एक तरफ तो गांधी परिवार के चश्म-ओ-चिराग चुनाव आते ही जनेऊ पहनकर और माथे पर चंदन पोतकर मंदिरों में घूमने का ऐसा नौटंकी भरा ड्रामा करते हैं, जैसे दुनिया के सबसे बड़े शिवभक्त यही हों।
लेकिन जब बात इनकी असलियत की आती है, तो इनका वो भयानक और हिंदू-विरोधी चेहरा सामने आ जाता है जिसे देखकर दिमाग भन्ना जाता है।
जो हाथ चुनाव के वक्त हिंदुओं के सामने वोट मांगने के लिए जुड़ते हैं, असल में वही हाथ हमारे पवित्र मंदिरों का खजाना लूटने वाले डकैतों को वीआईपी (VIP) पनाह भी देते हैं।
ज़रा सोचिए, भगवान अयप्पा का पवित्र सबरीमाला मंदिर हम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का एक बहुत बड़ा और पवित्र केंद्र है। हमारे लिए वो हमारे सनातन धर्म की सांस है।
लेकिन इस देश के सेक्युलर सिस्टम और इन दोगले राजनेताओं ने हमारे इस पवित्र मंदिर को क्या समझ रखा है? इन्होंने इसे अपना ‘पॉलिटिकल एटीएम’ बना दिया है।
जब मन किया, दानपात्र में हाथ डाला और जब मन किया, मंदिर का सोना गायब कर दिया। लेकिन इस बार जो हुआ है, उसने बेशर्मी और गद्दारी की सारी हदें पार कर दी हैं।
सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह से करोड़ों का सोना चुराने वाला मुख्य आरोपी, जिसे पुलिस और एजेंसियां ढूंढ रही थीं, वो कहीं और नहीं बल्कि दिल्ली के सबसे महफूज़ और वीआईपी इलाके- 10 जनपथ- यानी सोनिया गांधी के घर में बैठकर चाय पी रहा था!
ये कोई छोटा-मोटा इत्तेफाक नहीं है। ये उस बहुत बड़े और सुनियोजित ‘टेंपल लूट सिंडिकेट’ का वो सच है, जो साबित करता है की सनातन की संपत्ति लूटने वालों के असली आका दिल्ली के दरबार में बैठे हैं।
आज हम इस पूरी डकैती का वो कच्चा चिट्ठा खोलेंगे जिसे कांग्रेसी इकोसिस्टम पूरी ताकत से दबाने में लगा हुआ है।
भगवान अयप्पा के गर्भगृह में डकैती और कैसे गायब कर दिया गया सबरीमाला मंदिर का साढ़े चार किलो पवित्र सोना
इस खौफनाक सेक्युलर डकैती की तह तक जाने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। ये कहानी है साल 2019 की, जब सबरीमाला मंदिर में ‘इलेक्ट्रोप्लेटिंग’ (सोने की परत चढ़ाने) और मरम्मत के नाम पर एक बहुत बड़ा खेल खेला गया।
आप और हम जैसे आम हिंदू जब मंदिर जाते हैं, तो अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा दानपात्र में डालते हैं, इसी उम्मीद से की वो पैसा भगवान के काम आएगा।
लेकिन हमें क्या पता था की अंदर बैठे सरकारी गिद्ध हमारे उसी चढ़ावे को नोचने की प्लानिंग कर चुके हैं।
मंदिर के सबसे पवित्र हिस्से, यानी गर्भगृह (Sreekovil) के दरवाजों और द्वारपाल की भव्य मूर्तियों पर सोने का काम होना था।
इसके लिए लगभग 4.5 किलो शुद्ध सोने का इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन काम के बहाने इस सोने को बाहर निकाला गया और यहीं से शुरू हुआ वो भयानक खेल, जिसने पूरे हिंदू समाज को हिला कर रख दिया।
जांच में सामने आया की इस पूरी लूट का मास्टरमाइंड उन्नीकृष्णन पोट्टी नाम का एक दलाल था। इसे आज केरल में ‘सबरीमाला का महाचोर’ या ‘लूट ब्रोकर’ कहा जा रहा है।
एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है की ये पवित्र सोना इलेक्ट्रोप्लेटिंग के नाम पर 39 दिनों तक पूरे दक्षिण भारत के ज्वैलर्स और दलालों के बीच घूमता रहा।
और जब ये वापस मंदिर में लाया गया, तो वो असली सोना नहीं, बल्कि सोना चढ़ाया हुआ तांबा (Copper) था! साढ़े चार किलो शुद्ध सोना हवा में गायब कर दिया गया।
अब आप ही बताइए, क्या ये किसी एक दलाल के बस की बात है? क्या देवासम बोर्ड (Devaswom Board) में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और बड़े राजनेताओं की मिलीभगत के बिना भगवान अयप्पा के गर्भगृह से एक तिनका भी हिलाया जा सकता है?
