सत्ता से बेदखल होने से ठीक पहले मनमोहन सरकार ने 123 कीमती संपत्तियां की Waqf के हवाले, शांतिदूतों को देश की ज़मीनें बांटने वाली नीच कांग्रेस की डकैती

सत्ता से बेदखल होने से ठीक पहले मनमोहन सरकार ने 123 कीमती संपत्तियां की Waqf के हवाले, शांतिदूतों को देश की ज़मीनें बांटने वाली नीच कांग्रेस की डकैती

ज़रा सोचिए, एक आम हिंदू आदमी अगर अपने परिवार के लिए 50 गज़ का एक छोटा सा प्लॉट भी खरीदना चाहे, तो उसे क्या करना पड़ता है?

वो सालों तक अपनी खून-पसीने की कमाई बैंक में जोड़ता है, अपना पेट काटता है, बैंक से भारी-भरकम लोन लेता है और फिर आधी ज़िंदगी उस लोन की EMI भरते-भरते अपनी कमर तुड़वा लेता है। एक-एक इंच ज़मीन के लिए इस देश का आम करदाता अपनी पूरी जवानी झोंक देता है।

लेकिन ज़रा आंखें खोलकर देखिए की इस देश की छाती पर बैठकर राज करने वाली उस ‘सेक्युलर’ कांग्रेस पार्टी ने क्या किया!

जिस वक्त आम आदमी ज़मीन के एक टुकड़े के लिए तरस रहा था, ठीक उसी वक्त कांग्रेस ने अपने उस खास ‘शांतिदूतों’ वाले वोटबैंक को खुश करने के लिए रातों-रात अरबों-खरबों की सरकारी ज़मीनें खैरात में बांट दीं। ये आज़ाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी, सबसे नीच और सबसे खौफनाक डकैती थी।

बात मार्च 2014 की है। देश में लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने ही वाला था। उस वक्त केंद्र में बैठी मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की यूपीए (UPA) सरकार को बहुत अच्छी तरह से पता चल गया था की अब देश का हिंदू जाग चुका है और इस बार कांग्रेस को सत्ता से लात मारकर बाहर निकाला जाने वाला है।

चुनाव आचार संहिता लगने में महज़ कुछ ही घंटों का वक्त बचा था। हार के खौफ से कांप रही कांग्रेस ने उसी रात एक सीक्रेट कैबिनेट मीटिंग बुलाई।

उस रात जो फैसला लिया गया, वो देश के खज़ाने पर एक ऐसा जिहादी प्रहार था जिसे सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। कांग्रेस ने तय किया की दिल्ली की 123 बेशकीमती संपत्तियां, जो सीधे तौर पर भारत सरकार की थीं, उन्हें बिना किसी कानूनी हक के, बिना किसी नीलामी के, सीधे ‘दिल्ली Waqf बोर्ड’ को दान कर दिया जाए। मतलब समझ रहे हैं आप?

चुनाव हारने से ठीक पहले जाते-जाते इन्होंने भारत माता से ज़मीनें नोंचकर उन मुल्लों के हवाले कर दीं, जिनका इस ज़मीन पर धेले भर का भी अधिकार नहीं था। ये सिर्फ ज़मीन का सौदा नहीं था, ये उस जिहादी इकोसिस्टम के आगे कांग्रेस का सरेआम सरेंडर था।

लुटियंस दिल्ली और कनॉट प्लेस की अरबों की ज़मीनें शांतिदूतों को कर दी दान, हिन्दू टैक्सपेयर का खून चूसने वाली कांग्रेसी डकैती का घिनोना सच

अब अगर किसी को लग रहा है की “अरे, थोड़ी बहुत ज़मीन ही तो दी थी, इसमें इतना बवाल क्यों?”, तो ज़रा इन 123 संपत्तियों का असली सच सुन लीजिए। ये 123 संपत्तियां दिल्ली के किसी दूर-दराज़ इलाके की बंजर या खाली ज़मीनें नहीं थीं।

ये संपत्तियां देश की राजधानी दिल्ली के उस वीआईपी और सबसे महंगे इलाके में थीं जहाँ आज ज़मीन की कीमत सुनकर ही बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते हैं।

ये ज़मीनें लुटियंस दिल्ली (Lutyens Delhi), कनॉट प्लेस, मथुरा रोड, अशोक रोड, लोधी रोड और बाबर रोड जैसे अति-पॉश इलाकों में मौजूद थीं।

