सुख के सब साथी लेकिन दुख में न कोय.. कल तक प्रेमानंद महाराज जी के चरणों में बैठने वाले ये बॉलीवुड सितारे आज उनके बुरे समय में किधर हो गए गायब

दुनिया सच में कितनी मतलबी है ना! जब आपके पास शोहरत होती है, आपकी ज़िंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा होता है.. तो आपके पीछे पूरी दुनिया दुम हिलाते हुए चलती है।

लेकिन जैसे ही आप पर कोई संकट आता है, तो वही लोग आपको ऐसे भूल जाते हैं जैसे कभी आपको जानते ही न हों। ये बात तो हम कहानियों में बहुत सुनते हैं, लेकिन आज वृंदावन की गलियों में यही सच एकदम शीशे की तरह साफ़ नज़र आ रहा है।

पिछले कुछ हफ्तों से परम श्रद्धेय प्रेमानंद जी महाराज और उनके आश्रम को लेकर जो बवाल चल रहा है, उसने हमारे समाज के कई गंदे चेहरे बेनकाब कर दिए हैं।

इंटरनेट पर गालियों का बाज़ार गरम है, अफवाहें उड़ रही हैं, और कलेश इतना बढ़ गया है की एक बीमार संत को अपना ही घर छोड़ना पड़ गया।

लेकिन इस पूरे तमाशे के बीच सबसे ज़्यादा जो चीज़ खटक रही है, वो है उन ‘चमकते सितारों’ की खामोशी, जो कल तक महाराज जी के आगे हाथ जोड़कर अपनी पब्लिसिटी का खेल खेल रहे थे।

सुख के दिनों की वो VIP भक्ति और कैमरों का फ्लैश, जब महाराज जी के दरबार में लगती थी सितारों की हाजिरी

ज़रा एक-दो साल पीछे चलते हैं। याद है आपको? जब प्रेमानंद महाराज जी के वीडियोज़ रातों-रात सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे थे।

उनका बेबाक अंदाज़, वो ‘राधा-राधा’ जपने की धुन और उनकी सादगी ने करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया था। और जहाँ करोड़ों लोगों का ध्यान होता है, वहाँ हमारे बॉलीवुड और वीआईपी लोगों की नज़र न पड़े, ऐसा कैसे हो सकता है?

अचानक से वृंदावन की उस तंग और धूल भरी गली में मर्सिडीज़ और BMW गाड़ियों की लाइनें लगने लगीं।

क्रिकेट के बड़े सितारे हों, बॉलीवुड के जाने-माने सिंगर्स हों, या फिर बड़े-बड़े राजनेता… सबमें एक अंधी होड़ मच गई थी की कौन महाराज जी के सबसे करीब जाकर ज़मीन पर बैठेगा।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा से लेकर हेमा मालिनी और बादशाह तक.. हर कोई महाराज जी के सामने हाथ जोड़े बैठे रहता था।

राज कुंद्रा ने तो ये तक कह दिया था की वो महाराज जी को अपनी किडनी देने के लिए तैयार हैं!

महाराज जी कुछ कह रहे होते थे और ये सितारे ऐसे मुंडी हिला रहे होते थे जैसे अचानक से इन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई हो। फिर वो वीडियो एडिट होता था, पीछे एक इमोशनल सा बैकग्राउंड म्यूज़िक लगता था और इंस्टाग्राम पर ‘#FeelingBlessed’ के साथ पोस्ट हो जाता था।

असलियत में वो भक्ति नहीं थी भाई, वो विशुद्ध रूप से इमेज चमकाने का एक स्टंट था। किसी को अपनी फ्लॉप हो रही फिल्मों को बचाना था, किसी को अपने बिगड़े हुए विवादित करियर पर ‘संस्कार’ की सफेदी पोतनी थी, तो किसी को बस अपनी रील वायरल करनी थी।

महाराज जी की पॉपुलैरिटी का इन लोगों ने जमकर फायदा उठाया।

25 सितंबर की वो दर्दनाक घटना और सोशल मीडिया पर बेवजह महाराज जी को विलेन बनाने का ट्रेंड हुआ शुरू

वक़्त हमेशा एक सा नहीं रहता। 25 सितंबर 2026 के उस मनहूस दिन ने सब कुछ बदल कर रख दिया। वृंदावन के ‘श्री हित राधा केलि कुंज’ आश्रम में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।

आश्रम की चौथी मंज़िल से गिरकर 25 साल के एक युवा शिष्य दीपक लोधी (जिनका आश्रम का नाम रसिक दुलारी शरण था) की मौत हो गई।

अब किसी भी जवान लड़के की इस तरह मौत होना सच में बहुत दुखद है। कायदे से होना ये चाहिए था की पुलिस को शांति से अपनी जाँच करने दी जाती।