बिल्कुल नहीं! ये ऊपर से लेकर नीचे तक बिछाया गया वो जाल था, जिसमें हिंदुओं के खजाने को लूटकर अपनी तिजोरियां भरी जा रही थीं।
लेकिन इस पूरी डकैती का असली धमाका तो तब हुआ, जब जनवरी-फरवरी 2026 में इस लूट के तार सीधे सोनिया गांधी के घर से जुड़ते हुए नज़र आए।
’10 जनपथ’ में चोरों का शाही दरबार, जब ‘सोनिया गांधी’ के हाथ में धागा बांध रहा था सबरीमाला का ‘लुटेरा’
Sabarimala gold theft = betrayal of faith
Prime accused Unnikrishnan Potti at the centre of the alleged racket.
Now photos with Sonia Gandhi raise uncomfortable questions.
Coincidence? Or something more?
Devotees deserve truth. Not silence. pic.twitter.com/SNt4aWVkCO
— Rohit (@Iam_Rohit_G) January 24, 2026
अब तक जो लोग सोच रहे थे की ये सिर्फ मंदिर प्रशासन की चोरी है, उनकी आंखें तब फटी की फटी रह गईं जब 2026 की शुरुआत में सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर एक तस्वीर आग की तरह फैल गई।
ये तस्वीर कोई साधारण तस्वीर नहीं थी दोस्तों, ये कांग्रेस के उस हिंदू-विरोधी चेहरे का सबसे बड़ा पर्दाफाश था।
इस तस्वीर में सबरीमाला लूट का मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड उन्नीकृष्णन पोट्टी सीधे दिल्ली में सोनिया गांधी के 10 जनपथ वाले घर में शाही मेहमान की तरह खड़ा था।
ज़रा सोचिए! 10 जनपथ कोई पब्लिक पार्क नहीं है जहाँ कोई भी मुंह उठाकर घुस जाए। वहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता बिना टॉप लेवल की सिक्योरिटी और परमिशन के।
फिर करोड़ों के सोने की चोरी का एक आरोपी इतनी आसानी से सोनिया गांधी के ड्राइंग रूम तक कैसे पहुँच गया?
तस्वीर में साफ दिख रहा है की ये चोर उन्नीकृष्णन पोट्टी बड़े ही सम्मान के साथ सोनिया गांधी की कलाई पर कोई धागा या कलावा बांध रहा है।
वही सोनिया गांधी, जिन्हें आज तक राम मंदिर जाने का वक्त नहीं मिला, जिन्हें हिंदुओं के त्योहारों से चिढ़ मचती है, वो सबरीमाला के एक लुटेरे से अपने घर पर प्राइवेट मीटिंग कर रही थीं!
इस तस्वीर में दो और चेहरे हैं, जिन्होंने पूरे कांग्रेसी इकोसिस्टम को बेनकाब कर दिया। ये दोनों केरल कांग्रेस के बड़े सांसद हैं- अदूर प्रकाश (Adoor Prakash) और एंटो एंटनी।
मतलब साफ है की इन दोनों कांग्रेसी नेताओं ने एक ‘टेंपल लुटेरे’ की दलाली की और उसकी गांधी परिवार से ‘वीआईपी’ (VIP) मुलाकात फिक्स करवाई। आखिर इस मुलाकात के पीछे डील क्या थी?
