मुझे आज भी 2015 का वो दिन अच्छी तरह याद है। रामनाथ गोयनका अवार्ड्स का वो चमचमाता हुआ मंच था, सामने देश का सारा मीडिया बैठा था और वहाँ बैठकर बॉलीवुड का ये दोगला ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर खान पूरे भारत की पीठ में छुरा घोंप रहा था।
बड़े ही मासूम से चेहरे के साथ इस आदमी ने माइक पर कहा था की देश में ‘असहिष्णुता’ (Intolerance) बहुत बढ़ गई है।
इसने सरेआम नौटंकी करते हुए कहा की मेरी पत्नी किरण राव ने मुझसे पूछा है की “क्या हमें भारत छोड़ देना चाहिए? मुझे अपने बच्चों के लिए डर लगता है।”
ज़रा सोचिए भाई! जिस देश के करोड़ों भोले-भाले हिंदुओं ने अपना पैसा खर्च करके इसकी सड़ी-गली फिल्मों को ब्लॉकबस्टर बनाया, जिस देश ने इसे अरबों की दौलत दी, सिर-आंखों पर बिठाया, उसी देश को इसने पूरी दुनिया के सामने ‘असहिष्णु’ और ‘डरावना’ बता दिया।
लेकिन आज मैं डंके की चोट पर इस बॉलीवुडिया एक्टर से पूछना चाहता हूँ की मियाँ, अगर तुम्हें भारत में इतना ही डर लगता था, तो तुम अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर किसी इस्लामी मुल्क में क्यों नहीं चले गए?
सच्चाई तो ये है की ये ‘डर-वर’ सब एक बहुत बड़ा और गंदा राजनीतिक एजेंडा था। इनका मकसद सिर्फ और सिर्फ उस समय की राष्ट्रवादी सरकार और हिंदू समाज को दुनिया भर में बदनाम करना था।
और इस आदमी के दोगलेपन की हद देखिए! जिस देश में इसे और इसके परिवार को रात में नींद नहीं आ रही थी, उसी देश के सर पर बैठकर, मुंबई के अपने आलीशान बंगले में, इसी 5 जुलाई 2026 को इस 61 साल के बूढ़े ने बड़े मजे से अपनी ‘तीसरी’ शादी रचा ली है।
वो भी किससे? गौरी स्प्रैट (Gauri Spratt) नाम की एक और गैर-मुस्लिम महिला से।
आपको पता होगा की इस नीच इंसान की पहली दो बीवियां भी मुस्लिम नहीं, बल्कि हिंदू थी। आखिर ये कैसा ‘निकाह जिहाद’ चला रहा है जो इसे शादी के लिए कोई मुस्लिम महिला नहीं मिलती?
जब तुम्हें देश को गालियां देनी होती हैं, तब तुम्हें यहाँ ‘डर’ लगता है। लेकिन जब अपनी अय्याशी पूरी करनी हो, 61 की उम्र में तीसरी बार दूल्हा बनना हो, तब भारत से ज्यादा सेफ और महफूज़ जगह तुम्हारे लिए पूरी दुनिया में कोई नहीं होती!
ये कोई मामूली दोगलापन नहीं है, ये इस बॉलीवुड के सेक्युलर गैंग की वो असलियत है जिसे आज हर उस हिंदू को समझना होगा जो अपना खून-पसीने का पैसा इनकी फिल्मों के टिकट खरीदने पर बर्बाद करता है।
ये लोग असल जिंदगी में अपना जिहादी एजेंडा पूरा कर रहे हैं और कैमरे के सामने आकर ‘डरे हुए मुसलमान’ का वो पुराना और घिसा-पिटा विक्टिम कार्ड खेलने लगते हैं।
रीना दत्ता से लेकर किरण राव और अब गौरी स्प्रैट तक, सिर्फ गैर-मुस्लिम महिलाओं को ही क्यों बनाता है आमिर खान अपना शिकार
अब ज़रा इस आमिर खान की शादियों के पूरे ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालते हैं। आप खुद देखिए और सोचिए की क्या ये सब सिर्फ एक इत्तेफाक है या पर्दे के पीछे कोई बहुत खौफनाक और ज़हरीली साज़िश चल रही है?
