सच कहूं तो जब भी हम बॉलीवुड की फिल्में देखते हैं, तो वहां पुलिस वाले बड़े-बड़े डायलॉग मारते हुए गुंडों को हवा में उड़ाते नज़र आते हैं। लोग तालियां बजाते हैं और सीटी मारते हैं।
लेकिन जैसे ही हम असल ज़िंदगी की बात करते थे, तो कुछ सालों पहले तक यूपी का हाल एकदम उल्टा था। यहाँ पुलिस थानों में छुपकर बैठती थी और बाहुबली खुली जीपों में बंदूकें लहराते हुए सरेआम घूमते थे।
आम आदमी डर-डर कर जीता था और ये माफिया खुद को कानून का बाप समझते थे।
लेकिन भाई, वक्त का पहिया घूमा और यूपी पुलिस ने अपना वो खौफनाक और रौद्र रूप दुनिया को दिखाया, जिसे देखकर आज अच्छे-अच्छे खूंखार अपराधियों की पैंट गीली हो जाती है।
आज यूपी में गुंडों को ये नहीं पता होता की पुलिस उन्हें जेल ले जाएगी, उनकी करोड़ों की गाड़ी रास्ते में पलट जाएगी, या फिर सीधा उनके सीने में पीतल उतार दिया जाएगा!
इस नए और खौफनाक यूपी पुलिस के सिस्टम को ज़मीन पर उतारने वाले कई जांबाज़ अफसर हैं, लेकिन आज मैं आपको खाकी वर्दी के उस ‘असली सिंघम’ के बारे में बताने जा रहा हूँ, जिसके नाम भर से पाताल में छुपा हुआ माफिया भी थर-थर कांपने लगता है।
मैं बात कर रहा हूँ- आईपीएस (IPS) अविनाश पांडेय की।
ये कोई रील लाइफ के हीरो नहीं हैं जो कट और एक्शन सुनकर स्टंट करते हों। ये ज़मीन पर उतरकर अपराधियों की हड्डियां तोड़ने वाले वो खूंखार योद्धा हैं जिनका एक ही उसूल है- “कर्म ही धर्म है।”
अविनाश पांडेय का भौकाल ऐसा है की जब ये अपनी गाड़ी से किसी ज़िले में एंट्री लेते हैं, तो वहां के गुंडे-मवाली और बाहुबली अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर खुद ही ज़िला छोड़ने लगते हैं।
इनका सीधा सा और कड़क मैसेज है- “या तो जुर्म करना छोड़ दो, या फिर इस दुनिया को छोड़ दो।”
ये वो अफसर हैं जो ना नेताओं के फोन उठाते हैं, ना किसी दबाव में आते हैं। इनके लिए मुजरिम सिर्फ मुजरिम है, जिसे सीधा यमराज के पास भेजने में इन्हें एक सेकंड की भी हिचकिचाहट नहीं होती।
लखीमपुर खीरी की मिट्टी से लेकर इनकम टैक्स की नौकरी, फिर ‘सिंघम’ बनके अपराधियों का काल बनने का अविनाश पांडेय का जुनूनी सफर
ये जो आग और बेखौफ अंदाज़ अविनाश पांडेय के अंदर धधकता है, ये कोई रातों-रात नहीं आया। ये खून और मिट्टी का असर है। अविनाश पांडेय का जन्म 3 फरवरी 1988 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी ज़िले में हुआ था।
उनके पिता श्री श्रवण कुमार पांडेय जी ने बचपन से ही उन्हें ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति के वो संस्कार दिए थे, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बने।
शुरुआती पढ़ाई-लिखाई के बाद जब एक आम नौजवान सिर्फ एक ‘सेफ’ नौकरी ढूंढने के चक्कर में रहता है, तब अविनाश के दिमाग में कुछ बड़ा करने का जुनून सवार था।
उन्होंने अपनी बी.एससी (B.Sc) की पढ़ाई पूरी की और अपनी मेहनत के दम पर सरकारी नौकरी भी हासिल कर ली।
आपको जानकर हैरानी होगी की आईपीएस बनने से पहले उन्होंने इनकम टैक्स विभाग और डाक विभाग जैसी सुकून भरी नौकरियों में भी काम किया था।
अगर कोई आम इंसान होता, तो इनकम टैक्स की AC वाली कुर्सी पर बैठकर आराम से अपनी ज़िंदगी काट लेता। लेकिन अविनाश पांडेय को बंद कमरों में कुर्सियां तोड़ने का कोई शौक नहीं था।