एसआईटी की जांच में एक ‘गुडी बैग’ (Goody Bag – तोहफों का बैग) का भी ज़िक्र आ रहा है, जो ये चोर अपने साथ लेकर गया था।
क्या उस बैग में भगवान अयप्पा के खजाने का वो हिस्सा था, जिसे ‘कट’ या कमीशन के तौर पर आकाओं तक पहुँचाना था?
ये वो सवाल हैं जिनसे आज पूरी कांग्रेस पार्टी पसीने-पसीने हो रही है। जब सनातन धर्म को गाली देनी होती है, तो ये कांग्रेसी सबसे आगे खड़े होते हैं, लेकिन जब सनातन का खजाना लूटना होता है, तो इनके दरबार चोरों और दलालों के लिए चौबीसों घंटे खुले रहते हैं।
और ये कोई नई बात नहीं है। गांधी परिवार का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, सब समझ आ जाएगा।
ज़रा याद कीजिए इसी सोनिया गांधी की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बकायदा एक हलफनामा देकर क्या कहा था?
इन्होंने लिख कर दिया था की भगवान राम तो ‘काल्पनिक’ हैं, रामायण का तो कोई ऐतिहासिक सबूत ही नहीं है!
क्या कांग्रेस का फंड भरने के लिए लूटा गया था भगवान का खजाना, सोनिया गांधी की बोलती बंद करने वाले तीखे सवाल
ज़रा दिमाग लगाइए भाई, ये दाल में काला नहीं है, बल्कि यहाँ तो पूरी की पूरी दाल ही काली है!
सोनिया गांधी, जिन्हें आज तक राम मंदिर के नाम से ही मिर्ची लगती रही, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी किसी हिंदू मंदिर में जाकर पूजा-पाठ नहीं किया, वो अचानक से सबरीमाला के एक लुटेरे से अपने घर पर प्राइवेट मीटिंग क्यों कर रही थीं?
क्या ये कोई सामान्य शिष्टाचार भेंट थी? बिल्कुल नहीं! जब कोई चोर 10 जनपथ में वीआईपी एंट्री लेता है, तो इसका सीधा सा मतलब है कि उसके पीछे कोई बहुत बड़ा ‘पॉलिटिकल गेम’ चल रहा है।
बीजेपी के कद्दावर नेताओं और केरल बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने जब प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सीधे सोनिया गांधी की आंखों में आंखें डालकर सवाल दागे, तो पूरी कांग्रेस पार्टी के मुंह पर ताला लग गया।
राजीव चंद्रशेखर ने डंके की चोट पर पूछा की आखिर सोनिया गांधी ने भगवान अयप्पा का सोना लूटने वाले एक दलाल से अपने घर पर मुलाकात क्यों की? वो तो भगवान अयप्पा की भक्त भी नहीं हैं, फिर इस मुलाकात का असली एजेंडा क्या था?
सच कहूं तो, शक की सुई सीधे पॉलिटिकल फंडिंग की तरफ घूम रही है। चुनाव लड़ने के लिए, रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए और अपना ये छद्म-सेक्युलर इकोसिस्टम चलाने के लिए कांग्रेस को अरबों रुपये का फंड चाहिए होता है।
क्या ये साढ़े चार किलो पवित्र सोना कांग्रेस के उसी चुनावी खजाने को भरने के लिए चुराया गया था? क्या केरल के वो दोनों कांग्रेसी सांसद- अदूर प्रकाश और एंटो एंटनी- इसी ‘कट’ या ‘कमीशन’ को लेकर दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे थे?
