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‘The LogSabha’ Exit Poll: बिहार में NDA की प्रचंड वापसी के संकेत, जानें महागठबंधन को मिली कितनी सीटें

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के सभी चरणों के मतदान संपन्न होने के बाद अब सबकी निगाहें एग्जिट पोल के नतीजों पर टिकी हैं।देश की प्रतिष्ठित राजनीतिक विश्लेषण संस्था ‘The LogSabha’ ने अपने एग्जिट पोल के ताज़ा आंकड़े जारी कर दिए हैं, जिनमें एनडीए (NDA) की प्रचंड वापसी के संकेत मिल रहे हैं।सर्वे के अनुसार, इस […]

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वंदे मातरम

“वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूरे, एक राष्ट्रीय गीत जिसने स्वतंत्रता, स्वदेशी आंदोलन, पर्यावरण जागरूकता और धार्मिक बहस को गति दी

भारत को “माता” कहना केवल एक भावात्मक अभिव्यक्ति नहीं है—यह भारतीय संस्कृति का वह अनंत दर्शन है, जिसमें धरती को जीवित, चेतन और करुणामयी मानी गई है। जब भारतीय “भारत माता” कहते हैं, तो उनके मन में किसी भूभाग की आकृति नहीं उभरती, बल्कि एक ऐसी शक्ति की छवि आती है जो अपने सभी संतानों

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राजा पोरस: विदेशी लुटेरों को भगाने वाले हिंदू योद्धा, राष्ट्र की स्वतंत्रता का प्रतीक

प्रारंभ और जीवन यात्रा: हिंदू शौर्य की नींव से युद्ध की तैयारी तक राजा पोरस भारतीय इतिहास के वह महान हिंदू योद्धा थे, जिन्होंने विदेशी लुटेरों को भगाकर राष्ट्र की स्वतंत्रता का अमर प्रतीक बनाया। 326 ई.पू. में हाइडेस्पिस नदी के किनारे अलेक्जेंडर महान को धूल चटाने वाले पोरस ने हिंदू गौरव और राष्ट्रीय एकता

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28 अक्टूबर: भगिनी निवेदिता जयंती... स्वामी विवेकानंद से प्रभावित हो कर अपना जीवन भारत माता की सेवा में अर्पित किया

28 अक्टूबर: भगिनी निवेदिता जयंती… स्वामी विवेकानंद से प्रभावित हो कर अपना जीवन भारत माता की सेवा में अर्पित किया

प्रारंभ और जीवन यात्रा: विदेशी जन्म से भारतीय समर्पण तक 28 अक्टूबर 2025 को हम भगिनी निवेदिता की जन्मजयंती मनाते हैं, जो स्वामी विवेकानंद से गहन रूप से प्रभावित होकर अपना सम्पूर्ण जीवन भारत माता की सेवा में समर्पित करने वाली एक महान संन्यासिनी थीं। आयरलैंड में जन्मी मार्गरेट नोबल ने हिंदू संस्कृति, शिक्षा, और

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विट्ठलभाई पटेल का बलिदान दिवस: स्वाधीनता संग्राम में गांधी के विचारों का खुला विरोध, राष्ट्र की सेवा का अमर प्रतीक

एक क्रांतिकारी का बलिदान और उसकी अमर विरासत 22 अक्टूबर का दिन विट्ठलभाई पटेल का बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो स्वाधीनता संग्राम में गांधी के कई विचारों का खुलकर विरोध करने वाले एक निडर और दूरदर्शी नेता थे। उनका जीवन एक ऐसी गाथा है, जो राष्ट्र सेवा, स्वराज्य की दृढ़ मांग,

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सोलंकी साम्राज्य: गुजरात के वीर योद्धा, जिन्होंने गजनवी को पराजित कर खदेड़ा और हिंदू धर्म का परचम लहराया

सोलंकी साम्राज्य भारतीय इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम काल है, जहाँ गुजरात के वीर योद्धाओं ने हिंदू धर्म का परचम लहराया। इन वीरों ने महमूद गजनवी जैसे क्रूर आक्रमणकारियों को पराजित कर खदेड़ा, जो हिंदू मंदिरों और संस्कृति को नष्ट करने का दुस्साहस किया। यह लेख सोलंकी राजवंश की स्थापना, उनके शौर्यपूर्ण युद्धों,और गजनवी को

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नोआखाली 1946: मुस्लिम लीग के उन्माद में डूबा नरसंहार — हिंदुओं की क्रूर हत्याएं, लूटपाट और जबरन धर्मांतरण की कड़वी सच्चाई

नोआखाली 1946 का नरसंहार एक गहरी त्रासदी है, जो हिंदू समाज की दृढ़ता और बलिदान की गाथा को बयान करता है। इस लेख में उस भयावह घटना की जड़ों, उसके घिनौने कृत्यों और इसके पीछे के षड्यंत्र को उजागर किया जाएगा, जो हर हिंदू और देशभक्त के लिए जागरूकता का आह्वान है। विशेष रूप से,

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भारत रत्न नाना जी देशमुख जयंती — जिन्होंने जीवन से लेकर देह तक राष्ट्र को अर्पित किया, संघ संस्कार का अमर प्रतीक

भारत रत्न नाना जी देशमुख की जयंती हर देशभक्त के लिए गर्व का दिन है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को अर्पित किया और संघ संस्कार का अमर प्रतीक बने। उनका जन्म 11 अक्टूबर 1916 को महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के कदोली गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। वे एक ऐसे नेता थे,

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10 अक्टूबर: मालवीय जी की अध्यक्षता में आज ही हुआ प्रथम अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन – हिंदू एकता का गौरव

10 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में गौरवशाली है, जब प्रथम अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता महान स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षा विद मदन मोहन मालवीय जी ने की, जो हिंदू एकता और राष्ट्रीयता के प्रतीक थे। यह घटना न केवल हिंदी भाषा के उत्थान का प्रारंभ थी, बल्कि हिंदू

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9 अक्टूबर: पंडित गोपबंधु दास की जन्मजयंती — उत्कल मणि, स्वाधीनता संग्राम के योद्धा, राष्ट्रीयता और सामाजिक सुधार का प्रतीक

9 अक्टूबर का दिन ओड़िशा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है, क्योंकि इस दिन पंडित गोपबंधु दास का जन्म हुआ था। वे उत्कल मणि के नाम से प्रसिद्ध हुए, जो स्वाधीनता संग्राम के योद्धा, राष्ट्रीयता के प्रचारक, और सामाजिक सुधार के प्रतीक बने। उनका जीवन साहस, समर्पण, और देशभक्ति की मिसाल है, जो हर

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