, तो ये दोबारा सड़कों पर उतरेंगे और देश में बवाल काटेंगे।
ये क्या मज़ाक चल रहा है भाई? तुमने एक ‘माँ’ को सरेआम गालियां दीं, तुमने देश की ‘सेना’ को नीचा दिखाया, और अब तुम उम्मीद कर रहे हो की सरकार तुम्हारे सामने घुटने टेक देगी और तुम्हारे सारे गुनाह माफ़ कर देगी?
यहाँ मैं डंके की चोट पर सरकार को एक बहुत सीधी और कड़क चेतावनी देना चाहता हूँ! सरकार को इन ‘सड़कछाप गुंडों’ की धमकियों के आगे एक इंच भी नहीं झुकना है।
हमें पता है की कई बार राजनीतिक दबाव में आकर सरकारें उपद्रवियों पर से केस वापस ले लेती हैं। लेकिन इस बार ऐसा कोई पाप नहीं होना चाहिए!
वामपंथी मीडिया बहुत रोना रोएगा की ‘अरे बेचारे छात्र हैं, इनका करियर खराब हो जाएगा, एफआईआर वापस ले लो।’
भाड़ में गया इनका करियर! जो इंसान देश की ‘सेना’ और एक बुज़ुर्ग ‘माँ’ का सम्मान नहीं कर सकता, वो डॉक्टर बनकर समाज का क्या खाक भला करेगा?
ऐसे नीच लोगों का कोई करियर नहीं होना चाहिए। इन्हें सीधे तिहाड़ जेल की सबसे काली कोठरी में सड़ाना चाहिए ताकि आगे से कोई भी भारत में किसी भी ‘माँ’ की तरफ उंगली उठाने से पहले सौ बार सोचे।
भारत माता की जय!
