बांग्लादेशी जमात ने दीदी को दी भारत से बगावत की सलाह, क्या बंगाल की सत्ता के लिए देश के टुकड़े करने को तैयार ममता का जिहादी तंत्र?

हाल ही में बांग्लादेश के एक सिरफिरे और कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन, जमात-ए-इस्लामी के नेता मोहम्मद नुरुल हुदा का एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को सरेआम चौराहे पर ललकारा है। इस बंदे ने खुल्लम-खुल्ला कैमरे पर बैठकर जो ज़हर उगला है, वो महज़ कोई भड़काऊ बयान नहीं है। ये सीधे-सीधे भारत माता की छाती पर खंजर घोंपने की एक खुली साज़िश है, एक ‘एक्ट ऑफ वॉर’ है। 

नुरुल हुदा ने सीधा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को समर्थन देते हुए कहा है की आपको अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने की कोई ज़रूरत नहीं है- “हम आपके साथ हैं”। ज़रा सोचिए, एक विदेशी मुल्क का जिहादी नेता हमारे देश के एक राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री को अपना समर्थन दे रहा है।

लेकिन बात सिर्फ समर्थन देने तक सीमित नहीं रही। इस आस्तीन के सांप ने अगली ही सांस में ममता बनर्जी को उकसाते हुए कहा की “आपको दिल्ली के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर देना चाहिए और बंगाल को भारत से अलग करके एक स्वतंत्र मुल्क बना लेना चाहिए।”

अरे भाई, ये भारत कोई धर्मशाला या मुगलों की जागीर है क्या, की कोई भी सड़क छाप विदेशी मुल्ला उठकर आएगा और हमारे देश के टुकड़े करने की सलाह दे जाएगा? एक विदेशी जिहादी हमारी राज्य सरकार को केंद्र के खिलाफ सशस्त्र बगावत करने के लिए भड़का रहा है, और हमारे देश का लिबरल इकोसिस्टम चैन की नींद सो रहा है। 

ये कोई ऐसी-वैसी छिटपुट घटना नहीं है जिसे हम न्यूज़ चैनल की डिबेट देखकर भूल जाएं। ये उस गहरी, ज़हरीली और खौफनाक जेहादी मानसिकता का सुबूत है जो दशकों से हमारे पड़ोस में गज़वा-ए-हिंद के नाम पर पल रही है। ये जो ग्रेटर बांग्लादेश का सपना ये जिहादी पाले बैठे हैं, ये उसी का एक जीता-जागता ट्रेलर है। 

इस घटना ने एक बार फिर हमारी आंखें खोल दी हैं की भारत की अखंडता और हमारे सनातन धर्म को आज सबसे बड़ा ख़तरा बॉर्डर पार खड़े दुश्मनों से उतना नहीं है, जितना उन आंतरिक गद्दारों और कुर्सी के भूखे सियासतदानों से है जो इन जिहादी कीड़ों को अपने वोट बैंक के लिए घर में पाल रहे हैं। 

नुरुल हुदा जैसों की इतनी जुर्रत इसलिए हो रही है क्योंकि उन्हें लगता है की भारत के भीतर बैठे ममता जैसे नेता उनके इस देश-विरोधी एजेंडे में उनके पक्के साझेदार हैं। आज इसी गंदे नेक्सस, जिहादी चरमपंथ, अवैध घुसपैठ-वुसपैठ और बंगाल की पूर्व TMC सरकार की उस घिनौनी तुष्टीकरण की राजनीति का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलेंगे, जिसने बंगाल को बारूद के ढेर पर लाकर बिठा दिया है।

जिहादी नुरुल हुदा की गीदड़धमकी और लाखों हिन्दुओं का खून पीने वाली जमात का वहशियाना इतिहास

