बौखलाए विरोधियों ने लगाया एड़ी-चोटी का जोर, फिर भी आज रात New York में लहराएगा ‘भगवा’, RSS के 100 साल और सनातनी एकता पर संघ प्रमुख ‘मोहन भागवत’ का ‘अमेरिका’ में सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन

कभी-कभी ना वक्त ऐसा पहिया घुमाता है की दुश्मनों को छिपने के लिए बिल तक नहीं मिलता। आज 29 अगस्त 2026 की रात सनातन के इतिहास का एक नया पन्ना एकदम सुनहरे अक्षरों में दर्ज़ होने जा रहा है।

आप ज़रा सोचिए, जो नफरती लोग सदियों से RSS को पानी पी-पीकर कोसते थे, आज उनकी क्या हालत हो रही होगी? वो दिल्ली में बैठकर रो रहे हैं और वहां सात समंदर पार, अमेरिका के न्यूयॉर्क (New York) में आज रात भगवा लहराने जा रहा है!

मैडिसन स्क्वायर गार्डन (Madison Square Garden)... ये अमेरिका का वो सेंटर है, जहां दुनिया के सबसे बड़े-बड़े रॉकस्टार, हॉलीवुड वाले और ग्लोबल लीडर्स अपना भौकाल टाइट करते हैं।

आपको याद ही होगा, 2014 में जब पीएम मोदी ने यहीं से दहाड़ लगाई थी, तो कैसे पूरी दुनिया सन्न रह गई थी।

और आज, 2026 में, संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उसी मंच से सनातन का वो शंखनाद करने जा रहे हैं, जिसकी गूंज सीधे व्हाइट हाउस से लेकर दिल्ली के खान मार्केट तक जाने वाली है।

कार्यक्रम का नाम रखा गया है- ‘Universal Oneness Celebrations’ यानी सार्वभौमिक एकता उत्सव!

आज रात वहां पूरे अमेरिका से 5,000 से ज़्यादा भारतीय-अमेरिकी, टॉप के हिंदू लीडर्स, उद्योगपति और आम सनातनी जुटने वाले हैं। ये डंके की चोट पर पश्चिमी दुनिया के सामने हिंदुओं का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन है।

ये इवेंट एक ऐलान है की हम सनातनी दुनिया के किसी भी कोने में जा बसें, चाहे सिलिकॉन वैली में कोडिंग करें या नासा (NASA) में रॉकेट उड़ाएं, लेकिन हमारे सीने में भगवा ही धड़कता है।

आज रात जब वो 5000 लोग मैडिसन स्क्वायर गार्डन के उस विशाल एरीना में एक साथ खड़े होकर ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ का उद्घोष करेंगे, तो ज़रा सोचिए उस वामपंथी ईकोसिस्टम का क्या हाल होगा जो कल तक डॉ. मोहन भागवत का वीज़ा रुकवाने के लिए गिड़गिड़ा रहा था!

नागपुर की एक छोटी सी शाखा से लेकर अमेरिका के सबसे बड़े मंच तक, 100 सालों में RSS ने कैसे पलट दिया पूरी दुनिया का नैरेटिव

इस पूरे भौकाल और ग्लोबल जलवे को समझने के लिए आपको ज़रा फ्लैशबैक में जाना पड़ेगा। भई, कोई चीज़ जब 100 साल की भयंकर तपस्या और संघर्ष के बाद निखरती है ना, तो उसका तेज अलग ही होता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) आज अमेरिका में अपने शताब्दी वर्ष (100वें साल) में एंट्री ले रहा है।

ज़रा सोचिए उस वक्त के बारे में, साल 1925… जब नागपुर के एक छोटे से मैदान में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने चंद बच्चों और युवाओं के साथ एक शाखा शुरू की थी।

उस वक्त किसने सोचा था कि खाकी निक्कर, लाठी और काली टोपी वाले ये मुट्ठी भर स्वयंसेवक एक दिन पूरी दुनिया का नैरेटिव ही पलट कर रख देंगे?

आज़ादी के बाद से ही, वामपंथियों ने क्या कुछ नहीं किया इस वटवृक्ष को उखाड़ने के लिए?