उनके अंदर की वो ज्वाला उन्हें चैन से बैठने नहीं दे रही थी। उन्हें तो मैदान में उतरकर, खाकी वर्दी पहनकर उन भेड़ियों का शिकार करना था जो इस देश के आम आदमी का खून चूस रहे थे।
उन्होंने दिन-रात एक करके यूपीएससी (UPSC) की वो परीक्षा पास की जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है।
और फिर 7 सितंबर 2015 का वो ऐतिहासिक दिन आया, जब उन्होंने बाकायदा उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस (IPS) अधिकारी के रूप में वो खाकी वर्दी अपने सीने पर सजाई।
सच बताऊं तो जिस दिन 2015 बैच के इस तेज़-तर्रार अफसर ने पुलिस विभाग में कदम रखा था, उसी दिन यूपी के माफियाओं की उल्टी गिनती शुरू हो गई थी।
अविनाश पांडेय कोई नौकरी करने नहीं आए थे, वो खाकी के वेश में अपराधियों का परमानेंट इलाज करने का तूफानी संकल्प लेकर आए थे।
मऊ में मुख्तार अंसारी की सत्ता का खौफनाक अंत, जब IPS अविनाश पांडेय ने ढहा दिया बाहुबली का पूरा साम्राज्य
अगर आपको अविनाश पांडेय के खौफ का असली ट्रेलर देखना है, तो ज़रा इतिहास के पन्नों को पलटकर मऊ (Mau) ज़िले की उस खौफनाक ज़मीनी हकीकत को याद कर लीजिए।
एक दौर था जब पूरा का पूरा मऊ और गाज़ीपुर इलाका सिर्फ एक ही आदमी के इशारों पर कांपता था- और वो नाम था मुख्तार अंसारी!
मुख्तार की मर्जी के बिना उस ज़िले में एक पत्ता भी नहीं हिलता था। बड़ी-बड़ी सरकारें और पुलिस के कप्तान उसके दरबार में हाज़िरी लगाते थे।
पंजाब से लेकर यूपी तक मुख्तार के नाम का ऐसा खौफ था की पुलिस वाले भी उसके खिलाफ FIR लिखने से पहले सौ बार सोचते थे।
लेकिन जब शासन ने आईपीएस अविनाश पांडेय को मऊ के पुलिस अधीक्षक (SP Mau) की कुर्सी पर बिठाया, तो पूरी कहानी ही पलट गई।
मऊ में चार्ज लेते ही इस कड़क अफसर ने वो काम शुरू कर दिया जिसके बारे में वहां के लोग सपने में भी नहीं सोच सकते थे।
अविनाश पांडेय को बहुत अच्छे से पता था की किसी भी बड़े माफिया को मिट्टी में मिलाने के लिए सिर्फ एनकाउंटर काफी नहीं होता, बल्कि उसकी उस ‘आर्थिक कमर’ को तोड़ना पड़ता है जिसके दम पर वो अपना पूरा इकोसिस्टम चलाता है।
अविनाश पांडेय ने बिना किसी राजनीतिक दबाव की परवाह किए, मुख्तार अंसारी और उसके गुर्गों की कुंडली निकाल ली।
फिर शुरू हुआ बाबा के बुलडोज़र का वो खौफनाक तांडव, जिसने मुख्तार के पूरे साम्राज्य की ईंट से ईंट बजा दी।
मऊ में मुख्तार की करोड़ों-अरबों रुपये की वो संपत्तियां, जिन्हें उसने खून और डकैती के दम पर खड़ा किया था, पुलिस ने रातों-रात ज़ब्त कर लीं।
जो बड़ी-बड़ी इमारतें मुख्तार के खौफ का प्रतीक थीं, उन्हें बुलडोज़र से नेस्तनाबूद कर दिया गया।
अविनाश पांडेय ने अपनी पुलिस टीमों को खुली छूट दे दी थी की मुख्तार के गैंग से जुड़ा जो भी गुर्गा सड़क पर दिखे, उसे कॉलर से पकड़कर घसीटते हुए हवालात में डालो।
भाई साहब, इस एक अफसर के खौफ ने मऊ में वो गदर मचाया की मुख्तार के वो गुर्गे जो कल तक पुलिस को गालियां देते थे, वो रातों-रात अपनी गाड़ियां छोड़कर अंडरग्राउंड हो गए।
कई तो ऐसे थे जो खुद थाने पहुंचकर गले में तख्ती टांग कर गिड़गिड़ा रहे थे की “साहब हमें जेल में डाल दो, लेकिन बाहर मत छोड़ना, वरना हमारा एनकाउंटर हो जाएगा!”