ज़रा नुरुल हुदा के उस ज़हरीले बयान का चीरहरण करते हैं। इस जिहादी ने ममता बनर्जी को सिर्फ दिल्ली के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए ही नहीं उकसाया, बल्कि बहुत ही शातिर तरीके से अपनी बात में एक लाइन और जोड़ दी- “बांग्लादेश के 17 करोड़ लोग आपके साथ हैं।” 

ये सीधा-सीधा सैन्य और जनसांख्यिकीय आक्रमण की खुली धमकी है। एक विदेशी राष्ट्र का कट्टरपंथी नेता हमारी ही ज़मीन पर हमारे ही खिलाफ 17 करोड़ की फौज का डर दिखा रहा है। जो लोग इसे हल्के में ले रहे हैं, वो शायद इतिहास भूल चुके हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।

याद कीजिए की ये जमात-ए-इस्लामी आख़िर बला क्या है। इसका इतिहास कितना खूनी और वहशियाना रहा है। जमात वही कट्टरपंथी तंज़ीम है जिसने 1971 के मुक्ति संग्राम के वक़्त पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं। इनके पाले हुए गुंडों ने ‘अल-बद्र’ और ‘अल-शम्स’ जैसे डेथ स्क्वॉड बनाए थे।

ये वही राक्षस हैं जिन्होंने उस दौर में लाखों निर्दोष बंगाली हिंदुओं को गाजर-मूली की तरह काटा था। हमारी हिंदू माताओं-बहनों के साथ जो अमानवीय हैवानियत इन्होंने की थी, उसके क़िस्से सुनकर आज भी रूह कांप उठती है। 

हिंदुओं से नफ़रत और भारत से दुश्मनी तो जैसे इनके डीएनए में कूट-कूट कर भरी है। इनके हाथों से आज भी हमारे पूर्वजों के खून की बदबू आती है। और आज वही हिंदू-विरोधी जमात, वही कातिलों का गिरोह, भारत के एक अभिन्न हिस्से को “स्वतंत्र राज्य” बनाने का ख्वाब देख रहा है।

सबसे बड़ा सवाल तो ये है की इस विदेशी जिहादी की इतनी जुर्रत कैसे हुई की वो हमारे भारत को यूं खुलेआम ललकार सके? इसे ये ओवर-कॉन्फिडेंस आख़िर आ कहां से रहा है? सीधी सी बात है, उसे ये हौसला इसलिए मिला है क्योंकि वो अच्छे से जानता है की बंगाल में आज जो TMC बैठी है, उसका ट्रैक रिकॉर्ड इन घुसपैठियों और इस्लामी कट्टरपंथियों के मामले में कितना शर्मनाक रहा है। 

नुरुल हुदा जैसों को ये मुग़ालता हो गया है की बंगाल की ज़मीन अब जिहाद के लिए इतनी पक चुकी है की वो वहां से बैठकर भारत के टुकड़े करने का ब्लू-प्रिंट तैयार कर सकते हैं।

भारत की गर्दन काटने का जिहादी ख्वाब और ग्रेटर बांग्लादेश के नाम पर हिन्दुओं को मिटाने का खौफनाक एजेंडा

वैसे देखा जाए तो नुरुल हुदा का ये भड़काऊ बयान कोई पहला या इकलौता मामला नहीं है। अगर आप थोड़ा पीछे जाएं और डॉट्स कनेक्ट करें तो पूरी डरावनी पिक्चर सामने आ जाएगी। इसे पिछले साल दिसंबर 2025 में बांग्लादेश के नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता हसनात अब्दुल्ला के उस बयान से जोड़कर देखिए। 

हसनात अब्दुल्ला कोई ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा नहीं है, वो आज की तारीख़ में बांग्लादेश में भारत-विरोधी नफरत की फैक्ट्री का सबसे बड़ा पोस्टर बॉय बन चुका है। ढाका की एक रैली में इस आदमी ने खुलेआम हमारी संप्रभुता को चुनौती देते हुए कहा था की वो भारत विरोधी और अलगाववादी ताकतों को अपने मुल्क में पनाह देंगे। 