जब आमिर खान बॉलीवुड में नया-नया आया था, तब उसने अपनी पड़ोस में रहने वाली एक हिंदू लड़की को फंसाया। नाम था रीना दत्ता।
घर वालों से छुपकर, भागकर शादी की। सालों तक उस हिंदू औरत को अपनी पत्नी बनाकर रखा, उससे बच्चे पैदा किए और फिर एक दिन चुपचाप उसे अपनी जिंदगी से लात मारकर निकाल दिया।
इसके बाद इस एक्टर को फिर से एक और हिंदू लड़की मिल गई। लगान फिल्म के सेट पर इसकी नजर पड़ी किरण राव पर। फिर से वही पुराना प्यार-मोहब्बत का ड्रामा रचा गया।
किरण राव को अपनी दूसरी बेगम बनाया गया। सालों तक वो औरत आमिर खान के इस ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ वाले ड्रामे को ढोती रही।
सरोगेसी से बच्चा भी पैदा किया गया। और फिर अचानक से एक दिन दोनों ने कैमरे के सामने बैठकर बड़े ही ‘कूल’ तरीके से बता दिया की अब हम तलाक ले रहे हैं। जैसे कोई कपड़े बदल रहा हो!
और अब 2026 में, जब उम्र 61 के पार जा चुकी है, बाल सफेद हो चुके हैं, तब इस आमिर खान ने गौरी स्प्रैट नाम की एक ईसाई महिला को अपना तीसरा शिकार बना लिया है।
अब मेरा पूरे देश से और खासकर हिंदू समाज से एक सीधा सा सवाल है। क्या इस आमिर खान को पूरे हिंदुस्तान में, या पूरी दुनिया में कोई भी मुस्लिम लड़की शादी के लिए नहीं मिली?
आखिर ये कैसा इत्तेफाक है की इस आदमी को सिर्फ और सिर्फ हिंदू या गैर-मुस्लिम लड़कियां ही पसंद आती हैं?
सच्चाई तो ये है भाई की ये कोई इत्तेफाक नहीं है, ये एक वेल-प्लांड ‘निकाह जिहाद’ है। बॉलीवुड के ये खान अपनी उस ‘रोमांटिक हीरो’ वाली इमेज का बहुत ही गंदे तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
ये फिल्मों में ऐसे शरीफ और सीधे-सादे इंसान होने का ढोंग रचते हैं की मासूम और नासमझ लड़कियां इनकी इस चकाचौंध के जाल में फंस जाती हैं।
उन्हें लगता है की ये एक्टर कोई बहुत बड़ा सेक्युलर और खुले विचारों वाला इंसान है। लेकिन असल जिंदगी में ये लोग उसी कट्टरपंथी माइंडसेट का हिस्सा हैं जहाँ गैर-मुस्लिम औरतों को सिर्फ एक ट्रॉफी (Trophy) या बच्चा पैदा करने की मशीन समझा जाता है।
ये लोग प्यार का दाना डालते हैं, शादी रचाते हैं, सालों तक उन हिंदू या गैर-मुस्लिम औरतों का बच्चे पैदा करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, अपनी मजहबी आबादी बढ़ाते हैं और जब इनका मन भर जाता है, तो ‘तलाक-तलाक-तलाक’ का मॉडर्न वर्ज़न अपनाकर उसे डंप कर देते हैं।
और फिर शुरू हो जाती है एक नए और ताज़े शिकार की तलाश। ये इस ‘बॉलीवुड जिहाद’ गैंग की वो काली सच्चाई है जिसे छुपाने के लिए पीआर (PR) एजेंसियां दिन-रात इनके इमेज सुधारने में करोड़ों रुपये फूंकती हैं।
सेक्युलरिज्म का झुनझुना सिर्फ हिंदू औरतों के लिए, और बच्चों के नाम ये जिहादी रखते हैं पक्के ‘मजहबी’
अब ज़रा इनके सेक्युलरिज्म और तथाकथित ‘खुले विचारों’ का वो भयंकर सच सुनिए जो आपकी आंखें खोल देगा।
जब ये बॉलीवुड के खान हिंदू या ईसाई लड़कियों से शादी करते हैं, तो मीडिया में बड़ा ढोल पीटा जाता है की देखिए, प्यार की कोई सरहद नहीं होती, धर्म से कोई फर्क नहीं पड़ता।
लेकिन भाई, ये सेक्युलरिज्म का झुनझुना सिर्फ और सिर्फ उस गैर-मुस्लिम औरत के हाथ में थमाया जाता है ताकि समाज को बेवकूफ बनाया जा सके।
जब बात बच्चों की आती है, तो इनका असली और पक्का मजहबी चेहरा बेनकाब हो जाता है।
ज़रा आमिर खान के बच्चों के नाम उठाकर देख लीजिए। रीना दत्ता जो की एक हिंदू थीं, उनके पेट से पैदा हुए बच्चों के नाम क्या रखे गए? जुनैद और आयरा!
