देश और धर्म के सबसे बड़े दुश्मन — वामपंथी या कम्युनिस्ट ब्राह्मण, जो अल्पसंख्यकों और दलितों के अधिकारों की बात करते हैं, पर उन्हें वामपंथ के शीर्ष पदों तक पहुँचने नहीं देते
किसी भी सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा केवल सीमाओं पर खड़ा शत्रु नहीं होता; कभी-कभी वह भीतर से भी उठता है, जब कोई उसके मूल सिद्धांतों पर ही प्रश्न खड़ा करता है। “कम्युनिस्ट पंडित” की अवधारणा इसी संदर्भ में रखी जाती है—परंपरा में जन्मा, उसी से पोषित, परंतु “प्रगति” के नाम पर उसके शास्त्रों, […]