और सबसे ख़तरनाक बात जो उसने उगली, वो ये थी की बांग्लादेश भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, यानी हमारी ‘सेवन सिस्टर्स’ को बाकी हिंदुस्तान से पूरी तरह से काट देगा।

ये ‘सेवन सिस्टर्स’ को काटने वाली बात सीधा-सीधा हमारे सिलीगुड़ी कॉरिडोर की तरफ इशारा करती है। जिसे हम बोलचाल में ‘चिकन नेक’ कहते हैं। ये बंगाल का वो हिस्सा है जो महज़ 22 किलोमीटर चौड़ा है।

ज़रा सोचिए, सिर्फ 22 किलोमीटर! यही वो संकरा सा रास्ता है जो पूरे नॉर्थईस्ट (असम, मेघालय, त्रिपुरा, अरुणाचल वग़ैरह) को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है। इन जिहादी भेड़ियों की नज़र हमेशा से इसी चिकन नेक पर गड़ी हुई है। 

ये अच्छे से जानते हैं की अगर इस रास्ते को किसी तरह ब्लॉक कर दिया जाए, वहां दंगे-फसाद करवा दिए जाएं या जिहादियों की भीड़ खड़ी कर दी जाए, तो नॉर्थईस्ट का भारत से सीधा कॉन्टैक्ट टूट जाएगा। जैसे शरीर से कोई अहम नस काट दी जाए, बिल्कुल वैसी ही खौफनाक प्लानिंग है इनकी।

ये हसनात अब्दुल्ला और नुरुल हुदा जो भी ज़हर उगल रहे हैं, वो दरअसल ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ की उसी पुरानी और खतरनाक साज़िश का हिस्सा है जिसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेशी चरमपंथी पिछले कई दशकों से हवा दे रहे हैं। 

इनकी प्लानिंग बहुत क्लीयर है: बॉर्डर पार करवा के अपने जिहादी कीड़ों को भारत में घुसाओ, असम और पश्चिम बंगाल के डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) को पूरी तरह से बदल डालो, वहां के लोकल हिंदुओं को डरा-धमका कर भगा दो या माइनॉरिटी बना दो, और फिर जब सही वक़्त आए, तो वहां दंगे करवा कर या हथियारों के दम पर उस हिस्से को भारत से काटकर एक बड़ा इस्लामी राष्ट्र बना लो। 

हसनात का सेवन सिस्टर्स को काटने वाला बयान और हुदा का बंगाल को अलग करने का उकसावा, दोनों इसी एक ही राष्ट्र-विरोधी साज़िश के दो पहलू हैं।

बॉर्डर पर हावी होते जिहादी दरिंदे और हिन्दुओं की सुरक्षा बेचकर देश से खिलवाड़

अब ज़रा ग्राउंड रियलिटी की बात करते हैं की बॉर्डर पर असल में चल क्या रहा है। फ़रवरी 2026 में बांग्लादेश में जो चुनाव हुए, उसके नतीजों ने भारत के लिए एक ऐसा परमानेंट सिरदर्द पैदा कर दिया है जिसका इलाज अगर अभी नहीं किया गया तो नासूर बन जाएगा। 

शेख हसीना की सरकार तो चली गई, लेकिन उसके बाद जो भारत-विरोधी और जिहादी ताकतें वहां पावर में आई हैं, उसने हालात बद से बदतर कर दिए हैं। 

चुनावी आंकड़ों पर नज़र डालें तो जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी कट्टरपंथी गुटों ने उन जिलों में एकतरफ़ा जीत दर्ज की है जो सीधे भारत के बॉर्डर से सटते हैं। सातखिरा, खुलना, रंगपुर, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट… ये सब इलाके अब पूरी तरह से इन कट्टरपंथियों के कंट्रोल में आ चुके हैं।