इसके बाद किरण राव जो एक और हिंदू औरत थीं, उनके बच्चे का नाम क्या रखा गया? आज़ाद राव खान!
और आमिर खान तो बस इस सिंडिकेट का एक मोहरा है, असली ज़हर तो इन खानों के महलों में पल रहा है।
आपको पता ही है सैफ अली खान ने करीना कपूर को अपनी दूसरी बेगम बनाया। और फिर बेटे का नाम क्या रखा? तैमूर अली खान!
‘तैमूर’ वो क्रूर जिहादी इस्लामी लुटेरा था जिसने 1398 में एक ही दिन में एक लाख से ज्यादा बेगुनाह हिंदुओं को काट डाला था।
और आज के ये बॉलीवुडिया ‘खान’ गैंग अपनी हिंदू पत्नी की कोख से पैदा हुए बच्चे का नाम उसी कातिल तैमूर के नाम पर रखते हैं!
अब मेरा पूरे सेक्युलर इकोसिस्टम से एक सीधा सवाल है। क्या इन हिंदू औरतों को इतनी भी आज़ादी नहीं थी की वो अपने खून से पैदा हुए बच्चों को अपने सनातन धर्म का कोई एक नाम दे पातीं?
क्या जुनैद का नाम ‘जय’ या आज़ाद का नाम ‘आदित्य’ नहीं हो सकता था? नहीं हो सकता था! क्योंकि इस ‘निकाह जिहाद’ का असली और खौफनाक मकसद ही यही है।
इन गैर-मुस्लिम औरतों का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ बच्चे पैदा करने की एक मशीन के तौर पर किया जाता है।
हिंदू औरत की कोख का इस्तेमाल करके अपनी इस्लामी डेमोग्राफी (आबादी) बढ़ाना और इस्लाम का झंडा ढोने वाले बच्चे पैदा करना- यही इनका इकलौता एजेंडा है।
शादी के कार्ड पर भले ही दो धर्मों के नाम लिखे हों, लेकिन उस घर के अंदर संस्कार, तौर-तरीके और बच्चों का भविष्य सिर्फ और सिर्फ शरिया और मदरसे की सोच के हिसाब से तय होता है।
ये कैसा सेक्युलरिज्म है भाई जहाँ एक हिंदू माँ अपने ही बच्चे को गर्व से मंदिर नहीं ले जा सकती या उसे अपनी पुश्तैनी संस्कृति नहीं सिखा सकती?
ये सेक्युलरिज्म नहीं, बल्कि गैर-मुस्लिम औरतों की कोख पर किया गया एक मीठा और ज़हरीला कब्ज़ा है।
बॉलीवुड का ये खौफनाक लव जिहाद सिंडिकेट, जो पर्दे के पीछे से चला रहा अपनी जेहादी दुकान
बात सिर्फ एक आमिर खान की नहीं है। अगर आप पूरे बॉलीवुड का इतिहास और वर्तमान खंगाल कर देखेंगे, तो आपको एक बहुत ही गंदा और खौफनाक पैटर्न नज़र आएगा।
ये पूरी की पूरी फिल्म इंडस्ट्री एक ‘लव जिहाद सिंडिकेट’ बन चुकी है। ज़रा इन तथाकथित ‘खान सुपरस्टार्स’ की लिस्ट देखिए।
शाहरुख खान की पत्नी गौरी (हिंदू), सैफ अली खान की पहली पत्नी अमृता सिंह (हिंदू) और दूसरी पत्नी करीना कपूर (हिंदू), सोहेल खान की पत्नी सीमा सचदेव (हिंदू), अरबाज खान की पहली पत्नी मलाइका अरोड़ा (हिंदू)।
क्या ये सब सिर्फ एक संयोग है? बिल्कुल नहीं! ये ‘वन-वे ट्रैफिक’ है। क्या आपने कभी देखा है की बॉलीवुड के किसी बड़े हिंदू सुपरस्टार ने किसी मुस्लिम एक्ट्रेस से शादी की हो, और उस मुस्लिम एक्ट्रेस ने अपना नाम बदलकर कोई पक्का हिंदू नाम रख लिया हो?