पता लगाया जाता की ये आत्महत्या है, कोई हादसा है या फिर कोई गहरी साज़िश। लेकिन आज के ज़माने में सोशल मीडिया किसी गिद्ध से कम थोड़े ही है! पुलिस की रिपोर्ट आने से पहले ही इंटरनेट के स्वयंभू जजों ने अपना फैसला सुना दिया।

अचानक से मौत से ठीक पहले का एक 11 सेकंड का सीसीटीवी फुटेज लीक हो गया और फिर जो अफवाहों का बाज़ार गरम हुआ, उसने इंसानियत की सारी हदें पार कर दीं।

यूट्यूब और व्हाट्सएप पर भयंकर और घिनौनी अफवाहें फैलाई जाने लगीं। कोई कह रहा था की कमरे से ग्राइंडर मिला है, कोई कह रहा था की प्राइवेट पार्ट कटा हुआ था।

बिना किसी मेडिकल या फॉरेंसिक रिपोर्ट के, चंद व्यूज़ और लाइक्स के लिए कुछ बड़े यूट्यूबर्स ने तो महाराज जी के पवित्र आश्रम की तुलना बॉबी देओल की बदनाम वेब सीरीज़ ‘आश्रम 2.0’ से कर डाली (हम यहाँ पर शुभांकर मिश्रा की बात कर रहे हैं)।

सोचिए ज़रा! एक ऐसा संत जो दिन-रात राधा नाम जपता है, उसे बिना किसी सबूत के सरेआम गालियां दी जाने लगीं।

इंटरनेट की इस अंधी भीड़ ने एक पल नहीं लगाया उस संत को विलेन बनाने में, जिसकी एक झलक पाने के लिए कल तक यही भीड़ घंटों लाइनों में खड़ी रहती थी।

बच्चों के गायब होने का बवाल और चंदे के लालच में महाराज जी को घेरने वाले नकली संतों का गिरोह

जैसे एक मुसीबत कम थी, कि तभी आग में घी डालने का काम एक और विवाद ने कर दिया। आश्रम के बाहर कुछ परिवारों ने आकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।

इनका आरोप था की उनके किशोर बच्चे आश्रम आने के बाद महीनों से गायब हैं और आश्रम प्रशासन उन्हें कोई जवाब नहीं दे रहा। मीडिया ने तुरंत अपने माइक निकाल लिए और इसे एक बहुत बड़ा ‘स्कैंडल’ बताकर पेश करने लगे।

लेकिन जब पुलिस ने डंडा घुमाया और छानबीन की, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। गायब हुए दो लड़के, अनुज और मयंक, प्रयागराज और बरसाना से मिल गए।

उन्होंने बाकायदा संन्यासियों का भेष धारण कर लिया था और पुलिस को साफ़ बताया की वे अपनी मर्ज़ी से भक्ति मार्ग पर निकले हैं। लेकिन तब तक जो डैमेज होना था, वो हो चुका था। सारा ठीकरा महाराज जी के सिर पर ही फूटना था।

अब बात करते हैं इस पूरे विवाद की उस सबसे काली सच्चाई की, जो अक्सर टीवी की डिबेट्स में छिप जाती है। हिंदूवादी नेताओं और ब्रज के स्थानीय लोगों की मानें तो आश्रम के भीतर एक बहुत बड़ा खेल चल रहा है।

महाराज जी के आस-पास कुछ ऐसे ‘नकली संतों’ और मौकापरस्त लोगों ने एक सिंडिकेट (गुट) बना लिया है, जिनकी नज़र सिर्फ चंदे के पैसों और करोड़ों की ज़मीनों पर है।

आप खुद सोचिए, प्रेमानंद महाराज जी कोई स्वस्थ इंसान नहीं हैं। उनकी दोनों किडनियां पूरी तरह से खराब हो चुकी हैं। इंसान डायलिसिस के दर्द से ही टूट जाता है, लेकिन वो संत उस शारीरिक पीड़ा के बाद भी रातों को सोता नहीं है, सिर्फ राधा नाम जपता है।

ऐसे बीमार और विरक्त संत को प्रॉपर्टी और ज़मीनों से क्या लेना-देना? लेकिन उनके नाम की जो बड़ी ब्रांड वैल्यू बन गई थी, उसका फायदा ये मौकापरस्त लोग उठा रहे थे।

ये लोग महाराज जी को आगे रखकर पीछे से ज़मीनों की खरीद-फरोख्त का ऐसा गंदा खेल खेल रहे थे, जिसकी भनक शायद महाराज जी को भी बहुत देर से लगी।