जब भी इन लिबरलों को मौका मिला, इन्होंने सबसे पहला काम संघ पर बैन लगाने का किया। स्वयंसेवकों को काल कोठरियों में ठूंसा गया, उन पर दुनिया भर के झूठे मुकदमे लादे गए।

मीडिया और वामपंथी इतिहासकारों ने उन्हें किताबों और अख़बारों में ‘आतंकी’, ‘फासीवादी’ और ना जाने क्या-क्या बताकर पूरी दुनिया में बदनाम करने का एक भयंकर टूलकिट चलाया।

इनका बस चलता तो ये आरएसएस का नामोनिशान मिटा देते। लेकिन ये अकल के अंधे भूल गए थे की संघ कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है जो सत्ता जाने पर टूट जाए। ये तो वो आग है जो सनातनियों के सीने में धधकती है!

और आज का दिन देख लो! जो लोग कल तक इन्हें अछूत मानते थे, आज वो इनके सामने नतमस्तक हैं।

नागपुर की उस एक छोटी सी शाखा से निकला हुआ संघ आज दुनिया के 40 से ज़्यादा देशों में ‘हिंदू स्वयंसेवक संघ’ (HSS) के नाम से डंके की चोट पर काम कर रहा है।

अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा… आप नाम लीजिए भाई, वहां आपको संघ का भगवा ध्वज फहराता हुआ मिल जाएगा।

आज संघ प्रमुख किसी देश में जाते हैं तो वो कोई ‘प्राइवेट विजिट’ नहीं होती, वो एक ग्लोबल इवेंट बन जाता है जिसे पूरी दुनिया की मीडिया कवर करती है।

आज जो ये लिबरल गैंग डिप्रेशन में है ना, उसकी असली वजह यही है। दशकों तक इन्होंने पूरी दुनिया में झूठ बोला, परसेप्शन बनाया की आरएसएस तो एक पिछड़ा हुआ और कट्टरपंथी संगठन है।

लेकिन आज जब अमेरिका के टॉप डॉक्टर्स, इंजिनियर्स और दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के सीईओ (CEO) मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भगवा साफा बांधकर मोहन भागवत को सुनने बैठेंगे, तो इनका वो सारा का सारा झूठा नैरेटिव ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा।

100 सालों की इस तपस्या ने साबित कर दिया है की तुम चाहे जितना ज़हर उगल लो, सनातन का जो सूरज अब पूरी दुनिया में उग रहा है, उसे कोई भी वामपंथी टूलकिट नहीं रोक सकता!

मोहन भागवत का वीज़ा रद्द कराने से लेकर बैन की मांग तक, विदेशी लिबरलों ने इस कार्यक्रम को रोकने के लिए लगाया था एड़ी-चोटी का जोर

भाई साहब, जैसे ही इस ‘लिबरल ईकोसिस्टम’ को भनक लगी की 29 अगस्त को संघ प्रमुख अमेरिका की जमीन पर खड़े होकर हिंदू एकता का शंखनाद करने वाले हैं, इनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

इन्हें लगा की अगर ये कार्यक्रम हो गया, तो दशकों से जो आरएसएस को ‘कट्टरपंथी’ साबित करने की दुकान ये चला रहे थे, उसका शटर हमेशा के लिए गिर जाएगा।

फिर क्या था, रातों-रात विदेशी NGOs, जिहादी संगठनों और वामपंथी थिंक-टैंक का वो खौफनाक टूलकिट एक्टिव हो गया, जिसका इकलौता मक़सद इस इवेंट को किसी भी कीमत पर रोकना था।

मैदान में सबसे पहले उतारे गए वो संगठन जो नाम से तो ‘हिंदू’ हैं, लेकिन उनका काम दिन-रात हिंदुओं की पीठ में छुरा घोंपना है।

‘Hindus for Human Rights’ (HfHR) नाम का एक फर्जी संगठन और उसके साथ ‘Indian American Muslim Council’ (IAMC) जैसे जिहादी ग्रुप्स ने मिलकर एक भयंकर साज़िश रची।

इन्होंने सीधे अमेरिकी सरकार, स्टेट डिपार्टमेंट और वहां के सांसदों को चिट्ठियां लिख-लिखकर रोना शुरू कर दिया।

इनका बस एक ही एजेंडा था- “किसी भी तरह डॉ. मोहन भागवत का वीज़ा रद्द करो और उन्हें अमेरिका की धरती पर कदम मत रखने दो!”