मुख्तार अंसारी का जो खौफनाक नेटवर्क सालों से मऊ की नसों में ज़हर घोल रहा था, उसे अविनाश पांडेय ने जड़ से उखाड़ कर फेंक दिया।
ये कोई नॉर्मल पुलिसिंग नहीं थी, ये एक खूंखार बाहुबली की छाती पर पैर रखकर पूरे देश को ये संदेश देना था की खाकी वर्दी के सामने किसी भी माफिया की औकात सड़क के एक कीड़े से ज़्यादा नहीं है।
इस एक ऑपरेशन ने अविनाश पांडेय को यूपी पुलिस का वो ‘असली सिंघम’ बना दिया जिसके नाम से आज भी मुख्तार का पूरा गिरोह खौफ खाता है।
पीलीभीत का भयंकर एनकाउंटर, जब पंजाब से भागे खालिस्तानी आतंकियों को अविनाश पांडेय ने थमाया सीधा जहन्नुम का टिकट
मुख्तार अंसारी का साम्राज्य नेस्तनाबूद करना तो आईपीएस अविनाश पांडेय की उस धधकती हुई किताब का सिर्फ एक पन्ना था।
अगर आपको खाकी वर्दी के इस शेर का असली और खौफनाक रूप देखना है, तो ज़रा पीलीभीत (Pilibhit) के उस एनकाउंटर को याद कर लीजिए।
ये वो ऑपरेशन था जिसने पूरे देश को बता दिया था की यूपी पुलिस अब वो पुरानी पुलिस नहीं रही जो आतंकियों से डरकर छुप जाए। अब यूपी पुलिस वो काल बन चुकी है जो आतंकियों को उनके घर में घुसकर मिट्टी में मिला देती है।
बात दिसंबर 2024 की है जब पंजाब में खालिस्तानी आतंकियों का खौफनाक नेटवर्क दोबारा सिर उठाने की कोशिश कर रहा था।
गुरदासपुर (पंजाब) की एक पुलिस चौकी पर खालिस्तानी कमांडो फोर्स (KCF) के कुछ खूंखार आतंकियों ने ग्रेनेड से भयंकर हमला कर दिया था।
इस हमले के बाद पंजाब पुलिस की नींद उड़ गई थी, लेकिन वो आतंकी वहां से भाग निकले। उन आतंकियों को लगा की वो उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और तराई के जंगलों में आकर छुप जाएंगे और यूपी पुलिस उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी।
लेकिन उन जेहादी मानसिकता वाले खालिस्तानियों की बदकिस्मती ये थी की उस वक्त पीलीभीत के कप्तान (SP) कोई और नहीं, बल्कि हमारे यही ‘असली सिंघम’ अविनाश पांडेय थे!