और ये कोई नॉर्मल बात नहीं है। ये सारे बांग्लादेशी ज़िले सीधे हमारे पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और नदिया जैसे बेहद सेंसिटिव ज़िलों की छाती पर मूंग दलते हैं।

बॉर्डर के उस पार जिहादियों के सत्ता में आने का सीधा मतलब ये है की अब भारत में हथियारों की स्मगलिंग, जाली नोटों का धंधा, गौ-तस्करी और जिहादी लिटरेचर का आना कई गुना बढ़ जाएगा।

जैसे ही जमात वहां पावर में आई, बॉर्डर पर रातों-रात हलचल तेज़ हो गई। इनका बस एक ही एजेंडा है- बॉर्डर पार से अपने कट्टरपंथी लोगों को धड़ाधड़ भारत में पुश करना। ये लोग बंगाल और असम में अपने हमदर्दों और स्लीपर सेल की एक पूरी फौज खड़ी करना चाहते हैं। 

ये वही स्लीपर सेल हैं जो नुरुल हुदा या हसनात अब्दुल्ला जैसे किसी आका के एक इशारे पर भारत के भीतर ही दिल्ली के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर देंगे। जब बॉर्डर के इस पार और उस पार, दोनों तरफ एक ही कट्टरपंथी सोच वाले लोग भर जाएंगे, तो फिर ये जो तारबंदी है न, ये सिर्फ लोहे का कबाड़ बनकर रह जाएगी। 

ये स्थिति हमारी नेशनल सिक्योरिटी के लिए किसी टिकिंग टाइम-बम से कम नहीं है, जो किसी भी दिन फट सकता है। और इसका सबसे पहला और भयानक असर बंगाल के इन्हीं बॉर्डर वाले इलाकों पर पड़ेगा जहां हिंदू पहले ही खौफ के साए में जी रहा है।

टीएमसी का जिहादी देशद्रोही तुष्टीकरण और अवैध घुसपैठियों के लिए बंगाल के हिन्दुओं की बलि

यहां आकर एक बहुत लाज़िमी सा सवाल हर देशभक्त के मन में आता है की आख़िर इन बाहरी जिहादियों की इतनी जुर्रत कैसे हुई की वो हमारे घर में घुसकर हमें ही आंख दिखाएं? इन्हें भारत की धरती पर इतना पक्का बेस कैसे मिल गया? तो भैया, इसका सीधा और कड़वा जवाब छुपा है ममता की TMC सरकार और उनकी उस घिनौनी तुष्टीकरण की राजनीति में, जिसने सत्ता के लालच में पूरे देश को दांव पर लगा दिया था। 

आज की तारीख़ में अगर आप सच सुनना चाहें, तो कड़वा सच यही है की पश्चिम बंगाल अवैध बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं और कट्टरपंथी जिहादियों के लिए एक महफूज़ ‘स्वर्ग’ बन चुका है। नुरुल हुदा जैसों को ये दुस्साहस इसलिए मिल रहा है क्योंकि उन्हें अच्छे से मालूम है की टीएमसी सरकार ने उनके अवैध बांग्लादेशी भाइयों को बंगाल में बसाने का एक पूरा का पूरा इंडस्ट्रियल सेटअप लगा रखा है।

टीएमसी के लोकल नेता, बिके हुए पुलिसवाले और सिंडिकेट के गुंडों ने मिलकर एक ऐसा गंदा सिस्टम बना लिया है, जो खुलेआम चंद रुपयों और वोटों के लिए देश की सुरक्षा को नीलाम कर देता है। 

जब कोई अवैध बांग्लादेशी मुसलमान रात के अंधेरे में दलालों को पैसा खिलाकर बॉर्डर क्रॉस करता है, तो TMC पार्टी उसे देश का दुश्मन या घुसपैठिया नहीं मानती। उन्हें तो उस घुसपैठिए में अपना एक ‘पक्का वोटर’ नज़र आता है। लोकल नेताओं की शह पर इन घुसपैठियों के कागज़-वागज़ रातों-रात ऐसे तैयार कर दिए जाते हैं जैसे कोई जादू हो रहा हो। और ये कोई छोटी-मोटी धांधली नहीं है। 