ज़रा सोचिए इनके दोगलेपन की हद! अमेरिका वो देश है जो पूरी दुनिया को ‘फ्री स्पीच’ (अभिव्यक्ति की आज़ादी) और ‘डेमोक्रेसी’ का ज्ञान बांटता फिरता है।

वहां बैठकर ये सो-कॉल्ड मानवाधिकार वाले एक शांतिपूर्ण सनातनी कार्यक्रम को बैन कराने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रहे थे।

ये वही गैंग है जो भारत में आतंकियों के मानवाधिकार के लिए आधी रात को सुप्रीम कोर्ट खुलवा लेता है, लेकिन जब बात सनातनियों के एकजुट होने की आती है, तो इन्हें अचानक ‘लोकतंत्र खतरे में’ नज़र आने लगता है।

इन्होंने अमेरिकी मीडिया को पैसे खिलाकर संघ के खिलाफ खूब ज़हर उगला, झूठे-मूठे आर्टिकल्स छपवाए, ताकि किसी तरह मैडिसन स्क्वायर गार्डन वाले इस बुकिंग को कैंसिल कर दें।

लेकिन सत्य परेशान हो सकता है, हार नहीं सकता! इनकी सारी लेटरबाज़ी और गीदड़ भभकियां कूड़ेदान में डाल दी गईं।

न्यूयॉर्क के वामपंथी मेयर ज़ोहरान ममदानी का पूरा सिस्टम मिलकर भी संघ प्रमुख को अमेरिका आने से नहीं रोक पाया

सिर्फ NGO ही नहीं, इस बार तो वहां के लोकल वामपंथी नेताओं ने भी सारी हदें पार कर दीं। न्यूयॉर्क का ही एक धुर वामपंथी मेयर है- ज़ोहरान ममदानी (Zohran Mamdani)।

इस आदमी ने सरेआम आरएसएस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अमेरिकी मीडिया में बैठकर ये ममदानी इस कदर ज़हर उगलने लगा जैसे इसके खुद के घर में आग लग गई हो।

इसने आरएसएस को ‘कट्टरपंथी’ और इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को अमेरिका के लिए ‘खतरनाक’ तक बता डाला।

लेकिन भाई, कहते हैं ना की जब हाथी बाज़ार से गुज़रता है तो कुत्तों के भौंकने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। इन वामपंथी नेताओं की असली औकात तब सामने आ गई जब अमेरिकी प्रशासन और वहां की लोकल पुलिस ने इनकी एक नहीं सुनी।

क्यों? क्योंकि अमेरिकी सिस्टम भी अंदर से ये बात बहुत अच्छे से जानता है की हिंदू समाज दुनिया का सबसे शांतिप्रिय और कानून मानने वाला समाज है।

आज अमेरिका की इकॉनमी, सिलिकॉन वैली और मेडिकल सिस्टम को कौन चला रहा है? यही हिंदू ही तो चला रहे हैं!

जब प्रशासन ने देखा की ये सिर्फ एक राजनीतिक प्रोपेगेंडा है, तो ममदानी और उसके गैंग की सारी साज़िशें धरी की धरी रह गईं। इनका पूरा का पूरा लिबरल सिस्टम मिलकर भी डॉ. मोहन भागवत को अमेरिका आने से नहीं रोक पाया।

संघ प्रमुख एकदम शाही अंदाज़ में अमेरिका पहुंचे, और इन वामपंथी नेताओं को समझ आ गया की सनातन की इस आंधी को अब किसी भी फर्जी नैरेटिव से रोका नहीं जा सकता।

ट्विटर अकाउंट ब्लॉक करने की कायरता, और विदेशी टेक कंपनियों का सनातनी आवाज़ को दबाने वाला टूलकिट

जब ज़मीन पर दाल नहीं गली, पुलिस और प्रशासन ने इनकी बात नहीं सुनी, तो ये कायर लोग अपने असली हथकंडे पर उतर आए- ‘डिजिटल जिहाद’!

यार, जब आप किसी से सामने से नहीं लड़ पाते, तो आप पीठ पीछे वार करते हो। इन लिबरलों ने भी यही किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को आयोजित कर रही संस्था ‘AHEAD’ (American Hindus for Engagement and Dialogue) के खिलाफ इंटरनेट पर एक भयंकर जंग छेड़ दी गई।

इन्होंने मास-रिपोर्टिंग (Mass reporting) करके AHEAD के ‘X’ (Twitter) अकाउंट पर इतने फर्जी स्ट्राइक मारे की ट्विटर ने कुछ घंटों के लिए उस अकाउंट को ही सस्पेंड कर दिया।

ज़रा सोचिए इस इंटरनेशनल टेक ईकोसिस्टम का दोगलापन! सिलिकॉन वैली की इन बड़ी-बड़ी कंपनियों में अगर कोई फिलिस्तीन या हमास का आतंकी सरेआम हिंसा भड़काए, तो उसे ‘फ्री स्पीच’ मानकर खुली छूट दे दी जाती है।

लेकिन अगर अमेरिका के हिंदू एकजुट होकर ‘सार्वभौमिक एकता’ (Universal Oneness) की बात करें, तो चंद घंटों में उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है!