गालियों और अपनों के धोखे से आहत होकर प्रेमानंद महाराज जी ने छोड़ दिया अपना ही घर और चले गए बेलवन के एकांत में

सच कहूं तो इस पूरी घटना में जिस बात ने सबसे ज़्यादा रुलाया है, वो ये है की जिस संत ने दुनिया को जीवन जीने का रास्ता दिखाया, उसे खुद अपनों ने ही किस कदर लहूलुहान कर दिया।

एक तरफ इंटरनेट की वो अंधी भीड़ जो बिना सच जाने गालियों की बौछार कर रही है, और दूसरी तरफ आश्रम के भीतर बैठे वो आस्तीन के सांप जो महाराज जी के नाम पर चंदे और ज़मीनों की सौदेबाज़ी कर रहे थे।

जब ये सारा क्लेश और कीचड़ उछालने का खेल अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया, तो महाराज जी अंदर से पूरी तरह टूट गए।

एक इंसान जिसकी दोनों किडनियां काम नहीं करतीं, जो हर दूसरे दिन डायलिसिस के उस असहनीय दर्द से गुज़रता है, वो आख़िर कब तक इन दुनियावी प्रपंचों को झेलता?

आख़िरकार, अपनों के धोखे और समाज की गालियों से आहत होकर प्रेमानंद जी महाराज ने एक बहुत बड़ा और भावुक फैसला ले लिया।

उन्होंने अपना ही बसाया हुआ, अपना ही खून-पसीने से सींचा हुआ ‘श्री हित राधा केलि कुंज’ आश्रम छोड़ दिया। वो सब कुछ वहीं छोड़कर, उस भीड़-भाड़ और क्लेश से 20 किलोमीटर दूर ‘बेलवन आश्रम’ के एकांत में चले गए।

एक संत जिसने बुढ़ापे और बीमारी में भी लोगों को सिर्फ प्रेम और राधा-नाम जपना सिखाया, आज उसे अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में दर-दर की ठोकरें खाने और एकांत में रोने के लिए अकेला छोड़ दिया गया।

अब कहाँ छिप गए वो रील बनाने वाले सेलिब्रिटी और VIP भक्त, महाराज जी के बुरे वक़्त में इनकी जुबान पर क्यों लग गया ताला

अब आते हैं इस पूरे तमाशे के सबसे पाखंडी हिस्से पर! अरे भाई, ज़रा ढूँढ़कर तो लाओ उन चमकते सितारों को, जो कल तक आश्रम की दरी पर बैठकर महाराज जी के आगे रोने की एक्टिंग कर रहे थे!

कहाँ गए वो बड़े-बड़े क्रिकेटर्स, वो बॉलीवुड के एक्टर्स, वो पंजाबी सिंगर्स?

जब महाराज जी का समय अच्छा चल रहा था, जब उनके नाम पर मिलियंस में व्यूज़ आ रहे थे, तब तो इन वीआईपी लोगों को महाराज जी में साक्षात ‘भगवान’ नज़र आते थे।

तब तो इनके मैनेजर धक्के मारकर आम जनता को पीछे कर देते थे ताकि ‘साब’ की महाराज जी के साथ एक बढ़िया सी फोटो आ सके।

लेकिन आज? आज जब उसी आश्रम पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, जब एक बीमार संत के चरित्र पर कीचड़ उछाला जा रहा है, तो इन तथाकथित ‘भक्तों’ के मुँह में दही जम गया है!

असलियत ये है दोस्त, की इन्हें महाराज जी से कोई लेना-देना कभी था ही नहीं। इन्हे हमेशा सिर्फ अपनी पब्लिसिटी से मतलब था!

इन्हें लगता है की अगर इस विवाद में इन्होंने महाराज जी के पक्ष में कुछ बोल दिया, तो कहीं ट्रोल आर्मी इनके पीछे न पड़ जाए! कहीं इनके करोड़ों के ब्रांड एंडोर्समेंट (Brand Endorsement) न छिन जाएं!

मतलब आस्था गई भाड़ में, गुरु जी गए भाड़ में, बस अपना बैंक बैलेंस और अपनी ‘क्लीन इमेज’ सुरक्षित रहनी चाहिए।

खैर, प्रेमानंद महाराज जी को इन मतलबी सितारों के सपोर्ट की कोई ज़रूरत नहीं है।

वो बेलवन के एकांत में अपनी उसी मस्ती में आज भी राधा-राधा जप रहे हैं। दुनिया चाहे जो कह ले, उनके चेहरे का वो तेज़ और उनकी आँखों की वो सच्चाई आज भी वैसी ही है।

जो सच है, वो पुलिस की जाँच के बाद आज नहीं तो कल सामने आ ही जाएगा।

राधे-राधे!

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