धड़ल्ले से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनते हैं, और उसके बेस पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड और सबसे ज़रूरी चीज़… वोटर आईडी कार्ड बनाकर उनके हाथ में थमा दिया जाता है।

सोच कर देखिए, ये सिर्फ करप्शन नहीं है, ये देशद्रोह है! ये गद्दारी है! महज़ कुछ हज़ार वोटों के लालच में आपने देश की सुरक्षा को दांव पर लगा दिया। घुसपैठियों को भारत का वैध नागरिक बनाकर टीएमसी ने एक ऐसा सॉलिड ‘वोट बैंक’ तैयार कर लिया है, जो हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और हमारी सनातन संस्कृति से जन्मजात नफ़रत करता है। 

इन लोगों की वफ़ादारी भारत माता के लिए तो छोड़िए, भारत के संविधान के लिए भी नहीं है। इनकी वफ़ादारी सिर्फ अपनी उसी जिहादी विचारधारा के लिए है जो ये बॉर्डर पार से अपने साथ लेकर आए हैं। 

फिलहाल ममता और उनकी पार्टी तो बंगाल में हार चुकी है, लेकिन उनके बसाये हुए बांग्लादेशी और रोहिंग्या आज भी बंगाल में खुले आम घूम रहे हैं, जिन्हे भाजपा को चुन चुन कर बाहर फेकना ही होगा।

जब नुरुल हुदा ममता बनर्जी से कहता है की “हम आपके साथ हैं”, तो वो यूं ही हवा में तीर नहीं मार रहा था। वो इसी गंदे नेक्सस की तरफ इशारा कर रहा था। विदेशी जिहादियों को अब ये पूरा कॉन्फिडेंस आ चुका है की TMC सरकार उनके डेमोग्राफी बदलने वाले एजेंडे में कोई रुकावट नहीं डालेगी, बल्कि उल्टा उनकी पूरी मदद करेगी। 

टीएमसी ने अपनी सियासत चमकाने के लिए नेशनल सिक्योरिटी के साथ जो ये भद्दा खिलवाड़ किया है, उसे इतिहास कभी माफ़ नहीं करेगा। इस तुष्टीकरण की गंदी राजनीति ने हमारे देश की सुरक्षा की नींव को अंदर ही अंदर दीमक की तरह खोखला कर दिया है।

डेमोग्राफी बदलकर बंगाल को इस्लामिक मुल्क बनाने की जिहादी साज़िश 

इस पूरे गंदे और राष्ट्र-विरोधी खेल का सबसे भयानक खमियाज़ा कौन भुगत रहा है? बंगाल का वो मूल निवासी हिंदू! आज का बंगाल एक बहुत ही सुनियोजित जनसांख्यिकीय आक्रमण झेल रहा है। अगर आप ग्राउंड पर जाकर हालात देखें या सिर्फ कुछ सरकारी आंकड़े ही उठा लें, तो सच्चाई इतनी डरावनी है की रात की नींद उड़ जाएगी। 

मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना और नदिया जैसे ज़िलों में हिंदू आबादी, जो कभी शान से मेजॉरिटी में हुआ करती थी, आज माइनॉरिटी बन चुकी है। ये कोई कुदरती तौर पर नहीं हुआ है। ये जिहादी घुसपैठ और हिंदुओं को डरा-धमका कर भगाने का एक प्रॉपर प्लान है, जिसे बहुत ही ठंडे दिमाग से अंजाम दिया जा रहा है।

जिन भी इलाकों में घुसपैठियों और इन इस्लामिक कट्टरपंथियों की तादाद बढ़ी है, वहां हिंदुओं का जीना हराम कर दिया गया है। 