जैसे ही खुफिया एजेंसियों से अविनाश पांडेय को भनक लगी की पंजाब से भागे हुए वो खूंखार आतंकी पीलीभीत के इलाके में पनाह लिए हुए हैं, तो इस कड़क अफसर ने खुद अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी, अपनी असॉल्ट राइफल उठाई और फ्रंट लाइन से अपनी पुलिस टीम को लीड करते हुए उस इलाके को चारों तरफ से घेर लिया।
आतंकियों के पास AK-47 जैसे खतरनाक और ऑटोमैटिक हथियार थे। जैसे ही उन्हें पुलिस की भनक लगी, उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज उठा। लेकिन सामने यूपी पुलिस का वो खूंखार शेर खड़ा था जिसने पीछे हटना सीखा ही नहीं था।
अविनाश पांडेय की टीम ने वो खौफनाक पलटवार किया की उन खालिस्तानियों की रूह कांप गई होगी।
“गोलियों का जवाब सीधा गोलियों से!” इसी उसूल पर चलते हुए यूपी पुलिस ने उन तीनों खूंखार खालिस्तानी आतंकियों को वहीं खेत की मिट्टी में कुत्तों की तरह ढेर कर दिया!
जो आतंकी पंजाब पुलिस को चकमा देकर भागे थे, उनकी लाशें पीलीभीत की ज़मीन पर गोलियों से छलनी पड़ी थीं। इस एक एनकाउंटर ने पूरे देश में यूपी पुलिस का डंका बजा दिया।
अविनाश पांडेय की इस दहाड़ ने साफ कर दिया की उत्तर प्रदेश की धरती पर आतंकवादियों के लिए कोई कोर्ट-कचहरी और कोई जेल नहीं है, यहाँ उनके लिए सिर्फ और सिर्फ शमशान है!
कबूतरबाज़ी का इंटरनेशनल भंडाफोड़ और एक ही दिन में 40 माफियाओं पर FIR, अविनाश पांडे की खूंखार स्ट्राइक से कांप गया अंडरवर्ल्ड
अविनाश पांडेय सिर्फ बंदूक की नोक पर ही नहीं खेलते, बल्कि जब वो अपनी कलम से किसी माफिया की फाइल खोलते हैं, तो बड़े-बड़े सिंडिकेट रातों-रात दिवालिया हो जाते हैं।
यूपी और पंजाब के इलाकों में एक बहुत ही खौफनाक और सड़ा हुआ नेक्सस चल रहा था जिसे ‘कबूतरबाज़ी’ (Human Trafficking / Fake Passport Syndicate) कहा जाता है।
ये वो खूनी धंधा है जहाँ मासूम नौजवानों को कनाडा, अमेरिका और यूरोप भेजने का सपना दिखाकर उनके गरीब मां-बाप से लाखों-करोड़ों रुपये ठग लिए जाते थे।
ये दलाल फर्जी पासपोर्ट बनाते थे, फर्जी वीज़ा चिपकाते थे और उन युवाओं की ज़िंदगी तबाह कर देते थे। कई नौजवान तो विदेशों की जेलों में सड़ने को मजबूर हो गए थे।
इन ‘कबूतरबाज़’ माफियाओं के तार बहुत ऊपर तक जुड़े होते थे। बड़े-बड़े सफेदपोश नेता और भ्रष्ट अफसर इस धंधे से अपना कमीशन खाते थे, इसलिए कोई भी आम पुलिसवाला इन पर हाथ डालने से घबराता था।
लेकिन जब इन ठगों का पाला आईपीएस अविनाश पांडेय से पड़ा, तो इन्हें समझ में आ गया की अब इनका काल आ चुका है। अविनाश पांडेय ने इन दलालों की एक-एक जड़ को बड़ी खामोशी से खंगाला।
उन्होंने कोई जल्दबाज़ी नहीं की। पूरा खुफिया जाल बिछाया, सबूत इकट्ठे किए और फिर वो सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसने पूरे इंटरनेशनल सिंडिकेट की रीढ़ की हड्डी एक ही झटके में तोड़ कर रख दी।
ज़रा इस अफसर की दिलेरी देखिए! अविनाश पांडेय ने बिना किसी राजनीतिक दबाव की परवाह किए, ठीक 24 घंटे के अंदर, एक ही दिन में इन ‘कबूतरबाज़’ दलालों और माफियाओं के खिलाफ 40 से ज़्यादा FIR दर्ज कर डालीं!
पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। रातों-रात पुलिस की गाड़ियां दौड़ीं और इन दलालों को कॉलर से पकड़-पकड़ कर सीधा काल कोठरी में ठूंस दिया गया।
इनके वो फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले अड्डे, वो करोड़ों की काली कमाई सब कुछ पुलिस ने सीज़ कर लिया। इस खूंखार स्ट्राइक के बाद पूरे उत्तर प्रदेश के ठगों और दलालों ने अपना धंधा समेट लिया।
उन्हें पता चल गया की अगर अविनाश पांडेय की नज़र उन पर पड़ गई, तो ना ज़मानत मिलेगी और ना ही छुपने की कोई जगह बचेगी।
अपराधियों का काल और आम जनता का रक्षक, कानपुर से लेकर महाकुंभ तक अविनाश पांडेय की पुलिसिंग के मुरीद हैं लोग
अब अगर आपको लग रहा है की अविनाश पांडेय सिर्फ गोलियां चलाते हैं और एनकाउंटर करते हैं, तो आप इस अफसर की उस तेज़-तर्रार दिमागी ताकत (Smart Policing) को नहीं जानते जो इन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
ये वो कर्मयोगी ऑफिसर हैं जिन्हें जहाँ भी भेजा जाता है, वहां की कानून व्यवस्था चुस्त और दुरुस्त हो जाती है।
ज़रा इनके ट्रैक रिकॉर्ड पर नज़र डालिए। कानपुर, बरेली, गाज़ियाबाद (एसपी सिटी), मैनपुरी, उन्नाव और फिर प्रयागराज महाकुंभ- जहाँ करोड़ों लोगों की भीड़ को संभालना दुनिया का सबसे मुश्किल काम माना जाता है, वहां भी अविनाश पांडेय ने अपनी धाकड़ पुलिसिंग का वो जलवा दिखाया की पूरी दुनिया ने भारत की पुलिस व्यवस्था की तारीफ की।
जब ये 2019 में मेरठ के एसपी देहात (SP Rural) थे, तो इन्होंने देखा की गांव-देहात में पुलिस की पहुंच थोड़ी धीमी हो जाती है। इसके लिए इन्होंने टेक्नोलॉजी का ज़बरदस्त इस्तेमाल किया।
इन्होंने गांव के चौकीदारों को सीधे पुलिस से जोड़ने के लिए ‘प्रहरी ऐप’ (Prahari App) बनवाया। इस ऐप के ज़रिए गांव का कोई भी आम आदमी या चौकीदार रातों-रात पुलिस को अपराधियों की खुफिया जानकारी दे सकता था।
इसके अलावा इन्होंने साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए जो स्पेशल टीमें बनाईं, उसने साइबर क्रिमिनल्स के होश उड़ा दिए।
इनकी इसी खूंखार, ईमानदार और बेदाग कार्यशैली को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने इन्हें सिर आंखों पर बिठाया।
साल 2022 में इनकी धाकड़ सेवाओं के लिए इन्हें ‘डीजीपी कमेंडेशन डिस्क सिल्वर’ (DGP Commendation Disc Silver) से सम्मानित किया गया।
और फिर इनकी उस खून-पसीना बहाने वाली मेहनत को सलाम करते हुए, इसी साल 26 जनवरी 2025 (गणतंत्र दिवस) के मौके पर सरकार ने इन्हें ‘गोल्ड मेडल’ से सम्मानित किया!
