पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच आज राज्य के 15 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर और मगराहाट पश्चिम विधानसभा क्षेत्रों के कई बूथों पर री-पोलिंग कराने का फैसला लिया है। यह निर्णय पिछले चरण के मतदान के दौरान सामने आई गंभीर शिकायतों और अनियमितताओं के बाद लिया गया, जिसने राज्य की राजनीति को और अधिक गर्म कर दिया है।
सुबह 7 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम तक जारी रहेगा। मतदान केंद्रों के बाहर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए हैं ताकि मतदान पूरी तरह निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके। संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
दरअसल, पिछले चरण के मतदान के दौरान कुछ बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़, वेबकास्टिंग में गड़बड़ी, सीसीटीवी कैमरों के बंद होने और मतदाताओं को प्रभावित करने जैसे आरोप सामने आए थे। कई राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए कहा था कि कुछ केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। इन शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षकों और जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट में कई बूथों पर मतदान प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आई, जिसके बाद आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए वहां का मतदान रद्द कर पुनर्मतदान कराने का आदेश दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही एक-दूसरे पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगा रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं को डराने और बूथ कब्जाने की कोशिश हुई, जबकि टीएमसी ने विपक्ष पर माहौल खराब करने और झूठे आरोप लगाने की बात कही है। दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है।
सबसे ज्यादा चर्चा ईवीएम विवाद को लेकर हो रही है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई थी और मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश की गई। इन आरोपों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया। चुनाव आयोग ने हालांकि स्पष्ट किया कि जहां भी शिकायतें मिलीं, वहां तुरंत जांच कर कार्रवाई की गई और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए दोबारा मतदान का निर्णय लिया गया।
री-पोलिंग को देखते हुए प्रशासन ने इस बार पहले से ज्यादा सतर्कता बरती है। मतदान केंद्रों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। हर बूथ की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैयार रखी गई है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इस बार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर मतदाता को बिना किसी दबाव के वोट डालने का पूरा अधिकार दिया जाएगा।
आज के मतदान को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। कई मतदाताओं का कहना है कि लोकतंत्र में निष्पक्ष चुनाव सबसे जरूरी है और अगर किसी बूथ पर गड़बड़ी हुई है तो दोबारा मतदान होना सही फैसला है। वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती टकराव की वजह भी मान रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इन 15 बूथों पर होने वाला मतदान कई सीटों के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। बंगाल में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है और छोटी-सी बढ़त भी किसी दल की जीत-हार तय कर सकती है। यही वजह है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर इन मतदान केंद्रों पर टिकी हुई है।
इस बीच राज्य की राजनीति में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनावी माहौल इतना गरमा गया है कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक दल अदालत का रुख कर चुके हैं। मतगणना से पहले बढ़ती राजनीतिक बयानबाजी ने चुनाव को और अधिक हाई-वोल्टेज बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव आयोग का यह कदम आने वाले चरणों के लिए भी बड़ा संदेश है। आयोग यह दिखाना चाहता है कि किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जहां भी शिकायतें सही पाई जाएंगी, वहां तुरंत कार्रवाई होगी। इससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 इस बार पूरे देश की नजर में है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने इसे प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। लगातार बढ़ते राजनीतिक संघर्ष, हिंसा के आरोप, सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव आयोग की सख्ती ने इस चुनाव को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
अब सबकी नजर आज हो रही री-पोलिंग और आने वाली मतगणना पर टिकी हुई है। राजनीतिक दलों के लिए यह सिर्फ 15 बूथों का मतदान नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति और जनता के भरोसे की बड़ी परीक्षा बन चुका है। अगर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होता है तो यह चुनाव आयोग के लिए बड़ी राहत होगी, लेकिन किसी भी नई गड़बड़ी की स्थिति में राजनीतिक विवाद और ज्यादा बढ़ सकता है।
फिलहाल बंगाल की राजनीति पूरी तरह चुनावी रंग में डूबी हुई है और आज का यह पुनर्मतदान राज्य के चुनावी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है।