ये उस टूलकिट का हिस्सा था ताकि कार्यक्रम से ठीक पहले आयोजकों का संपर्क टूट जाए और लोग भड़क जाएं। लेकिन ये अकल के अंधे भूल गए थे कि आज का सनातनी युवा 1990 वाला नहीं है, जो चुपचाप बैठकर तमाशा देखेगा।

जैसे ही अकाउंट ब्लॉक हुआ, पूरी दुनिया के हिंदुओं ने ट्विटर पर ऐसा बवंडर खड़ा किया, ऐसा डिजिटल पलटवार किया की एलन मस्क की कंपनी को भी पसीने आ गए।

भारी दबाव और किरकिरी के बाद उन्हें चुपचाप वो अकाउंट वापस बहाल (Restore) करना पड़ा। मुंह की खानी पड़ी ना!

अमेरिका की धरती पर जब ISKCON मंदिर पहुंचे संघ प्रमुख, ‘कृष्ण चेतना’ से दुनिया जीतने का वो सनातनी मंत्र

जब अमेरिका का वामपंथी ईकोसिस्टम उनका वीज़ा रद्द करवाने के लिए गला फाड़ रहा था, तब आप जानते हैं हमारे संघ प्रमुख मोहन भागवत कहाँ थे?

वो न्यूयॉर्क के उसी ऐतिहासिक इस्कॉन (ISKCON) मंदिर में खड़े थे, जहाँ 1966 में श्रील प्रभुपाद ने दुनिया भर में ‘हरे कृष्ण’ आंदोलन की नींव रखी थी।

वहां डॉ. भागवत ‘जीरो हंगर’ (Zero Hunger New York) इनिशिएटिव के तहत बेघर और गरीब अमेरिकियों को खाना बांट रहे थे। जी हाँ! डॉ. भागवत ने वहां एक-दो नहीं, बल्कि एक लाखवें (1,00,000th) भोजन वितरण अभियान का उद्घाटन किया।

उन्होंने पूरी दुनिया को ‘कृष्ण चेतना’ (Krishna Consciousness) का वो अल्टीमेट मंत्र दिया जिसकी आज के मारकाट वाले दौर में सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

डॉ. भागवत ने साफ शब्दों में कहा, “आज की दुनिया अनगिनत संघर्षों, युद्धों और मतभेदों में जल रही है। इन सबको जोड़ने वाली सिर्फ एक ही शक्ति है- और वो है कृष्ण चेतना!”

उन्होंने कहा की जिस दिन दुनिया के हर इंसान के दिल में यह बात बैठ जाएगी की कण-कण में सिर्फ ‘कृष्ण’ हैं, उस दिन यह दुनिया इंसानों के लिए स्वर्ग बन जाएगी।

इस्कॉन मंदिर से निकले इसी संदेश ने मैडिसन स्क्वायर गार्डन वाले उस ऐतिहासिक कार्यक्रम का वो सॉलिड ग्राउंड सेट कर दिया, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा!

39 अमेरिकी राज्यों से उमड़ा 5000 सनातनियों का जनसैलाब और टिकटों के लिए मची ऐसी होड़ की बंद करनी पड़ी बुकिंग

वामपंथी गैंग हमेशा से देश में एक झूठा नैरेटिव सेट करता आया है की भाई, हिंदू तो जातियों में बंटा हुआ है, ये कभी एक नहीं हो सकते।

और विदेशों में रहने वाले भारतीय तो अपनी संस्कृति भूल ही चुके हैं। लेकिन आज मैडिसन स्क्वायर गार्डन में जो नज़ारा दिखने वाला है, वो इनके इस पूरे प्रोपेगेंडा की धज्जियां उड़ा कर रख देगा।

आंकड़े सुनेंगे तो आपकी छाती गर्व से और चौड़ी हो जाएगी। इस महाकुंभ में हिस्सा लेने के लिए पूरे अमेरिका के 39 राज्यों और 85 से ज़्यादा शहरों से 5000 से अधिक प्रवासी सनातनी (Indian-Americans) न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं।