लखनऊ की ‘स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स’ से लेकर क्राइम कैपिटल ‘मेरठ’ तक इस कड़क अफसर की जबरदस्त एंट्री
आईपीएस अविनाश पांडेय ने अपने करियर में कभी आसान रास्ते नहीं चुने। जब उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ में अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा के लिए ‘स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स’ (SSF) का गठन किया, तो इस खौफनाक वाहिनी का नेतृत्व करने के लिए जिस अफसर को चुना गया, वो अविनाश पांडेय ही थे।
लेकिन यूपी का वो पश्चिमी इलाका (Western UP), जिसे कभी ‘क्राइम कैपिटल’ कहा जाता था, वहां के माफियाओं को एक बार फिर से किसी असली सिंघम की ज़रूरत महसूस हो रही थी।
पश्चिमी यूपी का मेरठ (Meerut) एक ऐसा ज़िला है जहाँ बड़े-बड़े बाहुबली और क्राइम सिंडिकेट पनपने की कोशिश करते रहते हैं। यहाँ कोई साधारण पुलिस वाला काम नहीं कर सकता।
यहाँ तो वो खाकी का शेर चाहिए होता है जो सीधा आंखों में आंखें डालकर बात करे और ज़रूरत पड़ने पर बंदूक की नली खोलने में एक सेकंड भी ना लगाए।
फरवरी 2026 में यूपी शासन ने एक बहुत बड़ा और कड़क फैसला लेते हुए आईपीएस अविनाश पांडेय को सीधे मेरठ का नया ‘एसएसपी’ (SSP Meerut) बनाकर भेज दिया!
भाई साहब, जैसे ही ये खबर फ्लैश हुई की अविनाश पांडेय मेरठ के कप्तान बनकर आ रहे हैं, वहां के गुंडों, सटोरियों और बाहुबलियों के पसीने छूट गए।
मेरठ में एसएसपी (SSP) का चार्ज संभालते ही अविनाश पांडेय ने जो सबसे पहला और सबसे खौफनाक हथौड़ा चलाया, वो उन भ्रष्ट और दागी पुलिसवालों पर था जो पर्दे के पीछे से अपराधियों की दलाली कर रहे थे।
उन्होंने आते ही पूरे महकमे की फाइलें मंगवा लीं। जिस-जिस थानेदार या सिपाही के ऊपर माफियाओं से साठगांठ का दाग था, उसे रातों-रात लाइन हाज़िर कर दिया गया!
पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सबको समझ आ गया की ये कप्तान ना तो किसी नेता की सुनेगा और ना ही किसी भ्रष्ट बाबू की।
अविनाश पांडेय ने अपनी पहली ही मीटिंग में पुलिस अधिकारियों को साफ कह दिया की अपराध नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अगर कहीं कोई गुंडागर्दी या दंगा हुआ, तो सबसे पहले उस इलाके के थानेदार की वर्दी उतरेगी। और अपराधियों के लिए? उनके लिए तो अविनाश पांडेय का संदेश एकदम साफ और बारूदी था।
“या तो मेरठ छोड़कर भाग जाओ, या फिर जुर्म करना छोड़ दो। अगर दोनों में से कोई भी बात नहीं मानी, तो यूपी पुलिस तुम्हें सीधा ऊपर का वो परमानेंट टिकट काट कर देगी जहाँ से कोई वापस नहीं आता।”
इनके इस खौफनाक भौकाल का ही असर था की मेरठ की सड़कों पर मनचलों और गुंडों का निकलना बंद हो गया। जो माफिया कभी थानेदारों को आंख दिखाते थे, वो अब पुलिस की जीप का सायरन सुनकर ही अपने बिलों में घुस जाते हैं।
जब तक यूपी पुलिस में आईपीएस अविनाश पांडेय जैसे कर्मयोगी और खूंखार अफसर मौजूद हैं, तब तक इस राज्य की बहनों को घबराने की ज़रूरत नहीं है।
ये वो ढाल हैं जो हर गोली और हर वार को अपने सीने पर ले लेंगे, लेकिन आम जनता पर कोई खरोंच नहीं आने देंगे।
जय हिन्द! यूपी पुलिस ज़िंदाबाद!