ये कोई चोरी नहीं है, ये बाकायदा एक ‘सेक्युलर डकैती’ है। जिस तरह से इस चोर को दिल्ली में पनाह दी गई, उसने साफ कर दिया है की कांग्रेस पार्टी अब हिंदुओं के खजाने पर गिद्ध की तरह नज़र गड़ाए बैठी है।
अगर इस पूरे सिंडिकेट का सच बाहर लाना है, तो इसकी सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) से ऐसी खौफनाक जांच होनी चाहिए की 10 जनपथ की दीवारों में छुपे हुए सारे राज बाहर आ जाएं।
इन कांग्रेसी सांसदों को पकड़कर उल्टा लटकाना चाहिए ताकि पता चले की भगवान का सोना आखिर किस-किस की तिजोरी में गया है।
राहुल गांधी का डर और कांग्रेसी खेमे में मची भगदड़, जब खुल गई गांधी परिवार की पोल
अब जब चोरी रंगे हाथों पकड़ी गई और सोनिया गांधी की वो तस्वीर पूरे देश के सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई, तो 10 जनपथ में हड़कंप मचना तो लाज़मी था।
न्यूज़ रिपोर्ट्स के हवाले से जो अंदर की खबरें छन-छन कर बाहर आईं, वो और भी ज्यादा मज़ेदार और कांग्रेस का दोगलापन दिखाने वाली हैं।
बताया जा रहा है की जब राहुल गांधी ने अपनी माँ की वो तस्वीर उस महाचोर उन्नीकृष्णन पोट्टी के साथ देखी, तो वो अपनी ही केरल राज्य यूनिट पर बुरी तरह भड़क गए।
राहुल गांधी की बौखलाहट देखने लायक थी! आखिर बौखलाते भी क्यों नहीं?
एक तरफ तो चुनाव आते ही राहुल गांधी कोर्ट के ऊपर जनेऊ पहनकर खुद को दत्तात्रेय गोत्र का ब्राह्मण बताने का ढोंग करते हैं, और दूसरी तरफ उनकी माँ मंदिरों को लूटने वालों को अपने घर में चाय पिला रही हैं।
ये दोगलापन जब देश के सामने नंगा हुआ, तो राहुल गांधी को समझ ही नहीं आ रहा था की अब हिंदुओं से वोट मांगने किस मुंह से जाएंगे।
और तो और, केरल विधानसभा का वो नज़ारा तो हर उस इंसान को देखना चाहिए जो कांग्रेस को थोड़ा बहुत भी शरीफ मानता है।
जब केरल विधानसभा में इस चोरी और सोनिया गांधी के कनेक्शन पर भयंकर हंगामा हुआ, तो कांग्रेसियों की बेशर्मी देखने लायक थी।
अपनी चोरी पकड़े जाने पर शर्मिंदा होने की बजाय, कांग्रेस के विधायक और नेता स्पीकर के सामने गिड़गिड़ाने लगे। उन्होंने मांग की कि विधानसभा की कार्यवाही के रिकॉर्ड से ‘सोनिया गांधी’ का नाम ही हटा दिया जाए!
अरे भाई, चोर की दाढ़ी में तिनका नहीं, यहाँ तो पूरा का पूरा पेड़ छुपा है। अगर तुम्हारी नेता पाक-साफ थीं, तो फिर नाम हटाने का ये डर कैसा?
ये डर इसलिए था क्योंकि ये कांग्रेसी अच्छे से जानते हैं की जिस दिन देश के हिंदुओं को ये समझ में आ गया की उनके मंदिरों का चढ़ावा सीधे गांधी परिवार के दरबार में पहुंच रहा है, उस दिन ये हिंदू समाज कांग्रेस को जड़ से उखाड़ कर अरब सागर में फेंक देगा। इनका वो हिंदू प्रेम का नाटक अब तार-तार हो चुका है।
सबरीमाला का ये खौफनाक ‘गोल्ड स्कैम’ पूरे हिंदू समाज के मुंह पर एक बहुत बड़ा तमाचा है। आखिर कब तक हम हिंदू अपनी गाढ़ी कमाई इन लुटेरों के हवाले करते रहेंगे?
आज साढ़े चार किलो सोना चुराया है, अगर आज हम नहीं जागे और हमने अपनी आवाज़ नहीं उठाई, तो कल को ये हमारे भगवान की मूर्तियां भी बेच खाएंगे और हमें पता तक नहीं चलेगा।
खैर, सबरीमाला के लुटेरों को पनाह देकर कांग्रेस और गांधी परिवार ने अपने ताबूत में खुद ही आखिरी कील ठोक ली है।
इस हिंदू-विरोधी ‘इकोसिस्टम’ को अब जड़ से मिटाने का वक्त आ गया है। भगवान अयप्पा का एक-एक ग्राम सोना इन गद्दारों के हलक में हाथ डालकर वापस निकाला जाएगा!
हर हर महादेव!