टेक्सास की गर्मी से लेकर शिकागो की ठंड तक, हर जगह से हिंदू बस एक ही आवाज़ पर खिंचे चले आ रहे हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी की इस कार्यक्रम को लेकर लोगों में इतना भयंकर क्रेज़ था की आयोजकों (प्रिया सामंत और अदिति बनर्जी जैसे लोगों) के पसीने छूट गए।

टिकटों के लिए ऐसी मारामारी मची, मानो किसी बहुत बड़े रॉकस्टार का कंसर्ट हो! रजिस्ट्रेशन के लिए इतने लाखों रिक्वेस्ट आ गए की सिस्टम क्रैश होने की नौबत आ गई और मजबूरन आयोजकों को तय समय से पहले ही बुकिंग रोकनी पड़ गई।

ज़रा सोचिए! जिस देश में हॉलीवुड का जलवा है, वहां लोग संघ प्रमुख को सुनने के लिए पागल हुए जा रहे हैं। ये सनातन की वो अंडरकरंट ताकत है जिसे ये वामपंथी कभी समझ ही नहीं पाए।

और सबसे बड़ा तमाचा तो इस बात का है की इस आयोजन में अमेरिका के 200 से ज़्यादा छोटे-बड़े मंदिर, योग संस्थाएं, और स्थानीय हिंदू संगठन एक साथ आ खड़े हुए हैं।

कोई तमिल हिंदू है, कोई बंगाली, कोई गुजराती तो कोई मराठी, लेकिन आज न्यूयॉर्क की सड़कों पर सब सिर्फ और सिर्फ ‘सनातनी’ हैं।

ये जो 200 संगठनों की एकजुटता है ना, इसी ने इस लिबरल ईकोसिस्टम की नींव हिला कर रख दी है। इन्हें समझ आ गया है की अब विदेश में बैठा हिंदू भी जाग चुका है और वो अपने धर्म और देश के खिलाफ कोई भी बकवास बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

वासुदेव कुटुंबकम की आड़ में नहीं, बल्कि डंके की चोट पर सनातन के वर्चस्व का ऐलान है आज रात का यह ग्लोबल कार्यक्रम

अब ज़रा बात कर लेते हैं की आज रात उस ऐतिहासिक मंच से होने क्या वाला है। बहुत से लोगों को लग रहा होगा की ‘सार्वभौमिक एकता’ (Universal Oneness) का नाम है, तो वही पुरानी घिसी-पिटी शांति और भाईचारे वाली बातें होंगी। लेकिन भाई मेरे, गलतफहमी में मत रहना!

आज रात मैडिसन स्क्वायर गार्डन से डॉ. मोहन भागवत जो संदेश देने जा रहे हैं, वो ताकत का, शक्ति का और डंके की चोट पर सनातन के वर्चस्व का संदेश है।

हम ‘वसुधैव कुटुंबकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) में विश्वास ज़रूर रखते हैं, लेकिन अब हम ये बात डिफेन्स (बचाव) की मुद्रा में नहीं, बल्कि हार्ड पावर (Hard Power) की मुद्रा में कहते हैं।

आप देखिए ना, एक वक्त था जब हमारे नेता विदेशों में जाकर बस हाथ जोड़कर खड़े रहते थे। आज हमारे संघ प्रमुख अमेरिका में जाकर वहां के सिस्टम को बता रहे हैं की समाज कैसे चलता है।

यह कोई साधारण बात नहीं है! आज पूरी दुनिया देख रही है की कैसे एक संगठन, जिसे खत्म करने के लिए भारत से लेकर विदेशों तक में साज़िशें रची गईं, वो आज दुनिया के सबसे ताकतवर देश की ज़मीन पर खड़ा होकर अपनी शर्तों पर एकता की बात कर रहा है।

आज रात जब वो भगवा ध्वज मैडिसन स्क्वायर गार्डन के विशाल एरीना में फहरेगा, तो वो उन करोड़ों सनातनियों के स्वाभिमान का प्रतीक होगा जिन्होंने सदियों तक मुगलों और अंग्रेजों की चाबुक सहकर भी अपने धर्म को ज़िंदा रखा।

तो जलने वालों को जलने दो, रोने वालों को रोने दो। अमेरिका पर लहराता हुआ यह भगवा इस बात का सुबूत है की सनातन को मिटाने का ख़्वाब देखने वाले खुद इतिहास के कूड़ेदान में दफन हो गए, लेकिन सनातन कल भी अजेय था, आज भी अजेय है और कल भी रहेगा!

जय श्री राम!

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