Author name: संदीप (शिवा) | संस्थापक – लोगसभा

CAA और किसान आंदोलन में नरमी, UGC पर घर में कैद — BJP को जनरल वोटर से क्या दिक्कत है?

ज़रा सोचकर देखिए: यूपी के एक छोटे से शहर का रहने वाला 28-30 साल का एक नौजवान। एक स्कूल टीचर का बेटा। खूब जी-तोड़ मेहनत की, कोई प्रतियोगी परीक्षा निकाला, और सपना था की किसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनेगा। जबसे वोट डालने लायक हुआ, तब से हर चुनाव में पूरे यकीन के साथ उसने बीजेपी […]

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ओंकारेश्वर, उखीमठ: केदारनाथ की दिव्य उपस्थिति का शीतकालीन धाम

ओंकारेश्वर, उखीमठ: केदारनाथ की दिव्य उपस्थिति का शीतकालीन धाम

गढ़वाल हिमालय की ऊँची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच एक ऐसा पवित्र मंदिर स्थित है, जिसका संबंध भगवान शिव की निरंतर उपस्थिति से जुड़ा हुआ है। यहाँ का वातावरण, शांत पहाड़ और ठंडी हवाएँ मानो “महादेव” का स्मरण कराती हैं। जब कठोर हिमालयी शीतकाल में केदारनाथ धाम भारी बर्फबारी से ढक जाता है और वहाँ तक

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हिंदू युवा वाहिनी: योगी महाराज की वो अदृश्य सेना

गोरखपुर स्टेशन से बस कुछ ही कदम की दूरी पर महाराणा प्रताप मार्ग है। वहीं एक साधारण सी दो मंजिला इमारत है। बंद दरवाज़े के ठीक ऊपर योगी आदित्यनाथ का एक धुंधला सा पोस्टर आज भी टंगा है। आस-पास के दुकानदार बताते हैं की पहले रोज़ सुबह कोई न कोई आकर इस दफ्तर को खोलता

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ओंकारेश्वर: नर्मदा के मध्य गूँजता सनातन ‘ॐ’

कुछ मंदिर राजाओं द्वारा बनाए जाते हैं और कुछ श्रद्धा से आकार लेते हैं। लेकिन दुनिया में बहुत कम ऐसे पवित्र स्थान हैं जिन्हें स्वयं प्रकृति ने रचा हो। नर्मदा नदी की धाराओं के बीच स्थित ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर ऐसा ही एक अद्भुत स्थान है। यह मंदिर एक द्वीप पर स्थित है, जिसके बारे में

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पंडित केशव बलिराम हेडगेवार की विचारधारा आज की RSS से कितनी विपरीत? क्या संघ अपने ही संस्थापक से दूर हो चुका है?

नागपुर में 1 अप्रैल 1889 को एक बच्चे का जन्म हुआ। परिवार साधारण था- देशस्थ ब्राह्मण परंपरा से जुड़ा, जिसकी जड़ें आज के तेलंगाना के कंदाकुर्थी गांव तक जाती थीं। उस बच्चे का नाम केशव बलिराम हेडगेवार था। तब किसी ने शायद सोचा भी नहीं होगा की यही लड़का आगे चलकर भारत के सबसे प्रभावशाली

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BJP की केंद्र सरकार होश में आओ और दलितों को शांति दूतों से बचाओ। Justice for Tarun Hindu – एनकाउंटर से कम कुछ नहीं।

होली सिर्फ़ एक त्योहार नहीं है। देश भर के करोड़ों दलितों के लिए ये साल के उन गिने-चुने पलों में से एक है जब समाज की ऊंच-नीच मिट जाती है। जब रंग जाति के भेदभाव को मिटा देता है, और समाज के सबसे निचले तबगे पर पैदा हुआ इंसान भी सड़क पर सीना तान कर

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जयचंद — जिसे इतिहास ने गद्दार का पर्याय बना दिया

जयचंद — जिसे इतिहास ने गद्दार का पर्याय बना दिया

भारतीय इतिहास में बहुत कम व्यक्तित्व ऐसे हैं जिनकी प्रतिष्ठा को उतनी गहराई से धूमिल किया गया हो जितनी कन्नौज के राजा जयचंद्र की। पीढ़ियों तक यह बताया गया कि वही वह शासक था जिसने पृथ्वीराज चौहान के साथ विश्वासघात किया और उत्तर भारत के द्वार विदेशी आक्रमणकारियों के लिए खोल दिए। लेकिन जब किंवदंतियों

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पृथ्वीराज चौहान: आखिरी हिंदू सम्राट की अधूरी गाथा

पृथ्वीराज चौहान: आखिरी हिंदू सम्राट की अधूरी गाथा

क्या पृथ्वीराज चौहान एक पराजित नायक थे या फिर इतिहास और लोककथाओं में जीवित एक महान शासक? सदियों से उनका नाम लोकगीतों, पाठ्यपुस्तकों और राजनीतिक भाषणों में उत्तर भारत के अंतिम महान रक्षक के रूप में गूंजता रहा है, लेकिन इन गौरवपूर्ण कथाओं के पीछे एक और गहरी कहानी भी छिपी है—महत्त्वाकांक्षा, वीरता, प्रतिद्वंद्विता और

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भारत कोई रासायनिक कूड़ाघर नहीं है: ज़हरीली विरासत को ठुकराना होगा

जब कोई देश तेज़ औद्योगिक विकास और पर्यावरण की जिम्मेदारी के बीच खड़ा होता है, तब उसका हर निर्णय केवल लाभ या बैलेंस शीट तक सीमित नहीं रहता। उसका असर भविष्य तक जाता है। आज जब विकसित देशों में “फॉरएवर केमिकल्स” पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, ऐसे समय में विवादित औद्योगिक तकनीकों का चुपचाप

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जहाँ भक्ति स्वयं बन जाती है प्रमाण — वैद्यनाथ धाम

भारत की पवित्र भूमि पर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंग आस्था की अनंत ज्योति के रूप में प्रतिष्ठित हैं। इनमें से एक नाम विशेष श्रद्धा और लंबे समय से चल रही चर्चा के कारण अलग पहचान रखता है—वैद्यनाथ। क्या इसका पवित्र प्रकाश पहाड़ों में है, मैदानों में है या पूर्वी भारत की धरती में? हर

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