आज के वक्त में इन 123 संपत्तियों की मार्केट वैल्यू हज़ारों करोड़ रुपये से भी ज़्यादा है! ये वो ज़मीनें थीं जो L&DO (Land and Development Office) और डीडीए (DDA) की कस्टडी में थीं।

यानी ये ज़मीनें सीधे-सीधे भारत के ईमानदार करदाताओं की थीं। इन ज़मीनों पर कोई अस्पताल बन सकता था, कोई बड़ा सरकारी स्कूल बन सकता था, या देश के विकास के लिए कोई प्रोजेक्ट लग सकता था।

लेकिन कांग्रेस को देश के विकास से क्या लेना-देना? उन्हें तो बस उन शांतिदूतों की झोलियां भरनी थीं। ये हज़ारों करोड़ की ज़मीनें मुफ्त में एक ऐसे वक्फ बोर्ड को थमा दी गईं, जो सिर्फ और सिर्फ समाज में कट्टरपंथ और जिहादी मानसिकता को पालने का काम करता है।

ज़रा इस सड़े हुए सेक्युलरिज्म का दोगलापन देखिए। आज़ादी से लेकर आज तक, क्या कांग्रेस ने 123 तो छोड़िए, एक छोटी सी ज़मीन भी कभी किसी हिंदू मंदिर, किसी गुरुकुल, किसी गौशाला या किसी हिंदू अनाथालय को दान में दी है? बिल्कुल नहीं!

हिंदू अपने मंदिर बनाने के लिए अपना खून-पसीना एक करके चंदा इकट्ठा करता है और सरकार उल्टा हमारे मंदिरों का पैसा (HRCE एक्ट के तहत) लूट कर अपने खज़ाने में डाल लेती है।

लेकिन जब बात इन शांतिदूतों की आती है, तो ये कांग्रेसी सरकारें देश का पूरा का पूरा खज़ाना और देश की सबसे महंगी ज़मीनें थाली में सजाकर इनके आगे परोस देती हैं।

ये कैसा सेक्युलर देश है भाई जहाँ बहुसंख्यक हिंदू को भिखारी बना दिया गया है और इन जिहादियों को सरकारी खज़ाने से अरबपति बनाया जा रहा है?

ये डकैती नहीं तो और क्या है? ये उस आम हिंदू के मुंह पर कांग्रेस का तमाचा है जिसे हम आज तक अपनी बर्बादी का कारण मानकर झेल रहे हैं।

मोदी सरकार का खौफनाक हथौड़ा और हाई कोर्ट में रोते वक्फ बोर्ड के जिहादियों से वापस छीनी गई हमारी ज़मीनें

खैर, कांग्रेस ने तो 2014 में अपनी तरफ से भारत को लूटने और इन शांतिदूतों को अरबपति बनाने का पूरा इंतज़ाम कर दिया था। लेकिन कहते हैं ना की जब पाप का घड़ा भर जाता है, तो भगवान खुद उसका हिसाब करने नीचे उतर आते हैं।

2014 में देश की सत्ता बदली और दिल्ली की गद्दी पर एक ऐसी राष्ट्रवादी सरकार आकर बैठी जिसकी रगों में तुष्टिकरण का ज़हर नहीं था।

जब नई सरकार के मंत्रियों ने पुरानी फाइलों की धूल झाड़ी, तो इस 123 संपत्तियों वाले महाघोटाले का वो खौफनाक जिन्न बाहर निकल कर आया जिसे देखकर खुद बड़े-बड़े अफसरों के पसीने छूट गए थे। विश्व हिंदू परिषद ने पहले से ही इस कांग्रेसी डकैती के खिलाफ कोर्ट में मोर्चा खोल रखा था।

अब मोदी सरकार ने इन जिहादियों का गुरूर तोड़ने के लिए सीधे हथौड़ा चला दिया। सरकार ने इस पूरी डकैती की जांच के लिए जस्टिस एसपी गर्ग (SP Garg Committee) की दो सदस्यीय एक बहुत ही सख्त कमेटी बना दी।

इस कमेटी ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के उन मुल्लों को तलब किया जो इन हज़ारों करोड़ों की संपत्तियों पर कुंडली मारकर बैठे थे। कमेटी ने डंके की चोट पर पूछा- “चलो, अपने कागज़ दिखाओ! बताओ की ये लुटियंस दिल्ली और कनॉट प्लेस की बेशकीमती ज़मीनें तुम्हारे बाप-दादाओं ने कब खरीदी थीं?”