राम नवमी का पवित्र जुलूस हो, मां दुर्गा की पूजा का विसर्जन हो या हनुमान जयंती का पावन अवसर… इन पर छतों से पत्थरबाज़ी होना, पेट्रोल बम फेंके जाना और तलवारें लहराना अब वहां का नॉर्मल रूटीन बन गया है। ऐसा लगता है जैसे हिंदू किसी इस्लामिक मुल्क में रह रहे हों। 

हिंदू महिलाओं के साथ सरेआम बदसलूकी, लव जिहाद के रोज़ नए मामले और हिंदुओं की दुकानों और ज़मीनों पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा कर लेना… यही आज के बंगाल की कड़वी हक़ीक़त है। 

संदेशखाली का जो भयानक सच पूरे देश ने देखा, वो तो बस एक छोटी सी बानगी भर है। ऐसे ना जाने कितने संदेशखाली बंगाल के गांव-गांव में पनप रहे हैं जहां हिंदू महिलाओं की इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

चुनाव के बाद जो वहां राजनीतिक हिंसा के नाम पर खून-खराबा होता है, वो कोई आम हिंसा नहीं होती, वो असल में एक टार्गेटेड ‘एंटी-हिंदू पोग्रोम’ होता है। चुनाव ख़त्म होते ही चुन-चुन कर उन हिंदुओं को मारा-पीटा जाता है, उनकी दुकानों में आग लगाई जाती है, जिन्होंने बीजेपी या किसी भी राष्ट्रवादी ताक़त को वोट देने की हिम्मत की होती है। 

सत्ता के पाले हुए गुंडे और ये अवैध घुसपैठिए मिलकर ऐसा ख़ौफ़ पैदा करते हैं की कोई हिंदू दोबारा आवाज़ उठाने की जुर्रत ही न कर सके।

अगर आज भी दिल्ली में बैठे सत्ताधीश और नीति-निर्माता इस ख़तरे को नहीं समझेंगे, तो लिख कर रख लीजिए, वो दिन दूर नहीं जब बंगाल में 1946 के ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ या 1971 के नोआखली जैसे हालात दोबारा बन जाएंगे। 

उस वक़्त हिंदुओं के सामने सिर्फ दो ही रास्ते छोड़े जाएंगे-  ‘या तो इस्लाम क़बूल करो, या फिर सब कुछ छोड़कर भाग जाओ।’ जो कश्मीर घाटी में 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ था, आज हुबहू वही ‘कश्मीर मॉडल’ बंगाल के बॉर्डर वाले ज़िलों में दोहराया जा रहा है। पर अफ़सोस की बात ये है की बहुत से लोग अभी भी कबूतर की तरह आंखें बंद किए बैठे हैं और सोच रहे हैं कि बिल्ली उन्हें नहीं खाएगी।

अब जिहाद के फन को कुचलने का वक़्त आ गया है, हिन्दू राष्ट्र को बचाना ही होगा

अब पानी सिर से बहुत ऊपर जा चुका है। नुरुल हुदा की खुलेआम युद्ध की धमकी, हसनात अब्दुल्ला का सेवन सिस्टर्स काटने का सपना, बॉर्डर पर जमात-ए-इस्लामी का बढ़ता कब्ज़ा, बंगाल में घुसपैठियों की बढ़ती फौज, सत्ता का अंधा तुष्टीकरण और बंगाली हिंदुओं पर मंडराता मौत का साया… ये सब कोई अलग-अलग छोटी-मोटी घटनाएं नहीं हैं। ये एक ही बड़ी, खौफनाक और राष्ट्र-विरोधी साज़िश की अलग-अलग कड़ियां हैं। 

ये जिहादी ताकतें भारत को हज़ार ज़ख्म देकर मारना चाहती हैं। लेकिन अब वक़्त आ गया है की भारत का हिन्दू सनातन समाज और हमारी हिन्दू सरकार अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे और इस जिहादी वायरस का जड़ से इलाज करे।