ऐसा कभी नहीं होता। लेकिन हमारी हिंदू बेटियों को इन फिल्मों के ज़रिए बड़ी चालाकी से ‘ब्रेनवॉश’ किया जाता है।
पर्दे पर ये खान हीरो बनकर आते हैं, बड़े-बड़े रोमांटिक डायलॉग बोलते हैं, लड़कियों की इज़्ज़त करने का झूठा नाटक करते हैं।
हमारी युवा पीढ़ी और नासमझ बच्चियों के दिमाग में ये ज़हर भर दिया जाता है की इन ‘खान’ लड़कों से शादी करना बहुत ही मॉडर्न, कूल और प्रगतिशील बात है।
और असल ज़िंदगी में इसी नकली चकाचौंध का इस्तेमाल हमारी सनातन और गैर-मुस्लिम बच्चियों का धर्म भ्रष्ट करने के लिए होता है।
बॉलीवुड की ये जेहादी दुकान इसी फॉर्मूले पर चल रही है- हिंदुओं का पैसा लूटो, बॉक्स ऑफिस पर करोड़पति बनो, और उसी पैसे की ताकत से हिंदू समाज की बेटियों को अपने हरम का हिस्सा बना लो।
असहिष्णुता गैंग के इस सरगना का असली चेहरा पहचानो और बॉलीवुड के इस मीठे ज़हर से अपनी बेटियों को बचाओ
अब वक्त आ गया है की हिंदू समाज अपनी उस गहरी नींद से जागे जो बॉलीवुड के इस मीठे ज़हर ने उसे सुला रखी है।
आमिर खान जैसे लोग, जो इस ‘असहिष्णुता गैंग’ के सरगना हैं, वो पर्दे के जोकर से ज्यादा और कुछ नहीं हैं।
जिस देश का पानी पीकर, जिस बहुसंख्यक हिंदू समाज के पैसों पर ये पलते हैं, उसी समाज की संस्कृति और डेमोग्राफी को तबाह करने का गंदा खेल खेल रहे हैं।
जो इंसान खुले मंच से कह सकता है की उसे भारत में डर लगता है, उसे भारत के भोले-भाले दर्शकों की जेब से एक पैसा भी कमाने का कोई हक नहीं है।
ऐसे एक्टरों का, इनकी फिल्मों का और उन सभी ब्रांड्स का पूर्ण रूप से बहिष्कार होना चाहिए जिनका विज्ञापन ये टीवी पर आकर करते हैं।
जब इनकी फिल्मों के शोज़ खाली जाएंगे और बॉक्स ऑफिस पर इनकी औकात कौड़ियों के भाव हो जाएगी, तब इनका सारा ‘डर’ और सेक्युलरिज्म का बुखार अपने आप उतर जाएगा।
आखिर में, इस देश के हर सनातन और गैर-मुस्लिम समाज को मेरी एक साफ और सख्त चेतावनी है। इस 61 साल के बूढ़े एक्टर की तीसरी शादी (ईसाई महिला गौरी स्प्रैट से) को कोई गॉसिप या बॉलीवुड की न्यूज़ मत समझिए।
ये एक ‘निकाह जिहाद’ का जीता-जागता मॉडल है जो आपके सामने बेशर्मी से परोसा जा रहा है। अपनी बेटियों को, अपनी बहनों को इस बॉलीवुडिया चकाचौंध के भ्रम से बाहर निकालिए।
इन जेहादियों को उनकी असली जगह दिखाना ही अब हमारा इकलौता धर्म होना चाहिए!
जय श्री राम!