और भाई साहब, जब कागज़ दिखाने की बारी आई तो इन वक्फ बोर्ड वालों की पैंट गीली हो गई! इनके पास रत्ती भर का भी कोई सुबूत नहीं था।

कोई रजिस्ट्री नहीं, कोई मालिकाना हक़ नहीं। ये तो सिर्फ और सिर्फ उस कांग्रेसी खैरात और यूपीए सरकार के उस सीक्रेट लेटर के दम पर भारत के खज़ाने पर डाका डाल कर बैठे थे।

कमेटी की रिपोर्ट आते ही शहरी विकास मंत्रालय (MoHUA) ने बिना कोई टाइम वेस्ट किए एक खौफनाक फरमान जारी कर दिया।

सरकार ने एक झटके में इन 123 संपत्तियों को वक्फ बोर्ड के कब्ज़े से आज़ाद कर लिया और वापस भारत सरकार यानी आम जनता के नाम कर दिया। इन संपत्तियों पर लगे वक्फ के उन बोर्डों को उखाड़ कर फेंक दिया गया।

अब ज़रा इन शांतिदूतों की बौखलाहट देखिए! जब इनकी फ्री की मलाई छिन गई, तो ये दिल्ली वक्फ बोर्ड वाले छाती पीट-पीटकर और रोते-गिड़गिड़ाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गए।

इन्होंने सोचा की शायद कोई वामपंथी जज मिल जाएगा जो इन्हें बचा लेगा। लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकी वो भयंकर बेइज़्ज़ती की कि ये ताउम्र याद रखेंगे।

कोर्ट ने इन्हें लात मारकर भगा दिया और साफ कह दिया की “तुम्हारे पास कोई अधिकार नहीं है, सरकार का फैसला बिल्कुल सही है।” जो ज़मीनें कांग्रेस ने वोटबैंक की भीख में दी थीं, उसे आज के नए भारत ने जूतों के दम पर वापस छीन लिया है!

वक्फ बोर्ड को जड़ से उखाड़ फेंकने और देश को कांग्रेसी पापों से मुक्त कराने की हुंकार

दिल्ली की इन 123 संपत्तियों का वापस मिलना तो बस एक छोटी सी जीत है। असली लड़ाई तो अभी बाकी है। जब तक 1995 का वो काला और गद्दार ‘वक्फ एक्ट’ इस देश के कानून की किताब में ज़िंदा है, तब तक तुम्हारी और हमारी ज़मीनें सुरक्षित नहीं हैं। आज वक्फ बोर्ड सिर्फ दिल्ली में नहीं, बल्कि पूरे देश में भू-माफिया का बाप बन चुका है।

ज़रा तमिलनाडु के तिरुचेंदुरई गांव का हाल देख लीजिए। उस एक अकेले गांव में हिंदुओं के हज़ारों घर हैं, वहां का 1500 साल पुराना चोल राजवंश का हमारा भव्य हिंदू मंदिर है। और इस नीच वक्फ बोर्ड ने रातों-रात उस पूरे के पूरे गांव को अपनी संपत्ति घोषित कर दिया!

जब वहां का एक हिंदू किसान अपनी ज़मीन बेचने गया, तो रजिस्ट्रार ने कहा की भाई ये ज़मीन तो वक्फ की है, तुम्हें वक्फ बोर्ड से एनओसी (NOC) लानी पड़ेगी।

क्या ये सुनकर आपके खून में आग नहीं लगती? जो मंदिर इस्लाम के पैदा होने से भी सदियों पहले बना हुआ है, उस मंदिर पर कोई मुल्ला आकर अपना दावा ठोक दे और हमारा सड़ा हुआ सेक्युलर सिस्टम उसे ऐसा करने का कानूनी हक़ दे? ये बर्दाश्त के बाहर है

हमें इस कानून की पूर्ण रूप से मौत चाहिए! सरकार को एक ही झटके में इस 1995 के वक्फ एक्ट को उखाड़ कर डस्टबिन में फेंक देना चाहिए।

जितनी भी ज़मीनें इन जिहादियों ने वक्फ के नाम पर हड़पी हैं, वो सारी की सारी ज़मीनें रातों-रात भारत सरकार के कब्ज़े में आनी चाहिए।

अगर किसी भी शांतिदूत ने सड़कों पर उतरकर दंगा करने या पत्थर फेंकने की कोशिश की, तो यूपी वाला बुलडोज़र उनके घरों को मलबे में तब्दील करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

जय श्री राम! भारत माता की जय!

Scroll to Top