अब महज़ कड़ी निंदा करने, ट्वीट करने या एम्बेसी में बुलाकर कूटनीतिक विरोध दर्ज़ कराने से कुछ नहीं होने वाला। गीदड़ों को शेरों वाली भाषा में ही जवाब देना होगा। भारत माता की अखंडता और हमारी सनातन पहचान को बचाने के लिए अब कुछ बहुत ही कड़े और रफ-एंड-टफ फैसले लेने ही पड़ेंगे।

सबसे पहली चीज़, पूरे देश में और ख़ासकर बंगाल, असम और पूरे नॉर्थईस्ट में तुरंत और बहुत ही सख्ती के साथ एनआरसी (NRC) लागू होना चाहिए। गली-गली, गांव-गांव चेकिंग हो और एक-एक घुसपैठिए की कॉलर पकड़ कर पहचान की जाए। 

इनके जो भी फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड बने हैं, वो सब फौरन फाड़ कर डस्टबिन में फेंके जाएं। इनकी अवैध संपत्तियां ज़ब्त हों और बिना किसी मानवाधिकार के ड्रामे के, इन्हें सीधा धक्के मार कर डिपोर्ट किया जाए।

दूसरा, बॉर्डर मैनेजमेंट में अब कोई नरमी या भाईचारा नहीं चलना चाहिए। बीएसएफ (BSF) को खुली छूट दो। बॉर्डर पार से जो भी अवैध घुसपैठ हो रही है, उसे सीधे ‘एक्ट ऑफ वॉर’ माना जाए।

जो भी जिहादी तारबंदी लांघने की कोशिश करे, उसे देखते ही गोली मारने का सीधा ऑर्डर पास होना चाहिए। और जो हमारा सिलीगुड़ी कॉरिडोर है, वहां तो मिलिट्री का सबसे तगड़ा पहरा होना चाहिए ताकि कोई देशद्रोही उसकी तरफ आंख उठाकर भी न देख सके।

और सबसे बड़ी बात, जो सत्ता में बैठे लोगों को करनी होगी। पश्चिम बंगाल की सरकार अपने वोट बैंक की ख़ातिर देश की सुरक्षा के लिए एक नासूर बन चुकी है। 

अगर वहां बैठी सरकार इन घुसपैठियों के कागज़ रद्द करने और जिहादी नेटवर्क तोड़ने में आनाकानी करती है या केंद्र की मदद नहीं करती, तो बिना कुछ सोचे-समझे संविधान के अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल करके वहां तुरंत राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। देश की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर वोट बैंक के गिद्धों के लिए कुर्बान नहीं किया जा सकता।

भारत के हिंदू समाज और दिल्ली की सरकार के लिए ये एकदम फाइनल अलार्म है। हम अपने ही जीते-जी अपनी पावन मातृभूमि को एक और ‘इस्लामी गणराज्य’ या ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ में बदलते हुए हरगिज़ नहीं देख सकते। इतिहास इस बात का गवाह है कि जब-जब हिंदुओं ने अपनी ज़मीन, अपनी आबादी और अपने धर्म से समझौता किया है, हमने अपनी धरती का एक बड़ा हिस्सा हमेशा के लिए खोया है। 

इन विदेशी चरमपंथियों की धमकियों का जवाब अब किसी शांति-वार्ता या भाईचारे से नहीं, बल्कि एक प्रचंड राष्ट्रवादी प्रहार से मिलना चाहिए। इन्हें समझ आ जाना चाहिए की आज का भारत कोई कमज़ोर या डरपोक देश नहीं है जो इनकी गीदड़भभकियों से डर जाएगा। अगर इन्होंने हमारी तरफ आंख भी उठाई, तो वो आंख निकाल ली जाएगी।

बिल्ली के गले में घंटी बांधने और जिहाद के इस फन को कुचलने का वक़्त अब आ गया है।

जय हिंद! जय भारत! जय श्री राम!

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